बुद्धिजीवी सम्मेलन, पटना (बिहार)
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 17 अक्टूबर, 2025 को बिहार के पटना में बुद्धिजीवी सम्मेलन को संबोधित किया और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए और लालू यादव के शासनकाल के जंगलराज की याद दिलाते हुए कहा कि एक समृद्ध विरासत वाले बिहार को लालू के जंगलराज ने सदियों पीछे धकेल दिया। कार्यक्रम में बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री दिलीप जायसवाल, भाजपा के वरिष्ठ नेता, सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री रविशंकर एवं कई अन्य वरिष्ठ नेतागण उपस्थित थे।
श्री शाह ने कहा कि मां गंगा की कृपा से बिहार की भूमि उपजाऊ है, यहां पचास फुट नीचे जल उपलब्ध है, मेहनतकश लोग हैं और बुद्धिमत्ता में भी बिहार किसी से कम नहीं है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि बिहार बीमारू राज्य बनकर रह गया? जो लोग बिहार को उसके पुराने गौरव और प्रतिष्ठा के स्थान पर पुनः स्थापित करना चाहते हैं, उन्हें इस प्रश्न पर अवश्य विचार करना चाहिए। वह कौन-सा कालखंड था जब बिहार की प्रतिष्ठा का पतन हुआ, जब यह गौरवशाली भूमि पिछड़े राज्य के रूप में पहचानी जाने
अब समय है बिहार 3.0 का, यदि जनता एक बार फिर जंगलराज को रोक दे, तो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बिहार को उद्योग युक्त, रोजगार युक्त और तकनीकी रूप से उन्नत बनाया जाएगा
लगी? इसके लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। लालू प्रसाद यादव के 15 साल के जंगलराज ने बिहार से उसका गौरव, संपन्नता और विद्या तीनों छीन लिए। महाभारत कालीन ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रखने वाला यह बिहार मात्र 15 साल के जंगलराज के कालखंड में अपनी सारी गरिमा, ऐश्वर्य और उत्कृष्टता खो बैठा। यहां बैठे युवाओं को अपने घर के बड़ों से पूछना चाहिए कि लालू-राबड़ी की जोड़ी ने उस समय किस प्रकार का शासन दिया था। भ्रष्टाचार के मामलों में जेल जाने के बाद जब जमानत मिली तो हाथी पर बैठकर जुलूस निकाले जाते थे, ऐसा भी दृश्य बिहार की जनता ने देखा है। ऐसी बेशर्मी हमारे जीवन में कभी नहीं देखी गई।
उन्होंने कहा कि इन 15 वर्षों में बिहार प्रशासनिक व्यवस्था, राष्ट्रीय योगदान और अवसरों के लिहाज से हर दृष्टि से पिछड़ गया। आजादी के वक्त बिहार में जो बड़ी-बड़ी इंडस्ट्री और कल-कारखाने थे, वे धीरे-धीरे राज्य छोड़कर चले गए। व्यापारी भी पलायन कर गए, व्यापार ठप हो गया और बिहार अव्यवस्था में डूब गया। उस 15 साल के शासन ने बिहार को लगभग आधी सदी पीछे धकेल दिया।
श्री शाह ने कहा कि बिहार 1.0 में श्री नीतीश कुमार ने सुशासन की नींव रखी, इसी कारण उन्हें ‘सुशासन बाबू’ कहा गया। इस कालखंड में तीन बड़े कार्य हुए, जंगलराज से मुक्ति, कानून-व्यवस्था की बहाली, भ्रष्ट शासन से छुटकारा और 50 प्रतिशत महिला आरक्षण की व्यवस्था। यही नींव बिहार 1.0 की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। इसके बाद बिहार 2.0 की शुरुआत हुई, जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की सरकार बनी। इस कालखंड में बिहार में बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स शुरू हुए। गंगा नदी पर कई नए पुलों का निर्माण हुआ, जो पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। बिहार में अब बिजली कटौती बिल्कुल नहीं होती है। उन्होंने अपने युवाकाल में बिहार के गांवों में ऐसे दृश्य देखे थे, जब लोग छोटे-छोटे जनरेटर या इन्वर्टर की दुकानों पर जाकर मोबाइल चार्ज करवाते थे, क्योंकि गांवों में बिजली नहीं होती थी। आज बिहार 2.0 में बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे हुए। गंगा पर अनेक पुल बने, बरौनी रिफाइनरी का विस्तार हुआ, बिहटा में ड्राई पोर्ट बना, बोधगया में आईआईएम की स्थापना हुई, भागलपुर में ट्रिपल आईटी बना, दरभंगा में एम्स बना और चार नए एयरपोर्ट तैयार हुए।
उन्होंने कहा कि अब समय है बिहार 3.0 का, यदि जनता एक बार फिर जंगलराज को रोक दे, तो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बिहार को उद्योग युक्त, रोजगार युक्त और तकनीकी रूप से उन्नत बनाया जाएगा। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था, जो सीधे रोजगार से जुड़ी होगी। एनडीए सरकार ‘एआई सक्षम’ बिहार बनाएगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में यहां के शैक्षणिक संस्थानों को नई तकनीकों से जोड़ा जाएगा, सीटें बढ़ाई जाएंगी और युवाओं को एआई आधारित कौशल में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि बिहार इस तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर सके।
श्री शाह ने प्रबुद्धजनों से अपील की कि वह अपना मत एनडीए को दें और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमर को बिहार का विकास करने का अवसर दें।

