2024 में 20 लाख से ज्यादा युवा एनसीसी से जुड़े हैं : नरेन्द्र मोदी

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‘मन की बात’

पहले के मुकाबले पांच हजार और नए स्कूल-कॉलेजों में अब एनसीसी की सुविधा हो गई है और सबसे बड़ी बात, पहले एनसीसी में गर्ल्स कैडेट्स की संख्या करीब 25 प्रतिशत के आस-पास ही होती थी। अब एनसीसी में गर्ल्स कैडेट्स की संख्या करीब-करीब 40 प्रतिशत हो गई है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ की 116वीं कड़ी में 24 नवंबर को कहा कि आज बड़ा ही खास दिन है— आज एनसीसी दिवस है। एनसीसी का नाम सामने आते ही हमें स्कूल-कॉलेज के दिन याद आ जाते हैं। मैं स्वयं भी एनसीसी कैडेट रहा हूं, इसलिए पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि इससे मिला अनुभव मेरे लिए अनमोल है।

आकाशवाणी पर प्रसारित अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम में श्री मोदी ने कहा कि ‘एनसीसी’ युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और सेवा की भावना पैदा करती है। आपने अपने आस-पास देखा होगा, जब भी कहीं कोई आपदा होती है, चाहे बाढ़ की स्थिति हो, कहीं भूकंप आया हो, कोई हादसा हुआ हो, वहां मदद करने के लिए एनसीसी के कैडेट्स जरूर मौजूद हो जाते हैं। आज देश में एनसीसी को मजबूत करने के लिए लगातार काम हो रहा है।

उन्होंने कहा कि 2014 में करीब 14 लाख युवा एनसीसी से जुड़े थे। अब 2024 में 20 लाख से ज्यादा युवा एनसीसी से जुड़े हैं। पहले के मुकाबले पांच हजार और नए स्कूल-कॉलेजों में अब एनसीसी की सुविधा हो गई है और सबसे बड़ी बात, पहले एनसीसी में गर्ल्स कैडेट्स की संख्या करीब 25 प्रतिशत के आस-पास ही होती थी। अब एनसीसी में गर्ल्स कैडेट्स की संख्या करीब-करीब 40 प्रतिशत हो गई है। बॉर्डर किनारे रहने वाले युवाओं को ज्यादा से ज्यादा एनसीसी से जोड़ने का अभियान भी लगातार जारी है। मैं युवाओं से आग्रह करूंगा कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में एनसीसी से जुड़ें।

‘विकसित भारत’ के निर्माण में युवाओं का बहुत बड़ा रोल

श्री मोदी ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं का रोल बहुत बड़ा है। युवा मन जब एकजुट होकर देश की आगे की यात्रा के लिए मंथन करते हैं, चिंतन करते हैं, तो निश्चित रूप से इसके ठोस रास्ते निकलते हैं। आप जानते हैं, 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर देश ‘युवा दिवस’ मनाता है। अगले साल स्वामी विवेकानंद जी की 162वीं जयंती है। इस बार इसे बहुत खास तरीके से मनाया जाएगा। इस अवसर पर 11-12 जनवरी को दिल्ली के भारत मंडपम में युवा विचारों का महाकुंभ होने जा रहा है और इस पहल का नाम है ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’। भारत-भर से करोड़ों युवा इसमें भाग लेंगे। गांव, ब्लॉक, जिले, राज्य और वहां से निकलकर चुने हुए ऐसे दो हजार युवा भारत मंडपम में ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के लिए जुटेंगे।

उन्होंने कहा कि आपको याद होगा, मैंने लाल किले की प्राचीर से ऐसे युवाओं से राजनीति में आने का आह्वान किया है, जिनके परिवार का कोई भी व्यक्ति और पूरे परिवार का पॉलिटिकल बैकग्राउंड नहीं है, ऐसे एक लाख युवाओं को, नए युवाओं को राजनीति से जोड़ने के लिए देश में कई तरह के विशेष अभियान चलेंगे। ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ भी ऐसा ही एक प्रयास है।

