द्विपक्षीय व बहुपक्षीय हितों का संवर्धन, समावेशी विकास और शांति व सुरक्षा के प्रति समर्पित रही प्रधानमंत्री की पांच देशों की यात्रा

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प्रधानमंत्री ने घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील, नामीबिया की यात्रा की तथा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2 से 9 जुलाई के बीच पांच देशों घाना, त्रिनिडाड और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील तथा नामीबिया की 8 दिवसीय यात्रा की। इस मैराथन यात्रा के मध्य श्री मोदी ने ब्राजील की राजधानी रियो डी जेनेरियो में 6-7 जुलाई को आयोजित 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इस अभूतपूर्व यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 3 देशों घाना, त्रिनिडाड और टोबैगो तथा नामीबिया की संसद को संबोधित किया और उन्हें 4 राष्ट्रों घाना, त्रिनिडाड और टोबैगो, ब्राजील तथा नामीबिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री की 5 देशों व 6 शहरों की इस अहर्निश यात्रा ने इन देशों के साथ न केवल भारत के ऐतिहासिक संबंधों को और सुदृढ़ किया, बल्कि कृषि, निवेश, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वास्थ्य, सुरक्षा, व्यापार, पर्यटन, प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण जैसे कई प्रमुख विषयों में घनिष्ठ सहयोग का मार्ग प्रशस्त किया। साथ ही, अनेक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर भी हुए। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं ने ब्रिक्स एजेंडे के विभिन्न मुद्दों पर उपयोगी चर्चा की, जिसमें वैश्विक शासन में सुधार, वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को बुलंद करना, शांति और सुरक्षा, बहुपक्षवाद को मजबूत करना, विकास के मुद्दे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल हैं

घाना की यात्रा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2-3 जुलाई को राष्ट्रपति श्री जॉन ड्रामानी महामा के निमंत्रण पर दक्षिण अफ्रीका के देश घाना की राजकीय यात्रा की। घाना के राष्ट्रपति श्री महामा ने श्री मोदी का एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से स्वागत किया। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की घाना की यह यात्रा तीन दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा थी।

घाना के राष्ट्रपति श्री जॉन ड्रामानी महामा से भेंट: द्विपक्षीय हितों व संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर हुई चर्चा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 3 जुलाई को घाना के राष्ट्रपति श्री जॉन ड्रामानी महामा से भेंट की। दोनों नेताओं ने सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर के प्रारूपों में भेंट की और व्यापक बातचीत की। वे संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमत हुए। दोनों नेताओं ने भारत और घाना के बीच मधुर और समय के अनुरूप संबंधों की पुष्टि की और व्यापार एवं निवेश, कृषि, क्षमता निर्माण, डिजिटल प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों सहित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने के स्वरूपों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर भी चर्चा की।

दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुधारों सहित आपसी हितों के वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले के मद्देनजर राष्ट्रपति श्री महामा को उनके समर्थन और एकजुटता के लिए धन्यवाद दिया।

घाना की संसद को संबोधन

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 3 जुलाई को घाना की संसद के विशेष सत्र को संबोधित किया। ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं। यह संबोधन भारत-घाना संबंधों में एक महत्वपूर्ण क्षण था, जो दोनों देशों को एकजुट करने वाले परस्पर सम्मान और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को दर्शाता है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत और घाना के बीच ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया, जो

स्वतंत्रता के लिए साझा संघर्षों और लोकतंत्र तथा समावेशी विकास के लिए समान प्रतिबद्धता के माध्यम से बना है।

उन्होंने जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, महामारी और साइबर खतरों जैसी दबावपूर्ण वैश्विक चुनौतियों को भी रेखांकित किया और वैश्विक शासन में विकासशील देशों की सामूहिक आवाज का आह्वान किया।

