डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी के जीवन और विरासत पर आधारित पुस्तक ‘डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी: एक शिक्षक की राजनीतिक यात्रा’ का विमोचन 1 जून को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी शोध अधिष्ठान (एसपीएमआरएफ) द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में किया गया, जिसमें प्रमुख राजनीतिक और शैक्षणिक व्यक्तित्व उपस्थित रहे।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और तमिलनाडु भाजपा के उपाध्यक्ष प्रो. पी. कनागासबपति ने संयुक्त रूप से पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्तक के लेखक कमल संदेश के एसोसिएट एडिटर श्री विकास आनंद हैं और इसे वाणी प्रकाशन ने प्रकाशित किया है।
यह पुस्तक डॉ. मुकर्जी के अद्वितीय जीवन पर प्रकाश डालती है, जो एक प्रख्यात शिक्षाविद् और राजनेता थे और जिन्होंने भारत के राष्ट्रवादी विमर्श को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुस्तक

देश की राजनीतिक यात्रा में डॉ. मुकर्जी के योगदान को प्रस्तुत करती है, जो उनकी प्रारंभिक शैक्षणिक उपलब्धियों से लेकर भारतीय जनसंघ की स्थापना तक है, जिसने आज की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वैचारिक नींव रखी- पर प्रकाश डालती है।
यह पुस्तक न केवल डॉ. मुकर्जी की शैक्षणिक प्रतिभा और कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति के रूप में उनके कार्यकाल पर प्रकाश डालती है, बल्कि अपने समय की तुष्टीकरण की राजनीति के प्रति उनके दृढ़ विरोध, नेहरू-लियाकत समझौते को लेकर नेहरू मंत्रिमंडल से उनके सैद्धांतिक इस्तीफे और जम्मू-कश्मीर के भारतीय संघ में पूर्ण एकीकरण की मांग में उनकी ऐतिहासिक भूमिका पर भी प्रकाश डालती है।
कश्मीर में वर्ष 1953 में हिरासत के दौरान डॉ. मुकर्जी की रहस्यमयी मृत्यु भारत के इतिहास में सबसे चर्चित राजनीतिक घटनाओं में से एक है। यह पुस्तक इन घटनाओं को अकादमिक दृष्टिकोण के साथ संबोधित करती है और सार्वजनिक समझ को समृद्ध करने के लिए विभिन्न पहलुओं को छूती है।

