भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने झारखंड के रांची में आयोजित ‘बुद्धजीवी बैठक’ को संबोधित किया

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भारतीय जनता पार्टीभारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन ने आज शनिवार को अपने झारखंड प्रवास के पहले दिन रांची में आयोजित ‘बुद्धजीवी बैठक’ को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों के कल्याण, कृषि सुधार और उनकी आय बढ़ाने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि ऑर्गेनिक खेती, आयुष्मान भारत, जनधन योजना, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप और मुद्रा योजना जैसी पहलें देश के गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। श्री नवीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा, नक्सलवाद उन्मूलन, रेलवे और बुनियादी ढाँचे के विकास, महिला सशक्तिकरण तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सरकार की प्रमुख उपलब्धियाँ बताया और युवाओं से सकारात्मक राजनीति, नवाचार और विकसित भारत-2047 के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान झारखंड भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री दीपक साहू और झारखंड के नेता प्रतिपक्ष श्री बाबूलाल मरांडी, केंद्रीय मंत्री श्री संजय सेठ एवं श्रीमती अन्नपूर्णा देवी, पूर्व मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुंडा, श्री मधु कोड़ा और श्री रघुवर दास सहित अन्य गणमान्य भी उपस्थित रहे।

श्री नितिन नवीन ने कहा कि इस देश में और इस देश की मिट्टी में यदि किसी का सबसे बड़ा योगदान है, तो वह हमारे किसान भाइयों का है। किसान खुश है, अन्नदाता खुश है, तो निश्चित रूप से घर में संपत्ति भी है और सन्मति भी है। किसानों के प्रति सरकार की बहुत स्पष्ट योजना है। सरकार किसानों को केवल लाभार्थी बनाकर नहीं रखना चाहती, बल्कि किसानों के कल्याण, कृषि रोडमैप तथा भविष्य में उनकी कमाई दुगुनी करने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। साथ ही, किसानों की खेती से जुड़े विषयों का समाधान करने और उनके साथ निरंतर संवाद बनाए रखने पर भी बल दिया जा रहा है। यही कारण है कि पिछले लंबे समय में कृषि विभाग को केवल कृषि विभाग नहीं रहने दिया गया, बल्कि उसे ‘कृषि एवं किसान कल्याण विभाग’ बनाकर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आगे बढ़ाया। प्राकृतिक कृषि और ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर को हमारी सरकार लगातार बढ़ावा दे रही है। किसानों के साथ निरंतर संवाद हो रहे हैं और यह प्रयास किया जा रहा है कि वे ऑर्गेनिक खेती के नए मापदंडों को सीख सकें। इसके लिए प्रत्येक जिला स्तर पर किसानों के साथ संवाद के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की एक बैठक में मैं भी शामिल हुआ था, जिसमें प्रत्येक जिले में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन देने के विभिन्न उपायों पर चर्चा हुई। अभी मूल्य के विषय पर भी चर्चा हुई कि ऑर्गेनिक फसलों में कई बार लागत का प्रभाव पड़ता है, तो उसे किस प्रकार समायोजित किया जाए। इस दिशा में सरकार अत्यंत संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि यदि ऑर्गेनिक खेती बढ़ेगी, तो देश के लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। साथ ही, भूमि की उर्वरता को बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी, क्योंकि लगातार रासायनिक खादों के प्रयोग के कारण जो भूमि पहले अधिक उपजाऊ थी, वह कहीं न कहीं प्रभावित हो रही है। ऐसे में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देकर भूमि को संरक्षित करने में भी सफलता प्राप्त होगी।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि अनेक ऐसे सवाल पूछे गए हैं, जिनका यदि समग्र रूप से उत्तर दिया जाए, तो सभी के विषय उसमें शामिल हो जाएंगे। आयुष्मान योजना से लेकर कौशल विकास और विकसित भारत की परिकल्पना तक कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रश्न किए गए हैं। इसके साथ ही एआई, सेमीकंडक्टर, सोलर एनर्जी को आगे बढ़ाने, डिजिटल इंडिया के विस्तार, महिलाओं के सशक्तिकरण तथा संवेदनशीलता के साथ महिलाओं को आगे बढ़ाने जैसे विषयों पर भी सवाल उठाए गए हैं। झारखंड किस प्रकार विकास का द्वार बन सकता है और प्रधानमंत्री जी की यह भावना कि जब तक पूर्वी भारत का विकास नहीं होगा तथा ‘लुक ईस्ट’ की नीति को सशक्त रूप से लागू नहीं किया जाएगा, तब तक पूरे देश के विकास को नए आयाम तक नहीं पहुँचाया जा सकता, इस विषय पर भी चर्चा हुई है। एक अत्यंत विचारोत्तेजक प्रश्न हमारे एक वरिष्ठ सीए अथवा साथी द्वारा पूछा गया कि आने वाले 20-25 वर्षों के बाद, जब हमारी आबादी में युवाओं की तुलना में 35 प्रतिशत वरिष्ठजन हो जाएंगे, तब उस ऊर्जा का सदुपयोग किस प्रकार किया जाएगा। यह निश्चित रूप से ऐसा प्रश्न है, जो आने वाले समय में हम सभी को गंभीरता से सोचने की आवश्यकता की ओर संकेत करता है। भ्रष्टाचार पर कैसे अंकुश लगाया जाए, शिक्षा को किस प्रकार बेहतर और निःशुल्क बनाया जाए तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में और अधिक प्रगति कैसे की जाए, इन सभी दिशाओं में सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। विकसित राष्ट्र के निर्माण में नई शिक्षा नीति का क्या योगदान है, इस विषय को भी वे अपने संबोधन में विस्तार से रखेंगे। अंतिम प्रश्न, जो संवाद के दौरान सुनने को मिला, यह था कि सत्य सनातन मूल्यों के साथ भारत की आध्यात्मिक शक्ति को किस प्रकार बढ़ाया जा सकता है। ये सभी प्रश्न वर्तमान समय के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। अपने पूरे संबोधन में वे इन विषयों पर विस्तार से चर्चा करेंगे और उन्हें विश्वास है कि इस प्रक्रिया में उपस्थित सभी लोगों के प्रश्नों के साथ-साथ लिखित रूप से प्राप्त अन्य सवालों को भी संबोधित करने में वे सफल रहेंगे।

