मोदी स्टोरी —कंचन बनर्जी, एनआरआई-यूएसए
श्री नरेन्द्र मोदी 1993 में पहली बार अमेरिका गए थे, तो प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान के क्षेत्र में होने वाली प्रगति को लेकर उनकी जिज्ञासा काफी प्रबल थी। श्री मोदी, जो उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के युवा प्रचारक थे, ने अमेरिका को आकार देने वाले तकनीकी नवाचारों के हर विवरण को आत्मसात् करने का प्रयास किया।
इस यात्रा में श्री मोदी के साथ अमेरिका स्थित स्वास्थ्य सेवा पेशेवर श्री कंचन बनर्जी भी थे। टेक्सास के ह्यूस्टन में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ की अपनी यात्रा को याद करते हुए उन्होंने बताया कि मैंने श्री मोदी को नासा के वरिष्ठ व्यक्ति श्री कमलेश लालाजी से मिलवाया और उन्हें अंतरिक्ष एवं वैमानिकी के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। वह श्री मोदी की गहन जिज्ञासा से प्रभावित हुए। श्री बनर्जी याद कर कहते हैं, “वह ऐसे सवाल पूछ रहे थे जैसे वह कोई भौतिक विज्ञानी हों। विज्ञान और अंतरिक्ष के बारे में उनकी समझ उल्लेखनीय थी और उनके सवालों की जटिलता ने मुझे आश्चर्यचकित कर दिया।”
विज्ञान के प्रति उनके आकर्षण के अलावा, इस यात्रा के दौरान श्री मोदी की सादगी और आत्मनिर्भरता की सोच भी स्पष्ट थी। श्री बनर्जी ने बताया कि श्री नरेन्द्र मोदी ने सिर्फ एक छोटा सा बैग लेकर यात्रा की, जिसमें दो जोड़ी कपड़े और एक कैमरा था, जो फोटोग्राफी के प्रति उनके जुनून को दर्शाता है। अन्य लोगों के घर में मेहमान होने के बावजूद श्री मोदी ने कभी भी अपने मेजबानों पर कोई दबाव नहीं डाला। श्री बनर्जी कहते हैं, “जब मेरी पत्नी ने उनके कपड़े धोने का आग्रह किया, तो उन्होंने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया और जोर देकर कहा कि वह स्वयं ही कपड़े धो लेंगे। एक प्रचारक के तौर पर आत्मनिर्भरता की भावना उनके चरित्र का एक मुख्य हिस्सा थी।”
अपनी यात्राओं के दौरान श्री नरेन्द्र मोदी ने सौर एवं हरित ऊर्जा को लेकर भी अपनी रुचि दिखाई। बोस्टन में वैज्ञानिकों के साथ चर्चा के दौरान उन्होंने खेती योग्य भूमि पर सौर पैनल लगाने के मुद्दे पर सबका ध्यान आकर्षित किया, उन्होंने कहा कि ऐसा करने से खेती योग्य भूमि अनुपयोगी हो जाती है। श्री मोदी ने सिंचाई नहरों पर सौर पैनल लगाने का सुझाव दिया, जिससे भूमि की बचत होगी और नहरों से पानी का वाष्पीकरण भी कम होगा। इस विचार को बाद में भारत में लागू किया गया, जिससे सतत विकास को लेकर उनकी दूरदर्शिता का पता चलता है।
श्री मोदी ने बोस्टन की अपनी यात्रा के दौरान पहली बार स्वचालित टोल बूथ भी देखे और मानवीय भूल को खत्म करने एवं भ्रष्टाचार से निपटने की उनकी क्षमता को पहचाना। उन्होंने जल्दी ही समझ लिया कि इन नवाचारों को भारत में कैसे अपनाया जा सकता है, इसके लिए केवल नकल करने की अवश्यकता नहीं थी, बल्कि देश की जरूरतों के हिसाब से उन्हें लागू किया जाना था।
श्री कंचन बनर्जी याद करते हैं कि श्री नरेन्द्र मोदी की न्यूयॉर्क, शिकागो और अटलांटा सहित प्रमुख अमेरिकी शहरों की यात्राओं ने उन पर गहरा प्रभाव डाला। श्री बनर्जी कहते हैं, “मुझे यकीन है कि उस समय भारत की गरीबी और पिछड़ेपन को देखकर उन्हें दु:ख हुआ होगा। श्री मोदी के अनुभव ने संभवतः विकास पर उनका ध्यान केंद्रित किया, यह समझते हुए कि लोगों को गरीबी से बाहर निकालने के लिए बुनियादी जीवन स्तर में सुधार करना आवश्यक था।”

