ऑपरेशन सिंदूर आंसुओं से तूफान तक—एक निडर भारत का उदय

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डॉ. निरंजन बी. पूजार

एक समय था जब भारत की धरती पर होने वाले हर आतंकवादी हमले की प्रतिक्रिया में केवल आंसू, टीवी पर निंदा और कूटनीतिक औपचारिकताओं को निभाया जाता था, लेकिन वे दिन अब खत्म हो गये हैं। आज भारत केवल शोक नहीं मनाता। यह सटीकता, शक्ति और उद्देश्य के साथ जवाबी कार्रवाई करता है। ऑपरेशन सिंदूर इस परिवर्तन का एक ऐतिहासिक प्रमाण है— दुनिया के लिए यह एक घोषणा है कि अब भारत न केवल अपनी रक्षा करेगा, बल्कि आतंकवाद की जड़ों पर प्रहार भी करेगा, चाहे वे कहीं भी मौजूद हों।

सैन्य और सामरिक कौशल का अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया— एक ऐसा नाम जो अब वैश्विक सैन्य इतिहास में दर्ज हो गया है। पहली बार, किसी राष्ट्र ने इतनी हिम्मत, सटीकता और दृढ़ संकल्प के साथ एक परमाणु-सशस्त्र राष्ट्र पर हमला किया और उसे नुकसान पहुंचाया है। शांति और सहिष्णुता की भूमि भारत ने अब अपना विराट रूप दिखाया है।

भारत का कहर

पिछले कुछ दिनों में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के 100 से ज्यादा मोस्ट वांटेड आतंकवादियों को मार गिराया गया है। पाकिस्तान की सीमा के भीतर नौ बड़े आतंकवादी शिविर और कमांड मुख्यालय नष्ट कर दिए गए हैं। नूर खान (इस्लामाबाद), रफीकी, सरगोधा, स्कार्दू (एक उच्च ऊंचाई वाला लॉन्चपैड), रावलपिंडी, सियालकोट, जैकबाबाद और चुनियान जैसे रणनीतिक सैन्य ठिकानों को भारत की गोलाबारी में भारी नुकसान हुआ।

भारत के हवाई सुरक्षा कवच, जिसका नेतृत्व स्वदेशी आकाश प्रणाली और विश्व स्तर पर प्रसिद्ध एस-400 कर रहे थे, के सामने हजारों ड्रोन और पाकिस्तान के फतेह-2 जैसे उच्च तकनीक वाले

आज भारत केवल शोक नहीं मनाता। यह सटीकता, शक्ति और उद्देश्य के साथ जवाबी कार्रवाई करता है। ऑपरेशन सिंदूर इस परिवर्तन का एक ऐतिहासिक प्रमाण है – दुनिया के लिए यह एक घोषणा है कि अब भारत न केवल अपनी रक्षा करेगा, बल्कि आतंकवाद की जड़ों पर प्रहार भी करेगा, चाहे वे कहीं भी मौजूद हों

मिसाइल सिस्टम बेअसर हो गए। चीन निर्मित एचक्यू-9 सिस्टम और अमेरिकी एफ-16—जो पाकिस्तान की विदेशी सैन्य निर्भरता के प्रतीक हैं— भारतीय संयुक्त सैन्य अभियानों की सटीकता और समन्वय के सामने बेअसर दिखे।

एक हमले से कहीं अधिक – एक रणनीतिक संदेश

यह ऑपरेशन सिर्फ बदला लेने के लिए नहीं था। यह एक घोषणा थी कि भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति कूटनीतिक शब्दावली नहीं बल्कि एक सैन्य सिद्धांत है। यह एक स्पष्ट संदेश भेजने जैसा था – ‘भारतीय रक्त की हर बूंद के लिए परिणामों की बाढ़ होगी।‘ अब भारत अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति या प्रतिबंध का इंतजार नहीं करेगा; यह भौगोलिक स्थिति से परे राष्ट्रीय हित में काम करेगा।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ परमाणु हथियारों के भय से हमला न करने वाली बात के एकदम विपरीत भारत के साहस का प्रतीक है। दशकों से पाकिस्तान परमाणु हथियार की आड़ में सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता आया है और इसका उपयोग एक ढाल कर रहा था, लेकिन अब उस धोखे का पर्दाफाश हो चुका है। भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने आतंकवाद को लगातार प्रायोजित करने के लिए किसी परमाणु संपन्न देश को सीधे तौर पर दंडित किया है। सिर्फ यही बात वैश्विक रणनीतिक गणित को बदल देती है।

रणनीतिक संयम से निर्णायक जवाबी कार्रवाई तक

कभी अपने ‘रणनीतिक संयम’ के लिए पहचाने जाने वाले भारत ने अब एक नया मॉडल अपनाया है – ‘रणनीतिक आक्रामकता’। यह लापरवाही से की जाने वाली कार्रवाई नहीं, बल्कि एक नपा-तुला संकल्प है। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना ने समन्वय दिखाया, जो स्वदेशी तकनीकों और अगली पीढ़ी के युद्ध प्रणालियों से लैस थी। हमारी खुफिया जानकारी, परिचालन समन्वय और राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम ही था – एक ऐसी कार्रवाई जो आधुनिक सैन्य इतिहास में शायद ही कभी देखा गया हो।

इसके अलावा, भारत के स्वदेशी शस्त्रागार में मौजूद आकाश मिसाइल, ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, उपग्रह-निर्देशित सटीक हमला करने वाली प्रणाली ने पूरी दक्षता के साथ काम किया। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की कार्रवाई थी और इसने साबित कर दिया कि भारत को अब अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।

विश्व को संदेश: शक्ति के साथ शांति

भारत हमेशा शांति के पक्ष में खड़ा रहा है। बुद्ध से लेकर गांधी तक, इस भूमि ने विनाश के बजाय संवाद की वकालत की है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत आतंक के आगे झुक जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर का संदेश सरल है – ‘हम शांति चाहते हैं, लेकिन हम युद्ध के लिए भी तैयार हैं। हम पहले हमला नहीं करेंगे, लेकिन अगर उकसाया गया तो हम पीछे नहीं हटेंगे’।

यह सिर्फ एक ऑपरेशन या एक दुश्मन के खिलाफ कार्रवाई नहीं है। यह वैश्विक व्यवस्था में भारत के स्थान को फिर से परिभाषित करने के बारे में है। भारत अब एक कमजोर राष्ट्र नहीं है; यह एक संप्रभु सभ्यता-राष्ट्र है, जो अपनी सीमाओं और अपने लोगों की रक्षा करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रहार करने को तैयार है। जो लोग भारत की खामोशी को उसकी कमजोरी समझते हैं, उन्हें अब एक नई वास्तविकता का सामना करना होगा।

भारत का उत्थान

ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य सफलता नहीं है— यह एक सभ्यतागत प्रतिक्रिया है। एक नया भारत उभर रहा है— जो संघर्ष नहीं चाहता, लेकिन उससे डरता भी नहीं है। जो अब रोता नहीं बल्कि अपने पूर्वजों की शक्ति के साथ दहाड़ता है। अतीत के दु:खों की राख से अब एक संप्रभु ज्वाला प्रज्वलित हो रही है— एक ज्वाला जो कहती है: भारत अब कभी भी पीड़ित नहीं होगा।
‘भारत ने विश्व को अपना विराट रूप दिखा दिया है— एक शांतिपूर्ण राष्ट्र जो सद्भावना से रहने को तैयार है, लेकिन यदि इसकी संप्रभुता को चुनौती दी गई तो आग से झुलसने को भी पूरी तरह तैयार है।’