श्री नवीन ने कहा कि सबसे पहले इस भूमि के बारे में हम सभी जानते हैं कि झारखंड राज्य की परिकल्पना और इसकी स्थापना के समय से ही एक ध्येय था कि इस राज्य के विकास को एक नया आयाम दिया जाए। जब श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने झारखंड राज्य की स्थापना की, तब हम सभी की यह अपेक्षा थी कि झारखंड विकास के पैमाने पर आगे बढ़े तथा अपनी विरासत और संस्कृति को उसी प्रकार आगे बढ़ाए, जैसा इस राज्य की मिट्टी, जल और जंगल का स्वभाव है। इसी स्वभाव के अनुरूप झारखंड का विकास हो, यही हमारी भावना रही है। यह वह पवित्र भूमि है, जहाँ भगवान बिरसा मुंडा, वीर शहीद सिद्धू-कान्हू, फूलो-झानो जी, बाबा तिलका मांझी जी सहित अनेक वीर शहीदों और वीर सपूतों ने अपने पूरे जीवन का समर्पण किया। उन्होंने राज्य के निर्माण और इसकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। जब हम माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प की बात करते हैं और पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल को देखते हैं, तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि हर व्यक्ति के जीवन में आवश्यक बदलाव लाने का प्रयास किया गया है। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा था कि “हम अच्छे दिन लेकर आएँगे”, तब कई लोगों ने इस पर सवाल भी उठाए थे। लेकिन यदि निष्पक्ष रूप से देखा जाए, तो हर व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने का जो संकल्प लिया गया था, उसे सरकार ने पूरा करने का कार्य किया है। इस बात को प्रमाणित करने के लिए यह तथ्य पर्याप्त है कि आज 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। यह उस संकल्प की सिद्धि का प्रमाण है, जिसे सरकार ने लिया था। आज प्रधानमंत्री अन्न योजना के माध्यम से 80 करोड़ से अधिक लोगों तक 5 किलो अनाज पहुँचाया जा रहा है। इसके पीछे सरकार की यह चिंता है कि देश का कोई भी गरीब परिवार भूखा न सोए और आगे बढ़ने के लिए उसे खाद्यान्न के अभाव जैसी किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े।

राज्यसभा सांसद ने कहा कि आज आयुष्मान भारत की चर्चा हुई और चर्चा में भाग लेने वाले अनेक लोगों ने कहा कि आयुष्मान भारत निश्चित रूप से एक सुरक्षा कवच है। हम सभी ने वह समय भी देखा है, जब गरीब परिवारों को इलाज के लिए अपने घर की जमीन और जेवरात तक गिरवी रखने पड़ते थे। कई बार वे बड़े उपचार कराने में सक्षम भी नहीं हो पाते थे और केवल स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं के कारण पूरा परिवार कर्ज के बोझ तले दब जाता था। आज यदि 60 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत से जोड़ा गया है, तो निश्चित रूप से 60 करोड़ परिवारों को ऐसे सुरक्षा कवच से जोड़ा गया है, जिसके कारण स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए उन्हें किसी के दरवाजे पर जाने या ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। यदि महिलाओं के सम्मान और संवेदनशीलता की बात की जाए, तो जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा था कि गरीबों के बैंक खाते खोले जाएंगे, तब अनेक लोगों ने इसका मजाक उड़ाया था। लोगों का कहना था कि गरीबों के पास पैसा ही नहीं होता, तो वे बैंक खाता कैसे खोलेंगे। लेकिन आज यह संतोष का विषय है कि 54 करोड़ से अधिक जनधन खाते खोले जा चुके हैं। जब लोग जनधन खाते के लाभ के बारे में पूछते हैं, तो उन्हें यह बताया जाता है कि एक समय ऐसा था, जब यह कहा जाता था कि दिल्ली से गरीबों के लिए भेजा गया एक रुपया केवल 15 पैसे के रूप में ही लाभार्थी तक पहुँचता है। लेकिन आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने यह सुनिश्चित किया कि यदि दिल्ली से एक रुपया भेजा जाए, तो वह पूरा का पूरा एक रुपया सीधे गरीब के खाते में पहुँचे। यह निश्चित रूप से जनधन खातों की व्यवस्था का ही परिणाम है। आज डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर स्कीम के माध्यम से कोई भी बिचौलिया गरीबों के खाते में आने वाले पैसे पर अधिकार नहीं कर सकता। यह डिजिटल क्रांति का एक महत्वपूर्ण युग है, जहाँ सरकार की सभी लाभकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुँच रहा है। इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार के बिचौलिये की भूमिका समाप्त हो गई है और इसका सबसे बड़ा आधार कहीं न कहीं जनधन खाते बने हैं। 

