140 करोड़ देशवासियों का साझा संकल्प है विकसित भारत : नरेन्द्र मोदी

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    एनडीए सम्मेलन, नई दिल्ली

देश में सबसे अधिक दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री का अप्रतिम रिकॉर्ड बनाने के अवसर पर 10 जून, 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में एनडीए सम्मेलन आयोजित हुआ। इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों की यात्रा उपलब्धियों से भरी रही है। आने वाले वर्ष और भी नई और बड़ी सिद्धियों के होंगे।” उन्होंने कहा कि 2014 में देश में जो आशा और विश्वास का उदय हुआ था, वह आज जनभागीदारी, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण के व्यापक अभियान में बदल हो चुका है। श्री मोदी ने कहा कि एनडीए सरकार की एक बड़ी सफलता यह भी है कि देश कांग्रेस के कुचक्र से आजाद हुआ है। कांग्रेस ने देश को लाचारी, बेचारगी और हीनभावना के गर्त में गिरा दिया था। उस समय की कार्यशैली और विफलताएं कांग्रेस की थीं, लेकिन कलंक देश की बड़ी हिंदू आबादी के नाम पर लगाया गया था।

कांग्रेस सरकारों की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने लंबे समय तक ऐसी व्यवस्था देखी, जहां निर्णय लेने में वर्षों लग जाते थे और विकास परियोजनाएं राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में ठहर जाती थीं। इसके विपरीत आज की व्यवस्था का मंत्र है— समय पर निर्णय, बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन और परिणामों की निरंतर निगरानी। यही कारण है कि भारत ने इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल प्रौद्योगिकी और आर्थिक विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं। देश की

मुख्य बिंदु
•140 करोड़ भारतीयों का भरोसा हमारी सबसे बड़ी ताकत और जिम्मेदारी है
• युवाओं, महिलाओं, किसानों और मध्यम वर्ग की उम्मीदें देश के विकास को आगे बढ़ा रही हैं

आर्थिक प्रगति और वैश्विक प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया भारत को नए विश्वास के साथ देख रही है। वैश्विक चुनौतियों और अस्थिरताओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख इकोनॉमी में शामिल है।

मध्यम वर्ग की भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में उठाए गए कदमों ने उसे नई शक्ति और स्थिरता प्रदान की है। हमने मिडिल क्लास की परेशानियों और आकांक्षाओं को समझा। इसलिए आज 12 लाख रुपए तक की आय पूरी तरह से टैक्स फ्री है। आज देश में सरल और फेसलेस टैक्स सिस्टम है।

गरीब कल्याण को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए श्री मोदी ने कहा कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। बैंकिंग सुविधाओं से वंचितों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने, गरीबों को पक्का घर देने, स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने जैसे प्रयासों ने करोड़ों लोगों के जीवन को बदलने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की हर योजना के केंद्र में गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्ग रहा है।

किसानों के कल्याण और ग्रामीण समृद्धि पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का अन्नदाता केवल खाद्यान्न उत्पादन करने वाला नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक और सामाजिक शक्ति का आधारस्तंभ है।

पिछले 12 साल के आंकड़ों का जिक्र करते हुए श्री मोदी ने कहा कि देश का भाग्य तब बदला, जब 2014 में एनडीए की सरकार बनी। 2014 में 74 एयरपोर्ट थे, जो 2026 में 160 से अधिक हो गए। 2014 में एक हजार किलोमीटर एक्सप्रेसवे 2026 में बढ़कर छह हजार सात सौ किलोमीटर हो गए। 2014 में सिर्फ 5 शहरों में मेट्रो थी, जो 2026 में 20 से ज्यादा शहरों में चलने लगीं। 2014 में 700 करोड़ रुपये डिफेंस एक्सपोर्ट 2026 में बढ़कर 23 हजार करोड़ रुपये हो गया। 2014 में 25 करोड़ इंटरनेट यूजर थे, जो 2026 में 100 करोड़ से अधिक हो गए। बीते 12 सालों में देश ने हर सेक्टर में विकास की लंबी यात्रा तय की है।

युवा शक्ति की क्षमता और संभावनाओं पर विश्वास व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने युवाओं को अवसर, कौशल और नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने का काम किया है। स्टार्टअप, डिजिटल अर्थव्यवस्था, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर और नई तकनीकों के क्षेत्र में भारत के युवाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा दुनियाभर में मनवाया है। ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को एनडीए की मूल पहचान बताते हुए श्री मोदी ने कहा कि गठबंधन सरकारों के बारे में कभी यह धारणा थी कि वे बड़े और साहसिक निर्णय नहीं ले सकतीं। पहले असंभव माने जाने वाले आर्टिकल 370 को भी हमने खत्म करके पूरे देश में एक संविधान लागू किया। हमने आतंकवादियों पर सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की। ऑपरेशन सिंदूर में दुनियाभर ने भारत का सामर्थ्य देखा।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि विकसित भारत का सपना केवल सरकार का नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों का साझा संकल्प है। एनडीए के सभी कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और सहयोगी दलों की जिम्मेदारी है कि वे इस संकल्प को जन-जन तक पहुंचाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनशक्ति, लोकतंत्र की शक्ति और राष्ट्र प्रथम की भावना के बल पर भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के अपने लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेगा और दुनिया में नई ऊंचाइयों को छुएगा।•