‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’
‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ 8 से 11 जनवरी, 2026 तक सोमनाथ में आयोजित किया गया। यह पर्व भारत के उन असंख्य नागरिकों की स्मृति में मनाया गया, जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए बलिदान दिया और जो आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक चेतना को प्रेरित करते रहेंगे। यह कार्यक्रम 1026 ईस्वी में महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। सदियों से इसे नष्ट करने के कई प्रयासों के बावजूद सोमनाथ मंदिर आज भी दृढ़ता, आस्था और राष्ट्रीय गौरव का एक सशक्त प्रतीक है, जो इसे प्राचीन वैभव में पुनर्स्थापित करने के सामूहिक संकल्प और प्रयासों का परिणाम है। स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने मंदिर के जीर्णोद्धार का प्रयास किया। इस पुनरुद्धार यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि 1951 में हासिल हुई, जब जीर्णोद्धार किए गए सोमनाथ मंदिर को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में भक्तों के लिए औपचारिक रूप से खोला गया। 2026 में इस ऐतिहासिक जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूरे होने से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का विशेष महत्व बढ़ गया। इस समारोह में देश भर से सैकड़ों संतों ने भाग लिया और मंदिर परिसर में 72 घंटे तक निरंतर ‘ओम’ का जाप किया गया। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति भारत की सभ्यता की अटूट भावना को रेखांकित करती है और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और उत्सव के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को ज़ाहिर करती है
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 11 जनवरी को गुजरात के सोमनाथ में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को संबोधित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समय असाधारण है, यह वातावरण असाधारण है और यह उत्सव भी असाधारण है। उन्होंने कहा कि यहां एक ओर स्वयं भगवान महादेव विराजमान हैं, तो दूसरी ओर विशाल समुद्र की लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रों की गूंज और भक्ति का प्रवाह देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि इस दिव्य वातावरण में भगवान सोमनाथ के सभी भक्तों की उपस्थिति इस अवसर को दिव्य और भव्य बना रही है। श्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में उन्हें सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सक्रिय रूप से सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव गौरव और सम्मान, गरिमा और ज्ञान, भव्यता और विरासत, आध्यात्मिकता और आत्मीयता, अनुभव, आनंद और आत्मीयता का प्रतीक है और इन सबसे बढ़कर इसमें भगवान महादेव का आशीर्वाद समाहित है।
श्री मोदी ने कहा कि आज इस मौके पर संबोधित करते हुए उनके मन में बार-बार यह विचार आता है कि ठीक एक हजार साल पहले इसी स्थान पर, जहां आज लोग बैठे हैं, कैसा वातावरण रहा होगा। उन्होंने कहा कि यहां मौजूद लोगों के पूर्वजों, हमारे पुरखों ने अपने विश्वास, अपनी आस्था और अपने भगवान महादेव के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और अपना सब कुछ अर्पित कर दिया। एक हजार साल पहले आक्रमणकारियों को लगा होगा कि वे जीत गए हैं, लेकिन आज, एक सहस्राब्दी बाद भी, सोमनाथ महादेव मंदिर के शीर्ष पर लहराता ध्वज पूरी सृष्टि को हिंदुस्तान की शक्ति और क्षमता का प्रमाण देता है।
श्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ की स्वाभिमान यात्रा के हजार वर्ष पूरे होने के साथ ही 1951 में इसके पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं, जो एक सुखद संयोग है। प्रधानमंत्री ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर विश्व भर के लाखों श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।
न तो सोमनाथ नष्ट हुआ और न ही भारत
