प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 19 नवंबर को तमिलनाडु के कोयंबटूर से प्रधानमंत्री-किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी की, जिससे देश भर के 9 करोड़ किसानों को 18,000 करोड़ रुपये उनके खाते में ट्रांसफर किए गए। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस स्कीम के तहत अब तक छोटे किसानों के बैंक खाते में सीधे 4 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जा चुके हैं, जिससे वे खेती-बाड़ी की अपनी अलग-अलग जरूरतें पूरी कर पा रहे हैं। साथ ही, श्री मोदी ने कोयंबटूर में साउथ इंडिया नेचुरल फार्मिंग समिट 2025 का उद्घाटन भी किया।
पिछले ग्यारह सालों में पूरे कृषि क्षेत्र में हुए बड़े बदलावों पर जोर देते हुए श्री मोदी ने बताया कि भारत का कृषि निर्यात लगभग दोगुना हो गया है और सरकार ने कृषि को मॉडर्न बनाने में किसानों की मदद के लिए हर मुमकिन रास्ता खोला है। यह बताते हुए कि अकेले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) स्कीम के जरिए इस साल किसानों को 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मदद मिली है। श्री मोदी ने कहा कि सात साल पहले जब से पशुधन और मछली पालन सेक्टर को केसीसी का फायदा दिया गया है, तब से इन एरिया में काम करने वाले लोग भी इसका बड़े पैमाने पर लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जैविक खाद पर जीएसटी में कमी लाने से किसानों को और भी अधिक लाभ हुआ है।
इस बात पर जोर देते हुए कि एक विकसित भारत के लिए भविष्योन्मुखी कृषि प्रणाली बनाने के लिए मिलकर कोशिश करने की जरूरत है, प्रधानमंत्री ने किसानों से ‘एक एकड़, एक सीजन’ प्राकृतिक खेती शुरू करने और उसे करने एवं उसके परिणाम के आधार पर आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने वैज्ञानिक और अनुसंधान संस्थानों से प्राकृतिक खेती को कृषि के पाठ्यक्रम का एक मुख्य हिस्सा बनाने की अपील की और उन्हें किसानों के खेतों को जीती-जागती लैब की तरह इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारा लक्ष्य प्राकृतिक खेती को पूरी तरह से विज्ञान आधारित आंदोलन बनाना हो।”
श्री मोदी ने इस अभियान में राज्य सरकारों और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) की अहम भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में देश में 10,000 एफपीओ बनाए गए हैं। उनके समर्थन से छोटे किसान क्लस्टर बनाए जा सकते हैं, जिन्हें सफाई, पैकेजिंग और प्रोसेसिंग की सुविधाओं से लैस किया जा सकता है और सीधे ई-नाम जैसे ऑनलाइन मार्केट से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब पारंपरिक ज्ञान, वैज्ञानिक ताकत और सरकारी मदद एक साथ आएंगे, तो किसान तरक्की करेंगे और धरती मां स्वस्थ रहेंगी।

