ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में
नौ आतंकी शिविर नष्ट किए गए और बड़ी संख्या में आतंकवादियों को मार गिराया गया
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने आठ मई को नई दिल्ली में कहा कि हमारे अजेय और पेशेवर रूप से प्रशिक्षित सशस्त्र बल के उच्च गुणवत्तापूर्ण उपकरणों से लैस होने से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सफलतापूर्वक संचालित किया जा सका। रक्षा मंत्री ने किसी भी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान पहुंचाए बिना तथा न्यूनतम क्षति के साथ सशस्त्र बलों द्वारा इस अभियान को सटीकता के साथ अंजाम देने की सराहना की तथा इसे सोच से परे तथा राष्ट्र के लिए गर्व का विषय बताया।
श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी शिविर नष्ट किए गए और बड़ी संख्या में आतंकवादियों को मार गिराया गया।”
भारत एक जिम्मेदार राष्ट्र
रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत ने हमेशा बेहद संयम बरतते हुए एक जिम्मेदार राष्ट्र की भूमिका निभाई है और वह बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने में विश्वास रखता है। पर अगर कोई उसके संयम का फायदा उठाने की कोशिश करता है, तो उसे ‘कठोर कार्रवाई’ का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने देश को आश्वस्त किया कि भारत की संप्रभुता की रक्षा में सरकार के लिए कोई भी सीमा बाधक नहीं बनेगी। उन्होंने कहा कि हम भविष्य में भी ऐसी किसी दायित्वपूर्ण जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के रक्षा संप्रभुता के दृष्टिकोण के अनुरूप रक्षा मंत्री ने 2014 से ही रक्षा उत्पादन क्षेत्र के सशक्तीकरण पर सरकार द्वारा जोर दिए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि रक्षा संप्रभुता का अर्थ है कि जब तक कोई देश अपनी रक्षा आवश्यकताओं में सक्षम और आत्मनिर्भर नहीं होता, तब तक उसकी स्वतंत्रता सम्पूर्ण नहीं मानी जा सकती।
रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर हम विदेश से हथियार और अन्य रक्षा उपकरण खरीदते हैं, तो हम अपनी सुरक्षा को आउटसोर्स कर रहे हैं और इसे किसी और के भरोसे छोड़ रहे हैं। हमारी सरकार ने इस पर गंभीरता से विचार कर आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए निर्णायक कदम उठाया है और यही विस्तारित रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र भारत को अभूतपूर्व शक्ति प्रदान कर रहा है।
श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा उत्पादन में गुणवत्ता और मात्रात्मक उत्पादन पर समान जोर दिया जा रहा है और इस दिशा में कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं, जिसमें आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) का निगमीकरण भी शामिल है। रक्षा मंत्री ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की प्रगति का उद्देश्य स्वस्थ प्रतिस्पर्धी निजी रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना रहा है, जो गुणवत्ता द्वारा भारत की सुरक्षा सुदृढ़ करेगा। उन्होंने कहा कि आज विश्व में एक मजबूत ब्रांड उत्पाद से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। जो ब्रांड लगातार गुणवत्ता और विश्वसनीयता आश्वस्त कराता है, वही सफल होता है।
2024 में विश्व सैन्य व्यय 2,718 बिलियन डॉलर
वैश्विक व्यवस्था में हो रहे व्यापक बदलावों के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि जब विकसित देश पुनः शस्त्रीकरण की ओर बढ़ेंगे तो हथियारों और उपकरणों की मांग बढ़ेगी। उन्होंने स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2024 में विश्व सैन्य व्यय 2,718 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि समन्वित प्रयासों से भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र ब्रांड इंडिया दर्शन के साथ वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा निर्यात 24,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया। अब हमारा लक्ष्य 2029 तक इस आंकड़े को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र और दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा निर्यातक बनाना हमारा लक्ष्य है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमें अपने रक्षा उपकरणों की गुणवत्ता के बारे में वैश्विक भरोसा हासिल करना होगा।

