‘विकसित बिहार’ के स्वप्न को पूरा करेगी एनडीए सरकार

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   बिहार की जनता ने अपना जनादेश दे दिया है और अद्भुत जनादेश दिया है। निःसंदेह यह एनडीए के पक्ष में इकतरफा एवं मजबूत जनादेश है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के कुशल नेतृत्व को आशीष देने वाला यह जनादेश ‘विकसित बिहार’ के पथ को प्रशस्त करने वाला है।राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिला अद्भुत विजय, जिसमें 83 प्रतिशत सफलता दर के साथ 243 में 202 सीटें प्राप्त हुईं, कोई साधारण सफलता नहीं बल्कि असाधारण जनादेश है। यह लोक-कल्याणकारी सुशासन, महिला नीत विकास एवं समावेशी विकास के पक्ष में निर्णायक जनादेश है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास की दिशा तय करेगा।

आज जब जनता ने अपने भारी जनसमर्थन से एनडीए पर पुनः विश्वास व्यक्त किया है, ‘विकसित बिहार’ के लिए अब यह एक निर्णायक जनादेश एवं व्यापक जनसमर्थन बन गया है

बिहार की महान जनता, जो अपनी राजनैतिक जागरूकता एवं समझ के लिए जानी जाती है, ने पुनः एक बार अपनी परिपक्वता का परिचय देते हुए निर्णायक जनादेश से पूरे देश को स्पष्ट संदेश दिया है। इस जनादेश का संदेश है कि परफॉर्मेंस की राजनीति, सुशासन एवं विकास को देश की जनता से निरंतर व्यापक जनसमर्थन एवं कोटि-कोटि आशीर्वाद प्राप्त होता रहेगा। यह ‘विकसित बिहार’ के विजन को आशीर्वाद देने वाला एवं ‘विकसित भारत’ के संकल्प को सुदृढ़ करने वाला जनादेश है।

बिहार की जनता ने फिर से एक बार वंशवादी, विभाजनकारी एवं तुष्टीकरण की राजनीति, भ्रष्टाचार, लूट एवं जंगलराज के जहरीले गठजोड़ के विरुद्ध निर्णायक जनादेश दिया है। राजद, कांग्रेस, वामपंथ एवं कुछ अन्य राजनैतिक दलों के महागठबंधन ने अपने जनविरोधी चुनाव प्रचार से पूरे प्रदेश में भय एवं नकारात्मकता का वातावरण बना दिया था। इससे जंगलराज के दिनों की यादें ताजा हो गईं।

महागठबंधन, जो सही अर्थों में ‘महालठबंधन’ साबित हुआ, न तो कोई सकारात्मक कार्यक्रम न ही भविष्य के लिए कोई विजन जनता के सामने रख पायी। उन्हें विश्वास था कि नकारात्मक राजनीति करके वे जनता का मत पा जाएंगे और इसलिए बिना किसी सकारात्मक नीति एवं कार्यक्रमों के वे नकारात्मक प्रचार अभियान चलाते रहे। राजद की नकारात्मकता कांग्रेस की नकारात्मकता से जुड़कर कई गुणा अधिक विषैली हो गई। परिणामस्वरूप महागठबंधन स्वयं नकारात्मकता की भेंट चढ़ गया और चुनावों में जनता ने इन्हें कड़वा पाठ पढ़ाया। जहां महागठबंधन केवल 35 सीटें प्राप्त कर पाया, वहीं राजद मात्र 25 सीटों पर सिमट कर रह गई। बिहार की जनता ने इनकी विषैली एवं नकारात्मक राजनीति को एकजुट होकर पूरी तरह से पराजित कर दिया।

एनडीए की यह भारी विजय अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस जनादेश से यह स्पष्ट है कि लोक हितैषी, कल्याणकारी शासन, संस्थागत स्थिरता, समावेशी विकास के साथ-साथ परफॉर्मेंस एवं विकास की राजनीति का युग आज देश में गतिमान है। महिला एवं युवाओं द्वारा भारी मतदान इस बात का द्योतक है कि दशकों से चली आ रही जातिवादी एवं तुष्टीकरण की राजनीति के दिन अब ढल चुके हैं। अब लोग उन राजनीतिक दलों एवं गठबंधनों को समर्थन दे रहे हैं, जिन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण एवं जनाकांक्षाओं को पूरा करने का कार्य करके राजनैतिक विश्वसनीयता अर्जित की है। जहां जनादेश एनडीए द्वारा दो दशकों से किए गए जनकल्याणकारी कार्यों पर एक मुहर है, वहीं यह ‘डबल इंजन’ सरकार द्वारा बेरोजगारी, गरीबी एवं आर्थिक प्रगति के लिए उठाए गए कदमों को भारी जनसमर्थन भी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में भारी विकास एवं जनाकांक्षाओं की पूर्ति करने के प्रयासों का यह सुपरिणाम है।

आज जब जनता ने अपने भारी जनसमर्थन से एनडीए पर पुनः विश्वास व्यक्त किया है, ‘विकसित बिहार’ के लिए अब यह एक निर्णायक जनादेश एवं व्यापक जनसमर्थन बन गया है। बिहार के इस जबरदस्त जनसमर्थन के प्रति प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपना आभार व्यक्त किया है तथा इससे लोकतंत्र और अधिक मजबूत हुआ है, निखरा है और आशा एवं विश्वास का वातावरण बिहार को गौरवान्वित कर रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं कि ‘विकसित बिहार’ के स्वप्न काे एनडीए सरकार पूरा अवश्य करेगी।

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