डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम भारतीय समाज के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। उन्होंने भारत के दलित, वंचित और पिछड़े समाज को न्याय, समानता और अधिकार दिलाने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। भारतीय संविधान के शिल्पकार के रूप में उनका योगदान अतुलनीय है, लेकिन उनके विराट व्यक्तित्व और योगदान को लेकर जो राजनीतिक खेल कांग्रेस के द्वारा दशकों से खेला जा रहा है, वह न केवल उनके आदर्शों का अपमान है, बल्कि भारत के सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।
इतिहास गवाह है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने डॉ. अंबेडकर के योगदान को कभी उचित सम्मान नहीं दिया। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनके लोकसभा चुनाव में जीतने के मार्ग में अनेक नैतिक-अनैतिक बाधाएं खड़ी कीं। यह कटु सत्य है कि नेहरू और उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी ने अंबेडकरजी को मुख्यधारा की राजनीति से अलग-थलग करने के लिए हरसंभव प्रयास किया।
इतना ही नहीं, गांधी-नेहरू परिवार ने स्वयं को भारत रत्न से विभूषित करवा लिया, लेकिन बाबा साहेब को यह सम्मान उनके जीवनकाल में या उसके बाद भी कई दशकों तक नहीं दिया गया। भाजपा समर्थित वीपी सिंह सरकार ने अंततः इस ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त किया। यह कांग्रेस की वैचारिक संकीर्णता और अवसरवादी राजनीति को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। स्वयं को और अपने परिवार को सम्मानित करने वाली कांग्रेस ने बाबा साहेब जैसे महापुरुष को उचित सम्मान देने में कोताही बरती।
कांग्रेस की राजनीति का केंद्रबिंदु केवल सत्ता रही है। दलित और वंचित समाज को उन्होंने केवल एक ‘वोट बैंक’ के रूप में इस्तेमाल किया। बाबा साहेब के विचारों और उनके संघर्ष को कांग्रेस ने हमेशा अपने राजनीतिक स्वार्थों के हिसाब से तोड़ा-मरोड़ा। गांधी-नेहरू परिवार ने बाबा साहेब के योगदान को धूमिल करने के लिए ऐतिहासिक तथ्यों के साथ भी छेड़छाड़ की।
ऐसी विषम परिस्थितियों में जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने डॉ. अंबेडकर के प्रति सम्मान और समर्थन का परिचय दिया। उनके विचारों को आगे बढ़ाने और दलित समाज को सशक्त बनाने के

इतिहास गवाह है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने डॉ. अंबेडकर के योगदान को कभी उचित सम्मान नहीं दिया। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनके लोकसभा चुनाव में जीतने के मार्ग में अनेक नैतिक-अनैतिक बाधाएं खड़ी कीं। यह कटु सत्य है कि नेहरू और उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी ने अंबेडकरजी को मुख्यधारा की राजनीति से अलग-थलग करने के लिए हरसंभव प्रयास किया। इतना ही नहीं, गांधी-नेहरू परिवार ने स्वयं को भारत रत्न से विभूषित करवा लिया, लेकिन बाबा साहेब को यह सम्मान उनके जीवनकाल में या उसके बाद भी कई दशकों तक नहीं दिया गया
लिए जनसंघ और आरएसएस ने निरंतर प्रयास किए। यह समर्थन केवल सांकेतिक नहीं था, बल्कि विचारधारा के स्तर पर बाबा साहेब के आदर्शों को आत्मसात् करने का प्रयास था। ऐसा उन्होंने कई बार बाबा साहेब के विचारों से सहमति न रखते हुए भी किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने बाबा साहेब को उनके विराट व्यक्तित्व और अतुलनीय योगदान के अनुरूप सम्मान दिया है। ‘पंच तीर्थ’ का निर्माण— महू में जन्मस्थली, नागपुर दीक्षाभूमि, दिल्ली में महापरिनिर्वाण-भूमि, लंदन में अंबेडकर हाउस और मुंबई में चैत्यभूमि- बाबा साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि है। दिल्ली में अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र और मुंबई में निर्माणाधीन बाबा साहेब की गगनचुंबी मूर्ति मोदी जी के उनके प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।