श्री मोदी ने ज़ोर देते हुए कहा कि यह त्योहार केवल हजार वर्ष पूर्व हुए विनाश की स्मृति नहीं है, बल्कि यह हजार वर्षों की यात्रा के साथ-साथ भारत के अस्तित्व और गौरव का उत्सव है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि हर कदम और हर पड़ाव पर सोमनाथ और भारत के बीच अनूठी समानताएं देखी जा सकती हैं। जिस प्रकार सोमनाथ को नष्ट करने के अनगिनत प्रयास हुए, उसी प्रकार सदियों तक विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत को नष्ट करने का प्रयास किया। फिर भी न तो सोमनाथ नष्ट हुआ और न ही भारत, क्योंकि भारत और उसके धार्मिक स्थल अविभाज्य रूप से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।
श्री मोदी ने कहा कि हमें एक हजार वर्ष पूर्व के इतिहास की कल्पना करनी चाहिए, जब 1026 ईस्वी में महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर पहली बार आक्रमण किया और उसे नष्ट कर दिया और ये मान लिया कि उसने मंदिर का अस्तित्व ही मिटा दिया है, लेकिन कुछ ही वर्षों में सोमनाथ का पुनर्निर्माण हुआ और बारहवीं शताब्दी में राजा कुमारपाल ने मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार करवाया। उन्होंने बताया कि तेरहवीं शताब्दी के अंत में अलाउद्दीन खिलजी ने एक बार फिर सोमनाथ पर आक्रमण करने का साहस किया, लेकिन जालौर के शासक ने खिलजी की सेनाओं के खिलाफ बहादुरी से युद्ध किया। चौदहवीं शताब्दी के आरंभ में जूनागढ़ के राजा ने एक बार फिर मंदिर की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित किया और बाद में उसी शताब्दी में मुजफ्फर खान ने सोमनाथ पर आक्रमण किया, लेकिन उसका प्रयास भी विफल रहा।
श्री मोदी ने याद दिलाया कि पंद्रहवीं शताब्दी में सुल्तान अहमद शाह ने मंदिर को अपवित्र करने का प्रयास किया था और उनके पोते सुल्तान महमूद बेगड़ा ने इसे मस्जिद में बदलने की कोशिश की थी, लेकिन महादेव के भक्तों के प्रयासों से मंदिर का पुनरुद्धार हुआ। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि सत्रहवीं और अठारहवीं शताब्दी के दौरान औरंगजेब ने सोमनाथ को अपवित्र करते हुए इसे फिर से मस्जिद में बदलने का प्रयास किया, लेकिन उस समय अहिल्याबाई होल्कर ने बाद में एक नए मंदिर की स्थापना करके सोमनाथ को पुनर्जीवित किया।
हर युग में सोमनाथ का बार-बार पुनर्निर्माण हुआ
श्री मोदी ने रेखांकित किया, “सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का है।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आक्रमणकारी आते रहे, धार्मिक आतंक के नए हमले होते रहे, लेकिन हर युग में सोमनाथ का बार-बार पुनर्निर्माण हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसा सदियों लंबा संघर्ष, निरंतर प्रतिरोध, पुनर्निर्माण में असीम धैर्य, रचनात्मकता और दृढ़ता और संस्कृति और आस्था में अटूट विश्वास विश्व इतिहास में अद्वितीय है।
श्री मोदी ने कहा कि हमें खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या हमें अपने पूर्वजों की वीरता को भूलना चाहिए और क्या हमें उनके साहस से प्रेरणा नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी पुत्र या वंशज को अपने पूर्वजों के वीरतापूर्ण कार्यों को नहीं भूलना चाहिए। अपने पूर्वज़ों का इस प्रकार स्मरण करना न केवल कर्तव्य है, बल्कि शक्ति का स्रोत भी है और उन्होंने सभी से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि हमारे पूर्वजों के बलिदान और वीरता हमारी चेतना में जीवित रहें।
श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा कि दुर्भाग्यवश आज भी देश में सोमनाथ पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें सक्रिय हैं। हांलाकि, अब भारत के खिलाफ साजिशें तलवारों के बजाय अन्य दुर्भावनापूर्ण तरीकों से रची जा रही हैं। उन्होंने सतर्कता, शक्ति, एकता और लोगों को विभाजित करने वाली हर ताकत को पराजित करने का आह्वान किया।
श्री मोदी ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि सोमनाथ की हजार वर्ष पुरानी गाथा मानवता को यही पाठ पढ़ाती है। उन्होंने आग्रह किया कि हम अपने अतीत और विरासत से जुड़े रहते हुए विकास और भविष्य की ओर बढ़ने का संकल्प लें, आधुनिकता को अपनाते हुए चेतना को संरक्षित रखें और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व से प्रेरणा लेकर प्रगति के पथ पर तेजी से अग्रसर हों और हर चुनौती का सामना करते हुए अपने लक्ष्यों को प्राप्त करें।
इस कार्यक्रम में अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल भी उपस्थित थे।

