‘आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान’ बना जन-आंदोलन

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   भारतीय जनता पार्टी द्वारा पं. दीनदयाल उपाध्याय जयंती (25 सितंबर) से पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जयंती (25 दिसंबर) तक ‘आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान’ आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य था देश के हर नागरिक को स्वदेशी से जोड़ना ताकि यह जन आंदोलन बने और भारत को आत्मनिर्भर बनाने का संदेश घर-घर तक पहुंचे। इस अभियान के दौरान हर घर से स्वदेशी को जोड़ते हुए विभिन्न माध्यमों से ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश दिया गया और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की शपथ दिलाई गई।

‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ का विचार अंग्रेजों से देश की आजादी का एक प्रमुख अभियान बना था। उसके बाद महात्मा गांधी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी व अनेक महापुरुषों ने स्वदेशी के विचार को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया और समय-समय पर इस मुहिम का परिणाम भी मिला। आजादी से पूर्व वर्ष 1905 में ‘बंग-भंग आंदोलन’ के दौरान जब बंगाल को बांटने का प्रस्ताव रखा गया, उस समय भी हमारे क्रांतिकारी महापुरुषों ने निर्णय लिया कि ब्रिटेन से आने वाले सामान का बहिष्कार किया जाएगा। पूरे देश में इस मुहिम को समर्थन मिला, जिसके बाद अंग्रेजों को झुकना पड़ा और बंगाल के विभाजन को रद्द किया गया। समय-समय पर स्वदेशी आंदोलन के माध्यम से जनता को जागरूक करने का कार्य किया गया है लेकिन इस बार यह आह्वान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किया है जिनपर देश के 140 करोड़ लोगों का भरोसा है। जब नेतृत्व पर भरोसा और विश्वास होता है तो जनता उस आह्वान को स्वीकारती है। ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी अभियान’ देश के जन-जन का अभियान बना।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इस विषय पर ‘मन की बात’ और रैली में बोले। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने पटना और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा ने दिल्ली में संकल्प दिलाया। अनेक प्रदेशों के राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों एवं मंत्रियों ने संकल्प दिलाया।