केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ” पीएमएसएमए के 10 वर्ष – देखभाल का एक दशक” के उपलक्ष्य में राष्ट्रव्यापी समारोहों का शुभारंभ किया

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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की प्रमुख पहल, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) ने आज पूरे भारत में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में समर्पित सेवा के 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जेपी नड्डा ने आज इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के उपलक्ष्य में, “पीएमएसएमए के 10 वर्ष – देखभाल का एक दशक” विषय के तहत राष्ट्रव्यापी समारोहों का शुभारंभ किया। यह सुरक्षित गर्भावस्था और स्वस्थ मातृत्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत की प्रमुख पहलों में से एक प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के सफल कार्यान्वयन के एक दशक की सफलता का प्रतीक है।

श्री जेपी नड्डा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे देश के लिए गर्व और संतोष का क्षण है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में पीएमएसएमए का सफल कार्यान्वयन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उस दृष्टिकोण को साकार करने की सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके तहत देश के प्रत्येक परिवार के लिए सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ नवजात शिशु सुनिश्चित करना है।

श्री नड्डा ने कहा कि पिछले दस वर्षों में, पीएमएसएमए ने न केवल देश भर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया है, बल्कि एक स्वस्थ और अधिक लचीले भारत के लिए एक मजबूत नींव भी रखी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि माताओं के स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित करना एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण और स्वस्थ भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए अत्यावश्यक है।

कार्यक्रम की शुरुआत के बारे में श्री नड्डा ने बताया कि पीएमएसएमए (प्रसव पूर्व प्रसवपूर्व देखभाल योजना) का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 9 जून 2016 को किया था। इसका उद्देश्य प्रत्येक माह की 9 तारीख को विशेषज्ञ डॉक्टरों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क, व्यापक और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल सेवाएं प्रदान करना है। उन्होंने पीएमएसएमए के तहत सरकार के साथ स्वेच्छा से साझेदारी करने वाले निजी अस्पतालों और चिकित्सा विशेषज्ञों के बहुमूल्य योगदान को स्वीकार किया। इससे गर्भवती महिलाओं, विशेष रूप से वंचित क्षेत्रों में, विशेषज्ञ देखभाल तक पहुंच को काफी मजबूत हुई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सुरक्षित गर्भावस्था सुनिश्चित करने में प्रसवपूर्व देखभाल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने बताया कि सरकार के मातृ स्वास्थ्य देखभाल ढांचे के तहत गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसवपूर्व जांच की सुविधा मिलती है। इसमें पीएमएसएमए के अंतर्गत विशेषज्ञ द्वारा की जाने वाली जांच भी शामिल है। उन्होंने गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं की पहचान करने, उन पर नज़र रखने और उन्हें सहायता प्रदान करने में आशा कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका के बारे में भी बताया।

जनवरी 2022 में विस्तारित पीएमएसएमए (ई-पीएमएसएमए) रणनीति के शुभारंभ का उल्लेख करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की गहन निगरानी और अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करना है। ई-पीएमएसएमए के तहत, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं को सूचीबद्ध किया जाता है, व्यक्तिगत रूप से ट्रैक किया जाता है और प्रसव के बाद 45 दिनों तक निगरानी की जाती है। इसका उद्देश्य मां और बच्चे दोनों के स्वस्थ स्वास्थ्य को सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि एसएमएस आधारित अलर्ट और फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों के बेहतर सहयोग से देखभाल की निरंतरता और मजबूत हुई है। वहीं दूसरी ओर आशा कार्यकर्ताओं को दिए गए अतिरिक्त प्रोत्साहनों से सामुदायिक स्तर पर पहुंच और अनुवर्ती सेवाओं में सुधार करने में मदद मिली है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में हासिल की गई उपलब्धियों के बारे में बताते हुए श्री नड्डा ने कहा कि भारत की प्रगति को वैश्विक मान्यता मिली है। संयुक्त राष्ट्र मातृ मृत्यु दर आकलन अंतर-एजेंसी समूह (यूएन-एमएमईआईजी) की नवीनतम रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने 1990 से मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की प्रभावशाली गिरावट दर्ज की है। यह वैश्विक औसत 48 प्रतिशत की गिरावट से कहीं अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह गिरावट 61 प्रतिशत है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्यु दर आकलन अंतर-एजेंसी समूह (यूएन-आईजीएमई) की रिपोर्ट में 1990 से 2024 के बीच नवजात मृत्यु दर में 70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह गिरावट 54 प्रतिशत है।

श्री नड्डा ने नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के निष्कर्षों में परिलक्षित सुधारों पर भी बल दिया। उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसवों में 90.6 प्रतिशत की वृद्धि और प्रसवपूर्व देखभाल प्राप्त करने वाली माताओं का अनुपात बढ़कर 95.9 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों, बेहतर सेवा वितरण और मातृ स्वास्थ्य के प्रति परिवारों में बढ़ी जागरूकता का प्रतिबिंब हैं। उन्होंने कहा, “ये आंकड़े मात्र सांख्यिकी नहीं हैं; ये समय पर देखभाल, प्रारंभिक उपाय और हमारे स्वास्थ्य कर्मियों के सामूहिक प्रयासों के माध्यम से बचाई गई माताओं और नवजात शिशुओं के जीवन का प्रतिनिधित्व करते हैं।”

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पीएमएसएमए की सफलता में योगदान देने वाले डॉक्टरों, नर्सों, आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों, राज्य सरकारों, विकास भागीदारों और निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों के समर्पित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया कि देश की प्रत्येक गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान और उसके बाद भी समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्राप्त हो।

