लोकमाता अहिल्याबाई होलकर: भारत माता की सच्ची सेविका

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     भारत की महिलाओं ने इतिहास में वह स्थान अर्जित किया है जिससे देवता भी वंचित रहे हैं। महारानी अहिल्याबाई होलकर का व्यक्तित्व व कृतित्व उन्हें विश्व की श्रेष्ठतम महिलाओं की पंक्ति में अग्रणी बनाता है। माता अहिल्याबाई ने अपनी विचारशक्ति के आधार पर अनेक ऐतिहासिक कार्य किए। उनका संपूर्ण जीवन सनातन और न्याय के लिए समर्पित रहा जो कार्य बड़े-बड़े राजा महाराजा नहीं कर सके, ऐसे अविस्मरणीय कार्य माता अहिल्याबाई ने सनातन हिंदू धर्म के लिए करके दिखाया। कोई भी महापुरुष एक किसी न किसी जाति में जन्म ज़रूर लेते हैं क्योंकि जाति व्यवस्था समाज की संरचना है, जो सदियों से चली आ रही है परंतु महत्वपूर्ण यह है कि महापुरुष एक जाति विशेष के नहीं होते बल्कि वो समूचे राष्ट्र के होते हैं, उनको एक जाति में बांधना क़तई भी उचित नहीं है, माता अहिल्याबाई हम सभी के लिए आदर्श और प्रेरणा हैं। भारत के इतिहास और जनमानस पर उनका विशेष प्रभाव रहा है। बचपन के संस्कार ही बच्चों के भविष्य का निर्माण करते हैं। यही संस्कार जीवन की सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। किसे पता था चौंडी ग्राम, जामखेड़, अहमदनगर में जन्मी एक छोटी सी सौम्य, शांत, तेजवान बालिका मालवा के सूबेदार मल्हारराव को अपनी भक्ति व गायन से इस कदर प्रभावित कर देगी कि वह अपने पुत्र खंडेराव के विवाह के लिए मानकोजी (अहिल्याबाई के पिता) के समक्ष प्रस्ताव रखने से भी नहीं हिचकिचाएंगे।

बालिका के संस्कारों से प्रभावित मल्हार राव आश्वस्त थे कि यह बालिका अपने संस्कारों, कुशल व्यवहार, सेवा भावना से सभी का हृदय जीत लेगी और खंडेराव को सही दिशा में लाने में अवश्य सफल होगी और हुआ भी यही। बालिका अहिल्या में आदर्श भारतीय नारी के सभी गुण विद्यमान थे। उनके विवेक, नम्रता, सेवा, त्याग और सहनशीलता का ही यह परिणाम था कि खंडेराव में आत्म-गौरव व

भारत की महिलाओं ने इतिहास में वह स्थान अर्जित किया है जिससे देवता भी वंचित रहे हैं। महारानी अहिल्याबाई होलकर का व्यक्तित्व व कृतित्व उन्हें विश्व की श्रेष्ठतम महिलाओं की पंक्ति में अग्रणी बनाता है। माता अहिल्याबाई ने अपनी विचारशक्ति के आधार पर अनेक ऐतिहासिक कार्य किए

वीरता का भाव उत्पन्न हुआ। अहिल्याबाई ने भी शनै:-शनै: राजकाज में रुचि लेना प्रारंभ किया और युद्ध क्षेत्र में गोला बारूद, बंदूक, तोप और रसद की व्यवस्था की जिम्मेदारी उन्हीं पर आ गई थी। इसी बीच 1745 व 1748 में अहिल्याबाई ने क्रमश: मालेराव व मुक्ताबाई को जन्म दिया।

जनकल्याण की राह

रानी राहगीरों, गरीबों, विकलांगों, साधु-संतों, पशु-पक्षियों, जीव-जंतुओं सभी का ध्यान रखती थीं, यहां तक कि अपने सैनिकों, कर्मचारियों के कल्याण के लिए भी वह कभी पीछे नहीं हटीं। वेतन समय पर देना, शौर्यपूर्ण कार्य करने वाले स्वामिभक्त सैनिकों को पुरस्कृत करना इत्यादि। अहिल्याबाई का हृदय समाज के सभी वर्गों के लिए धड़कता था। उन्होंने बद्रीनाथ, केदारनाथ, रामेश्वरम, जगन्नाथपुरी, द्वारका, पैठण, महेश्वर, वृंदावन, सुपलेश्वर, उज्जैन, पुष्कर, पंढरपुर, चिंचवाड़, चिखलदा, आलमपुर, देवप्रयाग, राजापुर आदि स्थानों पर मंदिरों का पुनर्निर्माण करवाया तथा घाट बनवाए और अन्नसत्र या सदावर्त खुलवाए जहां लोगों को प्रतिदिन भोजन मिलता था। काशी विश्वनाथ मंदिर के साथ-साथ पूरे देश के मंदिरों का निर्माण व पुनर्निर्माण का कार्य रानी ने करवाया। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में तीर्थ यात्रा के लिए विश्रामगृह, अयोध्या, नासिक में भगवान राम के मंदिरों का निर्माण, सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण, उज्जैन में चिंतामणि गणपति मंदिर निर्माण जैसे कार्य रानी ने दिल खोलकर किए। उन्होंने कल्याणकारी व परोपकारी कार्यों द्वारा राष्ट्र निर्माण का महत्ती कार्य भी किया तथा देश में धार्मिक, सामाजिक, राष्ट्रीय एकता कायम करने के लिए सराहनीय प्रयास किए। इन सभी कार्यों के लिए भी केवल ‘खासगी संपत्ति’ ही खर्च करती थीं, जिस पर पूर्णतया राज परिवार का अधिकार था। प्रसिद्ध इतिहासकार चिंतामणि विनायक वैद्य ने लिखा है, ‘‘उनकी धार्मिकता इतनी उदार थी कि धर्म व नीति के हर क्षेत्र में उन्होंने अपना नाम अजर-अमर कर दिया। उनका दान-धर्म इतना महान था कि वैसा दान-धर्म आज तक हिंदुस्थान में किसी ने भी नहीं किया है।’’

