‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान प्रमुख पाकिस्तानी एयरबेसों पर भारत के 90 मिनट के लक्षित हमलों ने क्षेत्रीय सैन्य गतिशीलता में एक निर्णायक बदलाव की ओर इशारा किया है। इन सटीक हमलों ने पाकिस्तान की हवाई शक्ति, रक्षा तंत्र के समन्वय और किसी भी सार्थक जवाबी कार्रवाई को अंजाम देने की उसकी क्षमता को खत्म कर दिया। प्रत्येक बेस अपनी विशेषता रखता है और इनको क्षति पहुंचाये जाने से पाकिस्तान पर रणनीति और मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ा।
1. नूर खान/चकलाला एयरबेस (रावलपिंडी)
नूर खान पर भारत के हमले ने पाकिस्तान की हवाई रसद एवं सैन्य समन्वय को बाधित किया। इस्लामाबाद के नजदीकी इस बेस को अक्सर वीआईपी गतिविधियों और सैन्य रसद पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, इसके बर्बाद होने से पाकिस्तानी वायु सेना (पीएएफ) के शीर्ष नेतृत्व एवं इसकी परिचालन इकाइयों के बीच समन्वय टूट गया।
2. पीएएफ बेस रफीकी (शोरकोट)
रफीकी, एक प्रमुख लड़ाकू बेस है, जो फ्रंटलाइन लड़ाकू स्क्वाड्रनों का अड्डा है, उसका परिचाल बाधित किया गया। इसके एयरक्राफ्ट शेल्टर और रनवे को बर्बाद कर पाकिस्तान की काउंटर-एयर ऑपरेशन शुरू करने की क्षमता को काफी कमजोर कर दिया, खासकर मध्य पंजाब में इस बेस की भूमिका अहम है। इस कदम ने प्रभावी रूप से पीएएफ के सबसे तेज आक्रामक करने की क्षमता को नष्ट कर दिया।
3. मुरीद एयरबेस (पंजाब)

मुरीद को निशाना बनाकर भारत ने एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण केंद्र और संभावित मिसाइल भंडारण को बाधित कर दिया। इस हमले ने पाकिस्तानी वायु सेना की दीर्घकालिक तत्परता को प्रभावित किया। साथ ही पायलट प्रशिक्षण पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाया और भविष्य के किसी भी ऑपरेशन में रसद पहुंचाने की इस बेस की क्षमताओं को समाप्त किया।
4. सुक्कुर एयरबेस (सिंध)

भारत द्वारा सुक्कुर एयरबेस को नुकसान पहुंचाने से पाकिस्तान का दक्षिणी हवाई गलियारा कट गया। सुक्कुर सिंध और बलूचिस्तान में सेना और उपकरणों की आवाजाही के लिए जरूरी था। इसके नष्ट होने से एक प्रमुख रसद प्रणाली प्रभावित हुई और दक्षिण में पाकिस्तान की क्षमता कमजोर हुई।
छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं : जगत प्रकाश नड्डा
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा ने ‘एक्स’ पर कहा, “पहलगाम पर भारत का पैग़ाम – छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं। प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा—भारत की आत्मा पर हमला करने वालों को कड़ी सज़ा मिलेगी। भारत आतंकवाद को उसकी जड़ से उखाड़ फेंकने में सक्षम भी है और संकल्पबद्ध भी है। मिटा देंगे आतंकवाद का नासूर।”
हमें अपने सशस्त्र बलों पर गर्व है: अमित शाह
हमें अपने सशस्त्र बलों पर गर्व है। #ऑपरेशनसिंदूर पहलगाम में हमारे निर्दोष भाइयों की क्रूर हत्या के प्रति भारत की प्रतिक्रिया है। मोदी सरकार भारत और उसके नागरिकों पर किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
5. सियालकोट एयरबेस (पूर्वी पंजाब)
सियालकोट, जो भारतीय सीमा के करीब स्थित है, उसे संघर्ष की शुरुआत में ही नष्ट कर दिया गया था। यह बेस जम्मू और पंजाब की ओर उड़ान भरने के लिए एक अग्रिम परिचालन केंद्र के रूप में काम करता था। इसके नष्ट होने से पूर्वी सीमा पर एक महत्वपूर्ण ब्लाइंड स्पॉट बन गया, जिससे पाकिस्तानी स्थल सेना पर हमला करने में भारतीय वायुसेना के समक्ष आने वाली चुनौतियां समाप्त हो गयीं।
