वित्त वर्ष 2026 में वास्तविक जीडीपी में 6.3 फीसदी से 6.8 फीसदी की दर से वृद्धि का अनुमान

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                                      आर्थिक समीक्षा 2024-25

 वित्त वर्ष 2025 में भारत की वास्तविक जीडीपी और जीवीए वृद्धि दर के 6.4 फीसदी रहने का अनुमान
 वित्त वर्ष 2026 में वास्तविक जीडीपी में 6.3 फीसदी से 6.8 फीसदी की दर से वृद्धि का अनुमान
 पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2024 तथा आम चुनाव के बाद तक निरंतर वृद्धि हुई है, यह जुलाई-नवंबर, 2024 के दौरान 8.2 फीसदी की दर बढ़ी है
 खुदरा मुद्रा स्फीति वित्त वर्ष 2024 के 5.4 फीसदी से घटकर अप्रैल-दिसंबर, 2024 में 4.9 फीसदी रह गई
 अनुसूचित व्यवसायिक बैंकों का जीएनपीए घटकर 2.6 फीसदी के स्तर पर, जो 12 वर्षों में सबसे कम है
 वित्त वर्ष 2025 के पहले 9 महीनों में कुल निर्यात में 6 फीसदी (वर्ष दर वर्ष) की वृद्धि
 दूरसंचार, कम्प्यूटर तथा सूचना, सेवा क्षेत्र में भारत पूरी दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक
 विदेशी मुद्रा 640.3 बिलियन डॉलर जो 10.9 महीनों के आयात तथा बाहरी ऋण के लगभग 90 फीसदी को पूरा करने के लिए पर्याप्त
 स्मार्ट फोन आयात में भारी गिरावट, अब 99 फीसदी विनिर्माण घरेलू स्तर पर
 विश्व स्तर पर शीर्ष 10 पैटेंट दाखिल करने वाले कार्यालयों में भारत छठें स्थान पर
 वित्त वर्ष 2025 के अप्रैल-नवंबर के दौरान भारत की सेवा निर्यात वृद्धि दर 12.1 फीसदी रही, जो वित्त वर्ष 2024 के 5.7 फीसदी की तुलना में तेज वृद्धि दर्शाती है
 2024 में खरीफ खाद्यान्न उत्पादन के 1647.05 एलएमटी पर पहुंचने की उम्मीद, पिछले वर्ष की तुलना में 89.37 एलएमटी की वृद्धि
 गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोत से स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता, कुल उत्पादन क्षमता की 46.8 फीसदी है
 वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 के दौरान सामाजिक क्षेत्र व्यय में 15 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की गई
 सरकारी स्वास्थ्य खर्च 29.0 फीसदी से बढ़कर 48.0 फीसदी हुआ, लोगों के कुल स्वास्थ्य खर्च में जेब से होने वाले खर्च की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2022 के बीच 62.6 फीसदी से घटकर 39.4 फीसदी रह गई
 बेरोजगारी दर 2017-18 के 6 फीसदी से घटकर 2023-24 में 3.2 फीसदी रह गई

केंद्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 31 जनवरी को संसद में आर्थिक समीक्षा 2024-25 पेश की। समीक्षा की मुख्य बातें निम्न हैं:

अर्थव्यवस्था की स्थिति: फिर से तेज विकास दर

1. भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि वित्त वर्ष 2025 में 6.4 फीसदी रहने की उम्मीद (राष्ट्रीय आय के अग्रिम अनुमान के अनुसार), जो दशक के औसत के नजदीक है।
2. वैश्विक अर्थव्यवस्था 2023 में 3.3 फीसदी की दर से बढ़ी, आईएमएफ ने अगले 5 वर्षों के लिए 3.2 फीसदी वृद्धि का अनुमान लगाया था।
3. वित्त वर्ष 2026 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.3 से 6.8 के बीच बढ़ेगी, वृद्धि के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए।
4. जमीनी स्तर पर संरचनात्मक सुधारों पर जोर तथा विनियमन को कम करने से मध्य अवधि वृद्धि क्षमता सुदृढ़ होगी और भारतीय अर्थव्यवस्था की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।
5. भू-राजनैतिक तनाव अभी जारी संघर्ष तथा वैश्विक व्यापार नीतिगत जोखिम वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में गंभीर चुनौती बने हुए हैं।
6. खुदरा मुद्रा स्फीति (हेडलाइन) वित्त वर्ष 2024 के 5.4 फीसदी से घटकर अप्रैल-दिसंबर, 2024 में 4.9 प्रतिशत रह गई।
7. पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2024 के दौरान निरंतर सुधार हुआ है, आम चुनावों के बाद कैपेक्स में जुलाई-नवंबर, 2024 के दौरान 8.2 फीसदी की वृद्धि (वर्ष दर वर्ष) दर्ज की गई।