श्री नितिन नवीन ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। यह भी सच है कि सरकारी नौकरियों की अपनी सीमाएँ हैं। सरकार युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार करना चाहती है, लेकिन इन सीमाओं को भी समझती है। इसी सोच के साथ यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को विकसित करने का कार्य किया। आज देश में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स कार्यरत हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि नई पीढ़ी केवल जॉब सीकर्स नहीं, बल्कि जॉब गिवर्स बनकर उभर रही है। आज देश के युवा केवल रोजगार प्राप्त करने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले के रूप में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। यह निश्चित रूप से युवाओं की सोच और क्षमता में आए सकारात्मक बदलाव का परिणाम है। यदि यूनिकॉर्न की बात करें, तो आज देश में 125 से अधिक यूनिकॉर्न कार्यरत हैं। यह हमारे युवाओं के कौशल और उनकी उद्यमिता क्षमता का परिचायक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत का युवा अपनी उद्यमशीलता के बल पर आगे बढ़ रहा है और देश को नई दिशा देने का कार्य कर रहा है। चाहे स्टार्टअप योजना हो या मुद्रा योजना, सरकार का प्रयास अधिक से अधिक युवाओं को इन योजनाओं से जोड़ने का रहा है। मुद्रा योजना के अंतर्गत युवाओं को ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। पहले ऋण व्यवस्था का बड़ा हिस्सा बड़े ऋणों तक सीमित रहता था, लेकिन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने यह सुनिश्चित किया कि विभिन्न श्रेणियों के लिए अलग-अलग ऋण व्यवस्था विकसित की जाए। छोटे और बड़े सभी स्तरों के उद्यमियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार अवसर उपलब्ध कराए जाएँ। पहले ऋण का बड़ा हिस्सा बड़े व्यवसायियों तक ही सीमित रहता था। यह एक महत्वपूर्ण सुधार है, जिसे यहाँ उपस्थित उद्यमी भली-भाँति समझ सकते हैं। वर्ष 2014 तक देश के ऋण का बड़ा हिस्सा बड़े उद्यमियों के पास केंद्रित रहता था, लेकिन आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ऋण व्यवस्था को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित कर अधिक समावेशी बनाया। इसका परिणाम यह हुआ कि आज देश के युवा और छोटे उद्यमी भी बड़े पैमाने पर मुद्रा ऋण का लाभ लेकर आगे बढ़ रहे हैं तथा देश के विकास और प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि आज एआई, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक का युग है। हमें यह बताते हुए प्रसन्नता है कि जब भारत में एआई समिट आयोजित हुई, तब विश्व की अनेक बड़ी एआई कंपनियाँ भारत आईं और उन्होंने एक स्वर में कहा कि वे भारत को एआई का एक प्रमुख केंद्र बनाना चाहती हैं। भारत ने इसके लिए अवसर भी प्रदान किया और एक उपयुक्त मंच भी उपलब्ध कराया। हमें इस बात का दुःख अवश्य है कि कुछ लोगों ने इस विषय पर भी राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया। जब विश्व के 25 से 30 से अधिक बड़े राष्ट्राध्यक्ष और अनेक प्रमुख कंपनियाँ भारत आईं, तब यह स्पष्ट था कि भारत ने एआई के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मंच तैयार किया है। इसके बावजूद कुछ लोगों ने राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण इस आयोजन के बारे में गलत संदेश देने का प्रयास किया। भारत का लोकतंत्र निरंतर मजबूत हुआ है और इतना सशक्त है कि उसका संदेश ऐसे छोटे-छोटे विरोधों से निर्धारित नहीं होता। एआई समिट की सफलता से आने वाले समय में एआई क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी। हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तथा असम के मुख्यमंत्री के साथ हुई चर्चाओं में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि विभिन्न राज्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित करने के लिए आवश्यक भूमि और इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। चुनाव के दौरान असम प्रवास के समय भी इस विषय पर चर्चा हुई थी। आने वाले समय में भारत एआई और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में एक बड़ा वैश्विक केंद्र बनकर उभरेगा और इस दिशा में सरकार निरंतर आगे बढ़ रही है।

श्री नवीन ने कहा कि अभी कुछ समय पहले तक भारत के बारे में यह कहा जाता था कि भारत मैनपावर का देश है। मैनपावर को एक संसाधन के रूप में देखा जाता था और अन्य देश भी भारत को मुख्य रूप से मैनपावर के स्रोत के रूप में ही देखते थे। लोगों का मानना था कि भारत केवल मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाला देश है। लेकिन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने स्किल डेवलपमेंट पर जिस प्रकार से बल दिया और ‘स्किल इंडिया’ को जिस प्रकार से आगे बढ़ाया, उससे देश में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। स्किल इंडिया के सशक्त होने का परिणाम यह हुआ है कि आज भारत विनिर्माण क्षेत्र में एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है। सैमसंग जैसी बड़ी मोबाइल निर्माता कंपनी के संदर्भ में भी यह परिवर्तन स्पष्ट दिखाई देता है। एक समय ऐसा था जब मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भारत 12वें या 14वें स्थान पर था, जबकि आज भारत विश्व में मोबाइल विनिर्माण के क्षेत्र में दूसरे स्थान पर पहुँच चुका है। इसके पीछे ‘मेक इन इंडिया’ की अवधारणा को यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता दिए जाने की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही कारण है कि हाल ही में प्रस्तुत बजट में विनिर्माण क्षेत्र को विशेष प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया। इसके तहत लगभग 20,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन के माध्यम से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे देश में घरेलू उत्पादन को नई शक्ति मिलेगी और इसके माध्यम से राज्य तथा देश के युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में नए-नए प्रयोगों के साथ उद्यमिता को आगे बढ़ाने का अवसर प्राप्त होगा। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक युवाओं को नवाचार और उद्यमशीलता के लिए प्रोत्साहित किया जाए, ताकि वे देश के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।

