वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 और मुसलमान
वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 लोकसभा में प्रस्तुत किया गया
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री; तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने दो अप्रैल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) द्वारा व्यापक विचार-विमर्श के बाद लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस बार संयुक्त समिति में वक्फ संशोधन विधेयक पर भारत के संसदीय इतिहास में बहुत व्यापक रूप से चर्चा हुई है। कुल मिलाकर 97,27,772 याचिकाएं ऑनलाइन, फिजिकल, मेमोरेंडम के रूप में, रिक्वैस्ट के रूप में और सुझाव के रूप में आई हैं। सरकार ने उनको पूरी तरह से देखा है, चाहे वह जेपीसी के माध्यम से आई हो या डायरेक्ट दिया गया हो। आज तक इतनी ज्यादा संख्या में किसी भी बिल के ऊपर लोगों की याचिकाएं नहीं आई हैं। कुल मिलाकर 284 डेलिगेशन्स ने समिति के सामने अपनी बात को रखा है और सुझाव भी दिया है। 25 स्टेट गवर्नमेंट्स और यूनियन टेरिटरीज़ के वक्फ बोर्ड ने अपने निवेदन प्रस्तुत किए हैं।
मैं बताना चाहता हूं कि आज़ादी के बाद वर्ष 1954 में वक्फ़ अधिनियम पहली बार आज़ाद भारत का अधिनियम बना। उस समय वर्ष 1954 के अधिनियम में स्टेट वक्फ बोर्ड का भी प्रावधान किया गया था। उस समय से लेकर कई संशोधनों के साथ वर्ष 1995 में व्यापक रूप से यह वक्फ़ अधिनियम बना है। उस समय किसी ने नहीं कहा कि यह गैर-कानूनी है। वर्ष 1995 में पहली बार ट्राइब्यूनल की व्यवस्था की गई है, ताकि वक्फ़ बोर्ड का कोई भी निर्णय अगर किसी को पसन्द नहीं है, अगर वह उसको चैलेंज करना चाहता है, तो वह वक्फ़ ट्राइब्यूनल में जा सकता है।
वर्ष 2013 में कुछ ऐसे कदम उठाये गये, जिसे सुनकर दिमाग में यह सवाल जरूर उठेगा कि ऐसा कदम क्यों उठाया गया था। वर्ष 2013 में पहला यह बदलाव हुआ कि इस देश में कोई भी आदमी, कोई भी इंसान, चाहे वह हिंदू हो, मुसलमान हो, सिख हो, ईसाई हो, पारसी हो, बौद्ध हो या जैन हो, वक्फ़ क्रिएट कर सकता है। सबको यह मालूम है कि अल्लाह के प्रति एक पवित्र, धर्मार्थ और धार्मिक उद्देश्य के लिए वक्फ क्रिएट किया जाता है, लेकिन उसे शिथिल करके वर्ष 2013 में उस समय की यूपीए सरकार ने यह प्रावधान किया कि कोई भी वक्फ़ क्रिएट कर सकता है।
हमारे देश में वक्फ बोर्ड के पास थर्ड लार्जेस्ट लैंड बैंक है
वक्फ बनाने के संबंध में हमारी सरकार ने वर्ष 1995 के प्रावधानों को फिर से रिवाइव करते हुए यह जोड़ा है कि वक्फ वही क्रिएट कर सकता है, जो मिनिमम पांच साल इस्लाम को प्रैक्टिस करता है। हम वक्फ बोर्ड्स को बहुत ही धर्मनिरपेक्ष और समावेशी बनाना चाहते हैं। इसलिए इसमें पिछड़े मुस्लिम लोग, महिलाएं और एक्सपर्ट नॉन-मुस्लिम को शामिल करने का भी प्रावधान रखा गया है। सेंट्रल वक्फ काउंसिल में कुल 22 मेंबर्स में से चार नॉन-मुस्लिम से ज्यादा मेंबर्स नहीं हो सकते हैं। दस मुस्लिम सदस्यों में से दो महिला सदस्य का होना अनिवार्य है। इसी तरह से स्टेट बोर्ड में 11 मेंबर्स में 3 से ज्यादा नॉन-मुस्लिम नहीं हो सकते हैं। चार मुस्लिम सदस्यों में से दो महिलाएं होंगी।
