भारतवर्ष का संविधान सभी को समानता और सम्मान का अधिकार देता है। संविधान की उद्देशिका में स्पष्ट लिखा है— हम, भारत के लोग… यहां हम और भारत के लोग इन शब्दों में एकत्व की भावना का ज्ञान निहित है। वहीं आगे लिखा है— सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए अर्थात् उपयुक्त शब्द भारतवर्ष की विविधता संस्कृति में समरसता की भावना प्रकट करते हैं। यह उद्देशिका स्पष्ट करती है कि राष्ट्र की एकता और अखंडता बंधुता के बिना सुनिश्चित नहीं हो सकती। इसलिए इन सब भावनाओं के साथ हम संविधान को अंगीकृत करते हैं। यह हमारा संविधान ही है जो भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, भौगोलिक और अनेक आयामों पर विस्तार से प्रविधान करते हुए नागरिकों की शिक्षा, सुरक्षा एवं सम्मान को सुनिश्चित करता है। भारतीय संविधान देश की जनता का सुरक्षा कवच है। यह प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता के अधिकार और कर्तव्यों की सीमाओं का संदेश देता है। यह जाति, संप्रदाय, भाषा, क्षेत्रीयता आदि के भेदभाव से परे सबके लिए समान है। हमारे संविधान निर्माताओं ने जनहितों का सूक्ष्म अध्ययन-विश्लेषण करते हुए ऐसे प्रविधान किए हैं, जिन्हें सभी ने हृदय से स्वीकार किया है। अपने एक वक्तव्य में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा है कि मसौदे में केवल प्रत्येक अनुच्छेद पर ही नहीं वरन् लगभग प्रत्येक वाक्य पर और कभी-कभी तो प्रत्येक अनुच्छेद के प्रत्येक शब्द पर हमें विचार करना पड़ा…। हमने एक लोकतंत्रात्मक संविधान तैयार किया है।
संविधान को लागू हुए 75 वर्ष होने जा रहे हैं, तब प्रश्न उठता है कि क्या हमारे संविधान के मूल आधार को बदला या संशोधित किया जा रहा है? यदि बदला या संशोधित किया जा रहा है तो यह अधिकार किसको है? इसे किस परिस्थिति में बदला या संशोधन किया जा सकता है?
संविधान की प्रस्तावना संविधान की आत्मा है। डॉ. अंबेडकर ने कहा था, तो क्या शरीर से आत्मा को हटाया जा सकता है? भारत एक देश है तो फिर ‘एक देश, एक संविधान’ लागू होना चाहिए या नहीं। क्या संविधान पर धर्म, जाति तथा दलों की इच्छाएं थोपी जा सकती हैं? ये ऐसे ज्वलंत प्रश्न है जिन पर आज विचार करना अत्यंत आवश्यक है। कई बार निहित स्वार्थों के लिए कुछ लोग अथवा राजनीतिक दल जनता में संविधान को लेकर भ्रम और भय फैलाने का प्रयास करते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि संविधान जाति, संप्रदाय, धार्मिक मान्यताओं आदि से परे है। संविधान में संशोधन की संसदीय प्रक्रिया है, वह प्रक्रिया भी किसी व्यक्ति अथवा दल की इच्छा के अनुसार नहीं चलती, बल्कि संसद में चर्चा और पूरी प्रक्रिया के तहत ही होती है।
आजकल विपक्ष के नेता राहुल गांधी पवित्र संविधान को हाथ में लहराकर कि संविधान खत्म हो जाएगा, हम संविधान बचाने के लिए लड़ रहे हैं, आदि बातें कहकर दलितों व आदिवासियों को भड़काने का षड्यंत्र तो करते हैं। राहुल गांधी संविधान को पढ़ते नहीं हैं, उसकी भावना का आदर नहीं करते हैं। वे यह नहीं जानते कि बाबा साहेब अंबेडकर ने संविधान को अपने हृदय से लगाकर रखा। यदि राहुल गांधी संविधान का सम्मान करते, यदि वे बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर का सम्मान करते, यदि वे देश का सम्मान करते और संविधान को मानते तो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वालों से गले नहीं मिलते और दंगा भड़काने वालों की पैरवी भी