राज्यसभा सांसद ने कहा कि अभी महिला शक्ति की चर्चा हो रही थी। हमारी संस्कृति में सदैव नारी को पूजनीय स्वरूप में देखा गया है और नारी शक्ति की क्षमता का पूर्ण उपयोग करने की भावना रही है। हमारा मानना है कि जब कोई महिला सशक्त होकर आगे बढ़ती है, तो वह केवल एक नहीं, बल्कि दो-दो परिवारों को मजबूत करने का कार्य करती है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सदैव महिला शक्ति का सम्मान किया है। यही कारण है कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पूरे देश में महिलाओं को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप 3 करोड़ से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने में सफलता प्राप्त हुई है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर देश के विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। यदि महिलाएँ उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ती हैं, तो वे अपने परिवार को संबल प्रदान करती हैं, अपने राज्य को मजबूत बनाती हैं और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। आज 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवार स्वयं सहायता समूहों से जुड़े हुए हैं, जहाँ छोटे-छोटे उद्योगों और कुटीर उद्योगों के माध्यम से महिलाएँ आगे बढ़कर कार्य कर रही हैं। इससे वे अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा और परिवार के आर्थिक सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ की बात की और देश में पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत महिलाओं को अधिकार प्राप्त हुए, तब यह देखा गया कि महिलाओं ने पंचायतों और नगर निकायों में अपने प्रतिनिधित्व को सशक्त रूप से स्थापित किया। इसका सकारात्मक परिणाम भी सामने आया और उनकी भागीदारी ने पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यद्यपि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का पूर्ण लाभ अभी प्राप्त नहीं हुआ है, फिर भी सरकार का संकल्प स्पष्ट है कि देश की आधी आबादी को उसका पूरा सम्मान और अधिकार मिले। महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने का जो संकल्प लिया गया है, उसे आने वाले समय में अवश्य पूरा किया जाएगा।

श्री नितिन नवीन ने कहा कि जब बुनियादी ढाँचे और मूलभूत सुविधाओं में परिवर्तन की बात आती है, तो यह उल्लेख करना आवश्यक है कि आज 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। अभी एक साथी ने महिलाओं के विकास में संवेदनशीलता के विषय में प्रश्न किया था। हमारा मानना है कि इससे बड़ी संवेदनशीलता का उदाहरण शायद ही कोई हो सकता है। यदि 12 करोड़ शौचालयों का निर्माण हुआ है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ और सम्मान महिलाओं को प्राप्त हुआ है। स्वतंत्रता के 60-65 वर्षों बाद भी इस विषय पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया था। लेकिन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की संवेदनशीलता को देखिए कि उन्होंने इस विषय को केवल एक सामान्य आवश्यकता नहीं माना, बल्कि इसे एक महत्वपूर्ण अभियान, एक संकल्प और एक जन-आंदोलन का रूप दिया। आज 12 करोड़ शौचालयों का निर्माण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि महिलाओं के सम्मान के प्रति माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और सरकार की सोच कितनी गंभीर और संवेदनशील है। यदि महिलाओं का सम्मान सुनिश्चित नहीं किया जाएगा, तो उनके अधिकारों को भी पूरी तरह स्थापित नहीं किया जा सकेगा। इसलिए महिलाओं का सम्मान, उनके अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प सरकार की प्राथमिकता है और इसी दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। यदि गरीबों के लिए 4 करोड़ प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण किया गया है, तो यह भी सामाजिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। कई लोग पूछते हैं कि गरीबों को गरीबी रेखा से ऊपर कैसे लाया जा सकता है। ऐसे में यदि पिछले 12 वर्षों में 4 करोड़ गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराया गया है, तो इसका प्रभाव आसानी से समझा जा सकता है। जिस व्यक्ति के सिर पर पक्की छत न हो, जो फूस और झोपड़ी में जीवन बिताता हो और बरसात के दिनों में कठिन परिस्थितियों का सामना करता हो, उसके जीवन में पक्के घर का क्या महत्व होता है, इसका अनुमान सहज रूप से लगाया जा सकता है। आज जब ऐसे परिवारों को पक्का घर मिला है, तो इससे उनके आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और उनके जीवन में सम्मान तथा सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद उज्ज्वला योजना की शुरुआत की गई। जब उज्ज्वला गैस योजना लाई गई, तब देशभर की माता-बहनों ने आगे बढ़कर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को आशीर्वाद दिया। उस समय बहुत से लोगों को यह पूरी तरह समझ में भी नहीं आया था कि उज्ज्वला योजना का प्रभाव कितना व्यापक हो सकता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाते समय महिलाओं को जिस प्रकार धुएँ का सामना करना पड़ता था और उसके कारण उनके स्वास्थ्य पर जो प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था, वह किसी से छिपा नहीं था। हम सभी ने अपनी माता-बहनों को स्टोव और लकड़ी के चूल्हों पर भोजन बनाते हुए देखा है। सरकार की संवेदनशीलता का परिचय इस बात से मिलता है कि 10 करोड़ उज्ज्वला गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। इससे न केवल माता-बहनों को सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिला, बल्कि उनके स्वास्थ्य की रक्षा करने और उनके जीवन को बेहतर बनाने का भी कार्य हुआ। छोटे व्यवसायों और रेहड़ी-पटरी वालों के विषय में भी विशेष रूप से चर्चा की जानी चाहिए। पहले शायद ही कभी इस वर्ग के जीवन और चुनौतियों पर गंभीरता से विचार किया जाता था। बहुत कम लोगों ने यह सोचा होगा कि ठेला लगाने वाले, खोंचा चलाने वाले या छोटे दुकानदार किस प्रकार अपना जीवनयापन करते हैं। लेकिन आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने इस वर्ग को भी अपने विकास एजेंडे में शामिल किया। रेहड़ी-पटरी वालों को 10,000 रुपये का प्रारंभिक ऋण उपलब्ध कराना शुरू किया गया। जो व्यक्ति इस ऋण को समय पर लौटाता है, उसे 20,000 रुपये का ऋण मिलता है और जो 20,000 रुपये का ऋण लौटाता है, उसे 40,000 रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इस प्रकार लगभग 75 लाख लोगों को रेहड़ी-पटरी योजना से जोड़ा गया है। यह सरकार की व्यापक संवेदनशीलता और दूरदृष्टि का परिचायक है। हम अपने आसपास अनेक ऐसे लोगों को देखते हैं, जो छोटे स्तर पर व्यवसाय कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन अक्सर उनके संघर्षों पर ध्यान नहीं जाता। एक छोटा विक्रेता अपने पूरे परिवार का जीवन उसी व्यवसाय के माध्यम से चलाता है। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सोच का परिणाम है कि ऐसे लाखों लोगों को अवसर प्रदान किया गया और आज वे उद्यमी तथा व्यापारी के रूप में आगे बढ़ रहे हैं। इस योजना को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है, ताकि गरीब परिवारों से जुड़े अधिक से अधिक लोगों को सशक्त बनाकर उन्हें उचित संबल प्रदान किया जा सके।

