नीदरलैंड में चोल काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गई
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 31 मई को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 134वीं कड़ी की शुरुआत करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हमारे देश के लोग देशहित में, समाजहित में ऐसी अद्भुत चीजें कर रहे हैं और जब उनके विषय में सुनते हैं तो हमें एक नई प्रेरणा मिलती है। आज कार्यक्रम की शुरुआत मैं एथलेटिक्स में देश की ऐसी ही उपलब्धि से करूंगा। कुछ दिन पहले ही झारखंड के रांची में नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन कॉम्पिटिशन हुआ। इसमें करीब 800 एथलीट ने हिस्सा लिया, जो देशभर से आए थे। इस दौरान चार अलग-अलग इवेंट में चार राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे।
श्री मोदी ने कहा कि एक इवेंट जिसकी देशभर में बहुत चर्चा हो रही है, वह है– 100-meter Race, सौ मीटर की दौड़। महज दो दिनों के भीतर पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीन बार टूटा।
गर्मी से लड़ने का तरीका कई बार रसोई में भी मिलता है
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समय देश के ज्यादातर हिस्सों में बहुत गर्मी पड़ रही है। तेज धूप, गर्म हवाएं, ऐसे मौसम में अपना ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पानी पीते रहिए। धूप में अगर निकलना ही पड़े तो थोड़ा संभल कर निकलें। इस दिशा में सरकार के भिन्न-भिन्न विभागों ने जो दिशा-निर्देश जारी किए हैं, वो भी भूलियेगा नहीं।
श्री मोदी ने कहा कि हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका कई बार रसोई में भी मिलता है। आपने भी देखा होगा जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे घर की रसोई का स्वाद बदल जाता है, रसोई का प्रकार बदल जाता है। कहीं मटके का पानी निकल आता है, कहीं दही जमने लगती है, तो कहीं कच्चे आम उबलने लगते हैं और फिर शुरू होता है देसी पेय का दौर। देसी पेय से आप भी परिचित हैं, अगर आप उत्तर भारत में जाएंगे तो काफी जगह आपको मिलेगा आम पन्ना, कच्चे आम का स्वाद और गर्मी से राहत भी। पंजाब-हरियाणा जाइए तो लस्सी मिल जाएगी, बड़े गिलास वाली लस्सी।
उन्होंने कहा कि राजस्थान और गुजरात में छाछ, जैसे हर खाने की साथी बन जाती है और बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू का शरबत, उसकी तो बात ही क्या है- पेट भी भरे, ताकत भी दे। कोंकण और गोवा में कोकम शरबत, सोल कढ़ी। दक्षिण भारत में पानकम, नीर मोर, सम्बारम और ओडिशा में बेल पना, वो सिर्फ पेय नहीं, भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की परंपरा का हिस्सा है और इसमें ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना की झलक भी मिलती है। और एक बात जरूर ध्यान रखियेगा, इनमें से ज्यादातर चीजें हमारी अपनी रसोई से निकली हैं, हमारे खेत-खलिहान से निकली हैं। कोई बड़ी ब्रांडिंग नहीं है, लेकिन पीढ़ियों का अनुभव उनमें समाया हुआ है। आप भी गर्मी के दौरान देसी पेजयलों का खूब आनंद लीजिए।
आम की पहुंच: गांव से वैश्विक बाजार तक
श्री मोदी ने कहा कि गर्मी आते ही एक और चर्चा हर घर में शुरू हो जाती है और वो है आम। आम, आम चर्चा का विषय होता है, भारत में शायद ही कोई घर होगा जहां गर्मियों में आम की बात न होती हो। हर इलाके का अपना आम, अपना स्वाद, अपनी खुशबू। महाराष्ट्र और कोंकण का हापुस, अलफांसो, गुजरात का केसर, यह तो आमरस की जान है, उत्तर प्रदेश का दशहरी और मेरी काशी का लंगड़ा।
वैसे, लंगड़ा आम की एक खास बात होती है—पकने के बाद भी उसका रंग कई बार हरा ही रहता है। बिहार का जर्दालू जिसकी खुशबू दूर से पहचान में आ जाए। चौसा, मालदा—हर नाम के साथ लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं। दक्षिण भारत जाइए, तो बंगनपल्ली, तोतापुरी, नीलम, मलगोवा, बंगाल का हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश का सुवर्णरेखा। यानी, जगह बदलती है, आम का रूप-रंग और उसका स्वाद भी बदल जाता है।