चार समझौता ज्ञापनों पर हुए हस्ताक्षर

 सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (सीईपी) पर समझौता: कला, संगीत, नृत्य, साहित्य और विरासत में अधिक सांस्कृतिक समझ और आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
 भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) और घाना मानक प्राधिकरण (जीएसए) के बीच समझौता: मानकीकरण, प्रमाणन और अनुरूपता मूल्यांकन में सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से।
 घाना के पारंपरिक और वैकल्पिक चिकित्सा संस्थान (आईटीएएम) और भारत के आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान (आईटीआरए) के बीच समझौता: पारंपरिक चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान में सहयोग करना।
 संयुक्त आयोग की बैठक पर समझौता: उच्च स्तरीय संवाद को संस्थागत बनाना और नियमित आधार पर द्विपक्षीय सहयोग तंत्र की समीक्षा करना।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने घाना का राष्ट्रीय सम्मान ग्रहण किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को उनकी असाधारण शासन कला और प्रभावशाली वैश्विक नेतृत्व में योगदान के कारण घाना के राष्ट्रपति श्री जॉन ड्रामानी महामा ने 3 जुलाई को घाना के राष्ट्रीय सम्मान ‘द ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री ने इस विशेष सम्मान के लिए घाना की जनता और सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्य और परंपराएं साझेदारी को आगे बढ़ाती रहेंगी। श्री मोदी ने कहा कि यह पुरस्कार दोनों देशों के बीच मित्रता को और गहरा करता है तथा द्विपक्षीय संबंधों को आगे ले जाने की नई जिम्मेदारी उन पर डालता है।

प्रधानमंत्री की त्रिनिदाद एवं टोबैगो यात्रा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने त्रिनिदाद एवं टोबैगो गणराज्य की प्रधानमंत्री श्रीमती कमला प्रसाद-बिसेसर के निमंत्रण पर 3 से 4 जुलाई तक त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य की आधिकारिक यात्रा की। 26 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा होने के कारण यह ऐतिहासिक यात्रा रही। इसके व्यापक महत्व थे, क्योंकि यह 1845 में त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय प्रवासियों के आगमन की 180वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई थी। इसने गहरी जड़ें जमाए हुए सभ्यतागत संबंधों, लोगों के बीच जीवंत संबंधों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों की पुष्टि की, जो दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक मित्रता का आधार हैं।

त्रिनिडाड और टोबैगो के प्रधानमंत्री के साथ आधिकारिक वार्ता

छह समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 4 जुलाई को पोर्ट ऑफ स्पेन के रेड हाउस में त्रिनिडाड और टोबैगो गणराज्य की प्रधानमंत्री श्रीमती कमला परसाद-बिसेसर से भेंट की। दोनों नेताओं ने कृषि, स्वास्थ्य सेवा और औषधि, डिजिटल परिवर्तन, यूपीआई, क्षमता निर्माण, संस्कृति, खेल और लोगों के बीच आपसी संबंधों सहित संभावित सहयोग के व्यापक क्षेत्रों पर चर्चा की। विकास सहयोग भारत-त्रिनिडाड और टोबैगो साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। प्रधानमंत्री श्रीमती बिसेसर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की त्रिनिडाड और टोबैगो की ऐतिहासिक यात्रा दोनों देशों के बीच गहरे द्विपक्षीय संबंधों को फिर से प्रगाढ़ करेगी।

दोनों नेताओं ने आपसी हितों के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन और साइबर सुरक्षा जैसी वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक सहयोग का आह्वान किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले के मद्देनजर भारत के लोगों को त्रिनिडाड और टोबैगो द्वारा दिए गए मजबूत समर्थन और एकजुटता की प्रशंसा की।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों और अभिव्यक्तियों से लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। दोनों नेता ग्लोबल साउथ के देशों के बीच अधिक एकजुटता के लिए मिलकर काम करने और भारत-कैरिकॉम साझेदारी को मजबूत करने पर सहमत हुए।

वार्ता के बाद फार्माकोपिया, त्वरित प्रभाव परियोजनाओं, संस्कृति, खेल, राजनयिक प्रशिक्षण और हिंदी तथा भारतीय अध्ययन के लिए भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् (आईसीसीआर) चेयर के लिए छह समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया। द्विपक्षीय संबंधों को प्रोत्साहन देने के लिए कई घोषणाएं भी की गईं, जिनमें त्रिनिडाड और टोबैगो में भारतीय मूल के लोगों की छठी पीढ़ी को ओसीआई कार्ड की पेशकश शामिल है।

त्रिनिदाद और टोबैगो की संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधन

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सीनेट के सभापति महामहिम वेड मार्क और सदन के अध्यक्ष महामहिम जगदेव सिंह के निमंत्रण पर 4 जुलाई को त्रिनिदाद और टोबैगो (टीएंडटी) की संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित किया। टीएंडटी की संसद को संबोधित करने वाले वह भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं और यह अवसर भारत-त्रिनिदाद और टोबैगो द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्‍वपूर्ण मील का पत्‍थर है।

