प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर में चेनानी-नाशरी सुरंग राष्ट्र को समर्पित की
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में भारत की सबसे लंबी चेनानी-नाशरी राजमार्ग सुरंग को राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में, उन्होंने कहा कि इस सुरंग से न सिर्फ जम्मू और श्रीनगर के बीच की दूरी कम होगी, बल्कि घाटी में पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य में विकास को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री ने सड़क परिवहन, राजमार्ग और नौवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी और उनकी टीम को इस सुरंग के निर्माण के लिए धन्यवाद दिया और राज्य के विकास के लिए अपने श्रम का योगदान करने के लिए युवाओं की सराहना की।
श्री मोदी ने कहा कि ये सुरंग हजारों करोड़ रुपयों की लागत से बनी है। लेकिन मैं आज गर्व से कहता हूं, भले इस सुरंग के निर्माण में भारत सरकार के पैसे लगे होंगे, लेकिन मुझे खुशी इस बात की है कि इस सुरंग के निर्माण में भारत सरकार के पैसों के साथ जम्मू-कश्मीर के नौजवानों का पसीने की उसमें महक आ रही है। ढाई हजार से ज्यादा युवकों ने, जम्मू-कश्मीर के 90 प्रतिशत जवान जम्मू-कश्मीर के हैं; जिन्होंने काम करके ये सुरंग का निर्माण किया है। रोजगार की कितनी संभावनाएं उपस्थित हुई, ये हम अंदाज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के जिन नौजवानों ने इन पत्थरों को काट-काट करके सुरंग का निर्माण किया, एक हजार दिन से ज्यादा दिन-रात मेहनत करके वो पत्थरों को काटते रहे और सुरंग का निर्माण करते रहे। मैं कश्मीर घाटी के नौजवानों को कहना चाहता हूं, पत्थर की ताकत क्या होती है; एक तरफ कुछ भटके हुए नौजवान पत्थर मारने में लगे हैं, दूसरी तरफ उसी कश्मीर के नौजवान पत्थर काट करके कश्मीर का भाग्य बनाने में लगे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं घाटी के नौजवानों से कहना चाहता हूं, आपके सामने दो रास्ते हैं जो आपके भाग्य को किस दिशा में ले जाएंगे? एक तरफ है पर्यटन, दूसरी तरफ है आतंकवाद। 40 साल हो गए अनेक निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई, किसी का फायदा नहीं हुआ; अगर लहुलुहान हुई तो मेरी अपनी प्यारी कश्मीर घाटी हुई है। अगर कोई लाल खोया है तो मेरी कश्मीर की मां का लाल हमने खोया है, कोई हमने हिन्दुस्तान का लाल खोया है। इस अवसर पर सड़क परिवहन और राजमार्ग केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने भारत की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग को राष्ट्र को समर्पित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व के अंतर्गत यह एक नये भारत का शुभारंभ है। जम्मू और कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी राज्य के लिए सहायता बढ़ाने हेतु प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया।
भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’और ‘कौशल इंडिया’ पहल के एक आदर्श उदाहरण के रूप में जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर और रामबन के बीच वाहनों की आवाजाही के लिए सभी मौसम के अनुकूल नौ किलोमीटर लंबी यह सुरंग न सिर्फ भारत की सबसे लंबी सुरंग है, बल्कि एशिया में द्वि-दिशात्मक राजमार्ग की सबसे लंबी सुरंग भी है। दुर्गम हिमालय के सबसे कठिन मार्गों में से एक के तौर पर इसे 1200 मीटर की ऊंचाई पर बनाया गया है। यह सुरंग 41 किलोमीटर की सड़क दूरी को कम करते हुए जम्मू से श्रीनगर के बीच यात्रा के समय में दो घंटे की कमी लाएगी। भारी ट्रैफिक जाम, भूस्खलन, बर्फबारी, तीव्र मोड़ और वाहनों एवं दुर्घटनाओं के कारण होने वाली बाधाओं को देखते हुए इस सुरंग से जाने वाले यात्री सभी मौसमों में आसानी से अपनी यात्रा कर सकेंगे। यह सुरंग जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के 246 किलोमीटर लंबे चार लेन मार्ग का एक हिस्सा है। इस सुरंग के साथ-साथ एक समकक्ष मार्ग भी तैयार किया गया है, जो आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों को निकालने का काम करेगा। पूरी सुरंग के साथ-साथ 29 रास्ते इन आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार किए गए हैं। सुरंग के दोनों सिरों पर टोल प्लाजा के साथ चार लेन की सड़क और इसके दक्षिण और उत्तरी सिरे पर दो छोटे सेतु भी हैं। सुरंग में अधिकतम पांच मीटर तक की ऊंचाई के वाहन जा सकते हैं। इनकी जांच के लिए सुरंग के दोनों सिरों पर ऊंचाई के लिए विशेष सेंसर लगाए गए हैं।
सुरंग में एक कुशल वायु निकास की प्रणाली भी लगाई गई है। हर आठ किलोमीटर की दूरी पर ताजा वायु अंदर आने और हर सौ मीटर की दूरी पर प्रदूषण बाहर निकालने की व्यवस्था भी की गई है। सुरंग में वेंटीलेशन, संचार, बिजली आपूर्ति, दुर्घटना की जानकारी, एसओएस कॉल बॉक्स और अग्निशमन के लिए एक पूर्ण स्वचालित प्रणाली स्थापित की गई है। यह सुरंग पूरी तरह से स्वचालित स्मार्ट नियंत्रण पर आधारित है और इसके संचालन के लिए किसी भी मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होगी। सुरंग में किसी भी सुरक्षा खतरे से निपटने के लिए अत्याधुनिक स्कैनर भी लगाए गए हैं। दुनिया की बहुत कम सुरंगों में इस प्रकार की पूर्ण एकीकृत सुरंग नियंत्रण प्रणाली स्थापित है।
यह परियोजना पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल भी है। इससे जम्मू-श्रीनगर मार्ग पर समय बचत के साथ-साथ प्रतिदिन करीब 27 लाख रुपये के तेल की भी बचत होगी।

