‘आय से अिधक संपत्ति मामले में वीरभद्र सिंह इस्तीफा दें’

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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्री भूपेन्द्र यादव ने 2 अप्रैल को कहा कि कांग्रेस में नैतिकता का अभाव और भ्रष्टाचार का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि न्यायालय द्वारा श्री वीरभद्र सिंह के निर्णय के बाद भी कांग्रेस क्यों मौन है उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस में जरा सी भी नैतिकता है तो उन्हंे श्री वीरभद्र सिंह का तुरंत पद से इस्तीफा लेना चहिए। उन्होंने कहा कि श्री वीरभद्र सिंह जो वर्तमान में हिमाचल के मुख्यमंत्री हैं उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार व आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप उस समय से हंै जब से वो केन्द्र सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। श्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने अपनी प्रारंभिक जांच में यह पाया कि श्री वीरभद्र सिंह ने अपने खातों (income tax return) में यह दिखाया है कि वर्ष 2008-09 और वर्ष 2010-11 के दौरान उनके सेब के बागों का मुनाफा 6 करोड़ से ज्यादा था, जबकि उससे पहले के और उसके बाद के सालों में उनका मुनाफ़ा शून्य था। यह तथ्य स्वतः ही यह बताने में काफी है कि श्री वीरभद्र सिंह ने अपनी ‘काली कमाई’ को छुपाने के लिए अपने खातों में अपने ‘सेब के बागों’ की कमाई को अवैध रूप से दिखाया।
श्री वीरभद्र सिंह ने केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दायर भ्रष्टाचार के केस के विरुद्ध एक याचिका माननीय उच्च न्यायालय, दिल्ली में डाली थी जिसका निर्णय दिनांक 31-03-2017 को आया है और अपने निर्णय में माननीय उच्च न्यायालय ने श्री वीरभद्र सिंह की याचिका को खारिज कर दिया है तथा उनके विरुद्ध दायर की गई एफ.आई.आर. को सही माना है।

माननीय उच्च न्यायालय, दिल्ली ने केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अपनी अन्वेषण की कार्यवाही के दौरान श्री वीरभद्र सिंह के निवास स्थान पर मारे गए छापों को भी उचित माना है। माननीय उच्च न्यायालय, दिल्ली ने यह भी माना है कि श्री वीरभद्र सिंह जी के ऊपर एफ. आई. आर रजिस्ट्रेशन के पीछे किसी प्रकार का दुिश्वचार तथा राजनैतिक उद्देश्य नहीं था।

श्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि इस मामले में स्टांप पेपर के रजिस्टर पर साधारण ध्यान देने से ज्ञात होता है कि अपने अवैध अनुबंध को उचित ठहराने के लिए, इसमें अवैध रूप से जाली एंट्री की गई हैं। स्टांप पेपर रजिस्टर पर की गई कटिंग यह स्पष्ट रूप से सिद्ध करती है कि इसमें कुछ प्रविष्टियां बाद की तारीखों पर की गई हैं। जिस तरीके से आनंद चौहान (एजेंट-वीरभद्र सिंह) ने इस रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए उसमें और रजिस्टर में पूर्व में की गई प्रविष्टियों के हस्ताक्षरों में विरोधाभास प्रकट होता है। उससे यह सिद्ध होता है कि यह प्रविष्टियां बाद की तारीखों पर उस स्थिति में की गईं जब इनकम टैक्स विभाग द्वारा उन पर कार्यवाही की गई।

इन उपरोक्त तथ्यों से श्री वीरभद्र सिंह का मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहना न केवल नैतिक, अपितु सार्वजनिक जीवन की मर्यादाओं के भी विरुद्ध है। वे भ्रष्टाचार से कांग्रेस के समझौते के प्रतीक बन गये हैं। भाजपा मांग करती है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से त्याग-पत्र देना चाहिए।