गतांक से आगे…
श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जन्मशताब्दी वर्ष पर विशेष
वाजपेयी जी के दृष्टिकोण को साकार करना: श्री नरेन्द्र मोदी एवं ‘विकसित भारत 2047’ का रोडमैप
अटल बिहारी वाजपेयी जी की लगभग एक दशक की सरकार के बाद 2014 में नरेन्द्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने। अपनी अद्भुत दूरदर्शिता एवं गतिशीलता के साथ उन्होंने वहीं से शुरुआत की जहां अटल जी ने छोड़ा था। उन्होंने न केवल वाजपेयी जी द्वारा स्थापित मूलभूत आदर्शों को आत्मसात किया, बल्कि उन्हें नई उंचाइयों तक पहुंचाया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि हमारे आदरणीय एवं प्रशंसनीय नेता के दृष्टिकोण को न केवल याद रखा गया, बल्कि आधुनिक भारत में उन्हें पूरी तरह साकार भी किया जा रहा है।
मोदी सरकार के आगमन के साथ ही राष्ट्र निर्माण की प्रतीकात्मक ‘मशाल’ एक दूरदर्शी नेता से दूसरे दूरदर्शी नेता के हाथों में चली गई तथा अब यह मशाल और भी तेजी से प्रज्ज्वलित हो रही है, प्रगति और समावेशिता का मार्ग प्रशस्त कर रही है। मोदी जी का नेतृत्व एक अत्यंत शक्तिशाली निरंतरता का प्रतिनिधित्व करता है, जो वाजपेयी जी के ब्लूप्रिंट यानी पैमाने, गति और बेहतर तकनीकी एकीकरण के साथ आगे बढ़ रहा है।
बुनियादी ढांचे एवं कनेक्टिविटी में एक बड़ी छलांग
बुनियादी ढांचे के विकास एवं आधुनिकीकरण के लिए वाजपेयी जी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए मोदी जी ने इसे अभूतपूर्व पैमाने एवं एक महत्वाकांक्षा के साथ अपनाया। उदाहरण के लिए ‘भारतमाला परियोजना’ हमारी ‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ योजना का एक सीधा एवं व्यापक विस्तार है, जिसका उद्देश्य 83,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का विकास करना है, जिसमें आर्थिक गलियारे, अंतरराज्य-गलियारे और कई फीडर मार्ग शामिल हैं। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सड़कों की दक्षता, सीमा और
मोदी सरकार के आगमन के साथ ही राष्ट्र निर्माण की प्रतीकात्मक ‘मशाल’ एक दूरदर्शी नेता से दूसरे दूरदर्शी नेता के हाथों में चली गई तथा अब यह मशाल और भी तेजी से प्रज्ज्वलित हो रही है, प्रगति और समावेशिता का मार्ग प्रशस्त कर रही है। मोदी जी का नेतृत्व एक अत्यंत शक्तिशाली निरंतरता का प्रतिनिधित्व करता है, जो वाजपेयी जी के ब्लूप्रिंट यानी पैमाने, गति और बेहतर तकनीकी एकीकरण के साथ आगे बढ़ रहा है
अंतरराष्ट्रीय सड़कों, बंदरगाहों एवं तटीय संपर्क सड़कों तथा कई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी में सुधार करना भी है।
इसी प्रकार सागरमाला कार्यक्रम बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और तटीय क्षेत्रों में बंदरगाह-आधारित औद्योगीकरण एवं सामुदायिक विकास को बढ़ावा देने की परिकल्पना करता है। इसका लक्ष्य भारत के जलमार्ग एवं तटरेखा में सुधार लाना है। यह वाजपेयी जी की आर्थिक समझ का स्वाभाविक विस्तार है।
बंदरगाहों एवं सड़कों के अलावा वर्तमान सरकार ने समर्पित माल ढुलाई गलियारों, हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार, हवाई अड्डों की क्षमता में वृद्धि तथा नए हवाई अड्डों के निर्माण को लेकर तेजी से काम किया है। ये सभी मिलकर एक निर्बाध, एकीकृत राष्ट्रीय परिवहन ग्रिड बनाने में योगदान दे रहे हैं।
मोदी सरकार ने डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी काफी जोर दिया है, जो वाजपेयी जी के आधुनिकीकरण के प्रयासों की याद दिलाता है। डिजिटल इंडिया जैसी पहल लोगों को जोड़ रही है और उनके जीवन को अभूतपूर्व रूप से प्रभावित कर रही है। लेकिन ये पहल सिर्फ लोगों को जोड़ने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था में नागरिकों को सशक्त बनाते हुए शासन में बदलाव लाने का भी प्रयास करती हैं।
जैम (जन-धन, आधार, मोबाइल) त्रिमूर्ति ने एक मजबूत सार्वजनिक ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत हम डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) का प्रयोग कर, भ्रष्टाचार और लीकेज पर अंकुश लगाने में कामयाब रहे है। यह वाजपेयी जी के सुशासन एवं पारदर्शिता के दृष्टिकोण का स्पष्ट प्रकटीकरण है।
भारतनेट परियोजना, जिसका उद्देश्य प्रत्येक ग्राम पंचायत को ऑप्टिकल फाइबर (हाई-स्पीड इंटरनेट) से जोड़ना है, डिजिटल डिवाइड को पाटने की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता का एक और उदाहरण है। इस प्रकार, यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आधुनिक भारत के लाभ दूरस्थतम गांवों तक भी पहुंचें।
