इस विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना है: जगत प्रकाश नड्डा

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राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पर चर्चा

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने 3 अप्रैल, 2025 को राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा में भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य पूरे भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार और उसे सुव्यवस्थित करना है। यहां प्रस्तुत है उनके संबोधन का सारांश:

     श्री जगत प्रकाश नड्डा ने सदन को संबोधित करने का अवसर देने के लिए आभार व्यक्त करते हुए वक्फ संशोधन विधेयक 2025 के प्रति अपना प्रबल समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस विधेयक का उद्देश्य पूरे भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार और उसे सुव्यवस्थित करना है। उन्होंने इस दावे को खारिज कर दिया कि सरकार विधेयक को ‘धकेल रही है’, उन्होंने कहा कि विधायी प्रक्रिया समावेशी और पारदर्शी रही है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया और हितधारक सहभागिता

श्री नड्डा ने विधेयक के निर्माण के दौरान अपनाई गई व्यापक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर चर्चा की। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार के नेतृत्व वाले दृष्टिकोण की तुलना यूपीए काल से की। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में 31 सदस्य शामिल थे (जबकि 2013 में यूपीए के अंतर्गत 13 सदस्य थे) और 200 घंटों से अधिक समय तक 36 बैठकें हुईं। उन्होंने आगे कहा कि हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया, जिसमें 25 राज्यों के वक्फ बोर्ड, 15 राज्य सरकारें, अल्पसंख्यक आयोग, सांसद, विधायक और मंत्री सहित 284 हितधारक शामिल थे।

विपक्ष की रणनीति की आलोचना

श्री नड्डा ने विपक्षी सदस्यों पर राम मंदिर, कुंभ मेला, बिहार चुनाव और केरल सिनेमा जैसे अप्रासंगिक विषयों को चर्चा में लाकर बहस को पटरी से उतारने का आरोप लगाया, जिनका विधेयक से कोई संबंध नहीं है।

उन्होंने विपक्ष की चालों की ओर भी इशारा किया, जैसेकि विधेयक के दायरे से बाहर विवादास्पद टिप्पणी करने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं का इस्तेमाल करना। उन्होंने सनसनीखेज और चर्चा का राजनीतिकरण करने के प्रयासों की निंदा की और पक्षपातपूर्ण एजेंडे के बजाय राष्ट्रीय हित पर ध्यान देने का आग्रह किया।

राष्ट्रीय हित और उत्तरदायित्व

श्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस बात पर जोर दिया कि विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना है, जो भारत की तीसरी सबसे बड़ी भूमि स्वामित्व श्रेणी (रेलवे और रक्षा के बाद) है। उन्होंने कहा कि 2013 अधिनियम के तहत वक्फ बोर्डों को दी गई अनियंत्रित शक्तियों के कारण मनमाने ढंग से भूमि अधिग्रहण और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन सहित दुरुपयोग हुआ। संशोधन का उद्देश्य जांच और संतुलन स्थापित करना है, यह सुनिश्चित करना कि वक्फ बोर्ड जनता, विशेष रूप से मुस्लिम समुदायों के प्रति जवाबदेह हो।

उन्होंने समावेशी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के उदाहरण के रूप में ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ और ‘आवास योजना’ जैसी योजनाओं का हवाला दिया तथा इस बात पर जोर दिया कि इसका लाभ बिना किसी भेदभाव के सभी समुदायों तक पहुंचे।

वक्फ सुधारों के लिए अंतरराष्ट्रीय मिसाल

श्री जगत प्रकाश नड्डा ने विधेयक की आवश्यकता को उचित ठहराने के लिए मुस्लिम बहुल देशों में सुधारों पर प्रकाश डाला। उदाहरण के लिएः

क. तुर्कीए ने 1924 में राज्य-नियंत्रित वक्फ प्रबंधन की स्थापना की तथा पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 1990 के दशक में अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया।
ख. मलेशिया वक्फ परिसंपत्तियों के प्रबंधन के लिए भू-मानचित्रण और आधुनिक वित्तीय मॉडल का उपयोग करता है, जिससे सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित होती है।
ग. सऊदी अरब और इंडोनेशिया और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए क्रमश: 2016 और 2004 में वक्फ कानूनों में सुधार किया था।

इन उदाहरणों का हवाला देते हुए उन्होंने सवाल किया कि भारत में इसी तरह के सुधारों की आलोचना क्यों की जाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विधेयक वक्फ संपत्तियों को जब्त नहीं करता है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि उनका प्रबंधन शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और सामुदायिक कल्याण के लिए जिम्मेदारी से किया जाए।

संवैधानिक और कानूनी चिंताएं

श्री नड्डा ने 2013 के वक्फ अधिनियम में संवैधानिक उल्लंघनों पर प्रकाश डाला, जिनमें शामिल हैं:

क. अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार): अधिनियम ने वक्फ बोडों को बिना किसी उचित प्रक्रिया के एकतरफा रूप से संपत्तियों को वक्फ घोषित करने की अनुमति दी।
ख. अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार): इसने नागरिकों को वक्फ बोर्ड के निर्णयों को सिविल न्यायालयों में चुनौती देने के अधिकार से वंचित कर दिया तथा वक्फ न्यायाधिकरणों में शक्तियों को केंद्रीकृत कर दिया।
ग. अनुच्छेद 300 ए (संपत्ति अधिकार): यह 2013 अधिनियम की धारा 40 के अंतर्गत संपत्तियों को मनमाने ढंग से जब्त करने का अधिकार देता है।

उन्होंने कहा कि संशोधन में इन मुद्दों का समाधान किया गया है, जिसमें कलेक्टरों को वक्फ दावों को सत्यापित करने, जनजातीय भूमि (अनुसूची 5 और 6 के तहत) की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने का अधिकार दिया गया है कि सरकारी/स्वायत्त निकाय की संपत्तियों (जैसे एएसआई स्मारकों) को वक्फ के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है।

वक्फ संपत्तियों का दस्तावेजी दुरुपयोग

श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कुप्रबंधन के खतरनाक उदाहरणों का हवाला दिया जैसेकि 25 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 5,970 सरकारी संपत्तियों को अवैध रूप से वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया गया। कर्नाटक में 1975 और 2020 के बीच 10 सरकारी संपत्तियों (झीलों, मंदिरों और कृषि भूमि सहित) को वक्फ संपत्तियों में बदल दिया गया।

श्री नड्डा ने यह भी कहा कि सीएजी की 2018 की रिपोर्ट में अनधिकृत भूमि अधिग्रहण और जवाबदेही की कमी सहित प्रणालीगत खामियों को उजागर किया गया है।

सहयोग और चिंतन का आह्वान

श्री जगत प्रकाश नड्डा ने विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी से आग्रह किया कि वे इस विधेयक का समर्थन करें, ताकि हाशिए पर रह रहे मुस्लिम समुदायों के हितों की रक्षा हो सके। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारी की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने भू-माफियाओं को वक्फ संपत्तियों का शोषण करने की छूट दी और यह संशोधन ऐसे कमजोर वर्गों की रक्षा करता है, जिनमें महिलाओं से संबंधित विरासत के मुद्दों को भी संबोधित किया गया है।

उन्होंने हाल के चुनावों में मतदाताओं द्वारा विभाजनकारी राजनीति को अस्वीकार करने का हवाला देते हुए विनम्रता और सहयोग की अपील के साथ अपने भाषण का समापन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास’ के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि की और सांसदों से पक्षपातपूर्ण एजेंडों पर राष्ट्रीय प्रगति को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।