आर्बिट्ररी प्रोविजंस और इनसफिशिएंट प्रोविजन के स्थान पर हमने नया प्रावधान लाया है। हमारे देश में वक्फ बोर्ड के पास थर्ड लार्जेस्ट लैंड बैंक है। जब दुनिया की सबसे ज्यादा वक्फ प्रॉपर्टी हमारे देश में है, तो हमारे गरीब मुसलमानों की पढ़ाई, मेडिकल ट्रीटमेट, स्किलिंग, इनकम जेनरेशन के लिए आज तक क्यों काम नहीं हुआ? उस प्रॉपर्टी से गरीबों के उत्थान और लोगों की भलाई करने का काम इस विधेयक के माध्यम से किया जाना है और इसके लिए आज इस वक्फ संशोधन बिल की जरूरत है। वर्ष 2006 में 4.9 लाख वक्फ प्रॉपर्टीज से कुल आय 163 करोड़ रुपये थी और आज यह इनकम 166 करोड़ रुपये है। अगर 10 सालों के बाद भी दुनिया की सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी की टोटल इनकम जनरेशन 3 करोड़ रुपए बढ़ती है, तो इसे हम कभी भी मंजूर नहीं कर सकते हैं।
सच्चर कमेटी के समय भी कहा गया था कि अगर इन प्रॉपर्टीज को थोड़ा सा भी कुशलता से मैनेज करते तो 12 हजार करोड़ रुपये प्रति साल उस समय जेनरेट हो जाना चाहिए था। आज 4.9 लाख से बढ़कर हमारे देश में कुल वक्फ प्रॉपर्टीज 8.72 लाख हो गयी है। यदि 8.72 लाख वक्फ संपत्तियों का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए तो इससे मुसलमानों के साथ-साथ देश की तकदीर बदल जाएगी। जेपीसी की कई सिफारिशों को इस विधेयक में शामिल किया गया है।
यह कहना ठीक नहीं है कि संयुक्त संसदीय समिति की बात को नहीं माना गया है। विधेयक को लेकर सबके मन में उम्मीद जगी है, इसलिए इस विधेयक का नाम ‘उम्मीद अर्थात यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट इम्पॉवरमेंट एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट रखा गया है। इस अधिनियम से मुसलमानों में भी जो शिया है, सुन्नी हैं, बोहरा हैं, आगाखानी, पसमांदा मुस्लिम्स हैं, जिनको बैकवर्ड माना जाता है, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के लिए हमने जो प्रावधान रखे हैं, सबका सशक्तीकरण होगा। हम प्रौद्योगिकी का उपयोग कर कार्यकुशलता बढ़ाएंगे, केन्द्रीयकृत डाटाबेस बनेगा और इसमें पंजीकरण का पूरा प्रावधान है। नौकरशाही से संबंधित मुद्दों से निपटने का भी प्रावधान है। ऑडिट का प्रावधान हम लोग राज्य सरकार के ऊपर छोड़ रहे हैं, क्योंकि आखिर में सारी प्रॉपर्टी की अथॉरिटी राज्य सरकार की है। नियुक्ति बोर्ड का गठन राज्य सरकार करेगी, क्योंकि भूमि राज्य सूची का विषय है। केन्द्र सरकार कोई अतिरिक्त शक्ति नहीं ले रही है। सब कुछ राज्य सरकार के अधीन है।
यह कानून किसी की जमीन छीनने वाला नहीं
तीन उद्देश्यों अर्थात् धार्मिक, चैरिटेबल और पवित्र कार्यों के लिए वक्फ बोर्ड सृजन होता है। यह भी उल्लेखनीय है कि मुसलमानों में जो भी जो वक्फ के अंदर अपनी प्रॉपर्टी इस वक्फ बोर्ड के प्रावधान से चलाना चाहते हैं, उनका स्वागत है। यह कानून किसी की जमीन छीनने वाला नहीं है, यह कानून किसी हक और उसकी संपत्ति को हड़प करने वाला नहीं है। विधेयक में प्रावधान रखा है कि जब कोई भी मुसलमान वक्फ क्रिएट करता है, तो सबसे पहले उस परिवार की महिला का जो अधिकार है, उसको सुरक्षित करके ही वह वक्फ क्रिएट कर सकते हैं। आप उसी संपत्ति को ही वक्फ क्रिएट कर सकते हैं, जिसमें आपका 100 प्रतिशत हिस्सा है।
हमने समिति के सुझाव को मानते हुए कलेक्टर के ऊपर के अधिकारी को इस मामले के लिए प्राधिकृत किया है। आदिवासियों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए शेड्यूल 5 और शेडयूल 6 में वक्फ प्रॉपर्टी क्रिएट नहीं किया जा सकता है। न्यायाधिकरण में तीन सदस्यों को शामिल करने, उनका कार्यकाल निर्धारित करने के प्रस्ताव को मंजूर कर दिया गया है ताकि विवाद का शीघ्र निस्तारण हो। वार्षिक अंशदान संबंधी समिति के सुझावानुसार मुतवल्ली के लिए अंशदान को 7 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया, ताकि चैरिटेबल कार्यों पर अधिक धन खर्च किया जाए। सेक्शन 40 के क्रूर प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है।

