राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा में प्रधानमंत्री का जवाब
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पांच फरवरी को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया। सदन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि धन्यवाद प्रस्ताव के समर्थन में अपनी भावनाएं साझा करना उनका सौभाग्य है
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने मध्यम वर्ग, निम्न मध्यम वर्ग, गरीबों, गांवों, किसानों, महिलाओं, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कृषि के बारे में विस्तार से बात की और संसद में भारत की प्रगति की आवाज को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि युवा कैसे भारत की ताकत को आगे बढ़ा रहे हैं और इस बात पर जोर दिया कि हर वर्ग की क्षमताओं को व्यक्त किया गया, साथ ही भारत के उज्ज्वल भविष्य में विश्वास की मजबूत अभिव्यक्ति भी की गई, जो सभी के लिए प्रेरणादायक है।
श्री मोदी ने आगे कहा कि 21वीं सदी की पहला क्वार्टर खत्म हो गया है और जिस तरह पिछली सदी का दूसरा क्वार्टर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में निर्णायक था, उसी तरह यह दूसरा क्वार्टर भी एक ‘विकसित भारत’ बनाने में उतना ही शक्तिशाली और तेज गति वाला होगा। उन्होंने कहा कि हर नागरिक महसूस करता है कि देश एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया है, जहां रुकने या पीछे मुड़ने का कोई सवाल ही नहीं है, बस तेजी से आगे बढ़ना है, लक्ष्य हासिल करना है और उसे पाने के बाद ही चैन की सांस लेनी है और इसी दिशा में देश आगे बढ़ रहा है।
अर्थव्यवस्था में तीव्र वृद्धि और कम महंगाई का अनोखा मिलन
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत उम्मीद की किरण बनकर उभरा है, जो वैश्विक चुनौतियों का समाधान दे रहा है और उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था में तेज ग्रोथ और कम महंगाई के अनोखे संयोजन की ओर इशारा किया, जो इसकी मजबूती को दिखाता है। उन्होंने याद दिलाया कि जब उनकी सरकार को सेवा करने का मौका मिला, तो भारत को ‘कमजोर पांच’ देशों में गिना जाता था और भले ही आजादी के समय देश छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, लेकिन यह 11वें स्थान पर खिसक गया था, लेकिन आज भारत तेजी से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है।
श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि हर सेक्टर— विज्ञान, अंतरिक्ष, खेल— में भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद की दुनिया में जैसे-जैसे वैश्विक अस्थिरता बढ़ रही है, एक नई विश्व व्यवस्था उभर रही है और निष्पक्ष विश्लेषण से भारत की ओर एक साफ झुकाव दिख रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत कई देशों के लिए एक भरोसेमंद भागीदार और दोस्त बन गया है, जो दुनिया की भलाई में कंधे से कंधा मिलाकर योगदान दे रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बन गया है और बड़े देशों के साथ ‘भविष्य के लिए तैयार ट्रेड डील’ कर रहा है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में नौ महत्वपूर्ण ट्रेड समझौते किए गए हैं, जिसमें 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ ‘सभी समझौतों की जननी’ भी शामिल है। उन्होंने पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने भारत को ऐसी स्थिति में छोड़ दिया था जहां कोई भी देश व्यापार समझौता करने को तैयार नहीं था, जबकि मौजूदा स्थिति इसके बिल्कुल उलट है जहां विकसित देश भारत के साथ पार्टनरशिप करने के लिए उत्सुक हैं।
श्री मोदी ने कहा कि मौजूदा मौकों का सबसे ज्यादा फायदा भारत के युवाओं को मिलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब वह युवाओं की बात करते हैं, तो इसमें मध्यम वर्ग के युवा, शहरी युवा, ग्रामीण युवा, बेटे और बेटियां सभी शामिल हैं और इसे टुकड़ों में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश को अपने युवाओं की ताकत पर गर्व होना चाहिए, क्योंकि अब उनके लिए वैश्विक बाजार खुल गया है, जिससे हर जगह मौके मिल रहे हैं।
श्री मोदी ने बैंकिंग क्षेत्र का उदाहरण देते हुए इसे अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 से पहले ‘फोन बैंकिंग’ का दौर था, जहां नेताओं के फोन कॉल से करोड़ों रुपये बांटे जाते थे, जबकि गरीबों के साथ बुरा बर्ताव किया जाता था और उन्हें बैंक तक पहुंचने नहीं दिया जाता था। उन्होंने बताया कि 50% से ज्यादा आबादी ने कभी बैंक के दरवाजे नहीं देखे थे, जबकि उस समय के सत्ताधारी नेताओं ने अपने साथियों को अरबों रुपये दिलवाए, जो उस पैसे को अपनी निजी संपत्ति समझते थे। श्री मोदी ने कहा कि उस समय की सरकार के राज में, और अब विपक्ष गठबंधन द्वारा शासित राज्यों में, बैंकिंग प्रणाली ढहने की कगार पर थी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछली सरकारों ने एनपीए को पहाड़ों जितना जमा होने दिया और लगातार इस बात पर चर्चा होती रही कि एनपीए संकट से कैसे बचा जाए, जो बैंकिंग प्रणाली की अनदेखी और कुप्रबंधन को दिखाता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि चुनौती बहुत बड़ी थी, लेकिन सरकार ने समझदारी से काम लिया और बैंकिंग प्रणाली के सभी हितधारकों को भरोसे में लिया। उन्होंने बताया कि सुधार जरूरी थे और उन्हें हिम्मत के साथ किया गया, जिससे एक पारदर्शी व्यवस्था बनी। उन्होंने कहा कि कई बैंकिंग सुधार किए गए और जो कमजोर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ठीक से काम नहीं कर पा रहे थे, उन्हें मजबूत बैंकों के साथ मिला दिया गया।