6. पसरूर हवाई पट्टी (पंजाब)
हालांकि पसरूर एक छोटी हवाई पट्टी है, लेकिन इसका उपयोग आपातकालीन विमान संचालन में किया जा सकता है। इसे नष्ट कर भारत ने पाकिस्तान की सामरिक शक्ति को कमजोर किया और पाकिस्तानी वायुसेना को अन्य अधिक संवेदनशील, उच्च प्रोफाइल बेस से उड्डान भरे पर मजबूर किया।
7. चुनियान (रडार/सहायता केंद्र)
चुनियान पर हमलों ने रडार कवरेज और संचार के बुनियादी ढांचे को बाधित किया, जो मध्य पंजाब के हवाई क्षेत्र की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण था। इस हमले ने पाकिस्तान की प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को निष्क्रिय कर दिया, जिससे भारतीय विमानों को उड़ान भरते समय कम जोखिम का सामना करना पड़ा।
8. सरगोधा एयरबेस (मुशाफ बेस)
सरगोधा एयरबेस पर प्रहार एक रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक था। यह पाकिस्तान का सबसे महत्वपूर्ण बेस है, जहां कॉम्बैट कमांडर्स स्कूल, परमाणु प्लेटफॉर्म और उच्चस्तरीय स्क्वाड्रन मौजूद है। इसके ध्वस्त होने से पाकिस्तान की कमान और नियंत्रण संरचना पर असर पड़ा। यह झटका परिचालन और प्रतीकात्मक दोनों दृष्टि से अहम था, जिसने एक अजेय पीएएफ के मिथक को चकनाचूर कर दिया।
9. स्कार्दू एयरबेस (गिलगित-बाल्टिस्तान)
स्कार्दू पर भारत के हमले से वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास पाकिस्तान की उत्तरी निगरानी प्रणाली और हवाई अभियान कमजोर हो गए। इससे हिमालय क्षेत्र में चीनी-पाकिस्तानी समन्वय को मदद करने वाले सैन्य संपर्क भी बाधित हुए। उत्तरी क्षेत्र में सामरिक बढ़त अब पूरी तरह से भारत के पास है।
10. भोलारी एयरबेस (कराची के पास)
यह पाकिस्तान के सबसे नए एयरबेस में से एक है, जो नौसेना और वायुसेना दोनों के लिए अहम है, भोलारी पाकिस्तान की भविष्य की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण था। इसके ध्वस्त होने से उन आकांक्षाओं को गहरी चोट पहुंची है। हमने तटीय रक्षा समन्वय को प्रभावित किया और कराची को भारत के हमलों की दृष्टि से असुरक्षित बना दिया।
11. जैकोबाबाद एयरबेस (सिंध-बलूचिस्तान)
जैकोबाबाद के नष्ट होने से पश्चिमी पाकिस्तान और भी अलग-थलग पड़ गया। ऐतिहासिक रूप से इसका इस्तेमाल तेजी से सैन्य तैनाती के लिए किया जाता था और यहां तक कि आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना द्वारा भी इसका इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन इसके नष्ट होने से आंतरिक गतिशीलता, आपूर्ति शृंखला और पाकिस्तान की पश्चिमी हवाई निगरानी बाधित हो गई।
अंत में कहा जा सकता है कि इन एयरबेसों पर भारत के त्वरित और समन्वित हमलों ने पाकिस्तान की हवाई क्षमताओं को रणनीतिक रूप से ध्वस्त कर दिया। रडार नेटवर्क, कमांड हब और स्ट्राइक प्लेटफॉर्म को नष्ट करने से पीएएफ पंगु हो गया। युद्ध के मैदान में जीत से कहीं अधिक, ये संरचनात्मक विध्वंस थे— जिसका उद्देश्य पाकिस्तान की लड़ने की क्षमता को अक्षम करना और भविष्य में आक्रमण से बचाव था।
इस ऑपरेशन ने न केवल भारत की तकनीकी और सामरिक श्रेष्ठता को प्रदर्शित किया, बल्कि दक्षिण एशिया में भारत की शक्तियों को भी पुनर्परिभाषित किया। पाकिस्तान के एयरबेसों के विनाश ने एक स्पष्ट संदेश दिया: अब बढ़त भारत के हाथ में है और किसी भी उकसावे की कीमत विनाशकारी होगी।