नहीं करते, जम्मू-कश्मीर के अलगाववादियों से नहीं मिलते, गौ-हत्या करने वालों को कांग्रेस का पदाधिकारी नहीं बनाते और न ही धर्म के आधार पर आरक्षण देने की वकालत करते। कांग्रेस की संविधान विरोधी कार्य प्रणाली से अब सब परिचित हो चुके हैं। कांग्रेस का इतिहास है कि इन्होंने जम्मू-कश्मीर में डॉ. अंबेडकर के मना करने के बाद भी धारा 370 लगाकर आदिवासियों का विधानसभा में आरक्षण खत्म करके, 1975 में बेवजह संविधान की आत्मा को कुचलकर देश में आपातकाल लगाने, 90 बार अनुच्छेद 356 लगाकर जनता द्वारा चुनी हुई सरकारों को गिराने, जम्मू-कश्मीर में वाल्मीकि समाज को संवैधानिक अधिकारों से वंचित करना आदि कांग्रेस की संविधान विरोधी मानसिकता को सिद्ध करता है।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की तरफ देखते हैं तो स्पष्ट होता है कि मोदी जी के लिए संविधान एक किताब नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ग्रंथ है। इसलिए उन्होंने संविधान व श्रद्धेय बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की भावना का आदर करते हुए जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाकर
कांग्रेस ने संविधान की आत्मा को तो समय-समय पर कुचला ही, उसने संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. अंबेडकर को भी नहीं छोड़ा। यह वही कांग्रेस है जिसने देश के करोड़ों दलितों, वंचितों, आदिवासियों, गरीबों, महिलाओं और श्रमिकों को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए जीवनभर संघर्ष करने वाले महामानव बाबा साहब डॉ. अंबेडकर जी को 1952 में लोकसभा चुनाव और 1954 में लोकसभा उपचुनाव हरवाया, मतगणना में बड़े स्तर पर घपला किया और डॉ. अंबेडकर को हराने वाले काजोलकर को पद्मभूषण से सम्मानित कर बाबा साहब का अपमान किया
एक तरफ संविधान को ‘एक देश, एक संविधान’ बनाया वहीं दूसरी ओर आरक्षण और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की, 2015 से देश में प्रतिवर्ष शासकीय तौर पर 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाना प्रारंभ करके संविधान के प्रति अपने अटूट सम्मान को दर्शाया है। वे पहले भी गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए ‘संविधान गौरव यात्रा’ निकालकर, संविधान के प्रति अपनी पवित्र निष्ठा दिखा चुके थे।
विदित है कि कांग्रेस ने 80 बार संविधान में संशोधन किया और कई बार तो संशोधन जनहित में न होकर अपनी सत्ता बचाने के लिए किया, जबकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने श्रीमती इंदिरा गांधी के चुनाव को शून्य कर दिया था। मोदी जी ने आठ बार संविधान संशोधन दलित, वंचित व पिछड़ों के हितों में किया और दो दिन तक संसद के दोनों सदनों में संविधान पर चर्चा हुई।
कांग्रेस ने संविधान की आत्मा को तो समय-समय पर कुचला ही, उसने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर को भी नहीं छोड़ा। यह वही कांग्रेस है जिसने देश के करोड़ों दलितों, वंचितों, आदिवासियों, गरीबों, महिलाओं और श्रमिकों को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए जीवनभर संघर्ष करने वाले महामानव बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर को 1952 में लोकसभा चुनाव और 1954 में लोकसभा उपचुनाव हरवाया, मतगणना में बड़े स्तर पर घपला किया और डॉ. अंबेडकर को हराने वाले काजोलकर को पद्मभूषण से सम्मानित कर बाबा साहेब का अपमान किया। कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित नहीं किया, संसद के केंद्रीय कक्ष में उनकी आदमकद तस्वीर नहीं लगाई, देशभर में उनके जीवन से जुड़े स्थलों पर राष्ट्रीय स्मारक नहीं बनाए, उनके नाम से किसी योजना का नाम नहीं रखा, और तो और अंतिम समय में दिल्ली में उनकी अंत्येष्टि भी नसीब नहीं हुई। कांग्रेस के इन पापों से स्पष्ट होता है कि वह बाबा साहेब का राजनीतिक और सामाजिक जीवन समाप्त करना चाहती थी।
