वैचारिकी

सामाजिक रचना का आधार

दीनदयाल उपाध्याय पिछली बार जब हमने कुछ विचार किया था तो हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि कार्य का आधार...

मैं और हम

दीनदयाल उपाध्याय गतांक का शेष साध्य से ही साधन की महत्ता है और ‘हम’ का यही अंतर है। महाभारत का उदाहर...

मैं और हम

दीनदयाल उपाध्याय प्रत्येक देशभक्त व्यक्ति की ऐसी इच्छा होना स्वाभाविक ही है कि अपना देश वैभवशाली बने...

मनुष्य या मशीन

दीनदयाल उपाध्याय मनुष्य ने मशीन को अपनी सहायता और सुविधा के लिए बनाया, किंतु आज वह उसका गुलाम बन गया...

सांस्कृतिक पुनरुत्थान

भारतीय जनसंघ का पहला राष्ट्रीय वार्षिक अधिवेशन, कानपुर में 29 से 31 दिसंबर, 1952 को हुआ। इस अधिवेशन...

एकात्मता की चिर साधना

-दीनदयाल उपाध्याय भारत  की एकता और अखंडता की साधना हमने सदा से की है। हमारे राष्ट्र का इतिहास इस साध...