देश में कोयला उत्पादन 1 अरब टन के पार हुआ

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भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकता के लगभग 55 प्रतिशत के लिए कोयले पर निर्भर है और देश की लगभग 74 प्रतिशत बिजली कोयला आधारित बिजली संयंत्रों द्वारा उत्पन्न की जाती है

भारत ने कोयला उत्पादन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 20 मार्च, 2025 को एक अरब टन (बीटी) को पार कर गया। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि पिछले वित्त वर्ष के 997.83 मिलियन टन (एमटी) कोयला उत्पादन से 11 दिन पहले प्राप्त की गई है, जो भारत की अपनी ऊर्जा मांगों को सुनिश्चित करने और औद्योगिक, कृषि और समग्र आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति को चिन्हित करती है।

भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकता के लगभग 55 प्रतिशत के लिए कोयले पर निर्भर है और देश की लगभग 74 प्रतिशत बिजली कोयला आधारित बिजली संयंत्रों द्वारा उत्पन्न की जाती है।

रिकॉर्ड कोयला उत्पादन सरकार के रणनीतिक सुधारों और नीतियों को दर्शाता है, जैसेकि खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम में संशोधन और कोयला ब्लॉकों की वाणिज्यिक नीलामी के माध्यम से कोयला क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलना। इन पहलों से घरेलू कोयले की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे आयात में उत्तरोत्तर कमी आई है और विदेशी मुद्रा बचत में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।

अप्रैल से दिसंबर 2024 तक भारत के कोयला आयात में 8.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसके परिणामस्वरूप पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में लगभग 5.43 अरब डॉलर (42,315.7 करोड़ रुपए) की विदेशी मुद्रा की बचत हुई।

देश के लिए गौरव का क्षण: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 21 मार्च को देश की एक अरब टन कोयला उत्पादन की ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता के प्रति देश की महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। श्री मोदी ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे ‘देश के लिए गौरव का क्षण’ बताया तथा इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के पूर्ण समर्पण और कड़ी मेहनत की सराहना की।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी किशन रेड्डी ने एक्स पोस्ट में बताया कि देश ने एक अरब टन कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है।

केंद्रीय मंत्री के एक्स पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री मोदी ने एक्स पर लिखा, “भारत के लिए गर्व का क्षण! एक अरब टन कोयला उत्पादन को पार करना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, जो ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को उजागर करती है। यह उपलब्धि इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के समर्पण और कड़ी मेहनत को भी दर्शाती है।”