मन की बात
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 30 मार्च को ‘मन की बात’ संबोधन में दैनिक जीवन में फिटनेस के महत्व पर जोर दिया और फिट इंडिया कार्निवल तथा अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस जैसी पहलों की प्रशंसा की। स्वस्थ विश्व के लिए भारत के दृष्टिकोण को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “योग दिवस 2025 की थीम ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग’ रखी गई है। यानी हम योग के जरिए पूरे विश्व को स्वस्थ बनाने की कामना करते हैं।”
लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम के 120वें एपिसोड के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा, “आज फिटनेस के साथ-साथ गिनती भी बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। एक दिन में कितने कदम चले, एक दिन में कितनी कैलोरी खाई, कितनी कैलोरी बर्न की…इन सब गिनतियों के बीच एक और उल्टी गिनती शुरू होने वाली है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की उल्टी गिनती। योग दिवस में अब 100 दिन से भी कम समय बचा है। अगर आपने अभी तक योग को अपने जीवन में शामिल नहीं किया है, तो अभी करें… अभी भी देर नहीं हुई है।”
देश में हजारों कृत्रिम तालाब, चेक डैम, बोरवेल रिचार्ज, कम्युनिटी सोक पिट का निर्माण हो रहा है। हर साल की तरह इस बार भी ‘कैच द रेन’ अभियान के लिए कमर कस ली गई है
श्री मोदी ने कहा कि 10 साल पहले 21 जून, 2015 को पहला अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था। अब तो इस दिन ने योग के एक विराट महोत्सव का रूप ले लिया है। मानवता को भारत की ओर से यह एक ऐसा अनमोल उपहार है, जो भविष्य की पीढ़ी के बहुत काम आने वाला है।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि आज हमारे योग और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को लेकर पूरी दुनिया में जिज्ञासा बढ़ रही है। बड़ी संख्या में युवा योग और आयुर्वेद को स्वास्थ्य के एक बेहतरीन माध्यम के रूप में अपना रहे हैं। अब जैसे दक्षिण अमेरिका का एक देश है चिली। वहां आयुर्वेद तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पिछले साल ब्राजील की अपनी यात्रा के दौरान मैंने चिली के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। आयुर्वेद की लोकप्रियता को लेकर हमारी काफी चर्चा हुई थी।”
दुनिया भर में आयुष प्रणालियों की तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता
दुनिया भर में आयुष प्रणालियों की तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता और इसमें प्रमुख हितधारकों के योगदान को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे ‘सोमोस इंडिया’ नाम की एक टीम के बारे में पता चला है। स्पेनिश में इसका मतलब है, ‘हम भारत हैं’। यह टीम लगभग एक दशक से योग और आयुर्वेद को बढ़ावा दे रही है। उनका ध्यान इलाज के साथ-साथ शैक्षणिक कार्यक्रमों पर भी है। वे योग और आयुर्वेद से जुड़ी जानकारियों का स्पेनिश भाषा में अनुवाद भी करवा रहे हैं। अगर पिछले साल की ही बात करें तो उनके असंख्य कार्यक्रमों और पाठ्यक्रमों में लगभग 9 हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया था। मैं इस टीम से जुड़े सभी लोगों को उनके प्रयासों के लिए बधाई देता हूं।”
‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि गर्मी का मौसम शुरू होते ही शहर-शहर, गांव-गांव पानी बचाने की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। अनेक राज्यों में वाटर हार्वेस्टिंग से जुड़े कामों ने, जल संरक्षण से जुड़े कामों ने नई तेजी पकड़ी है। जलशक्ति मंत्रालय और अलग-अलग स्वयंसेवी संस्थाएं इस दिशा में काम कर रही हैं। देश में हजारों कृत्रिम तालाब, चेक डैम, बोरवेल रिचार्ज, कम्युनिटी सोक पिट का निर्माण हो रहा है। हर साल की तरह इस बार भी ‘कैच द रेन’ अभियान के लिए कमर कस ली गई है। ये अभियान भी सरकार का नहीं बल्कि समाज का है, जनता-जनार्दन का है। जल संरक्षण से ज्यादा-से-ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए जल संचय जन-भागीदारी अभियान भी चलाया जा रहा है। प्रयास यही है कि जो प्राकृतिक संसाधन हमें मिले हैं, उसे हमें अगली पीढ़ी तक सही सलामत पहुंचाना है।
श्री मोदी ने कहा कि जब हम जड़ से जुड़े रहते हैं तो कितना ही बड़ा तूफान आए; तूफान हमें उखाड़ नहीं पाता। आप कल्पना करिए, करीब 200 साल पहले भारत से कई लोग गिरमिटिया मजदूर के रूप में मॉरीशस गए थे। किसी को नहीं पता था कि आगे क्या होगा। लेकिन समय के साथ वे वहां रच-बस गए। मॉरीशस में उन्होंने अपनी एक बड़ी पहचान बनाई। उन्होंने अपनी विरासत को सहेजकर रखा और जड़ों से जुड़े रहे। मॉरीशस ऐसा अकेला उदाहरण नहीं है। पिछले साल जब मैं गुयाना गया था तो वहां की चौताल ने मुझे बहुत प्रभावित किया था।