मौद्रिक और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े तथ्य

1. बैंक ऋण में स्थिर गति से वृद्धि हुई है और यह जमा राशि के लगभग बराबर हो गई है।
2. अनुसूचित व्यवसायिक बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियां (डीएनपीए) घटकर सिंतबर, 2024 के अंत में सकल ऋण और अग्रिम के 2.6 फीसदी पर आ गई है, जो 12 वर्षों का निम्न स्तर है।
3. दिवाला और दिवालियापन संहिता के अंतर्गत सितंबर, 2024 तक 1068 योजनाओं के समाधान से 3.6 लाख करोड़ रुपये प्राप्त किए गए।
4. प्राथमिक बाजारों (इक्विटी और ऋण) से प्राप्त पूंजी संग्रह अप्रैल से दिंसबर, 2024 के दौरान 11.1 लाख करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2024 के दौरान जुटाई गई धनराशि से 5 फीसदी अधिक है।

बाहरी क्षेत्रः एफडीआई बेहतर हो रहा है

1. वैश्विक अनिश्चितताओं और प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच भारत का बाहरी क्षेत्र सुदृढ़ बना हुआ है।
2. वित्त वर्ष 2025 के पहले 9 महीनों में कुल निर्यात में (व्यापार+सेवा) 6 प्रतिशत (वर्ष दर वर्ष) की वृद्धि दर्ज की गई।
3. वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी का 1.2 फीसदी रहा, जिसे नेट सेवा प्राप्तियों की वृद्धि तथा निजी अंतरण प्राप्तियों में वृद्धि से समर्थन मिला है।
4. वित्त वर्ष 2025 में सकल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) में मजबूती आई है, जो वित्त वर्ष 2024 के पहले 8 महीनों के 47.2 बिलियन डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 की सामान अवधि के लिए 55.6 बिलियन डॉलर हो गया है, इसमें 17.9 फीसदी की वर्ष दर वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है।
5. दिसंबर, 2024 के अंत में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 640.3 बिलियन डॉलर है, 10.9 महीनों के आयात तथा देश के बाहरी ऋण के 90 फीसदी के लिए पर्याप्त है।
6. भारत का बाहरी ऋण पिछले कुछ वर्षों से स्थिर रहा है; सितंबर, 2024 के अंत में बाहरी ऋण और जीडीपी का अनुपात 19.4 फीसदी रहा है।

मूल्य और मुद्रा स्फीतिः समीकरण को समझना

1. आईएमएफ के अनुसार वैश्विक मुद्रा स्फीति दर 2024 में 5.7 फीसदी रही, जो 2022 में 8.7 फीसदी के शीर्ष पर थी।
2. भारत में खुदरा मुद्रा स्फीति वित्त वर्ष 2024 के 5.4 फीसदी के मुकाबले वित्त वर्ष 2025 (अप्रैल-दिसंबर, 2024) में घटकर 4.9 फीसदी रह गई।
3. आरबीआई और आईएमएफ का अनुमान है कि भारत की उपभोक्ता मूल्य स्फीति वित्त वर्ष 2026 में 4 फीसदी लक्ष्य के अनुरूप रहेगी।
4. जलवायु-सहनीय फसल किस्मों और कृषि तौर-तरीकों में सुधार, तीव्र जलवायु घटनाओं के प्रभावों को कम करने और दीर्घावधि में मूल्य स्थिरता हासिल करने के लिए आवश्यक है।

मध्य अवधि दृष्टिः विनियमन में कमी से विकास को गति

1. वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विज़न को प्राप्त करने के लिए भारत को अगले एक दशक या दो दशकों तक औसतन स्थिर मूल्य पर लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करने की जरूरत है।
2. भारत घरेलू विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रणालीगत विनियमन में कमी पर ध्यान केन्द्रित करेगा तथा लोगों और संगठनों को वैध आर्थिक गतिविधि को आसानी से संचालित करने के लिए सशक्त बनाएगा।
3. अगले कदम के रूप में राज्यों को मानकों तथा नियंत्रणों पर ढील देने पर काम करना चाहिए, लागू करने के लिए कानूनी सुरक्षा उपाय निर्धारित करना, टैरिफ और शुल्कों में कमी लाना, जोखिम आधारित विनियम को लागू करना।