उन्होंने कहा कि आम की ये यात्रा अब गांव से वैश्विक बाजार तक भी पहुंच रही है। आज ‘मन की बात’ के माध्यम से मैं आम की पैदावार से जुड़े अपने किसान भाई-बहनों की प्रशंसा करूंगा। आप देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए आम किसान नहीं बहुत विशेष हैं। ऐसे ही छाए रहिए।
प्रधानमंत्री की नीदरलैंड यात्रा: चोल काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं वापस सौंपी गई
श्री मोदी ने कहा कि बीते दिनों मुझे यूरोप के नीदरलैंड जाने का अवसर मिला। वहां मैं कई मीटिंग में शामिल हुआ। इसी दौरान एक ऐसा क्षण आया जिसने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। नीदरलैंड में आयोजित एक विशेष समारोह में चोल काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गई। उस कार्यक्रम में नीदरलैंड के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे। इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर मुझे देश-विदेश से लगातार संदेश मिल रहे हैं। लोग खुशी जता रहे हैं, गर्व व्यक्त कर रहे हैं। दुनियाभर के तमिल समुदाय में भी इसे लेकर विशेष उत्साह है।
उन्होंने कहा कि इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर लोगों में काफी जिज्ञासा भी है। इसलिए आज मैं इससे जुड़ी कुछ बातें आपसे साझा करना चाहता हूं। इनमें 21 बड़ी और तीन छोटी ताम्र पट्टिकाएं हैं। ये मुख्य रूप से राजा राजेंद्र चोला-प्रथम द्वारा अपने पिता राजा राजराजा चोला के एक वचन को पूरा करने से जुड़ी हैं। इनमें आनइमंगलम् गांव को एक बौद्ध विहार को दान देने का उल्लेख है। इन ताम्र पट्टिकाओं में चोल वंश की उपलब्धियों का भी वर्णन मिलता है। इनसे पता चलता है कि चोल साम्राज्य की समुद्री शक्ति कितनी मजबूत थी। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ उनके संबंधों की जानकारी भी इनमें मिलती है।
श्री मोदी ने कहा कि चोल साम्राज्य के समृद्ध इतिहास और संस्कृति पर हम सभी को बहुत गर्व है।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार भारत की ऐसी अमूल्य धरोहरों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में ‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में भी एक महत्वपूर्ण खोज हुई है। यहां तीन दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएं मिली हैं। ये पांडुवंशी राजवंश के महर्षि बालार्जुन के शासनकाल से जुड़ी मानी जा रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ये अभिलेख छठी-सातवीं सदी के हैं यानी चौदह सौ-पंद्रह सौ साल पुरानी ये ताम्र पट्टिकाएं प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई हैं। इनसे उस समय की शासन-व्यवस्था, धर्म और संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के हर गांव में, हर शहर में कुछ-न-कुछ ऐसा हो रहा है जो हमें प्रेरणा देता है। कई बार इन प्रयासों की ज्यादा चर्चा नहीं होती, लेकिन जब हम इन्हें जानते हैं, तो ये विश्वास और मजबूत होता है कि देश अपने लोगों की शक्ति से आगे बढ़ रहा है। मेरा आपसे आग्रह है, अपने आसपास ऐसे प्रयासों को जरूर देखिए। जो लोग समाज के लिए अच्छा काम कर रहें हैं, उन्हें पहचानिए, उनकी सराहना कीजिए, उनसे सीखिए और हो सके तो खुद भी किसी अच्छे काम से जुड़िए।
‘मन की बात’ एक सशक्त मंच है जो गुमनाम नायकों को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन एवं अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा मुख्यालय में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ सुना।
श्री नवीन ने बताया कि प्रधानमंत्री ने भीषण गर्मी के दौरान स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया। साथ ही, उन्होंने ‘स्थानीय से वैश्विक’ स्तर पर भारतीय उत्पादों की बढ़ती पहचान, उभरती खेल प्रतिभाओं, नवाचार, विज्ञान और खगोल विज्ञान में युवाओं की बढ़ती रुचि, जल संरक्षण में जनभागीदारी और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ वैश्विक सम्मान जैसे प्रेरक विषयों पर अपने विचार साझा किए।
उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ एक सशक्त मंच है जो देश के गुमनाम नायकों और जनभागीदारी के प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है, जो हम सभी को सकारात्मक बदलाव की ओर प्रेरित करता है।