श्री मोदी ने याद किया कि एक बुद्धिजीवी ने एक बार लिखा था कि अगर मोदी सरकार यह कर पाती है, तो यह भारत के लिए एक बड़ा सुधार होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह काम सत्ता संभालने के तुरंत बाद ही पूरा कर लिया गया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इसके परिणामस्वरूप बैंक गहरी समस्याओं से आजाद हुए, उनकी हालत में लगातार सुधार हुआ, और अब वे तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बैंकों के स्वस्थ होने से लेनदेन बढ़े, लोगों को फंड मिला और आम नागरिकों को पैसे मिले। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि लोन उन गरीब लोगों तक पहुंचे, जिन्हें पहले बैंकों में प्रवेश नहीं मिलता था। उन्होंने मुद्रा योजना की सफलता पर प्रकाश डाला, जो युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने और सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि असली समर्थन देकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित करती है।
मुद्रा योजना के जरिए युवाओं को बिना गारंटी के 30 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन दिए गए
श्री मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना के जरिए युवाओं को बिना गारंटी के 30 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन दिए गए, जिससे वे अपने व्यवसाय बढ़ा सके, जिसमें बड़ी संख्या में महिला लाभार्थी शामिल हैं।
मौजूदा मौकों का सबसे ज्यादा फायदा भारत के युवाओं को मिलेगा। जब वह युवाओं की बात करते हैं, तो इसमें मध्यम वर्ग के युवा, शहरी युवा, ग्रामीण युवा, बेटे और बेटियां सभी शामिल हैं और इसे टुकड़ों में नहीं देखा जाना चाहिए। देश को अपने युवाओं की ताकत पर गर्व होना चाहिए, क्योंकि अब उनके लिए वैश्विक बाजार खुल गया है, जिससे हर जगह मौके मिल रहे हैं
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ग्रामीण महिलाएं, स्वयं-सहायता समूहों के जरिए, अब बड़े सपने देख रही हैं और आजादी से खड़ी हैं, जिसमें 10 करोड़ महिलाओं को सीधे वित्तीय मदद मिली है। उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र को काफी कर्ज दिए गए। श्री मोदी ने संतोष जताया कि 2014 से पहले जो एनपीए बहुत ज्यादा थे, वे अब एक प्रतिशत से भी कम हो गए हैं, जिससे बैंकों की सेहत मजबूत हुई है। उन्होंने बताया कि बैंक रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमा रहे हैं, जिससे कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
श्री मोदी ने विपक्ष पर देश के किसानों को भी धोखा देने का आरोप लगाया और कहा कि दो हेक्टेयर से कम जमीन वाले 10 करोड़ छोटे किसानों की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि विपक्ष का मानना था कि व्यवस्था चलाने के लिए कुछ बड़े किसानों को संभालना ही काफी है और छोटे किसानों को नजरअंदाज किया गया। श्री मोदी ने बताया कि उनकी सरकार ने छोटे किसानों का दर्द समझा और जमीनी हकीकत को समझते हुए पीएम किसान सम्मान निधि योजना शुरू की। उन्होंने कहा कि कम समय में ही 4 लाख करोड़ रुपये सीधे छोटे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं, जिससे उन्हें नई ताकत मिली है और वे बड़े सपने देख पा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि किसान भारत की उम्मीदों के मुताबिक नतीजे देंगे।
श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार न सिर्फ परियोजनाओं को समय पर पूरा करती है, बल्कि अक्सर तय समय से पहले ही पूरा कर देती है। उन्होंने कहा कि भारत ने 2030 तक कुछ सोलर लक्ष्य हासिल करने का वादा किया था, लेकिन उन्हें 2025 तक ही पूरा कर लिया गया। इसी तरह इथेनॉल के लक्ष्य भी दो से तीन साल पहले ही हासिल कर लिए गए।
श्री मोदी ने कहा कि लोगों का अपमान करना विपक्ष की आदत और संस्कृति बन गई है। उन्होंने बताया कि विपक्ष ने हाल ही में भारत के राष्ट्रपति का अपमान किया और चुनाव के बाद इस्तेमाल किए गए शब्द शर्मनाक थे। उन्होंने कहा कि लोकसभा में भी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा नहीं हो पाई, जिसे उन्होंने सर्वोच्च संवैधानिक पद का गंभीर अपमान बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब एक गरीब, आदिवासी परिवार की महिला सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचती है, तो उसका अपमान करना न केवल उसका अपमान है, बल्कि आदिवासी समुदाय, महिलाओं, संविधान और खुद देश का भी अपमान है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाया, पूर्वोत्तर में शांति और विकास लाया, पाकिस्तानी आतंकवादियों को उनके घर में घुसकर जवाब दिया, ऑपरेशन सिंदूर चलाया, देश को माओवादी आतंक से आजाद कराने के लिए साहसिक कदम उठाए और तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा हस्ताक्षर की गई अन्यायपूर्ण सिंधु जल संधि को रोक दिया।