श्री नवीन ने कहा कि जब डिजिटल इंडिया की बात शुरू हुई थी, तब भी उसका मजाक उड़ाया गया था। हमारा मानना है कि जब-जब विपक्ष के साथी उनका उपहास करते हैं, तब-तब देश की जनता और अधिक आशीर्वाद तथा स्नेह प्रदान करती है। जब डिजिटल ट्रांसफर की बात सामने आई, तब यह कहा गया कि देश के लोगों को मोबाइल का उपयोग नहीं आता, वे पढ़े-लिखे नहीं हैं, ऐसे में डिजिटल ट्रांसफर कैसे संभव होगा। लेकिन आज भारत विश्व में सबसे अधिक डिजिटल लेन-देन करने वाला देश बन चुका है। एक वर्ष में 314 लाख करोड़ रुपये का डिजिटल ट्रांसफर किया गया है। यह केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि उस परिवर्तन और क्रांति का प्रतीक है, जिसकी दिशा में देश आगे बढ़ रहा है। अभी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की चर्चा हो रही थी और इसके माध्यम से 51 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाए गए हैं। यदि यही राशि पुरानी व्यवस्था के तहत जाती, जिसके बारे में कभी कहा जाता था कि एक रुपये में से केवल 15 पैसे ही लाभार्थी तक पहुँचते हैं, तो शेष राशि विभिन्न स्तरों पर बिचौलियों के पास चली जाती। लेकिन आज 51 लाख करोड़ रुपये सीधे गरीबों के खातों में पहुँचे हैं। यह आँकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि किस प्रकार गरीबों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। अक्सर लोग पूछते हैं कि अच्छे दिन कैसे आए और उसका क्या अर्थ है। अच्छे दिन केवल एक नारा नहीं, बल्कि वह परिवर्तन है, जिसे जमीन पर उतारकर लोगों के जीवन में महसूस कराया गया है। सरकार ने लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का कार्य किया है। अभी बुनियादी ढाँचे और रेलवे के विकास की चर्चा हो रही थी। आज पूरे देश में 164 वंदे भारत ट्रेनें संचालित की जा रही हैं। इस विषय का उल्लेख प्रदेश अध्यक्ष द्वारा भी किया गया था। मैं स्वयं अपने छात्र जीवन में पटना से दिल्ली तथा पटना से रांची की यात्राएँ करता था और उस समय रेलवे की स्थिति को निकट से देखा है। 

राज्यसभा सांसद ने कहा कि बीआईटी मेसरा आते-जाते समय अक्सर यह कहा जाता था कि ट्रेन की अपेक्षा बस से यात्रा करना अधिक सुविधाजनक है, क्योंकि ट्रेनों में अनेक कठिनाइयाँ होती थीं। हाल ही में मैं राजधानी एक्सप्रेस से पटना से दिल्ली की यात्रा करके आया और आज जो परिवर्तन दिखाई देता है, उसे कोई भी सामान्य यात्री आसानी से महसूस कर सकता है। ट्रेनों में स्वच्छता बढ़ी है, सुविधाओं का विस्तार हुआ है और यात्रियों के अनुभव में उल्लेखनीय सुधार आया है। केवल सुविधाओं तक ही विकास सीमित नहीं रहा है, बल्कि रेलवे के आधारभूत ढाँचे को भी सुदृढ़ किया गया है। रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। एक समय था जब ट्रेनों के घंटों विलंब से चलने की शिकायतें आम थीं। लोग अक्सर एक, पाँच या छह घंटे तक ट्रेनों के विलंबित होने की चर्चा करते थे। पहले केवल नई ट्रेनें शुरू करने पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में रेलवे के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया। 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि रेलवे लाइनों के दोहरीकरण पर व्यय की गई है। साथ ही, ब्रॉडगेज रेलवे नेटवर्क का 99 प्रतिशत विद्युतीकरण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, देश के 26 शहरों में मेट्रो नेटवर्क प्रारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियाँ स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि रेलवे क्षेत्र में किस प्रकार व्यापक और संरचनात्मक विकास हुआ है।