भारतीय लोकतंत्र की जीवंतता के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की जननी के रूप में भारत ने इस पद्धति को अपनी संस्कृति और जीवन का अभिन्न अंग बना लिया है। श्री मोदी ने कहा कि इस दृष्टिकोण ने भारत की विविधता को फलने-फूलने और समृद्ध होने तथा सभी विचारों के सह-अस्तित्व तथा संसदीय विमर्शों और सार्वजनिक चर्चाओं को समृद्ध बनाने का अवसर दिया है।
सदन में महिला सांसदों की काफी संख्‍या में उपस्थिति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने भारत द्वारा संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने की दिशा में उठाए गए ऐतिहासिक कदम पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने मानवता के समक्ष मौजूद चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने विश्‍व समुदाय से शांतिप्रिय समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुके आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने का आह्वान किया। श्री मोदी ने वैश्विक शासन में सुधार और ग्‍लोबल साउथ को उसका हक दिए जाने का आह्वान किया। उन्होंने भारत-कैरिकॉम संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ‘द ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो’ से सम्मानित

पोर्ट ऑफ स्पेन में राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में त्रिनिदाद एवं टोबैगो गणराज्य की राष्ट्रपति महामहिम क्रिस्टीन कार्ला कंगालू ओआरटीटी ने 4 जुलाई को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को त्रिनिदाद और टोबैगो का सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार ‘द ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो’ प्रदान किया। यह उनकी राजनीति कौशल, वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं की पैरवी करने तथा भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के बीच संबंधों को मजबूत करने में उनके असाधारण योगदान के लिए है। प्रधानमंत्री इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले पहले विदेशी नेता हैं।

भारत के 140 करोड़ लोगों की ओर से पुरस्कार स्वीकार करते हुए श्री मोदी ने इस सम्मान को दोनों देशों के बीच मित्रता के स्थायी बंधन को समर्पित किया। उन्होंने बताया कि ये विशेष संबंध 180 वर्ष पहले देश में आए भारतीयों द्वारा बनाए गए साझा इतिहास और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित हैं।

त्रिनिडाड और टोबैगो में सामुदायिक कार्यक्रम

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 4 जुलाई को त्रिनिडाड और टोबैगो में भारतीय समुदाय के एक बड़े समूह को संबोधित किया। श्री मोदी ने अपने संबोधन में त्रिनिडाड और टोबैगो की प्रधानमंत्री श्रीमती कमला प्रसाद-बिसेसर को उनके गर्मजोशी भरे स्वागत करने और दोनों देशों के बीच जीवंत और विशेष संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि ऐसे समय में त्रिनिडाड और टोबैगो की उनकी ऐतिहासिक यात्रा, जब देश अपने तटों पर भारतीय प्रवासियों के पहले आगमन की 180 वीं वर्षगांठ मना रहा है, इसे और भी विशेष बनाती है। श्री मोदी ने भारतीय प्रवासियों की उनके सुगम, सांस्कृतिक समृद्धि और त्रिनिडाड और टोबैगो में उनके अपार योगदान की प्रशंसा की।

अर्जेंटीना यात्रा

अर्जेंटीना के राष्ट्रपति से मुलाकात: द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 6 जुलाई को अर्जेंटीना के राष्ट्रपति श्री हावियर मीलेई से मुलाकात की। कासा रोसाडा पहुंचने पर राष्ट्रपति श्री मीलेई ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 57 वर्षों के अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की अर्जेंटीना की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। यह भारत-अर्जेंटीना संबंधों के लिए महत्वपूर्ण वर्ष है, क्योंकि दोनों देश राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अपने और अपने प्रतिनिधिमंडल के शानदार आतिथ्य के लिए राष्ट्रपति श्री मीलेई को धन्यवाद दिया।

दोनों नेताओं ने सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर के प्रारूपों में मुलाकात की। उन्होंने व्यापक चर्चा की और द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण पहलुओं की समीक्षा की। उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों, तेल और गैस, रक्षा,