निवेश और अवसंरचनाः निरंतर जारी रहनी चाहिए

1. पिछले पांच वर्षों में सरकार का केन्द्रीय ध्यान अवसंरचना के लिए सार्वजनिक व्यय में वृद्धि करने तथा मंजूरी व संसाधन जुटाने को गति देने पर रहा है।
2. प्रमुख अवसंरचना क्षेत्रों पर केन्द्र सरकार के पूंजीगत परिव्यय में वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2024 तक 38.8 फीसदी की दर से वृद्धि हुई है।
3. परिचालन दक्षता में सुधार से प्रमुख पत्तनों पर कंटेनर टर्न अराउंड अवधि में औसतन कमी दर्ज की गई है, यह अवधि वित्त वर्ष 2024 के 48.1 घंटों से घटकर वित्त वर्ष 2025 (अप्रैल-नवंबर) में 30.4 घंटे रह गई है इससे पत्तन की परिवहन सुविधा में सुधार हुआ है।
4. भारत की कुल स्थापित क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 47 फीसदी हो गई है।
5. डीडीयूजेजीवाई और सौभाग्य जैसी सरकार की योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली तक पहुंच में सुधार हुआ है, 18,374 गांवों तथा 2.9 करोड़ घरों को बिजली की सुविधा मिली।
6. जल जीवन मिशन के तहत योजना की शुरुआत से अब तक 12 करोड़ परिवारों को नल से पेय जल आपूर्ति की सुविधा मिली है।
7. शहरी क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 89 लाख आवासों का निर्माण हुआ है।
8. नगर परिवहन नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है, 29 शहरों के 1000 किलोमीटर से अधिक के लिए मेट्रो और त्वरित रेल प्रणाली या तो परिचालन में है या निर्माण के अधीन है।
9. रियल स्टेट (विनियम और विकास) अधिनियम 2016 ने रियल स्टेट क्षेत्र के विनियमन और पारदर्शिता सुनिश्चित की; जनवरी, 2025 तक 1.38 लाख रियल स्टेट परियोजनाएं पंजीकृत की गई है तथा 1.38 लाख शिकायतों का समाधान किया गया है।
10. वर्तमान में भारत 26 सक्रिय अंतरिक्ष परिसम्पत्तियों का परिचालन करता है; सरकार के अंतरिक्ष विज़न 2047 में गगनयान मिशन तथा चंद्रयान-4, चांद सैम्पल वापसी मिशन जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शामिल हैं।
11. केवल सार्वजनिक निवेश अवसंरचना की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता, अंतर को पाटने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी महत्वपूर्ण है।

उद्योगः व्यापार सुधार पर विशेष ध्यान

1. विद्युत तथा निर्माण में मजबूत विकास से संचालित औद्योगिक क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025 (पहला अग्रिम अनुमान) में 6.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की।
2. वित्‍त वर्ष 2024 में भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र में घरेलू बिक्री में 12.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही।
3. 99 प्रतिशत स्‍मार्टफोन अब घरेलू स्‍तर पर देश में निर्मित हो रहे हैं जिससे भारत की आयात पर निर्भरता उल्‍लेखनीय तौर पर कम हो गई है।
4. सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम क्षेत्र में समान धन सहायता के लिए सरकार ने 50 हजार करोड़ रुपये के कोष से आत्‍मनिर्भर-भारत कोष स्‍थापित किया है।
5. सरकार देशभर में एमएसएमई क्‍लस्‍टर विकसित करने के लिए सूक्ष्‍म और लघु उद्यम-क्लस्‍टर विकास कार्यक्रम लागू कर रही है।

सेवा क्षेत्र: पुराने योद्धा के समक्ष नई चुनौतियां

1. वर्ष 2023 में वैश्विक सेवा निर्यात में भारत 4.3 प्रतिशत साझेदारी के साथ विश्‍व में सातवें स्‍थान पर रहा।
2. भारत के सेवा निर्यात में विकास वित्‍त वर्ष 2024 के 5.7 प्रतिशत से बढ़कर वित्‍त वर्ष 2025 के (अप्रैल-नवम्‍बर) में 12.8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।
3. वित्‍त वर्ष 2013 से वित्‍त वर्ष 2023 के दशक में सूचना और कम्‍प्‍यूटर आधारित सेवा में 12.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इससे सकल मूल्‍य वर्धन-जीवीए में उसकी हिस्‍सेदारी 6.3 प्रतिशत से बढ़कर 10.9 प्रतिशत हो गई है।
4. भारतीय रेलवे ने वित्‍त वर्ष 2024 से यातायात में 8 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की है, जबकि वित्‍त वर्ष 2024 में माल भाड़े ढुलाई में 5.2 प्रतिशत का राजस्‍व अर्जित किया है।
5. पर्यटन क्षेत्र का सकल घरेलू उत्‍पाद में योगदान वित्‍तीय वर्ष 2023 में महामारी पूर्व की स्थिति में 5 प्रतिशत पहुंच गया है।