श्री नितिन नवीन ने कहा कि कुछ विषय ऐसे होते हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े होते हैं। देश ने वह समय भी देखा है, जब सैनिकों के साथ गंभीर घटनाएँ होती थीं और दिल्ली में बैठी सरकार मौन बनी रहती थी। लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। यदि कोई भारत की ओर एक ईंट भी फेंकता है, तो उसका जवाब दृढ़ता के साथ दिया जाता है। देश की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। मैं भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता रहा हूं  और राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में भी मैंने कार्य किया है। वर्ष 2011 में राष्ट्रीय एकता यात्रा के दौरान मैं कोलकाता से कश्मीर तक की यात्रा में शामिल थे। उस समय युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अनुराग ठाकुर थे और जम्मू-कश्मीर में संगठनात्मक समन्वय तथा लोगों को जोड़ने की जिम्मेदारी मेरे पास थी। जब मैं कश्मीर के लाल चौक पहुंचा, तो वहाँ के प्रशासन को यह जानकारी देने गए कि उनकी पूरी टीम 26 जनवरी को लाल चौक पर तिरंगा फहराने आ रही है। प्रशासन ने यह कहा कि यदि वहाँ तिरंगा फहराया गया, तो घाटी में अशांति फैल सकती है। उस समय वहाँ के मुख्यमंत्री ने भी ऐसा ही बयान दिया था कि कश्मीर में तिरंगा फहराने से अशांति फैल जाएगी। जब हम लाल चौक पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, तब हमें एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने मुझे गहराई से प्रभावित किया। 22 जनवरी 2011 को लाल चौक पर पाकिस्तान का झंडा लहराता हुआ दिखाई दे रहा था। वहाँ मौजूद प्रशासन और सुरक्षा तंत्र इस स्थिति पर मौन था। इसके बावजूद उनकी टीम ने अपने कार्यक्रम को आगे बढ़ाया और अपने संकल्प के अनुसार कार्य किया। वर्ष 2014 के बाद परिस्थितियों में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। आज वही लाल चौक तिरंगे से आच्छादित दिखाई देता है और यह दृश्य गर्व की अनुभूति कराता है। यह उस परिवर्तन का प्रतीक है, जिसे देश ने अनुभव किया है। आज कश्मीर में पहले जैसी परिस्थितियाँ नहीं हैं और यह बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा तथा एकता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि मैं वर्ष 2012 की एक घटना का उल्लेख करना चाहता हूं। वर्ष 1962 के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से, युद्ध के 50 वर्ष पूर्ण होने पर, मैं भारतीय जनता युवा मोर्चा के साथियों के साथ गुवाहाटी से तवांग तक की यात्रा पर गया था। जब मैं तवांग के सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंचा, तो मैंने देखा कि भारतीय सीमा क्षेत्र में कच्ची सड़कें थीं। प्रारंभ में मुझे लगा कि यह पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण स्वाभाविक स्थिति होगी। लेकिन जब हम सीमा तक पहुँचे, तो हमने देखा कि दूसरी ओर चीन की तरफ पक्की सड़कें बनी हुई थीं। यह देखकर मैंने वहाँ तैनात सैन्य अधिकारियों से पूछा कि भारत की ओर कई किलोमीटर तक कच्ची सड़कें हैं, जबकि सीमा के उस पार बेहतर सड़क व्यवस्था दिखाई दे रही है, इसका क्या कारण है। इस प्रश्न के उत्तर में वहाँ मौजूद सैन्य अधिकारियों ने बताया कि लंबे समय तक यह सोच बनी रही कि वर्ष 1962 के युद्ध के दौरान चीन की सेना दुर्गम पहाड़ियों और कठिन मार्गों के माध्यम से आगे बढ़ी थी तथा पर्याप्त लॉजिस्टिक सहायता नहीं मिलने के कारण उसे कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। इसी कारण वर्षों तक यह धारणा बनी रही कि सीमावर्ती क्षेत्रों में अत्यधिक बुनियादी ढाँचे का विकास न किया जाए, ताकि दुर्गमता बनी रहे। यह उस समय की सरकार का दृष्टिकोण था। उस समय यह देखकर मुझे आश्चर्य हुआ कि स्वतंत्रता के दशकों बाद भी सीमावर्ती क्षेत्रों में आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का पर्याप्त विकास नहीं हुआ था। वर्ष 2014 के बाद परिस्थितियों में परिवर्तन देखने को मिला। जब मैं वर्ष 2017 में पुनः उस क्षेत्र में गया, तो सीमा तक सड़क संपर्क विकसित हो चुका था और वहाँ आवश्यक सामरिक बुनियादी ढाँचे का विस्तार भी हुआ था। यह नए भारत की सोच का प्रतीक है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में यह स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाया गया है कि देश की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा, बुनियादी ढाँचे के विकास और सैनिकों के मनोबल को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