श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि देश ने विपक्ष को दशकों तक मौके दिए, लोगों ने उन पर अपना भविष्य भी दांव पर लगा दिया, लेकिन उन्होंने गरीबी हटाने के नारों से देश को गुमराह किया। उन्होंने कहा कि हर विपक्षी प्रधानमंत्री ने लाल किले से गरीबी हटाने की बात की, फिर भी किसी ने भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, क्योंकि उनके नारे खोखले ही रहे। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने गरीबों को सशक्त बनाने का रास्ता चुना, भारत के गरीबों को सरकारी योजनाओं को समझने और अपनाने के लिए सलाम किया और अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के उनके प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने सरकार की नीयत पर गरीबों के भरोसे का जश्न मनाया और कहा कि 25 करोड़ परिवारों ने गरीबी को हराया और निराशा से बाहर निकले और प्रगति में भागीदार बने।
श्री मोदी ने आगे बताया कि 2014 से पहले 18,000 गांवों ने कभी बिजली नहीं देखी थी, कभी बल्ब या रोशनी के बारे में नहीं सुना था। 2014 में जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी सरकार उन गांवों में रोशनी लेकर आई।
प्रधानमंत्री ने आगे याद दिलाया कि पहले बार-बार सीमाओं पर कमी की खबरें चर्चा में आती थीं— गोला-बारूद नहीं, बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं, सैनिक बिना सही जूतों के बर्फ में खड़े रहते थे। श्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने सैनिकों के लिए देश का खजाना खोल दिया और उन्हें जो कुछ भी चाहिए था, वह सब देने का संकल्प लिया।
सत्ता सुख का रास्ता नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है
श्री मोदी ने कहा कि पहले की सरकारें रिमोट कंट्रोल से चलती थीं, लेकिन उनकी सरकार भी रिमोट से चलती है – लेकिन वह रिमोट भारत के 140 करोड़ नागरिक, उनके सपने, उनकी आकांक्षाएं और युवाओं का संकल्प है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सत्ता सुख का रास्ता नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है और मुद्रा योजना का उदाहरण दिया जिसने स्वरोजगार के जरिए लाखों लोगों को सशक्त बनाया। उन्होंने बताया कि विपक्ष ने कभी स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा नहीं दिया, उन्हें कुछ सौ स्टार्टअप्स के बारे में ही पता था, जबकि उनकी सरकार ने 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि सफलता लोगों का दिल जीत लेती है। श्री मोदी ने उन दिनों को याद किया जब बीएसएनएल का मज़ाक उड़ाया जाता था, लेकिन उनकी सरकार में एक स्वदेशी 4जी स्टैक स्थापित किया गया और भारत ने दुनिया में सबसे तेज गति से 5जी लॉन्च किया, जिससे संचार तकनीक और नवाचार को प्रोत्साहन मिला।
भारत हर क्षेत्र – अंतरिक्ष, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, महासागर, जमीन, आसमान और बाहरी अंतरिक्ष – में नई ऊर्जा और उपलब्धियों के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन, क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई मिशन में की गई पहलों का उल्लेख किया, जिनके बारे में अब दुनिया मानती है कि भारत इनमें महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है
श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एक उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए वर्तमान को उज्ज्वल बनाने के लिए लगातार काम करने की जरूरत है। उन्होंने समझाया कि उनकी सरकार पांच-वर्षीय चक्रों में योजनाएं बनाती है, वार्षिक बजट तैयार करती है और चुनावी लाभ के लिए नहीं, बल्कि 2047 तक एक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए दिशा तय करती है।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत हर क्षेत्र – अंतरिक्ष, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, महासागर, जमीन, आसमान और बाहरी अंतरिक्ष – में नई ऊर्जा और उपलब्धियों के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन, क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई मिशन में की गई पहलों का उल्लेख किया, जिनके बारे में अब दुनिया मानती है कि भारत इनमें महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ धातुओं पर ध्यान दे रहा है, जो भू-राजनीतिक हथियार बन गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश को कभी भी दूसरों के सामने हाथ न फैलाना पड़े।
श्री मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण में योगदान देने वाले सभी सांसदों को भी दिल से धन्यवाद दिया और कहा कि साझा किए गए बहुमूल्य विचार देश की प्रगति में मदद करेंगे। उन्होंने अंत में माननीय राष्ट्रपति को अभिभाषण के लिए गहरा आभार व्यक्त किया।

