योग एक वैश्विक आंदोलन बन गया है

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दुनिया ने वर्ष 2026 में ‘हेल्दी एजिंग फॉर योग’ (स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग) थीम के साथ 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया। योग विश्वभर में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों का सामना करने के साथ-साथ लोगों के शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ऐतिहासिक प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद पिछले बारह वर्षों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस एक ऐसे नए भारत का सशक्त प्रतीक बन गया है, जो ‘विकास और विरासत’ के दृष्टिकोण को आत्मसात् करता है, अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर गर्व करता है और अपने प्राचीन ज्ञान को विश्व के साथ साझा करने में विश्वास रखता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस सांस्कृतिक पुनर्जागरण, वैश्विक नेतृत्व तथा एक स्वस्थ और अधिक सामंजस्यपूर्ण मानवता के निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है। साथ ही, यह सभी के लिए स्वास्थ्य और कल्याण (वेलनेस) को सुलभ बनाने की भारत की अवधारणा को भी साकार करता है। गंगा के तटों से लेकर संयुक्त राष्ट्र के मंच तक, योग एक वैश्विक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है और 21वीं सदी में भारत की सभ्यतागत कूटनीति की सबसे स्थायी एवं प्रभावशाली विरासतों में से एक बन गया है।

वर्ष 2014 में, जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सितंबर माह में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए विश्व के समक्ष भारत की महानतम सांस्कृतिक धरोहरों में से एक ‘योग’ को प्रस्तुत किया, तब एक नए इतिहास की शुरुआत हुई। सदियों पुरानी यह परंपरा मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन एवं सामंजस्य स्थापित करने का एक प्रभावी माध्यम मानी जाती है। योग समग्र विकास, प्रकृति के साथ सामंजस्य, रोगों की रोकथाम तथा भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना का सशक्त प्रतीक है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता इस बात का प्रमाण है कि योग केवल एक प्राचीन भारतीय परंपरा नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सामंजस्यपूर्ण जीवन का ऐसा सार्वभौमिक मार्ग है, जिसे आज पूरी दुनिया अपना रही है

जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखा, तो उसे अभूतपूर्व वैश्विक समर्थन प्राप्त हुआ। रिकॉर्ड 177 देशों ने इस प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया और संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। यह संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में सबसे व्यापक समर्थन प्राप्त प्रस्तावों में से एक था। तब से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और ‘सॉफ्ट पावर’ (सांस्कृतिक प्रभाव) के विस्तार का सबसे सफल उदाहरण बनकर उभरा है। यह भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है, जो आज भी आधुनिक विश्व में उतनी ही प्रासंगिक हैं। योग न केवल स्वास्थ्य, खुशहाली और आंतरिक शांति को बढ़ावा देता है, बल्कि यह देशों, संस्कृतियों और समुदायों को जोड़ने वाले एक सशक्त सेतु के रूप में भी कार्य करता है। इसी कारण योग आज मानवता के साझा कल्याण और वैश्विक एकता का प्रतीक बन चुका है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने फ्रांस में आयोजित 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेकर वैश्विक मंच पर भारत की ‘ग्लोबल ग्रोथ इंजन’ के रूप में उभरती भूमिका को और अधिक मान्यता एवं स्वीकार्यता दिलाई। एक साझेदार देश के नेता के रूप में आमंत्रित प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘ग्लोबल साउथ’ की आकांक्षाओं, अपेक्षाओं और चिंताओं को प्रभावी ढंग से विश्व समुदाय के समक्ष रखा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय विकास वित्तपोषण व्यवस्था में सुधार तथा वैश्विक निर्णय-निर्माण संस्थाओं में विकासशील देशों की अधिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आर्थिक लचीलापन, जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों और तकनीकी सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर उनकी सक्रिय भागीदारी ने 21वीं सदी की चुनौतियों के समाधान में भारत की बढ़ती और रचनात्मक भूमिका को रेखांकित किया। शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अनेक प्रमुख वैश्विक नेताओं के साथ उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन संवादों ने भू-राजनीतिक चुनौतियों और मतभेदों के बीच भारत की एक विश्वसनीय साझेदार, संवादकर्ता और सेतु-निर्माता राष्ट्र के रूप में स्थापित भूमिका को और सुदृढ़ किया। वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय एजेंडा निर्धारण और वैश्विक नीति-निर्माण में भारत की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। यह भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, रणनीतिक प्रभाव तथा एक समावेशी, न्यायपूर्ण, स्थिर और शांतिपूर्ण विश्व व्यवस्था के निर्माण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

आज, जब हम वर्ष 2015 में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित पहले ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ को याद करते हैं— जिसने एक वैश्विक जन-आंदोलन के रूप में विश्व स्तर पर कई रिकॉर्ड स्थापित किए थे— तो स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि योग के प्रति लोगों की भागीदारी और उत्साह निरंतर बढ़ता गया है। पिछले कुछ वर्षों में प्रतिवर्ष 190 से अधिक देशों के लाखों लोगों ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों में भाग लिया है। योग को राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों, शैक्षणिक संस्थानों, जन-जागरूकता अभियानों तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विभिन्न प्रयासों का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। इसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्य और कल्याण (वेलनेस) के क्षेत्र में भारत की वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका और अधिक सुदृढ़ हुई है। साथ ही, योग ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण साधन बनकर उभरा है। वेलनेस पर्यटन, अनुसंधान, योग शिक्षक प्रशिक्षण तथा पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े उद्योगों के माध्यम से यह भारत की अर्थव्यवस्था में भी उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। इससे नए रोजगार और अवसर सृजित हो रहे हैं तथा विश्वभर में भारत की सांस्कृतिक पहचान और प्रभाव को भी नई मजबूती मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता इस बात का प्रमाण है कि योग केवल एक प्राचीन भारतीय परंपरा नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सामंजस्यपूर्ण जीवन का ऐसा सार्वभौमिक मार्ग है, जिसे आज पूरी दुनिया अपना रही है।

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