श्री नवीन ने कहा कि आज देशभर में सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर बॉर्डर फेंसिंग का कार्य किया जा रहा है। भारत आज 38,000 करोड़ रुपये से अधिक का रक्षा निर्यात कर रहा है और नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई में भी महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की गई है। नक्सलवाद की जड़ें झारखंड में भी लंबे समय तक काफी मजबूत रही थीं, लेकिन यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा यह संकल्प लिया गया कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त किया जाएगा। मैं लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के प्रभारी रहा हूं और मैंने स्वयं बस्तर क्षेत्र की परिस्थितियों को निकट से देखा है। जिस क्षेत्र में कभी नक्सलवाद और उग्रवाद की गंभीर घटनाएँ होती थीं, वहाँ आज स्थिति में व्यापक परिवर्तन आया है। इस दिशा में सरकार की सफलता राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अभी एक प्रश्न सत्य सनातन मूल्यों और भारतीय संस्कृति के संबंध में भी सामने आया था। भारतीय जनता पार्टी और जनसंघ के काल से जिन संकल्पों को लेकर कार्य किया गया, उन्हें पूरा करने का प्रयास किया गया है। लंबे समय तक लोगों द्वारा यह प्रश्न पूछा जाता था कि राम मंदिर कब बनेगा। अंततः वह समय भी आया जब तिथि निर्धारित हुई और अयोध्या में 500 वर्षों के संघर्ष के बाद भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण संभव हुआ। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सनातन परंपराओं और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं। एक समय ऐसा भी था जब कुछ लोगों द्वारा भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर प्रश्न उठाए गए, राम सेतु पर सवाल किए गए और न्यायालय में भी विभिन्न प्रकार के तर्क प्रस्तुत किए गए। यह सब देश ने देखा है। लेकिन आज यह गर्व का विषय है कि भारतीय संस्कृति, आस्था और विरासत से जुड़े विषयों को सम्मानपूर्वक स्थापित किया गया है। 

राज्यसभा सांसद ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने राजनीतिक संकल्पों के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय विरासत को भी सुदृढ़ करने का कार्य किया है। यही भारतीयता और सनातन परंपरा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। आज चाहे काशी विश्वनाथ हो, महाकाल हो या केदारनाथ धाम, इन सभी स्थलों से देशवासियों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। बिहार और झारखंड के लोगों में काशी जाने की परंपरा बहुत पुरानी रही है। एक समय था जब श्रद्धालुओं को काशी की संकरी गलियों से होकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए जाना पड़ता था। अनेक सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच दर्शन करने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था और कई बार ऐसा अनुभव होता था कि अपने ही देश में अपने आराध्य के दर्शन के लिए अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आज जब गंगा तट पर काशी विश्वनाथ धाम का स्वरूप दिखाई देता है, तो प्रत्येक भारतवासी और प्रत्येक सनातन परंपरा में आस्था रखने वाले व्यक्ति को गर्व की अनुभूति होती है। यह केवल एक धार्मिक स्थल का विकास नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और विरासत के पुनर्जागरण का प्रतीक है। इसी प्रकार महाकाल लोक और केदारनाथ धाम का विकास भी केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के संरक्षण तथा संवर्धन से जुड़ा हुआ है। इन स्थलों के पुनरुत्थान के लिए जिस प्रकार कार्य किया गया है, वह देश की सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हम सभी का यह दायित्व है कि विकास और विरासत दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ें। देश के समग्र विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और विरासत को संरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है।

श्री नितिन नवीन ने कहा कि अभी पूर्ववर्ती सरकारों और वर्तमान सरकार की कार्यशैली को लेकर चर्चा हो रही थी। 10 वर्षों के यूपीए शासन और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 12 वर्षों के कार्यकाल की तुलना देश की जनता स्वयं स्पष्ट रूप से कर सकती है। इन दोनों कालखंडों के बीच सबसे बड़ा अंतर वातावरण और दृष्टिकोण का है। एक समय ऐसा था जब पूरे देश में निराशा का माहौल था और भ्रष्टाचार को लेकर व्यापक चिंताएँ थीं। इसके विपरीत आज देश में आशा, विश्वास और अपेक्षाओं के साथ आगे बढ़ने का वातावरण है। मोदी सरकार ने देश को निराशा के माहौल से निकालकर आशा और विश्वास के वातावरण में लाने का कार्य किया है। विकास के विभिन्न मानकों पर भी इस परिवर्तन को देखा जा सकता है। एक समय ऐसा था जब रेलवे अवसंरचना के विस्तार की गति सीमित थी, जबकि आज रेलवे नेटवर्क के विस्तार और बुनियादी ढाँचे के विकास पर कहीं अधिक गति और व्यापकता के साथ कार्य किया जा रहा है। ऐसे अनेक आँकड़े झारखंड तथा अन्य राज्यों के संदर्भ में भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं, जो विकास की इस गति को दर्शाते हैं। वर्ष 2016 में झारखंड के 22 जिले नक्सल प्रभावित थे, जबकि आज स्थिति में व्यापक परिवर्तन आया है। 31 मार्च 2026 तक झारखंड के प्रत्येक जिले को नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। यह सरकार की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा विकास दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में लोगों ने यह प्रश्न उठाया कि इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में हमारे चिकित्सकों का अनुपात कैसे बढ़ेगा और इसे सही रूप से कैसे संतुलित किया जा सकेगा। यह बहुत गंभीर प्रश्न है। देश में कल तक केवल 7 एम्स थे, जबकि आज 21 से अधिक एम्स बन चुके हैं। आज हजारों की संख्या में मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं और अनेक विश्वविद्यालयों की स्थापना हो रही है। साथ ही, हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की कल्पना को साकार करने की दिशा में कार्य आगे बढ़ रहा है। इसी राज्य में पहले एक भी एम्स नहीं था, जबकि आज झारखंड का अपना एम्स देवघर में है। बीआईटी रांची और आईआईटी आईएसएम धनबाद जैसे संस्थान बड़े शिक्षा केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। झारखंड वह भूमि है, जो पहले से ही शिक्षा के लिए जानी जाती रही है, जहाँ बड़ी-बड़ी संस्थाएँ थीं और जहाँ शिक्षा प्राप्त करने के लिए पूरे देश से लोग आते थे। झारखंड के उस गौरवशाली इतिहास को और अधिक मजबूत करने का कार्य उनकी सरकार करेगी। इसी दिशा में वर्ष 2014 में झारखंड में केवल 7 एकलव्य विद्यालय थे, जबकि आज 91 से अधिक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय बनकर तैयार हो चुके हैं। यह दर्शाता है कि अब झारखंड के पास केवल एक नेतरहाट या कुछ नवोदय विद्यालय ही नहीं हैं, बल्कि ऐसे अनेक एकलव्य विद्यालय भी हैं, जो यहाँ के युवाओं और छात्रों को अपना भविष्य सँवारने तथा निर्माण करने की दिशा में सशक्त रूप से आगे बढ़ा रहे हैं।