एक तरफ कांग्रेस की बाबा साहेब को अपमानित करने की गंदी मानसिकता रही, वहीं दूसरी ओर भाजपा और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें अपना मार्गदर्शक माना और उनके सम्मान में जन्म-स्थान महू मध्य प्रदेश, संकल्प भूमि बड़ोदरा, दीक्षाभूमि नागपुर, परिनिर्वाण भूमि 26 अलीपुर रोड दिल्ली और चैत्य भूमि (अंतिम संस्कार स्थल) मुंबई में भव्य राष्ट्रीय स्मारकों का निर्माण कराया। इतना ही नहीं लंदन में पढ़ते समय जहां बाबा साहेब किराए के मकान में रहते थे उस मकान को खरीदकर शिक्षा भूमि बनाकर उनके प्रति अपनी सच्ची श्रद्धा प्रकट की। 15 जनपद मार्ग दिल्ली में 192 करोड़ की लागत का श्रद्धेय डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाया।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इन स्मारकों को ईट-गारे का भवन नहीं, बल्कि इन्हें पंचतीर्थ घोषित कर अपना श्रद्धाभाव प्रकट किया। बाबा साहेब को भारत रत्न दिलाने में व देश की संसद में आदमकद चित्र लगवाने में श्रद्धेय अटल जी व आदरणीय आडवाणी जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
बाबा साहेब चाहते थे कि देश की एकता, अखंडता और उसे बनाए रखने के लिए सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय व अवसर की समानता यह जाति, धर्म के लोगों का नहीं, बल्कि सभी गरीबों व वंचितों के लिए हो, यह संविधान में भी उल्लिखित किया गया है, लेकिन कांग्रेस केंद्र में लगभग 55 साल और प्रदेशों में लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद भी गरीब और वंचितों को उनके मौलिक अधिकार नहीं दिला पाई। वर्ष 2014 भारत के भाग्य उदय और गरीबों, वंचितों, महिलाओं व श्रमिकों की आशा लेकर आया और भारतीय राजनीति में संकल्प के धनी श्री नरेन्द्र मोदी के हाथों देश की बागडोर मिली। पिछले 10 वर्षों में आयुष्मान योजना, गरीबों को फ्री अनाज, उज्ज्वला व उजाला योजना, एक देश एक राशन कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, घर-घर शौचालय का निर्माण, जनधन योजनाओं ने एक तरफ दलित, आदिवासी, वांछित व अन्य गरीबों के विकास के रास्ते खोले तो दूसरी ओर उनका आर्थिक सशक्तीकरण किया। उच्चतम न्यायालय में पहली बार अनुसूचित जाति, जनजाति के जज की नियुक्ति, राष्ट्रपति के पद पर श्री रामनाथ कोविंद जी और आदिवासी समाज से श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी का चयन, पहली बार चार प्रदेशों में राज्यपालों की नियुक्ति, दो प्रदेश मध्यप्रदेश व राजस्थान में उपमुख्यमंत्री व कर्नाटक और झारखंड में नेता प्रतिपक्ष बनाना, केंद्र सरकार में पहली बार 12 अनुसूचित जाति वह आठ अनुसूचित जनजाति के मंत्री बनाना, आजादी के बाद पहली बार रेलवे बोर्ड के पद पर अनुसूचित जाति व नियंत्रक महालेखा परीक्षक के पद पर आदिवासी श्री गिरीश चंद्र मुर्मू जी की नियुक्ति करके संविधान और राजनीतिक, सामाजिक अवसर की समानता का सम्मान किया।