परमाणु ऊर्जा, कृषि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, कृषि में ड्रोन के उपयोग, मत्स्य पालन और बिजली पारेषण लाइनों की निगरानी, आईसीटी, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, यूपीआई, अंतरिक्ष, रेलवे, फार्मा, खेल और लोगों के बीच संबंधों के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

नेताओं ने वर्तमान आर्थिक सहयोग का जायजा लिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार स्थिर गति से आगे बढ़ रहा है, लेकिन दोनों पक्षों को वाणिज्यिक सहयोग की पूरी क्षमता का दोहन करने के लिए व्यापार क्षेत्र में विविधता लाने पर काम करने की जरूरत है। इस संदर्भ में उन्होंने भारत-मर्कोसुर अधिमान्य व्यापार समझौते के विस्तार पर भी चर्चा की।

श्री मोदी ने पहलगाम में हुए बर्बर आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करने के लिए राष्ट्रपति श्री मीलेई को धन्यवाद दिया और आतंकवाद से लड़ाई में भारत के प्रति अर्जेंटीना की एकजुटता की सराहना की। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि आतंकवाद मानवता के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने इस खतरे से वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखने पर सहमति प्रकट की। उन्होंने वैश्विक दक्षिण की चिंताओं को अधिक से अधिक आवाज देने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा के समापन से पहले ब्यूनस आयर्स में महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति श्री मीलेई ने अर्जेंटीना की ऐतिहासिक यात्रा के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। श्री मोदी ने राष्ट्रपति श्री मीलेई को पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया।

प्रधानमंत्री ने सैन मार्टिन स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 6 जुलाई को अर्जेंटीना की अपनी आधिकारिक यात्रा की शुरुआत अर्जेंटीना के राष्ट्रपिता जनरल जोस डे सैन मार्टिन को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ की। श्री मोदी ने प्लाजा सैन मार्टिन का भ्रमण किया और स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने जनरल जोस डे सैन मार्टिन को श्रद्धांजलि अर्पित की और अर्जेंटीना तथा कई अन्य दक्षिण अमेरिकी देशों के मुक्तिदाता के रूप में उनकी स्थायी विरासत को मान्यता दी। भारत उनके योगदान और उनके द्वारा अपनाए गए मूल्यों का सम्मान करता है। अर्जेंटीना के नायक के नाम पर नई दिल्ली में एक सड़क हमें उनकी विरासत की याद दिलाती है। यह दोनों देशों के बीच मधुर और मैत्रीपूर्ण संबंधों का एक उत्कृष्ट प्रतीक है।

प्रधानमंत्री को ब्यूनस आयर्स शहर की चाबी प्रदान की गई

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को 6 जुलाई को ब्यूनस आयर्स शहर की सरकार के प्रमुख श्री जॉर्ज मैक्री ने ब्यूनस आयर्स शहर की चाबी प्रदान की। ‘एक्स’ पर पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा, “ब्यूनस आयर्स शहर की सरकार के प्रमुख श्री जॉर्ज मैक्री से ब्यूनस आयर्स शहर की चाबी प्राप्त करके सम्मानित महसूस कर रहा हूं।

प्रधानमंत्री ने 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ब्राजील की राजधानी रियो डी जेनेरियो में 6-7 जुलाई को आयोजित 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लिया। नेताओं ने ब्रिक्स एजेंडे के विभिन्न मुद्दों पर उपयोगी चर्चा की, जिसमें वैश्विक शासन में सुधार, वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को बुलंद करना, शांति और सुरक्षा, बहुपक्षवाद को मजबूत करना, विकास के मुद्दे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल हैं। श्री मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति श्री लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा को उनके गर्मजोशी से भरी मेहमाननवाजी और शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।

वैश्विक शासन में सुधार तथा शांति एवं सुरक्षा

प्रधानमंत्री ने ‘वैश्विक शासन में सुधार तथा शांति एवं सुरक्षा’ विषय पर उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। बाद में श्री मोदी ने ‘बहुपक्षीय, आर्थिक-वित्तीय मामलों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मजबूत बनाने’ संबंधी विषय पर एक सत्र को भी संबोधित किया। इस सत्र में ब्रिक्स भागीदार और आमंत्रित देशों ने भाग लिया।

वैश्विक शासन और शांति एवं सुरक्षा पर सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने वैश्विक दक्षिण की आवाज को बुलंद करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों

को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वित्‍तीय सहायता और प्रौद्योगिकी तक पहुंच के मामले में निरंतर विकास के लिए अधिक सहयोग की आवश्यकता है। इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि 20वीं सदी के वैश्विक संगठनों में 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने की क्षमता का अभाव है, उन्होंने उनमें सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

बहुध्रुवीय और समावेशी विश्व व्यवस्था का आह्वान करते हुए श्री मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद्, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और विश्‍व व्‍यापार संगठन जैसी वैश्विक शासन संस्थाओं को वर्तमान वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए तत्काल सुधार से गुजरना होगा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् सुधार की तत्काल आवश्यकता को उजागर करने और शिखर सम्मेलन घोषणा-पत्र में इस मुद्दे पर एक मजबूत भाषा अपनाने के लिए नेताओं को धन्यवाद दिया।

आतंकवाद मानवता के लिए गंभीर खतरा

शांति और सुरक्षा पर प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद मानवता के लिए एक गंभीर खतरा है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि अप्रैल, 2025 में पहलगाम में हुआ आतंकी हमला सिर्फ भारत पर हमला नहीं था, बल्कि पूरी मानवता पर हमला था। आतंकवाद के खिलाफ सख्त वैश्विक कार्रवाई का आह्वान करते हुए श्री मोदी ने कहा कि आतंकवादियों को धन उपलब्‍ध कराने वालों, उन्‍हें बढ़ावा देने या सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने वालों से सख्त से सख्त तरीके से निपटा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद से निपटने में कोई दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। श्री मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करने के लिए ब्रिक्स नेताओं का आभार व्‍यक्‍त किया। ब्रिक्स देशों से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने का आह्वान करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस खतरे से निपटने में जीरो टॉलरेंस होना चाहिए।

इस विषय पर विस्तार से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया से लेकर यूरोप तक संघर्ष गहरी चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा ऐसे संघर्षों को हल करने के लिए बातचीत और कूटनीति का आह्वान किया है और ऐसे प्रयासों में योगदान देने के लिए तैयार है।

बहुपक्षवाद, आर्थिक-वित्तीय मामलों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मजबूत करना

‘बहुपक्षवाद, आर्थिक-वित्तीय मामलों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मजबूत करना’ विषय पर सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विविधता और बहुध्रुवीयता ब्रिक्स की महत्वपूर्ण ताकत हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब विश्व व्यवस्था दबाव में है और वैश्विक समुदाय अनिश्चितता और चुनौतियों का सामना कर रहा है, ब्रिक्स की प्रासंगिकता स्पष्ट है। श्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स एक बहुध्रुवीय दुनिया को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इस संबंध में उन्होंने चार सुझाव दिए:

 पहला, ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक को परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए मांग आधारित सिद्धांत और दीर्घकालिक स्थिरता का पालन करना चाहिए।
 दूसरा, समूह एक विज्ञान और अनुसंधान भंडार स्थापित करने पर विचार करे, जो वैश्विक दक्षिण देशों को लाभान्वित कर सके।
 तीसरा, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित और लचीला बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
 चौथा, समूह को जिम्मेदार एआई के लिए काम करना चाहिए; एआई शासन की चिंताओं को देखते हुए इसे क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भी समान महत्व देना चाहिए।
नेताओं के सत्र के समापन पर सदस्य देशों ने ‘रियो डी जेनेरियो घोषणा’ को स्‍वीकार कर लिया।

ब्राज़ील यात्रा

द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर विचारों का आदान-प्रदान

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 8 जुलाई को ब्राजील की राजकीय यात्रा की। यह यात्रा ब्राजील के राष्ट्रपति श्री लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा के निमंत्रण पर की गई। मित्रता और विश्वास की भावना से हुई यह यात्रा लगभग आठ दशकों से ब्राजील-भारत संबंधों का आधार रही है।

नेताओं ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों की विस्तृत शृंखला पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के अपने संकल्प की पुष्टि की। साथ ही लोगों की शांति, समृद्धि और निरंतर विकास की खोज में योगदान देकर वैश्विक मामलों में अपने देशों की अलग-अलग भूमिकाओं को बरकरार रखते हुए साझा मूल्यों पर आधारित ऊंचे उद्देश्यों को आगे बढ़ाया।