इतिहास को संजोकर रखने वाले देश का भविष्य भी सुरक्षित रहता है

श्री मोदी ने कहा कि परसों रात ही मैं दक्षिण अमेरिका के देश गुयाना से लौटा हूं। भारत से हजारों किलोमीटर दूर गुयाना में भी एक ‘मिनी भारत’ बसता है। आज से लगभग 180 वर्ष पहले गुयाना में भारत के लोगों को खेतों में मजदूरी के लिए, दूसरे कामों के लिए ले जाया गया था। आज गुयाना में भारतीय मूल के लोग राजनीति, व्यापार, शिक्षा और संस्कृति के हर क्षेत्र में गुयाना का नेतृत्व कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गुयाना की तरह ही दुनिया के दर्जनों देशों में लाखों की संख्या में भारतीय हैं। दशकों पहले की 200-300 साल पहले की उनके पूर्वजों की अपनी कहानियां हैं। क्या आप ऐसी कहानियों को खोज सकते हैं कि किस तरह भारतीय प्रवासियों ने अलग-अलग देशों में अपनी पहचान बनाई! कैसे उन्होंने वहां की आजादी की लड़ाई के अंदर हिस्सा लिया! कैसे उन्होंने अपनी भारतीय विरासत को जीवित रखा? मैं चाहता हूं कि आप ऐसी सच्ची कहानियों को खोजें और मेरे साथ शेयर करें।

श्री मोदी ने कहा कि जो देश, जो स्थान अपने इतिहास को संजोकर रखता है, उसका भविष्य भी सुरक्षित रहता है। इसी सोच के साथ एक प्रयास हुआ है जिसमें गांवों के इतिहास को संजोने वाली एक डायरेक्टरी बनाई है। समुद्री यात्रा के भारत के पुरातन सामर्थ्य से जुड़े साक्ष्यों को सहेजने का भी अभियान देश में चल रहा है। इसी कड़ी में लोथल में एक बहुत बड़ा संग्रहालय भी बनाया जा रहा है, इसके अलावा आपके संज्ञान में कोई manuscript हो, कोई ऐतिहासिक दस्तावेज हो, कोई हस्तलिखित प्रति हो तो उसे भी आप भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार की मदद से सहेज सकते हैं।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान ने सौ करोड़ पेड़ लगाने का अहम पड़ाव पार किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अब मैं आपसे देश की एक ऐसी उपलब्धि साझा करना चाहता हूं जिसे सुनकर आपको खुशी भी होगी और गौरव भी होगा और अगर आपने नहीं किया है, तो शायद पछतावा भी होगा। कुछ महीने पहले हमने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान शुरू किया था। इस अभियान में देशभर के लोगों ने बहुत उत्साह से हिस्सा लिया। मुझे ये बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि इस अभियान ने सौ करोड़ पेड़ लगाने का अहम पड़ाव पार कर लिया है। सौ करोड़ पेड़, वो भी सिर्फ पांच महीनों में— ये हमारे देशवासियों के अथक प्रयासों से ही संभव हुआ है।

श्री मोदी ने कहा कि इससे जुड़ी एक और बात जानकर आपको गर्व होगा। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान अब दुनिया के दूसरे देशों में भी फैल रहा है। जब मैं गुयाना में था, तो वहां भी इस अभियान का साक्षी बना। वहां मेरे साथ गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. इरफान अली, उनकी पत्नी की माता जी और परिवार के बाकी सदस्य, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में शामिल हुए।

उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत कई सामाजिक संस्थाएं स्थानीय जरूरतों के हिसाब से पेड़ लगा रही हैं। उनका प्रयास है कि जहां पेड़ लगाए जाएं, वहां पर्यावरण के अनुकूल पूरा इको-सिस्टम विकसित हो। इसलिए ये संस्थाएं कहीं औषधीय पौधे लगा रहीं हैं, तो कहीं चिड़ियों का बसेरा बनाने के लिए पेड़ लगा रहीं हैं।

श्री मोदी ने कहा कि इस अभियान से जुड़कर कोई भी व्यक्ति अपनी मां के नाम पर पेड़ लगा सकता है। उन्होंने कहा कि मां, हम सबके लिए जो करती है हम उनका ऋण कभी नहीं चुका सकते, लेकिन एक पेड़ मां के नाम लगाकर हम उनकी उपस्थिति को हमेशा के लिए जीवंत बना सकते हैं।