इस अवसर पर श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के दस वर्ष पूरे होने को भारत में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में, पीएमएसएमए सरकार की सबसे प्रभावशाली जन स्वास्थ्य पहलों में से एक बनकर उभरा है। इसने देश भर में करोड़ों महिलाओं और परिवारों के जीवन को बेहतर किया है।

इस पहल के उद्देश्य को याद करते हुए श्रीमती श्रीवास्तव ने बताया कि जून 2016 में पीएमएसएमए के शुभारंभ के तुरंत बाद, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जुलाई 2016 में अपने ‘मन की बात’ संबोधन में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के डॉक्टरों से अपील की थी कि वे पीएमएसएमए के तहत गर्भवती महिलाओं को मुफ्त प्रसवपूर्व देखभाल सेवाएं प्रदान करने के लिए हर महीने कम से कम एक दिन समर्पित करें। उन्होंने कहा कि चिकित्सा जगत से मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया इस कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण रही है। आज, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 9,000 से अधिक निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता पीएमएसएमए के तहत पंजीकृत हैं। इससे विशेष रूप से कम सुविधाओं वाले, दूरस्थ और महत्वाकांक्षी जिलों में विशेषज्ञ प्रसवपूर्व देखभाल तक पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।

इस पहल के प्रभाव का उल्लेख करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि इस कार्यक्रम ने देश में मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) के अनुसार, भारत में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 2014-16 के दौरान प्रति लाख जन्मों पर 130 से घटकर 2022-24 के दौरान प्रति लाख जन्मों पर 87 हो गई है, जो 43 अंकों की कमी दर्शाती है। इसी प्रकार, नवजात मृत्यु दर प्रति 1,000 जन्मों पर 24 से घटकर प्रति 1,000 जन्मों पर 18 हो गई है, जो माताओं और नवजात शिशुओं के जीवन की सुरक्षा में निरंतर प्रगति को दर्शाती है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) में परिलक्षित उत्साहजनक सुधारों के बारे में भी बताया। प्रसवपूर्व देखभाल प्राप्त करने वाली माताओं का अनुपात बढ़कर 95.9 प्रतिशत हो गया है, जबकि कम से कम चार प्रसवपूर्व देखभाल जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत बढ़कर 65.2 प्रतिशत हो गया है। पहली तिमाही में प्रसवपूर्व देखभाल के लिए पंजीकरण बढ़कर 76.2 प्रतिशत हो गया है, और संस्थागत प्रसव बढ़कर 90.6 प्रतिशत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच, सुरक्षित मातृत्व तौर-तरीकों के बारे में बढ़ी हुई जागरूकता और देश भर में सेवा वितरण तंत्र को मजबूत करने का प्रमाण हैं।

श्रीमती श्रीवास्तव ने इस बात पर बल दिया कि पिछले एक दशक में पीएमएसएमए का पैमाना अभूतपूर्व रहा है। इसकी शुरुआत से लेकर अब तक इस कार्यक्रम के तहत 75 लाख से अधिक प्रसवपूर्व जांच की जा चुकी हैं। लगभग 12 लाख उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं (एचआरपी) की पहचान की गई है। इन उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान से उचित रेफरल, विशेषज्ञ हस्तक्षेप और बेहतर निगरानी संभव हो पाई है। इससे माताओं और नवजात शिशुओं दोनों के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित हुए हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव यह भी कहा कि विस्तारित पीएमएसएमए (ई-पीएमएसएमए) रणनीति की शुरुआत से उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के लिए अनुवर्ती कार्रवाई और निरंतर देखभाल को मजबूती मिली है। इन प्रयासों के पूरक के रूप में, पीएमएसएमए और ई-पीएमएसएमए के तहत विशेषज्ञ नेतृत्व वाली प्रसवपूर्व देखभाल सेवाओं और मजबूत रेफरल तंत्र ने मातृ एवं नवजात शिशु उत्तरजीविता को बढ़ाया है, प्रसूति सम्बंधी जटिलताओं के लिए बेहतर तैयारी की है और जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई), जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके) और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) जैसी प्रमुख मातृ कल्याण योजनाओं के अधिक उपयोग को बढ़ावा दिया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं, मातृ एवं शिशु चिकित्सा नर्सों, डॉक्टरों, विशेषज्ञों, विकास भागीदारों और निजी क्षेत्र के स्वयंसेवकों के प्रयासों की सराहना की। इनके समर्पण ने पीएमएसएमए की सफलता में योगदान दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यक्रम आने वाले वर्षों में देश भर में सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

उत्सवों के हिस्से के रूप में, गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को पीएमएसएमए के तहत उपलब्ध नौ सुनिश्चित मुफ्त सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करने और समय पर और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल के महत्व को बढ़ावा देने के लिए 9 जून 2026 से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जागरूकता और आउटरीच गतिविधियों का आयोजन किया गया है।

इस अवसर पर, श्री नड्डा ने पीएमएसएमए की दसवीं वर्षगांठ मनाने और देश में मातृ स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने में इसके योगदान को मान्यता देने के लिए एक विशेष 75 रुपये का स्मारक सिक्का और एक 5 रुपये का डाक टिकट भी जारी किया।

इस कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल, भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रतिनिधि डॉ. इवान जेएफ हुटिन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अपर सचिव एवं मिशन निदेशक श्रीमती आराधना पटनायक, संचार मंत्रालय के मुख्य डाक महानिरीक्षक कर्नल अखिलेश कुमार पांडे और विभिन्न राज्यों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी उपस्थित थे।