इसके अतिरिक्त, संविधान दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का निर्णय बाबा साहेब की स्मृतियों को जीवंत रखने का एक ऐतिहासिक कदम है। नरेन्द्र मोदी सरकार ने न केवल बाबा साहेब को उचित सम्मान दिया, बल्कि दलित और वंचित समाज के उत्थान के लिए कई योजनाएं और नीतियां लागू कीं।
आज जब देश एक सशक्त भारत की ओर बढ़ रहा है, कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार एक बार फिर बाबा साहेब के नाम पर घृणा और भ्रम का वातावरण तैयार करने में लगे हुए हैं। गृहमंत्री अमित शाहजी के संसद में दिए बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कांग्रेस की कोशिशें यह साबित करती हैं कि यह पार्टी देश में वैमनस्यता फैलाने और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने में संकोच नहीं करती
प्रधानमंत्री मोदीजी ने स्पष्ट किया है कि बाबा साहेब का सम्मान केवल औपचारिकताओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना चाहिए। उनके द्वारा शुरू की गई योजनाएं— जैसेकि जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत योजना- दलित और वंचित समाज को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम हैं।
कांग्रेस और गांधी परिवार ने बाबा साहेब के नाम का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया है। राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा जैसे नेता जब दलित समाज के बीच जाते हैं, तब उनके प्रयासों में सच्चाई और ईमानदारी का अभाव साफ झलकता है। उनकी राजनीति का मकसद केवल दलित वोट बैंक को सुरक्षित करना है, न कि समाज के वास्तविक उत्थान के लिए काम करना।
आज जब देश एक सशक्त भारत की ओर बढ़ रहा है, कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार एक बार फिर बाबा साहेब के नाम पर घृणा और भ्रम का वातावरण तैयार करने में लगे हुए हैं। गृहमंत्री अमित शाहजी के संसद में दिए बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कांग्रेस की कोशिशें यह साबित करती हैं कि यह पार्टी देश में वैमनस्यता फैलाने और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने में संकोच नहीं करती। कांग्रेस का यह रवैया न केवल दलित समाज के लिए अपमानजनक है, बल्कि देश की अखंडता और शांति के लिए भी खतरा है। कांग्रेस का इकोसिस्टम और उसके समर्थक बुद्धिजीवी हरसंभव प्रयास कर रहे हैं कि समाज में अस्थिरता बनी रहे। यह केवल राजनीतिक स्वार्थ नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अखंडता के लिए खतरा है। यह स्पष्ट है कि कांग्रेस का एकमात्र उद्देश्य किसी भी तरह से सत्ता में वापसी करना है, चाहे इसके लिए उन्हें देश की सामाजिक एकता और शांति को दांव पर क्यों न लगाना पड़े।
यह समय की मांग है कि कांग्रेस और गांधी परिवार की इस विभाजनकारी राजनीति पर स्थायी रोक लगाई जाए। देश को एकजुट रखने और बाबा साहेब के सपनों को साकार करने के लिए ऐसे राजनीतिक षड्यंत्रों का पर्दाफाश आवश्यक है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर के आदर्शों को आत्मसात् कर आगे बढ़ रहा है। दलित, वंचित और पिछड़े समाज के सशक्तीकरण के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे न केवल बाबा साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि हैं, बल्कि एक नए, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की नींव भी हैं।
अब समय आ गया है कि देश की जनता कांग्रेस और गांधी परिवार की इस घृणित राजनीति को पूरी तरह नकारे और राष्ट्रहित में एकजुट होकर आगे बढ़े। बाबा साहेब के सपनों का भारत तभी साकार होगा, जब समाज में समानता, न्याय और सद्भावना का वातावरण स्थापित होगा।
(लेखक भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद हैं)