कृषि और खाद्य प्रबंधन: भविष्‍य की संभावना का क्षेत्र

1. कृषि और इससे संबंधित क्षेत्रों ने वित्‍त वर्ष 2024 के (प्रारंभिक अनुमानों) में मौजूदा आधार पर सकल घरेलू उत्‍पाद में 16 प्रतिशत का योगदान रहा है।
2. वर्ष 2024 में खरीफ खाद्यान्‍न उत्‍पादन 1647.05 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) तक पहुंचने की उम्‍मीद है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 89.37 एलएमटी की वृद्धि दर्शाती है।
3. वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अरहर और बाजरा के एमएसपी में उत्‍पादन की भारित औसत लागत पर क्रमश: 59 प्रतिशत और 77 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
4. 31 अक्‍टूबर तक पीएम किसान के तहत 11 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला है, जबकि 23.61 लाख किसान पीएम किसान मानधन के तहत नामांकित हैं।

जलवायु और पर्यावरण: अनुकूलन की अनिवार्यता

1. वर्ष 2047 तक विकसित राष्‍ट्र का दर्जा प्राप्‍त करने की भारत की महत्‍वाकांक्षा मूल रूप से समावेशी और सतत विकास के दृष्टिकोण में निहित है।
2. भारत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 2,13,701 मेगावाट की संस्‍थापित बिजली उत्‍पादन क्षमता सफलतापूर्वक स्‍थापित की है, जो वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचने के एनडीसी के अद्यतित लक्ष्‍य की तुलना में 30 नवम्‍बर, 2024 तक कुल क्षमता का 46.8 प्रतिशत है।
3. भारत के नेतृत्‍व वाले वैश्विक अभियान, लाइफस्‍टाइल फॉर एनवायरनमेंट (लाइफ) का उद्देश्‍य देश के स्थिरता संबंधी प्रयासों को बढ़ाना है।

सामाजिक क्षेत्र: पहुंच का विस्‍तार करना और सशक्तीकरण को आगे बढ़ाना

1. सरकार का सामाजिक सेवा व्‍यय (संयुक्‍त रूप से केंद्र और राज्‍यों कें संबंध में) वित्त वर्ष 21 से वित्त 25 तक 15 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है।
2. वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2022 के बीच देश के कुल स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यय में सरकारी स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यय की हिस्‍सेदारी 29.0 प्रतिशत से बढ़कर 48.0 प्रतिशत हो गई है। इसी अवधि के दौरान कुल स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यय में लोगों द्वारा किए जाने वाले आउट-ऑफ-पॉकेट एक्‍पेंडिचर की हिस्‍सेदारी 62.6 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत हो गई।
3. आयुष्‍मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना (एबीपीएम-जेएवाई) ने परिवारों के जेब खर्च में उल्‍लेखनीय कमी लाने में निर्णायक भूमिका निभाई है, जिसके अधीन 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत दर्ज की गई है।

रोजगार और कौशल विकासः अस्तित्वगत प्राथमिकताएं

1. बेरोजगारी दर 2017-18 (जुलाई-जून) के 6.0 प्रतिशत की तुलना में घटकर 2023-24 में 3.2 प्रतिशत रह जाने के साथ भारतीय श्रम बाजार के संकेतकों में सुधार हुआ है।
2. 10-24 वर्ष के आयु वर्ग में लगभग 26 प्रतिशत जनसंख्‍या होने के साथ भारत वैश्विक स्‍तर पर सबसे युवा राष्‍ट्रों में से एक के तौर पर विशेष जन सांख्यिकी अवसर के मुहाने पर है।
3. महिला उद्यमशीलता को प्रोत्‍साहन देते हुए सरकार ने आसान कर्ज, विपणन समर्थन, कौशल विकास और महिला स्‍टार्ट-अप्‍स को समर्थन आदि से जुड़ी कई पहलों की शुरुआत की है।
4. डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों के विकास से रोजगार सृजन के अवसर बढ़ रहे हैं, जो विकसित भारत के विजन को हासिल करने के लिए आवश्‍यक हैं।
5. हाल में पेश की गई पीएम-इंटर्नशिप योजना रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिहाज से परिवर्तनकारी साबित हो रही है।
6. ईपीएफओ के तहत बीते 6 साल में कुल नए पेरोल का आंकड़ा दोगुना हो गया है। इससे औपचारिक रोजगार में मजबूत बढ़ोतरी के संकेत मिलते हैं।

एआई युग में श्रम: संकट या उत्‍प्रेरक?

1. कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता (एआई) के डेवलपर नए युग में प्रवेश करने का भरोसा दिलाते हैं, जहां आर्थिक रूप से बहुमूल्‍य ज्‍यादातर कार्य स्‍वचालित होंगे।
2. युवा, सक्रिय और तकनीक के मामले में कुशल जनसंख्‍या के दोहन के द्वारा भारत में ऐसा कार्यबल तैयार करने की क्षमताएं हैं, जो अपने कार्य निष्‍पादन और उत्‍पादकता में सुधार के लिए एआई का उपयोग कर सकता है।