श्री बलबीर पुंज (1949–2026) एक अनुभवी पत्रकार थे, जो बाद में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और दो बार राज्यसभा सांसद रहे। एक प्रमुख वैचारिक आवाज़ के तौर पर उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (2013) और पार्टी के बौद्धिक प्रकोष्ठ के संयोजक के रूप में अपने दायित्व का निर्वहन किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश (2000–2006) और ओडिशा (2008–2014) से उच्च सदन (राज्यसभा) का प्रतिनिधित्व किया। उनका निधन 18 अप्रैल, 2026 को हुआ। वे 77 वर्ष के थे। श्री पुंज भाजपा के बौद्धिक एवं नीति-निर्माण से जुड़े रहे। उन्होंने उच्च सदन में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर होने वाली बहसों में अपना अमूल्य योगदान दिया।
राजनीति में आने से पहले श्री पुंज ने पत्रकारिता के क्षेत्र में एक विशिष्ट करियर बनाया था। उन्होंने अपने पेशेवर सफर की शुरुआत 1971 में ‘द मदरलैंड’ नामक एक दैनिक समाचार पत्र के प्रकाशन के साथ की थी। वे 1974 में ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ से जुड़े। उन्होंने 1996 तक, यानी दो दशकों से भी अधिक समय तक ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ में काम किया। वे अपने सटीक विश्लेषण और टिप्पणियों के लिए जाने जाते थे। बाद में, उन्होंने मई, 1996 से मार्च, 2000 तक ‘द ऑब्ज़र्वर ऑफ़ बिज़नेस एंड पॉलिटिक्स’ के कार्यकारी संपादक के रूप में कार्य किया।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने श्री पुंज के निधन पर अपनी संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने कहा, “श्री बलबीर पुंज जी एक प्रखर लेखक, विचारक और बुद्धिजीवी थे। उन्होंने मीडिया जगत में अपना समृद्ध योगदान दिया। उनके लेख व्यापक रूप से पढ़े जाते थे, जो राष्ट्र-पुनर्निर्माण के प्रति उनके गहरे जुनून को दर्शाते थे। संसद में उनके हस्तक्षेप तथ्यों और सिद्धांतों से परिपूर्ण होते थे। श्री बलबीर पुंज जी ने भाजपा को मजबूत करने के लिए अथक परिश्रम किया, विशेष रूप से छात्रों, पेशेवरों, विद्वानों और बुद्धिजीवियों के बीच। वे गुजरात सहित विभिन्न राज्यों के प्रभारी रहे। उन दिनों हुई हमारी मुलाकातों की यादें आज भी ताजा हैं। उनके निधन से मुझे गहरा दु:ख हुआ है। उनके परिवार और मित्रों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति।”
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन ने कहा, “वरिष्ठ भाजपा नेता और राज्यसभा के पूर्व सांसद बलबीर पुंज जी के निधन की खबर अत्यंत हृदयविदारक है। सार्वजनिक जीवन में उनकी स्पष्ट वैचारिक दृष्टि, राष्ट्रहित के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता और अपने लेखन के माध्यम से समाज को दिशा देने में उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिवार तथा समर्थकों को इस दु:ख को सहन करने की शक्ति दें।”
एक लेखक और स्तंभकार के रूप में वे अपने अंतिम दिनों तक सक्रिय रहे और हिंदी तथा अंग्रेजी के समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में व्यापक रूप से लेखन कार्य करते रहे। उनके निधन से हमने एक अनुभवी पत्रकार, विचारक और राजनैतिक हस्ती को खो दिया है।

