भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का पश्चिम बंगाल प्रवास
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन ने 24 एवं 25 मार्च, 2026 को पश्चिम बंगाल का प्रवास किया। प्रवास के अंतिम दिन श्री नवीन ने कोलकाता में नबद्वीप ज़ोन बैठक को संबोधित किया और कार्यकर्ताओं को बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत का मंत्र दिया। उन्होंने आज कई महत्वपूर्ण सांगठनिक बैठकें की और बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा की माइक्रो लेवल तैयारियों की समीक्षा की तथा पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को आवश्यक दिशानिर्देश दिए। कार्यक्रम के
टीएमसी और ममता बनर्जी ने बंगाल को ‘मां, माटी और मानुष’ का सपना दिखाया था, लेकिन आज यह तीनों भय के साये में हैं। राज्य की माताएं और बहनें असुरक्षित हैं
दौरान पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा चुनाव प्रभारी व केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव, राष्ट्रीय महामंत्री एवं पश्चिम बंगाल के प्रभारी श्री सुनील बंसल, बिहार सरकार के मंत्री श्री मंगल पांडे, सह प्रभारी श्री अमित मालवीय, पूर्व सांसद श्रीमती लॉकेट चटर्जी सहित अन्य वरिष्ठ नेता व पदाधिकारी उपस्थित रहे।
श्री नवीन ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग टीएमसी सरकार के भ्रष्टाचार, वसूली, भय और अराजकता के माहौल से मुक्ति चाहते हैं। भाजपा ही सुरक्षा, रोजगार और सम्मान सुनिश्चित कर सकती है। भाजपा के कमल का निशान पश्चिम बंगाल को विकास, सुरक्षा और ‘सोनार बंगाल’ की दिशा में आगे ले जाने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भाजपा की ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं, जो ‘राष्ट्र प्रथम’ के भाव से काम करते हैं। पार्टी के कार्यकर्ता मेहनत और परिश्रम के साथ हर बूथ तक पहुंचेंगे और 4 मई को राज्य में भाजपा की सरकार बनाएंगे।

उन्होंने कहा कि कमल का निशान, इस राज्य को विकास के पैमाने पर आगे बढ़ाने, राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ‘सोनार बंगाल’ के सपने को साकार करने का प्रतीक है। यह कमल का फूल निश्चित रूप से पश्चिम बंगाल को ‘विकसित पश्चिम बंगाल’ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए सभी लोग प्रयासरत हैं और ऐसे में कार्यकर्ताओं की सहभागिता तथा हमारी जीत पश्चिम बंगाल को भी 2047 तक विकसित पश्चिम बंगाल बनाने के सपने को साकार करेगी।
उन्होंने कहा कि हमारे नेतृत्वकर्ता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी हमेशा कहते हैं कि बूथ जीतने से ही चुनाव जीता जाता है। जिस प्रकार भारतीय जनता पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ता एक-एक बूथ की संरचना खड़ी करने में जुटे हैं और पिछले चार-पांच वर्षों में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पश्चिम बंगाल में संगठन को मजबूत किया है, वह अत्यंत सराहनीय है। पिछले चार-पांच वर्षों में विपरीत परिस्थितियों में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा की गई मेहनत अब रंग ला रही है और आज जनता उनके साथ खड़ी है। पश्चिम बंगाल का एक-एक व्यक्ति इस परिवर्तन की लहर में कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा होकर संघर्ष करने के लिए तैयार है। 4 मई को पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है और इस संकल्प को लेकर सभी को आगे बढ़ना है। भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल की जनता को सुरक्षित पश्चिम बंगाल देने के अपने संकल्प को पूरा करेगी।
श्री नवीन ने कहा कि यह पूरा चुनाव केवल दो प्रमुख विषयों पर केंद्रित है— तृणमूल सरकार के कुशासन से भय और जनता का भाजपा के सुशासन पर भरोसा। यह चुनाव टीएमसी के भय के वातावरण से बाहर निकलने का चुनाव है, क्योंकि जनता अब पूरी तरह से उस डर से मुक्त होना चाहती है। टीएमसी के गुंडे, तथाकथित कार्यकर्ता और उनकी सरकार वसूली, भ्रष्टाचार और अराजकता की सरकार चला रहे हैं, उससे अब राज्य की जनता मुक्ति चाहती है। जनता उस भय के वातावरण से बाहर आना चाहती है और उसे यह भी स्पष्ट रूप से पता है कि यदि उसे इस स्थिति से निकलना है तो उसका भरोसा केवल भारतीय जनता पार्टी पर है। भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व, उसके कार्यकर्ता और स्थानीय नेतृत्व पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और जनता को विश्वास है कि वही सोनार बंगाल के सपने को साकार कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि टीएमसी और ममता बनर्जी ने बंगाल को ‘मां, माटी और मानुष’ का सपना दिखाया था, लेकिन आज यह तीनों भय के साये में हैं। राज्य की माताएं