विभिन्न समझौता ज्ञापन/समझौतों पर हस्ताक्षर

 अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने में सहयोग पर समझौता।
 डिजिटल कायाकल्प के लिए सफल बड़े पैमाने पर डिजिटल समाधानों के आदान-प्रदान के लिए सहयोग पर समझौता ज्ञापन।
 नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग पर समझौता ज्ञापन।
 ईएमबीआरएपीए और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के बीच कृषि अनुसंधान पर समझौता ज्ञापन।
 गोपनीय सूचना के आदान-प्रदान और पारस्परिक संरक्षण पर समझौता।
 भारत के डीपीआईआईटी और ब्राजील के एमडीआईसी के प्रतिस्पर्धात्मकता और विनियामक नीति सचिवालय के बीच बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन

प्रधानमंत्री श्री मोदी ‘द ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस’ से सम्मानित

ब्राजील के राष्ट्रपति श्री लुईज इनासियो लूला दा सिल्वा ने 9 जुलाई को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी

को ब्राजील के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ‘द ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस’ से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री ने इस विशिष्ट सम्मान के लिए ब्राजील के राष्ट्रपति, सरकार और जनता का हृदय से आभार व्यक्त किया।

इस पुरस्कार को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार 140 करोड़ भारतवासियों और भारत और ब्राजील के बीच मित्रता के स्थायी संबंधों का सम्मान है। श्री मोदी ने आगे कहा कि राष्ट्रपति लूला भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी के निर्माता रहे हैं और यह पुरस्कार द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक ऊंचाइयों तक ले जाने के उनके अथक प्रयासों के प्रति सम्मान है।

प्रधानमंत्री की नामीबिया यात्रा

नामीबिया की राष्ट्रपति से मुलाकात: भारत-एसएसीयू पीटीए पर चर्चा में तेजी लाने का आह्वान

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नामीबिया की अपनी राजकीय यात्रा के दौरान 9 जुलाई को राजधानी विंडहोक स्थित स्टेट हाउस में नामीबिया की राष्ट्रपति महामहिम डॉ. नेटुम्बो नंदी-नदैतवा से भेंट की। पिछले 27 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नामीबिया की यह पहली यात्रा है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस संबंध में अब भी पूरी क्षमता का उपयोग किया जाना शेष है। इस संबंध में उन्होंने भारत-एसएसीयू पीटीए पर चर्चा में तेजी लाने का आह्वान किया।

एमओयू/समझौते

 नामीबिया में उद्यमिता विकास केंद्र की स्थापना पर एमओयू
 स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग पर एमओयू

घोषणाएं

 नामीबिया ने सीडीआरआई (आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन) में शामिल होने के लिए स्वीकृति पत्र प्रस्तुत किया
 नामीबिया ने वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन में शामिल होने के लिए स्वीकृति पत्र प्रस्तुत किया
 नामीबिया यूपीआई तकनीक अपनाने के लिए लाइसेंसिंग समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला विश्व का पहला देश बन गया

प्रधानमंत्री ने नामीबिया की संसद को किया संबोधित

नेशनल असेम्‍बली की स्‍पीकर महामहिम सारा कुगोंगेल्वा के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 9 जुलाई को नामीबिया की संसद को संबोधित किया। संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात

पर ज़ोर दिया कि भारत हमेशा अफ्रीका की प्रगति के लिए काम करेगा, जैसाकि उसने जी-20 की अध्यक्षता के दौरान किया था, जब अफ्रीकी संघ को इस समूह का स्थायी सदस्य बनाया गया था। श्री मोदी ने कहा कि भारत को नामीबिया और महाद्वीप के अन्य देशों के साथ अपने विकास के अनुभव साझा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी नामीबिया के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित

नामीबिया की राष्ट्रपति महामहिम नेटुम्बो नंदी-नदैतवा ने 9 जुलाई को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को नामीबिया के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एंशिएंट वेल्विट्सचिया मिराबिलिस’ से सम्मानित किया। वह यह पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय नेता हैं।

प्रधानमंत्री को यह पुरस्कार प्रदान किया जाना भारत और नामीबिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह दोनों देशों के युवाओं के लिए इस विशेष द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक ऊंचाइयों तक ले जाने हेतु प्रेरणा का स्रोत है।