‘न्याय संहिता’ समानता, सद्भाव और सामाजिक न्याय के आदर्शों से बुनी गई है

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 3 दिसंबर को चंडीगढ़ में परिवर्तनकारी तीन नए आपराधिक कानूनों— भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के सफल कार्यान्वयन को राष्ट्र को समर्पित किया। उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि चंडीगढ़ की पहचान देवी मां चंडी से जुड़ी है, जो शक्ति का एक रूप है जो सत्य और न्याय की स्थापना करती है। उन्होंने कहा कि यही दर्शन भारतीय न्याय संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के पूरे स्वरूप का आधार है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान की भावना से प्रेरित भारतीय न्याय संहिता का लागू होना एक शानदार क्षण है, क्योंकि राष्ट्र विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ने के महत्वपूर्ण मोड़ पर है और साथ ही भारतीय संविधान के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न भी मना रहा है। उन्होंने कहा कि यह उन आदर्शों को पूरा करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है, जो हमारे संविधान ने देश के नागरिकों के लिए परिकल्पित किए हैं।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि देश की नई न्याय संहिता बनाने की प्रक्रिया, दस्तावेज जितनी ही व्यापक रही है। उन्होंने कहा कि इसमें देश के कई महान संविधान विशेषज्ञों और कानूनी विशेषज्ञों की कड़ी मेहनत शामिल है।

श्री मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता-पूर्व के कालखंड में अंग्रेजों द्वारा बनाए गए आपराधिक कानूनों को उत्पीड़न और शोषण के हथियार के रूप में देखा जाता था। उन्होंने कहा कि 1857 में देश के पहले बड़े स्वतंत्रता संग्राम के परिणामस्वरूप 1860 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) लागू की गई थी। उन्होंने कहा कि कुछ वर्षों बाद भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किया गया और फिर सीआरपीसी की पहली संरचना अस्तित्व में आई। श्री मोदी ने कहा कि इन कानूनों की अवधारणा के साथ-साथ इसका उद्देश्य भारतीयों को दंडित करना और उन्हें गुलाम बनाना था।

न्याय संहिता को समानता, सद्भाव और सामाजिक न्याय की अवधारणा से बुना गया बताते हुए श्री मोदी ने कहा कि कानून की नजर में सभी समान होने के बावजूद व्यावहारिक वास्तविकता अलग है। उन्होंने कहा कि गरीब लोग कानून से डरते हैं, यहां तक कि वे अदालत या पुलिस थाने में जाने से भी डरते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि नई न्याय संहिता समाज के मनोविज्ञान को बदलने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि हर गरीब व्यक्ति को यह भरोसा होगा कि देश का कानून समानता की गारंटी है। उन्होंने कहा कि यह हमारे संविधान में दिए गए सच्चे सामाजिक न्याय को दर्शाता है।