प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 23-24 जुलाई को ब्रिटेन की आधिकारिक यात्रा की। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री माननीय सर कीर स्टारर ने बकिंघमशायर स्थित यूके के प्रधानमंत्री के कंट्री रेजिडेंस ‘चेकर्स’ पहुंचने पर श्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान भारत और ब्रिटेन ने ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे आर्थिक साझेदारी और अवसरों का एक नया युग शुरू हुआ। इस समझौते ने ब्रिटेन में भारत के 99% निर्यात के लिए अभूतपूर्व शुल्क-मुक्त पहुंच सुनिश्चित की है, जो लगभग पूरे व्यापार क्षेत्र को कवर करता है। उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 56 अरब अमेरिकी डॉलर का है, जिसे 2030 तक दोगुना करने का संयुक्त लक्ष्य है। साथ ही, श्री मोदी और श्री स्टारर ने द्विपक्षीय संबंधों के सारे पहलुओं की समीक्षा की और भारत-यूके विजन 2035 को अपनाया
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से मुलाकात
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 24 जुलाई को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री माननीय सर कीर स्टारर से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने अकेले बैठक के साथ-साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी की।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने ऐतिहासिक भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं में द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, आर्थिक सहयोग और रोजगार सृजन को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाएगा। दोनों पक्षों ने एक डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन पर बातचीत करने पर भी सहमति व्यक्त की, जो सीईटीए के साथ प्रभावी होगा और वाणिज्यिक इकाइयों के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देकर और व्यापार करने की लागत को कम करके दोनों देशों के पेशेवरों और सेवा उद्योग को सुविधा प्रदान करेगा।
पूंजी बाजारों और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने रेखांकित किया कि दोनों पक्ष भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र, गुजरात में गिफ्ट सिटी और यूके के जीवंत वित्तीय इकोसिस्टम के बीच अधिक बातचीत को बढ़ावा देने के लिए काम कर सकते हैं।
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के सारे पहलुओं की समीक्षा की और भारत-यूके विजन 2035 को अपनाया। विजन 2035 दस्तावेज़ अर्थव्यवस्था और विकास, प्रौद्योगिकी, नवाचार, अनुसंधान और शिक्षा, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई, स्वास्थ्य और एक दूसरे के बीच संबंधों के प्रमुख क्षेत्रों में अगले दस वर्षों के लिए संबंधों को आगे बढ़ाकर व्यापक रणनीतिक साझेदारी में अधिक महत्वाकांक्षा और नई गति का संचार करेगा।
रक्षा उत्पादों के सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन में सहयोग
दोनों नेताओं ने दोनों देशों के साथ-साथ वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए रक्षा उत्पादों के सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन में सहयोग को बढ़ावा देने हेतु रक्षा औद्योगिक रोडमैप को अंतिम रूप दिए जाने का भी स्वागत किया। दोनों देशों के सशस्त्र बलों की नियमित भागीदारी का स्वागत करते हुए उन्होंने गहरी होती रक्षा और सुरक्षा साझेदारी पर संतोष व्यक्त किया।
दोनों नेताओं ने नई और उभरती प्रौद्योगिकियों में बढ़ते सहयोग पर संतोष व्यक्त किया और प्रौद्योगिकी और सुरक्षा पहल (टीएसआई) के तेज कार्यान्वयन का आह्वान किया, जो दूरसंचार, महत्वपूर्ण खनिज, एआई, जैव प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, उन्नत सामग्री और क्वांटम पर केंद्रित है।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने शिक्षा क्षेत्र में भारत और यूके के बीच बढ़ती साझेदारी का भी स्वागत किया, जहां छह यूके के विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत भारत में परिसर खोलने के लिए काम कर रहे हैं। साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय, जिसने 16 जून, 2025 को गुरुग्राम में अपना परिसर खोला, एनईपी के तहत भारत में अपना परिसर खोलने वाला पहला विदेशी विश्वविद्यालय है।
श्री मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले के मद्देनजर भारत के लोगों के प्रति प्रधानमंत्री श्री स्टारर के मजबूत समर्थन और एकजुटता के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
यात्रा के दौरान दोनों पक्षों द्वारा निम्न दस्तावेजों पर हस्ताक्षर/अपनाया गया:
व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए)
भारत-यूके विजन 2035
रक्षा औद्योगिक रोडमैप
प्रौद्योगिकी और सुरक्षा पहल पर वक्तव्य
केंद्रीय जांच ब्यूरो, भारत और यूके की राष्ट्रीय अपराध एजेंसी के बीच एमओयू
व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हुए हस्ताक्षर
