मोदी सरकार संघवाद का सम्मान करती है : जगत प्रकाश नड्डा

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संविधान के 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर विशेष चर्चा

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने 17 दिसंबर, 2024 को भारतीय संविधान के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राज्यसभा में आयोजित चर्चा में भाग लिया। इस अवसर पर श्री नड्डा ने कहा कि हम सब जानते हैं कि भारत सबसे बड़ा प्रजातंत्र है, लेकिन यह प्रजातंत्र की जननी भी है। प्रजातंत्र में समाज में स्वतंत्रता, स्वीकार्यता, समानता और समावेशिता शामिल होती है। उन्होंने 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 को हटाने और जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाने के लिए संसद को धन्यवाद दिया।
हम यहां उनके भाषण का सारांश प्रकाशित कर रहे हैं:

कुछ ही दिन बाद हम अपने गणतंत्र के 75 साल पूरे होते हुए देखेंगे। यह उत्सव एक तरीके से हमारी संविधान के प्रति समर्पण, संविधान के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूती प्रदान करता है। हम सब जानते हैं कि भारत सबसे बड़ा प्रजातंत्र है, लेकिन यह प्रजातंत्र की जननी भी है। प्रजातंत्र में समाज में स्वतंत्रता, स्वीकार्यता, समानता और समावेशिता शामिल होती है। इससे आम नागरिक सम्मानजनक जीवन जी पाते हैं। संविधान की मूल प्रति में भी अजंता एलोरा की गुफाओं की छाप दिखती है। हम सबको उसमें कमल की भी छाप दिखती है और कमल इस बात को प्रतिबिंबित करता है कि हम कीचड़ में से निकलकर नए संविधान के साथ खड़े होने के लिए तैयार हैं।

हमारा संविधान भी उस कमल के माध्यम से हमें यह प्रेरणा देता है कि हम तमाम मुसीबतों के बावजूद प्रजातंत्र को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। अनुच्छेद 370 के ही विरोध में उस समय के जनसंघ के संस्थापक ने आवाज़ उठाते हुए कहा कि एक देश में ‘दो निशान, दो विधान और दो प्रधान’ नहीं चलेंगे। उन्होंने इसके लिए बलिदान दिया। राष्ट्रपति के आदेश से अनुच्छेद 370 में धारा 35क लाई गई और संसद में कोई बहस किए बिना इस धारा को राष्ट्रपति की स्वीकृति दी गई। भारतीय संसद द्वारा पारित किए गए अनेक कानून जम्मू और कश्मीर में लागू नहीं होते थे।

आज जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन गया है

जम्मू-कश्मीर में पंजाब से सफाई कर्मचारियों को लाया गया और उनको बसाया गया। उनको जम्मू-कश्मीर की नागरिकता तो दी गई, लेकिन उनको सिर्फ सफाई कर्मचारी की ही नौकरी का अधिकार था। वे कुछ और नहीं कर सकते थे। इस तरह से आजाद भारत में कानून का उल्लंघन हो रहा था। मैं इस संसद को धन्यवाद देता हूं कि उसने 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया और आज जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन गया है।

अभी अगले साल 25 जून को आपातकाल लगाए जाने के 50 साल हो जाएंगे, हम ‘लोकतंत्र विरोधी दिवस’ मनाएंगे। हम आह्वान करते हैं कि कांग्रेस भी उसमें शामिल हो। आपातकाल इसलिए नहीं लगा कि देश को कोई खतरा था, बल्कि इसलिए लगा कि सत्ताधारी दल की सत्ता को खतरा था और इस कारण 25 जून, 1975 को राष्ट्रपति की सम्मति के द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के अंतर्गत आंतरिक अशांति कारण बताते हुए मूल अधिकारों, अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 को निलंबित कर दिया गया। आपातकाल के दौरान लगभग 1 लाख से ज्यादा लोग मीसा और डीआईआर में 22-22 महीने के लिए बंदी हुए।

अल्पसंख्यक तुष्टीकरण

मैं अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की भी बात करना चाहता हूं। राजीव गांधी जी को प्रगतिशील बताया गया, लेकिन वह अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के लिए शाहबानो मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय को निरस्त करने के लिए संसद में संशोधन ले आए। उच्चतम न्यायालय ने कई बार कहा था कि तीन तलाक समाप्त होना चाहिए, लेकिन कांग्रेस सरकारों ने इस दिशा में कोई कार्य नहीं किया, जबकि कई इस्लामी देशों में भी तीन तलाक नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की दूर-दृष्टि और पक्के इरादे से तीन तलाक को समाप्त किया गया और मुस्लिम बहनों को मुख्यधारा में लाने का काम किया।

पं. नेहरू ने सीमा के बुनियादी ढांचे सहित रक्षा तैयारियों की उपेक्षा की

कांग्रेस पार्टी ने न तो भू-क्षेत्रों को सौंपने के संदर्भ में भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की है और न ही हमारे पड़ोस में भारत के प्रभाव को कम करने के प्रयासों का मुकाबला किया है। 1949 में हमारी बहादुर सेना ने युद्ध के मैदान में सफलता हासिल की थी, लेकिन पंडित नेहरू ने युद्ध विराम स्वीकार किया था। यही कारण है कि आज भी ‘पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर’ मौजूद है। सभा यह भी जानती है कि चीन ने 38,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था और पाकिस्तान ने उसे 5,180 वर्ग किलोमीटर का अवैध हस्तांतरण किया था। चीन ऐसा इसलिए कर सका क्योंकि श्री जवाहरलाल नेहरू ने सीमा के बुनियादी ढांचे सहित रक्षा तैयारियों की उपेक्षा की और उन्हें कूटनीति की समझ नहीं थी।

