प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने विश्वास, विकास और जनकल्याण को समर्पित अपने 12 वर्ष पूर्ण किए हैं। ‘संकल्प से सिद्धि’ का यह गौरवशाली कालखंड भारत के विकास, सुरक्षा, आर्थिक सशक्तीकरण और वैश्विक प्रतिष्ठा में अभूतपूर्व वृद्धि का साक्षी रहा है। कांग्रेस देश को अनिश्चितता, भ्रष्टाचार और कमजोर नेतृत्व की विरासत देकर गई थी, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को आत्मविश्वास, सुशासन और विकास की नई पहचान दी है। कांग्रेस के लिए राजनीति का मतलब वर्षों तक परिवार की विरासत को बचाना रहा, जबकि प्रधानमंत्री मोदी के लिए राजनीति- ‘परिवार नहीं राष्ट्र प्रथम’ और ‘सत्ता नहीं सेवा प्रथम’ का मार्ग रही है। यदि हम दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के इतिहास को देखें, तो उनकी सफलता के पीछे जो एक मूलमंत्र नजर आता है, वह है उस राष्ट्र का ‘सामूहिक स्वप्न’। भारत के संदर्भ में वर्ष 2014 में पहली बार 140 करोड़ की विशाल जनता को सामूहिक चेतना के एक सूत्र में पिरोने का ऐतिहासिक कार्य प्रधानमंत्री मोदी ने किया। देश को पहला ऐसा नेतृत्व मिला है, जो एक ‘प्रधान सेवक’ के भाव से ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के महा-संकल्प को लेकर निरंतर आगे बढ़ रहा है। 2014 में प्रधानमंत्री ने पहले राष्ट्र को एक ‘सामूहिक सोच’ दी, फिर जन-विश्वास के बल पर उस सोच को ‘सामूहिक संकल्प’ में बदला, और आज वही संकल्प ‘विकसित भारत’ के रूप में ‘सामूहिक स्वप्न’ का रूप ले चुका है।
इस महापरिवर्तन की शुरुआत बुनियादी ढांचे की अभूतपूर्व क्रांति से हुई। 2014 से पहले देश बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा था। आज जमीनी स्तर पर बदलाव का परिणाम है कि 12 करोड़ से अधिक शौचालय बने, 100% विद्युतीकरण हुआ, एक्सप्रेस-वे नेटवर्क 7 गुना बढ़ा और एयरपोर्ट्स 74 से 160 से अधिक हो गए। यह कालखंड मानसिक गुलामी से मुक्ति और वास्तविक ‘डी-कलोनाइजेशन’ का साक्षी है। लोक कल्याण मार्ग, कर्तव्य पथ और सेवा तीर्थ का नामकरण और योग का वैश्विक प्रसार इसका प्रमाण है। एक समय था जब देश के शीर्ष नेतृत्व ने तत्कालीन 54 करोड़ की आबादी को बोझ माना था, पर आज प्रधानमंत्री मानते हैं कि यही 140 करोड़ देशवासी भारत के विकास की गाथा की सबसे मजबूत कड़ी हैं। इसी सोच ने धारा 370 को हमेशा के लिए निरस्त किया। आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर नक्सलवाद और आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई गई। कोरोना काल में 220 करोड़ से अधिक मुफ्त वैक्सीन डोज और ‘वैक्सीन मैत्री’ ने वैश्विक स्तर पर भारत की क्षमता का परिचय दिया।
आज का युवा ‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि ‘जॉब गिवर’ बन रहा है। 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स और 125 से ज्यादा यूनिकॉर्न्स के साथ भारत मैनपावर से ‘मैन्युफैक्चरिंग पावर’ की ओर बढ़ रहा है। इसी प्रकार, देश ‘वीमेन डेवलपमेंट’ से आगे बढ़कर ‘वीमेन लेड डेवलपमेंट’ का साक्षी बन रहा है, जहां 3 करोड़ से अधिक ‘लखपति दीदी’ और सुरक्षा बलों में महिला अधिकारियों की 4 गुना वृद्धि नारीशक्ति के स्वावलंबन को दर्शाती है। मोदी सरकार ने मातृशक्ति को सम्मान, सुरक्षा, स्वाभिमान और हिस्सेदारी देने में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
गरीब कल्याण के क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं ने वंचितों के ‘विशियस साइकिल’ (दुश्चक्र) को ‘वर्चुअल साइकिल’ (गुणात्मक चक्र) में बदल दिया है, जिससे 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। 4 करोड़ पक्के घर, 60 करोड़ नागरिकों को आयुष्मान कवच और पीएम मुद्रा योजना के तहत 40 लाख करोड़ रुपए का कोलेटरल-फ्री लोन इसका आधार बना। डिजिटल क्रांति के क्षेत्र में ‘1 रुपए में से सिर्फ 15 पैसे पहुंचने’ के पुराने दौर को समाप्त कर डीबीटी के माध्यम से 51 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए। जनधन-आधार-मोबाइल (जैम) ट्रिनिटी और यूपीआई के माध्यम से आज ₹314 लाख करोड़ का वार्षिक डिजिटल लेनदेन हो रहा है, जो वैश्विक स्तर पर 49% है। प्रकृति के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए भारत ने स्वच्छ भारत अभियान, एक पेड़ मां के नाम और सोलर कैपेसिटी को 2.6 जीडब्ल्यू से 110+ जीडब्ल्यू तक पहुंचाकर ग्रीन अर्थ के संकल्प को सिद्ध किया है।
प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में आज देश के सीमावर्ती क्षेत्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिली है। कभी देश के अंतिम गांव कहे जाने वाले ये क्षेत्र आज भारत के प्रथम गांव के रूप में नई पहचान पा चुके हैं। इसके साथ ही, आज भारत की सैन्य क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है और हमारी सेनाएं अत्याधुनिक हथियारों से सुसज्जित हैं। 500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल महालोक का जीर्णोद्धार हमारे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की उस सभ्यतागत चेतना का पुनर्जागरण है, जो विकास भी, विरासत भी के मूलमंत्र को पूरी सार्थकता से साकार कर रहा है।
पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरे देश का सोचने का ट्रेंड भी बदला है। आज नए भारत का मिजाज ऐसा है, जहां आंत्रप्रेन्योर बनना एक ट्रेंड है, कड़ी मेहनत करना एक ट्रेंड है, और वोकल फॉर लोकल से लेकर मेक इन इंडिया को अपनाना हर नागरिक का मूलमंत्र बन चुका है। यह ऐसा दौर है, जहां तीव्र विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करना एक ट्रेंड है। आज देश में स्पिरिचुअल टूरिज्म का एक नया उभार दिख रहा है और सबसे महत्वपूर्ण बात, ‘नेशन फर्स्ट’ के भाव के साथ, एक सामूहिक संकल्प के साथ काम करना देश का ट्रेंड बन चुका है। इन तमाम सकारात्मक बदलावों के पीछे प्रधानमंत्री की भूमिका एक ट्रेंडसेटर की रही है, जिन्होंने इनके माध्यम से आज पूरे देश को एकता के एक मजबूत सूत्र में पिरो दिया है। आज भारत न केवल आंतरिक रूप से सशक्त हो रहा है, बल्कि वैश्विक पटल पर भी एक महाशक्ति के रूप में उभरा है। जब प्रधानमंत्री को विश्व के 32 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त होता है, तो यह वास्तव में सनातन भारतीय सोच और 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ का सम्मान है। यही कारण है कि आज विकसित भारत केवल एक नारा नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसे देशवासियों ने अटूट विश्वास और संकल्पित भाव से आत्मसात किया है।