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में 24 जुलाई को व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर करके भारत और ब्रिटेन ने एक मज़बूत आर्थिक साझेदारी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। इस समझौते पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और व्यापार एवं व्यापार राज्य मंत्री श्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने दोनों प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।
यह मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत के जुड़ाव में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और आर्थिक एकीकरण को मज़बूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दुनिया की क्रमशः चौथी और छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और ब्रिटेन के द्विपक्षीय संबंध वैश्विक आर्थिक महत्व रखते हैं। भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर 6 मई, 2025 को घोषित वार्ता के सफल समापन के बाद हुए हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 56 अरब अमेरिकी डॉलर का है, जिसे 2030 तक दोगुना करने का संयुक्त लक्ष्य है।
सीईटीए ने ब्रिटेन को भारत के 99% निर्यात के लिए अभूतपूर्व शुल्क-मुक्त पहुंच सुनिश्चित की है, जो लगभग पूरे व्यापार क्षेत्र को कवर करता है। इससे कपड़ा, समुद्री उत्पाद, चमड़ा, जूते, खेल के सामान, खिलौने और रत्न एवं आभूषण जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों के साथ-साथ इंजीनियरिंग सामान, ऑटो कंपोनेंट और जैविक रसायन जैसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के एक मज़बूत चालक ‘सेवा क्षेत्र’ को भी व्यापक लाभ प्राप्त होंगे। यह समझौता आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं, वित्तीय और कानूनी सेवाओं, पेशेवर और शैक्षिक सेवाओं और डिजिटल व्यापार में बेहतर बाज़ार पहुंच प्रदान करता है। भारतीय पेशेवर, जिनमें ब्रिटेन में सभी सेवा क्षेत्रों में काम करने के लिए कंपनियों द्वारा तैनात पेशेवर, आर्किटेक्ट, इंजीनियर, शेफ, योग प्रशिक्षक और संगीतकार जैसे अनुबंध पर तैनात पेशेवर शामिल हैं, सरल वीज़ा प्रक्रियाओं और उदार प्रवेश श्रेणियों से लाभान्वित होंगे, जिससे प्रतिभाओं के लिए ब्रिटेन में काम करना आसान हो जाएगा।
भारत-ब्रिटेन विजन 2035
भारत और ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों ने 24 जुलाई, 2025 को लंदन में द्विपक्षीय बैठक के दौरान नए ‘भारत-ब्रिटेन विजन 2035’ को साझा स्वीकृति प्रदान कर दी, जो पुनर्जीवित साझेदारी की पूर्ण क्षमता को प्राप्त करने के लिए उनकी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। यह महत्वाकांक्षी एवं भविष्य-केंद्रित समझौता, तेजी से बदलते वैश्विक दौर में आपसी विकास, समृद्धि और एक समृद्ध, सुरक्षित व सतत विश्व को आकार देने के लिए दोनों देशों के साथ मिलकर काम करने के संकल्प को रेखांकित करता है।
विस्तारित महत्वाकांक्षा: भारत और ब्रिटेन ने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने के बाद से सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदारियों तथा विकास को गति दी है। नया दृष्टिकोण इसी सहभागिता को आगे बढ़ाता है और द्विपक्षीय सहयोग को विस्तार देने तथा विविधतापूर्ण बनाने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करता है।
रणनीतिक दृष्टिकोण: भारत-ब्रिटेन के बीच प्रमुख साझेदारियां वर्ष 2035 तक दोनों देशों के संबंधों को पुनर्परिभाषित करेंगी और दोनों पक्षों के लिए परिवर्तनकारी अवसर तथा विशेष लाभ प्रदान करेंगी। भारत-ब्रिटेन विजन 2035 स्पष्ट रणनीतिक लक्ष्य लेकर चलेगा और यह मील के पत्थर स्थापित करता है, जिससे भविष्य में निरंतर सहयोग व नवाचार के लिए मार्ग प्रशस्त होता है।
व्यापक परिणाम: भारत-ब्रिटेन विजन 2035 के स्तंभों को एक-दूसरे को सुदृढ़ करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे एक ऐसी संयुक्त साझेदारी का निर्माण होगा जो परिणामों की एक विस्तृत और गहन शृंखला में अपनी हिस्सेदारी के योग से भी अधिक बड़ी होगी, इसमें शामिल हैं:
ब्रिटेन और भारत में विकास तथा नौकरियां एक महत्वाकांक्षी व्यापार समझौते पर आधारित हैं, जो दोनों देशों के लिए बाजार व अवसरों को खोलेगा।
वैश्विक प्रतिभा की अगली पीढ़ी को पोषित करने के लिए शिक्षा और कौशल साझेदारी, ब्रिटेन तथा भारतीय विश्वविद्यालयों के बीच अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सहयोग को आगे ले जाना, जिसमें एक-दूसरे के देशों में अग्रणी विश्वविद्यालयों के परिसरों की स्थापना भी शामिल है।
प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल पर आधारित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान का विकास करना, जो भविष्य के दूरसंचार, एआई व महत्वपूर्ण खनिजों पर केंद्रित हो और अर्धचालक, क्वांटम, जैव-प्रौद्योगिकी तथा उन्नत सामग्रियों पर भविष्य के सहयोग के लिए आधार तैयार करे।
एक परिवर्तनकारी जलवायु साझेदारी, स्वच्छ ऊर्जा में तेजी लाने, बड़े पैमाने पर जलवायु वित्त जुटाने और लचीलेपन को बढ़ने पर केंद्रित है।
रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग बढ़ाना, जिसमें हिंद-प्रशांत और उसके बाहर शांति, सुरक्षा व समृद्धि के लिए साझा प्रतिबद्धता शामिल है।

