मार्शल जिसने दिल जीत लिया

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भारतीय सशस्त्र बलों के सैन्य संचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने-अपने बल के बारे में जानकारी दी। इस दौरान प्रश्न-उत्तर काल में न्यूज नेशन के पत्रकार मधुरेंद्र ने पूछा: “प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू करने से पहले सेना ने एक वीडियो चलाया, जिसमें राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की

पंक्तियां बैकग्राउंड में थीं। कल के वीडियो में शिव तांडव स्तोत्र था। इसके जरिए आप दुश्मन को क्या संदेश देना चाह रहे थे?” एयर मार्शल ए.के. भारती इस सवाल से बेहदर प्रभावित दिखे। उन्होंने पत्रकार का नाम और एजेंसी फिर से पूछी, ताकि इसे नोट किया जा सके। पत्रकार द्वारा बताई गई पंक्तियां राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के प्रसिद्ध महाकाव्य ‘रश्मिरथी’ से थीं, खास तौर पर ‘कृष्ण की चेतावनी’ वाला भाग। पंक्तियां इस प्रकार हैं:

दुर्योधन वह भी दे ना सका,
आशीष समाज की ले ना सका,
उलटे, हरि को बांधने चला,
जो था असाध्य, साधन चला।

(दुर्योधन वह भी नहीं दे सका, वह समाज का आशीर्वाद नहीं ले सका, इसके बजाय, उसने असंभव का प्रयास करते हुए हरि (कृष्ण) को बांधने की कोशिश की।)

जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।
हरि ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप विस्तार किया।
डगमग-डगमग दिग्गज डोले, भगवान कुपित हो कर बोलें।
जंजीर बढ़ा अब साध मुझसे, हां-हां दुर्योधन! बांध मुझे।

(जब किसी व्यक्ति पर विनाश मंडराता है, तो सबसे पहली चीज जो मरती है वह है ज्ञान। हरि ने भयंकर गर्जना की और अपने दिव्य रूप का विस्तार किया। महान योद्धा कांप गए और लड़खड़ा गए। भगवान ने क्रोधित होकर कहा: अब अपनी जंजीर बढ़ाओ, मुझे बांधो! हां, दुर्योधन! मुझे बांधो!)

इसी सन्दर्भ में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ए.के. भारती ने ‘रामचरितमानस’ की चौपाई के माध्यम से उत्तर दिया। उन्होंने धाराप्रवाह रूप मे कहा:

बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीनी दिनी बीति।
बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति।।

(भगवान् राम ने समुद्र से विनम्र निवेदन किया, लेकिन वह नहीं माना। तीन दिन बीत गए। तब भगवान राम ने क्रोध में भरकर कहा: भय के बिना प्रेम नहीं हो सकता।*) यह तब की बात है जब भगवान राम, समुद्र देवता से लंका जाने का रास्ता देने की प्रतीक्षा कर रहे थे, लेकिन तीन दिन बाद उनका धैर्य जवाब दे गया और वे क्रोधित हो गए। उन्होंने कहा कि भय के बिना प्रेम नहीं होता और उन्होंने अपना धनुष उठा लिया। तभी समुद्र देवता प्रकट हुए और मदद के लिए हाथ बढ़ाया।

आम तौर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार मेहमानों के आने पर जयकारे नहीं लगाते, तालियां नहीं बजाते, यहां तक कि खड़े भी नहीं होते। ऐसा केवल राष्ट्रगान या राष्ट्र गीत के दौरान होता है। खास तौर पर एक गंभीर सैन्य प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसी प्रतिक्रियाएं दुर्लभ हैं। लेकिन ए.के. भारती के सहज और भावनात्मक शब्दों को सुनने के बाद पत्रकार खुद को तालियां बजाने से रोक नहीं पाए। यहां तक कि नौसेना के वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद, जो एयर मार्शल भारती के बगल में बैठे थे, एक सौम्य मुस्कान के साथ बैठे नजर आये।

प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म करने से पहले प्रमोद ने एक टिप्पणी की: ‘शं नो वरुणः – एक वैदिक आह्वान जिसका अर्थ है, हे वरुण’ (समुद्रों के देवता) हमारे लिए शुभ हों।