गौरवशाली वीरों के गुण

रानी अहिल्याबाई में इतिहास के गौरवशाली वीरों के गुण देखने को मिलते हैं। कोई भी महिला सर्वगुण संपन्न कैसे हो सकती है? इतिहास, वर्तमान और भविष्य में केवल एक ही व्यक्ति में इतने गुणों का समावेश होना संभव ही नहीं है। धर्माचरण, शासन प्रबंध, विद्वानों का सम्मान व न्याय, दानशीलता, उदार धर्म नीति, भक्ति भावना, वीरता, त्याग व बलिदान, साहस, शौर्य से परिपूर्ण रानी अहिल्याबाई युगों-युगों तक अमर रहेंगी। इतिहास के दिग्गज शासकों के गुणों से परिपूर्ण रानी हम सभी की प्रेरणास्रोत हैं। रानी का नाम सदा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

उन्होंने लोगों के कल्याण के लिए कई काम किए, जिनमें से निम्नलिखित शामिल हैं:

कृषि को बढ़ावा देना: उन्होंने किसानों को भूमि प्रदान की, सिंचाई के लिए तालाब और नहरें बनवाईं, और कपास और मसालों की खेती को प्रोत्साहित किया।

उद्योगों का विकास: उन्होंने महेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध वस्त्र उद्योग स्थापित किया, जिससे लोगों को रोजगार मिला।

रानी अहिल्याबाई में इतिहास के गौरवशाली वीरों के गुण देखने को मिलते हैं। कोई भी महिला सर्वगुण संपन्न कैसे हो सकती है? इतिहास, वर्तमान और भविष्य में केवल एक ही व्यक्ति में इतने गुणों का समावेश होना संभव ही नहीं है। धर्माचरण, शासन प्रबंध, विद्वानों का सम्मान व न्याय, दानशीलता, उदार धर्म नीति, भक्ति भावना, वीरता, त्याग व बलिदान, साहस, शौर्य से परिपूर्ण रानी अहिल्याबाई युगों- युगों तक अमर रहेंगी

सामाजिक सुधार: उन्होंने विधवाओं और कैदियों के लिए रोजगार की व्यवस्था की और महिलाओं को शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की।

सांस्कृतिक विकास: उन्होंने मंदिरों, घाटों और अन्य धार्मिक स्थलों का निर्माण किया, जिससे लोगों में धार्मिक भावनाएं जागृत हुईं।

कर नीति में सुधार और किसानों की भलाई

अहिल्याबाई होल्कर की कर नीति न्यायप्रिय और सरल थी। उन्होंने अत्यधिक करों को कम किया और पिछले शासकों द्वारा लगाए गए अन्यायपूर्ण करों को समाप्त कर दिया। उन्होंने किसानों पर कर का बोझ कम करते हुए कृषि उत्पादन को बढ़ावा दिया। प्राकृतिक आपदाओं जैसे सूखा या अकाल के समय में कर राहत देकर उन्होंने किसानों की मदद की।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कृषि सुधार

अहिल्याबाई होल्कर ने कृषि सुधारों में जल प्रबंधन तकनीकों को अपनाया। उन्होंने बावड़ियों और जलाशयों का निर्माण कराया, जो सिंचाई और सूखे के समय जल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण थे। इसके अलावा, उन्होंने बेहतर खेती के उपकरण और टिकाऊ खेती प्रथाओं जैसे फसल चक्र और मिश्रित खेती को प्रोत्साहित किया, जिससे कृषि उत्पादकता और मृदा स्वास्थ्य में वृद्धि हुई।

एक वीरांगना के रूप में अहिल्याबाई

अहिल्याबाई सिर्फ एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि एक योद्धा रानी भी थीं। उन्होंने अपने पति की मृत्यु के बाद मालवा साम्राज्य की बागडोर संभाली और अपने सैन्य कौशल से साम्राज्य की रक्षा की। वे खुद युद्ध के मैदान में अपनी सेना का नेतृत्व करती थीं और अपने राज्य की स्थिरता और संप्रभुता को बनाए रखने में सफल रहीं। उनका जीवन सदैव ही समस्त देशवासियों को प्रेरणा देता रहेगा। मोदी जी ने देवी होलकर के सिद्धांतों एवं उनके विचारों को हर प्रकार से आत्मसात करते हुए नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं जिससे आज हमारा भारत देश विश्व पटल पर नक्षत्र की तरह निखर रहा हैं।

(लेखक भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं)

स्कॉटलैंड की कुमारी जोना बेली नाम की एक सुप्रसिद्ध कवयित्री अहिल्याबाई के समय में जीवित थी। इस महिला ने देवी की प्रशंसा में एक छोटी-सी पुस्तक लिखी है। पुस्तक में वर्णित लंबी कविता में उनकी महानता व गुणों का बड़ा सुंदर वर्णन है। एक स्थान पर लिखा है- ‘अहिल्याबाई ने तीस वर्षों तक शातिपूर्वक राज्य किया। उनके समय में रते थे। इससे यह स्पष्ट है कि अहिल्याबाई की कीर्ति भारत की सीमाओं को लांघकर विदेशों तक पहुंच गई थी।राज्य का ऐश्वर्य बढ़ता ही गया। सभ्य और असभ्य, बूढ़े और जवान सब उनकी मुक्तकंठ से प्रशंसा क