और बहनें असुरक्षित हैं। माटी के साथ भी अन्याय हो रहा है, क्योंकि राज्य की जनसंख्या संरचना को बदलने के प्रयास किए जा रहे हैं और जमीन का उपयोग घुसपैठियों को संरक्षण देने तथा उन्हें शरण देने के लिए किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल का आम मानुष भी भय के माहौल में जी रहा है और घर से बाहर निकलने से पहले सोचता है कि कहीं कोई ऐसा व्यक्ति न मिल जाए जो उससे वसूली की बात करे। आज मकान बनाने वाला व्यक्ति भी यह मानकर चलता है कि उसे पहले हफ्ता देना होगा, चाहे वह गिट्टी, ईंट या बालू हो, हर चीज़ के लिए पैसे देने पड़ते हैं। यहां तक कि लाभ की योजनाओं में भी कट लिया जाता है और इस प्रकार की निर्मम सरकार, जिसे ‘भाईपो कट’ की सरकार कहा जा सकता है, इससे पश्चिम बंगाल और उसकी जनता को मुक्ति दिलानी है। राज्य की जनता को उस भय के वातावरण से बाहर निकालना आवश्यक है, जिसमें लोगों को अपनी संपत्ति खोने का भय है, युवाओं को अपने अंधकारमय भविष्य की चिंता है और माताओं-बहनों को अपनी सुरक्षा का भय सताता है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की वर्तमान परिस्थितियां देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बन गई हैं। राज्य में जिस प्रकार से घुसपैठियों के लिए रास्ते खोले गए हैं, वह गंभीर समस्या है। जब केंद्र सरकार फेंसिंग के लिए जमीन मांगती है तो राज्य सरकार हिचकिचाहट दिखाती है, लेकिन घुसपैठियों को बसाने के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाती है। जब सीमाओं की सुरक्षा के लिए रोड फेंसिंग की बात होती है तो जमीन देने में बाधाएं खड़ी की जाती हैं।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सांस्कृतिक और साहित्यिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, जहां से अनेक विद्वानों ने देश को शिक्षा, ज्ञान और नेतृत्व प्रदान किया है, इसलिए इस भूमि को बचाना आवश्यक है। यह वही भूमि है जिसने ‘वंदे मातरम’ जैसा गीत दिया, जिसके माध्यम से अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी गई और उनकी हुकूमत को समाप्त किया गया। इस गीत का अपमान भी यहीं के टीएमसी सांसदों द्वारा किया गया और यह बात जनता के बीच ले जानी चाहिए। जब संसद सदन में ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा हो रही थी, तब भी टीएमसी सांसदों ने उस चर्चा को रोकने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि जिस बंगाल को उसकी सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, जिस संस्कृति ने पूरे देश को एक सूत्र में बांधा, आज ममता बनर्जी की सरकार में उसी बंगाल की धरती पर संस्कृति में ऐसे तत्व पैदा हो रहे हैं जो हमारी संस्कृति को चोट पहुंचा रहे हैं। आज बंगाल में सार्वजनिक नमाज करने की इजाजत मिलती है, लेकिन मां की पूजा के लिए पंडाल की अनुमति हाई कोर्ट से लानी पड़ती है। ये बहुत बड़ा दुर्भाग्य है। मुझे उम्मीद है कि मां का आशीर्वाद हमें मिलेगा और हम निश्चित रूप से सोनार बांग्ला और ‘विकसित बंगाल’ का निर्माण करेंगे।
प्रमुख बिंदु
इस बार पश्चिम बंगाल में कमल का खिलना निश्चित है और यह जीत सभी पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर देगी। 4 मई को हम भगवा होली मनाएंगे
यह चुनाव जनता में टीएमसी के भय बनाम भाजपा के भरोसे का चुनाव है
ममता बनर्जी की सरकार मतलब— घर जल जाने का भय, जान जाने का भय, रोजगार छिन जाने का भय, बहन–बेटी की इज़्ज़त जाने का भय, संसाधनों पर अतिक्रमण का भय, कटमनी, टोलाबाजी और युवाओं के काले भविष्य का भय
भाजपा सरकार मतलब— भयमुक्त, भ्रष्टाचारमुक्त, घुसपैठ मुक्त और विकासयुक्त सरकार का भरोसा। सुरक्षा व सम्मान का भरोसा, मुफ्त इलाज़-पक्के घर-मुफ्त बिजली का भरोसा, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का भरोसा
भाजपा पर भरोसा, बंगाल की जनता को भय के वातावरण से बाहर निकालेगी
बंगाल की जनता टीएमसी के गुंडों और ममता बनर्जी की वसूली सरकार से मुक्ति चाहती है
ममता दीदी की सरकार में ऐसी कोई योजना नहीं है, जिसमें कटमनी न लिया जाता हो
बनर्जी की सरकार देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा है
जब केंद्र सरकार बॉर्डर फेंसिंग के लिए जमीन मांगती है तो राज्य सरकार हिचकिचाहट दिखाती है, लेकिन घुसपैठियों को बसाने के लिए तुरंत जमीन उपलब्ध कराती है
ममता बनर्जी एवं उनकी सरकार तो संसद में ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा का भी विरोध करती है
आज बंगाल में सार्वजनिक नमाज करने की इजाजत मिलती है, लेकिन मां की पूजा के लिए पंडाल की अनुमति हाई कोर्ट से लानी पड़ती है। ये बहुत बड़ा दुर्भाग्य है
भाजपा के कमल का निशान ‘सोनार बांग्ला’ और ‘विकसित बंगाल’ के निर्माण का प्रतीक है