जहां तक म्यांमार का सवाल है, 1950 के दशक में कोको द्वीप समूह पर हमारे नियंत्रण के हस्तांतरण की परिस्थितियां आज भी अस्पष्ट हैं। हमने 2008 से 2010 के बीच हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर डालने वाले घटनाक्रमों के बारे में लापरवाही का रिकॉर्ड भी देखा है। जब चीन ने श्रीलंका में हंबनटोटा बंदरगाह बनाया, तब हम चुपचाप देखते रहे। मालदीव में 2012 में एक भारत विरोधी आंदोलन के कारण प्रमुख क्षेत्रों में भारतीय निवेश बाहर हो गया। इसका भी कांग्रेस ने हमेशा विरोध नहीं किया। एक द्वीप है कच्चातीवू जो 1974 में श्रीलंका को सौंपे जाने से पहले तमिलनाडु के अधिकार क्षेत्र में था। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती गांधी ने इसे एकतरफा तौर पर श्रीलंका को दे दिया और यह हस्तांतरण भारत के संविधान में संशोधन किए बिना निष्पादित किया गया, जिससे महत्वपूर्ण संवैधानिक और कानूनी प्रश्न उठे।

इसी तरह, दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने के लिए 16 मई, 1974 को भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे और इसे अनुसमर्थन की आवश्यकता थी। 1974 से 2015 तक कोई अनुसमर्थन नहीं हुआ था। 2015 में सरकार ने समझौते को अंतिम रूप दिया और क्षेत्रीय परिवर्तनों के अंतरराष्ट्रीय समझौते पर सहमति बनी और संसद द्वारा इसका अनुसमर्थन किया गया। मोदी सरकार संघवाद का सम्मान करती है, इसीलिए केंद्र सरकार ने त्रिपुरा, असम, मेघालय और पश्चिमी बंगाल के साथ विचार-विमर्श किया और उनमें से प्रत्येक की सहमति लेने के बाद भूमि सीमा समझौता किया गया और बांग्लादेश में लगभग 111 भारतीय इन्क्लेव और भारत में 51 बांग्लादेशी इन्क्लेव को पुनर्स्थापित किया गया और 50,000 की आबादी को समझौते के तहत लाया गया।

आप लोगों को जानना चाहिए कि संविधान सभा में जो लोग थे, जिन लोगों ने बाद में आकर देश को चलाया, उनके मन में आरक्षण के प्रति क्या भावना थी। संविधान में अनुसूचित जातियों और पिछड़ी जातियों के बीच बहुत स्पष्ट रूप से अंतर किया गया है। हमारे संविधान निर्माताओं ने यह अंतर क्यों किया? उनके दिमाग में कुछ था। आज हम उस अंतर को क्यों खो चुके हैं? मैं आपसे सहमत हूं, वास्तविकता यह है कि इस देश में जाति का बहुत महत्व है। मैं इससे असहमत नहीं हूं। यदि हमारा लक्ष्य जातिविहीन समाज है, तो आपका हर बड़ा कदम ऐसा होना चाहिए जिससे आप जातिविहीन समाज की ओर बढ़े। जिन्होंने 55 साल राज किया, मैंने उनका मत आपके सामने रखा है। काका कालेलकर रिपोर्ट पर आप 22 साल तक बैठे रहे, लेकिन आपने आरक्षण के बारे में कुछ नहीं सोचा। मंडल आयोग कौन लेकर आया? जनता पार्टी की सरकार इसे लेकर आई। राजीव गांधी जी ने तथ्यात्मक त्रुटियों का हवाला देते हुए और रिपोर्ट को अधूरा बताते हुए मंडल आयोग की रिपोर्ट के क्रियान्वयन का विरोध किया था। आपने पिछड़े वर्ग के साथ कितना अन्याय किया।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा

अब अगर मैं सामाजिक न्याय की बात करूं, तो अनुच्छेद 338ख के तहत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा नरेन्द्र मोदी जी की सरकार द्वारा दिया गया। उसी तरीके से आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करके सामाजिक न्याय देने का काम किया गया। संघ राज्य क्षेत्र जम्मू-कश्मीर में वाल्मीकि समुदाय को आरक्षण भी नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने दिया। अगर में राजनीतिक न्याय की बात करूं, तो अनुच्छेद 370 को समाप्त करके जम्मू-कश्मीर को राजनीतिक न्याय देने का काम हमारी सरकार द्वारा किया गया।

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को पारित करके महिलाओं को आरक्षण देने का काम भी हमारी सरकार द्वारा ही किया गया। हमने ट्रिपल तलाक का उन्मूलन करके मुस्लिम महिलाओं को न्याय देने का प्रयास भी किया

जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों को अधिकार देकर राजनीतिक न्याय देने का काम भी अनुच्छेद 370 को समाप्त करके हमारी सरकार द्वारा किया गया।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को पारित करके महिलाओं को आरक्षण देने का काम किया भी हमारी सरकार द्वारा ही किया गया। हमने ट्रिपल तलाक का उन्मूलन करके मुस्लिम महिलाओं को न्याय देने का प्रयास भी किया। अगर मैं आर्थिक न्याय की बात करूं, तो मुद्रा योजना, जन-धन खाते, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना आदि के जरिए आर्थिक न्याय दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी जी के द्वारा आयुष्मान भारत के अंतर्गत 61 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपये प्रति परिवार प्रति वर्ष स्वास्थ्य सुरक्षा देना बहुत बड़ी उपलब्धि है।