कांग्रेस ने परिवारवाद की संकुचित मानसिकता के चलते अन्य महापुरुषों व संतों को सम्मान देने का प्रयास भी नहीं किया, लेकिन श्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या धाम में महर्षि वाल्मीकि जी का मंदिर और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम रख दिया, कुशीनगर से बोधगया होते हुए काशी सारनाथ तक बुद्ध सर्किट बनाने का रास्ता खोल दिया, 100 करोड़ की लागत से मध्य प्रदेश के सागर में संत शिरोमणि रविदास जी के मंदिर की आधारशिला रख दी और काशी में उनके जन्म स्थान पर भव्य संत रविदास उद्यान व 25 फुट की बड़ी प्रतिमा स्थापित कर दी। मऊ इंदौर रेलवे स्टेशन का नाम डॉ. अंबेडकर के नाम पर रखकर संविधान में उल्लिखित सामाजिक समानता का सम्मान किया, व्यक्ति और राजनीतिक
कांग्रेस ने परिवारवाद की संकुचित मानसिकता के चलते अन्य महापुरुषों व संतों को सम्मान देने का प्रयास भी नहीं किया, लेकिन श्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या धाम में महर्षि वाल्मीकि जी का मंदिर और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम रख दिया, कुशीनगर से बोधगया होते हुए काशी सारनाथ तक बुद्ध सर्किट बनाने का रास्ता खोल दिया, 100 करोड़ की लागत से मध्य प्रदेश के सागर में संत शिरोमणि रविदास जी के मंदिर की आधारशिला रख दी और काशी में उनके जन्म स्थान पर भव्य संत रविदास उद्यान व 25 फुट की बड़ी प्रतिमा स्थापित कर दी। मऊ इंदौर रेलवे स्टेशन का नाम डॉ. अंबेडकर के नाम पर रखकर संविधान में उल्लिखित सामाजिक समानता का सम्मान किया, व्यक्ति और राजनीतिक दल अपने राजनीतिक एजेंडे से बड़े नहीं होते, बल्कि अपनी सोच व ईमानदार प्रयासों से बड़े होते हैं
दल अपने राजनीतिक एजेंडे से बड़े नहीं होते, बल्कि अपनी सोच व ईमानदार प्रयासों से बड़े होते हैं। कांग्रेस ने अपनी संकुचित मानसिकता से अपने आप को बौना बना लिया, उसने राजनीतिक स्वार्थ पूर्ति के लिए अपने आप को देश से बड़ा मानकर षड्यंत्र का घर बना लिया, इसलिए आज उनकी राजनीतिक दुकान बंद होने के कगार पर पहुंच गई है।
भाजपा का लक्ष्य है— अंत्योदय, व्यक्ति से बड़ा परिवार, परिवार से बड़ा समाज, समाज से बड़ा देश, इसी भावना से राजनीतिक स्वार्थ को अलग रखकर संघर्ष किया, सत्ता के शीर्ष स्थान पर बैठकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, भारत में रहने वाले गरीबों, वंचितों का सशक्तीकरण, युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों, किसानों को ताकतवर बनाने के संकल्प को पूरा करने में दिन रात एक कर दिया। हाल ही में ‘मन की बात’ के 117वें प्रसारण में उन्होंने संविधान के विषय में कहा कि— हमारे संविधान निर्माताओं ने हमें जो संविधान सौंपा है वह समय की हर कसौटी पर खरा उतरा है, संविधान हमारे लिए गाइडिंग लाइट है, हमारा मार्गदर्शक है…। जब संकल्प पवित्र होता है तो लक्ष्य कितने भी कठिन हो प्राप्त होते ही हैं। तमाम नए-नए षड्यंत्र अपमानों के बीच अत्यंत गरीबी में पैदा हुए मोदी जी एक सफल योद्धा की तरह आगे बढ़ रहे हैं और आज उसी का परिणाम है कि वे विश्व के सर्वाधिक प्रसिद्ध नेता हैं। वे जब भी संसद में जाते हैं अथवा अन्य अनेक अवसरों पर संविधान सम्मत स्थानों, व्यक्तियों और संविधान के आगे नतमस्तक होते हैं। उनके लिए संविधान एक पुस्तक भर नहीं है अपितु वह एक राष्ट्रीय ग्रंथ है, जिसका वे सदैव प्राणपन से सम्मान करते हैं।
(लेखक भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के
राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं)

