4,399 दिनों की एक लंबी नेतृत्व यात्रा

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    स्वतंत्र भारत ने जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेन्द्र दामोदरदास मोदी तक 15 प्रधानमंत्री देखे हैं। उन्होंने अलग-अलग सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक हालात में देश की सेवा की एवं अपनी पूरी क्षमता से कई तरह की चुनौतियों का सामना किया, लेकिन वर्तमान प्रधानमंत्री की कहानी एक अनोखी कहानी है।

आज, 10 जून को श्री नरेन्द्र मोदी सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं — उन्होंने नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 4,399 दिनों की यात्रा तय की है। उनके वर्तमान कार्यकाल में अभी तीन वर्ष और बाकी हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी अहम है क्योंकि आज हम जिस दौर में है उसमें जोरदार राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, गठबंधन की राजनीति, 24 घंटे मीडिया की नजर और सोशल मीडिया का कड़ा पहरा है।

साधारण परिवार में जन्मे श्री मोदी ने गुजरात के वडनगर में चाय बेचने का काम किया और अपने पिता का हाथ बंटाया। वहां से निकलकर देश की राजधानी के साउथ ब्लॉक में प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचना एक असाधारण उपलब्धि है।

यह आत्म-साक्षात्कार की यात्रा थी — भारत, यहां के लोगों और उनकी समस्याओं को समझने, देश को ‘स्वर्णिम भारत’ के रूप में देखने और इस सपने को साकार करने की यात्रा थी। उनकी यह सोच मुख्य रूप से आरएसएस के साथ उनके जुड़ाव से उपजी थी। अपने जीवन का अधिकतर समय उन्होंने आरएसएस, जनसंघ और भाजपा में अलग-अलग स्तरों पर सौंपे गए विभिन्न दायित्वों को चुपचाप निभाते हुए बिताया। इस दौरान उन्होंने शानदार संगठनात्मक कौशल, विचारों की स्पष्टता, भविष्य का सपना देखने का साहस और अवश्यकता पड़ने पर दायित्व निभाने की क्षमता हासिल की।

51 वर्ष की आयु में श्री मोदी गुजरात के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। उन्होंने पहले दिन से ही अपनी योग्यता दिखाई और गुजरात के लोगों की उद्यमिता एवं ऊर्जा को सही दिशा दी। मुख्यमंत्री के तौर पर उनका 13 साल लंबा कार्यकाल कई मायनों में यादगार रहा। उनके कार्यकाल में जो ‘गुजरात मॉडल’ सामने आया, उसने देश के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। भारत के लोग एक ऐसे नेता की तलाश में थे जो काम करके दिखाए। उन्हें मोदी के रूप में ऐसा नेता मिला।

मोदी के नेतृत्व में एनडीए ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की। पहली बार भाजपा को अपने दम पर बहुमत मिला। मुझे खुशी है कि मैं भाजपा के उन वरिष्ठ नेताओं में से एक था जिन्होंने प्रधानमंत्री पद के लिए श्री मोदी का पुरजोर समर्थन किया था। श्री मोदी ने अगले दो चुनावों में भी लगातार शानदार प्रदर्शन किया।

प्रधानमंत्री श्री मोदी का मानना है कि लोगों की भागीदारी के बिना भारत का बदलाव संभव नहीं है। 12 करोड़ से अधिक घरों में शौचालय बनाकर ‘स्वच्छ भारत’ को एक जन-आंदोलन बनाया गया; गरीबों के लिए 4 करोड़ से अधिक घर बनाए गए; जैम के तहत 57 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए; डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों को 45 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए; धुएं वाली रसोई में काम करने वाली 10 करोड़ से अधिक महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन दिए गए। यूपीआई के माध्यम से 24,000 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन ने हमारे देश को रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट में ग्लोबल लीडर बना दिया; कोविड-19 महामारी के दौरान 80 करोड़ लोगों को भोजन की मदद मिली और यह मदद अभी भी मिल रही है। श्री मोदी की सोच है ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों का बड़े पैमाने पर विस्तार करके मानव संसाधन विकास को आगे बढ़ाया। देश भर में आईआईटी, आईआईएम और एम्स की संख्या कई गुना बढ़ गई है। ‘आयुष्मान भारत’ दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी फंडिंग वाला स्वास्थ्य कार्यक्रम है। प्रधानमंत्री श्री मोदी पुरानी सोच या रूढ़ियों में विश्वास नहीं रखते। तुष्टीकरण सही रास्ता नहीं है। अनुच्छेद 370 को हटाना, तीन तलाक खत्म करना, भारी विरोध के बावजूद जीएसटी सुधार लागू करना और संसद एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण इसके स्पष्ट उदाहरण हैं।

श्री मोदी ने आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरी छाप छोड़ी है। वामपंथी उग्रवाद लगभग खत्म हो चुका है। सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने उन लोगों को कड़ा सबक सिखाया है, जिनकी हम पर बुरी नजर थी। हमारी विदेश नीति भी ऐसे काम कर रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने साफ कर दिया है कि यह केवल राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होगी, न कि किसी खास देश के। अब दुनिया भर में होने वाली बातचीत में भारत की आवाज मायने रखती है।

2014 में पद संभालने के बाद मैंने कुछ महीनों तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच और उनके काम को देखा, ताकि उनके मिशन को समझ सकूं। तब मैंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ‘MODI’ का मतलब है ‘Making of Developed India’ (विकसित भारत का निर्माण) है। इन 12 वर्षों के बाद मुझे ‘MODI’ को ‘Man of Destiny for India’ (भारत के भाग्य विधाता) कहने में कोई संकोच नहीं है। वह भाग्य है ‘स्वर्णिम भारत’। भारत उनके हाथों में सुरक्षित है। मैं श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी को उनके प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

           (लेखक भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हैं)