श्री नवीन ने कहा कि आज हम सभी को अटल बिहारी वाजपेयी जी के सपनों का झारखंड बनाना है। हम हमेशा कहते हैं कि जिस झारखंड को हमने बनाया है, उसे हम ही सँवारेंगे और उसकी विरासत तथा संस्कृति के साथ विकास के नए मापदंड स्थापित करते हुए आगे ले जाने का कार्य करेंगे। आज एक ऐसी परिस्थिति भी है, जिसकी ओर वह सभी का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। आज का युवा निश्चित रूप से देश के निर्माण के लिए काम करना चाहता है और अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए प्रयासरत है। लेकिन कुछ लोगों ने इस देश के युवाओं को ‘एंटी एस्टेब्लिशमेंट’ का नाम दे दिया है। देश का युवा इनोवेशन के लिए जाना जाता है और देश का युवा क्रिएशन के लिए जाना जाता है। ऐसे देश में युवाओं के लिए ‘एंटी एस्टेब्लिशमेंट’ शब्द का प्रयोग कभी नहीं हो सकता। भारत का युवा निर्माण करना जानता है और अनुशासन के साथ देश के निर्माण के लिए कार्य करेगा। आज 2 लाख स्टार्टअप बने हैं, अनेक मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज बन रहे हैं, बड़ी संख्या में चिकित्सक तैयार हो रहे हैं, देश यूनिकॉर्न की दिशा में आगे बढ़ रहा है और आईटी का हब बनने की ओर अग्रसर है। यह सब कहीं न कहीं देश के युवाओं के पुरुषार्थ का परिणाम है और उसी के बल पर देश आगे बढ़ रहा है। जो लोग देश के युवाओं को नेगेटिव पॉलिटिक्स की ओर ले जाना चाहते हैं, उन्हें हम चेतावनी देते हैं कि भारत का युवा पॉजिटिव पॉलिटिक्स करेगा। लोकतंत्र के आधार पर हर प्रकार का विरोध निश्चित रूप से किया जाएगा, लेकिन लोकतंत्र के मापदंडों को समाप्त नहीं होने दिया जाएगा। कुछ लोग विदेश में बैठकर यह सोच लेते हैं कि वे भारत के युवाओं को दिशा दे देंगे, लेकिन भारत का युवा किसान की चौपाल में रहता है, गाँव की पगडंडियों में रहता है, कोचिंग इंस्टिट्यूट में रहता है और कॉलेज के कैंपस में रहता है। भारत का युवा दिल्ली में बैठकर चंद लोगों की मुट्ठी में कठपुतली बनकर आगे बढ़ने वाला नहीं है।

राज्यसभा सांसद ने कहा कि आज देश के लोगों को एक बहुत बड़ा संदेश मिला है। डिजिटल का उपयोग सकारात्मक रूप से किया जा सकता है, डिजिटल का उपयोग देश और युवाओं के निर्माण के लिए हो सकता है तथा डिजिटल का उपयोग देश की युवा क्रांति को नेगेटिव दिशा में ले जाने के लिए कभी नहीं हो पाएगा। देश के युवाओं को जागने की आवश्यकता है। यदि हम 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना चाहते हैं, तो हम सभी को अपने कालखंड का पुरुषार्थ करना पड़ेगा। हम हमेशा मानते हैं कि चाहे राजनीति हो या व्यक्तिगत जीवन, कभी भी शार्टकट में विश्वास नहीं करना चाहिए। कोई भी शार्टकट किसी व्यक्ति को उसकी मंजिल तक नहीं पहुँचा सकता। इससे तत्काल सुख मिल सकता है, लेकिन उसका परिणाम हमेशा दुःखद होता है। श्री नवीन ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि अपने जीवन को क्रिकेट की उस पिच की तरह समझना चाहिए, जहाँ समय बिताना पड़ता है। जितना अधिक समय क्रिकेट की पिच पर बिताया जाता है, उतनी ही अधिक सफलता प्राप्त होती है। रांची मेरी जन्मस्थली है। मैं झारखंड के विकास के प्रति स्वयं भी संकल्पित हूं  और आने वाले समय में हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारी सरकार झारखंड के विकास तथा झारखंड के लोगों के जीवन में उत्थान के लिए संकल्पबद्ध होकर आगे बढ़े।