प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 26 सितंबर को अपने आवास पर शतरंज ओलंपियाड के विजेताओं से बातचीत की। मिशन प्रमुख दिब्येंदु बरुआ ने प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर दिलाया कि भारत ने पहली बार इन प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि पहली बार लड़कों की टीम ने 22 अंकों में से 21 अंक हासिल किए, लड़कियों की टीम ने 22 अंकों में से 19 अंक हासिल किए और दोनों टीमों ने मिलकर कुल 44 अंकों में से 40 अंक हासिल किए।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि हमारे देश के युवाओं में अपार क्षमता है। श्री मोदी ने तनाव से उबरने के बारे में खिलाड़ियों के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि व्यक्ति को शारीरिक रूप से फिट रहना चाहिए और ऐसी आदतें अपनानी चाहिए जिससे प्रदर्शन में सुधार हो। उन्होंने कहा, “अच्छे निर्णय लेने के लिए आपको बहुत सारी जानकारी की आवश्यकता होती है— सकारात्मक और नकारात्मक दोनों। यह मानव स्वभाव है कि वह केवल वही सुनना चाहता है जो सुखद हो, लेकिन इससे निर्णयों में गलतियां हो सकती हैं।”
श्री मोदी ने सभी प्रकार की सूचनाओं का विश्लेषण करने, विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने, विशेषज्ञों से परामर्श करने और बिना जल्दबाजी के निर्णय लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “इससे आपको चुनौतियों से निपटना आसान लगेगा। कुछ चीजें अनुभव के साथ आती हैं और जैसाकि मैंने पहले कहा है कि योग और ध्यान में वास्तविक शक्ति है।”
श्री मोदी ने कहा कि कभी भी किसी चीज से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे आत्मसंतुष्टि आने लगती है। उन्होंने कहा, “हमारे अंदर हमेशा कुछ नया करने और अधिक करने की भूख होनी चाहिए।”
दिब्येंदु बरुआ ने प्रधानमंत्री को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और भारत के लिए दो ऐतिहासिक स्वर्ण पदकों की घोषणा पर खुशी व्यक्त की। अंत में श्री मोदी ने खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनके साथ अपना संवाद कार्यक्रम समाप्त किया।