हाशिए पर पड़े लोगों का सशक्तीकरण: अंत्योदय की पहल
अंत्योदय (अंतिम व्यक्ति का उत्थान) के लिए वाजपेयी जी के कार्य को हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ाया है। 50 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के साथ आज आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य सेवा बन गयी है। यह योजना गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी चिकित्सा उपचार प्रदान करने के साथ ही यह सुनिश्चित करती है कि हाशिए पर पड़े एवं सबसे कमजोर लोगों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
वित्तीय समावेशन एक और आधारशिला रही है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने लाखों परिवारों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ा है और उनकी पहुंच बैंक खाते, डेबिट कार्ड, ऋण एवं बीमा तक सुनिश्चित की है। इसके अतिरिक्त छोटे उद्यमियों के लिए मुद्रा ऋण एवं प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण हमारे नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाकर एवं अर्थव्यवस्था में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए समावेशी विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मददगार साबित हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी पहलों ने ग्रामीण महिलाओं को मुफ़्त रसोई गैस कनेक्शन प्रदान किए और सार्वभौमिक स्वच्छता के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग किया है। ऐसे ही स्वच्छ भारत अभियान ने हाशिए पर पड़े लोगों के जीवन स्तर और सम्मान में प्रत्यक्ष रूप से सुधार किया है। यह उनके सशक्तीकरण के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण को भी दर्शाता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपनी दृढ़ कूटनीति का परिचय दिया है एवं वैश्विक मंच पर भारत का कद बढ़ाया है जो वाजपेयी जी की सिद्धांतबद्ध विदेश नीति की काफी याद दिलाता है। ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ जैसी पहलों ने भारत की रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक प्रभाव को उल्लेखनीय रूप से मजबूत किया है जो मोदी जी की सक्रिय विदेश नीतियों की पहचान है। रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने, सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे पर निर्णायक कार्रवाई जैसे सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर, भारत के हितों की रक्षा के लिए उनकी सच्ची दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अनुच्छेद 370 को निरस्तीकरण, जो पार्टी की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा थी, ने राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रणनीतिक स्वायत्तता पर प्रधानमंत्री मोदी जी के दृढ़ रुख को प्रदर्शित किया है।
संकट के समय में लचीलापन एवं सुशासन
कोविड-19 महामारी के प्रति सरकार की त्वरित एवं व्यापक प्रतिक्रिया ने सुशासन तथा जन-केंद्रित नीतियों की विरासत को दर्शाया है। स्वदेशी टीकों के तीव्र विकास एवं उपयोग से लेकर व्यापक
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपनी दृढ़ कूटनीति का परिचय दिया है एवं वैश्विक मंच पर भारत का कद बढ़ाया है जो वाजपेयी जी की सिद्धांतबद्ध विदेश नीति की काफी याद दिलाता है। ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ जैसी पहलों ने भारत की रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक प्रभाव को उल्लेखनीय रूप से मजबूत किया है जो मोदी जी की सक्रिय विदेश नीतियों की पहचान है
टीकाकरण अभियान तक और 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने से लेकर आर्थिक राहत पैकेजों तक, प्रशासन ने संकट के समय में संयम और जन कल्याण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का परिचय दिया है। डिजिटल सुधारों पर निरंतर जोर, जैसे कि डिजिटल लेन-देन में क्रांति लाने वाला यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) और टीकाकरण प्रबंधन के लिए कोविन प्लेटफ़ॉर्म, कुशल और पारदर्शी शासन के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की सरकार की क्षमता को दर्शाता है, जो एक आधुनिक और प्रभावी राज्य के लिए वाजपेयी जी के दृष्टिकोण का प्रत्यक्ष विस्तार है।
आदर्शों का अनुकरण: मेरी संसदीय भूमिका
अटल बिहारी वाजपेयी जी के साथ मिलकर काम करने का विशिष्ट सौभाग्य प्राप्त करने और अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व में सेवा करने के बाद यह स्पष्ट है कि हमारी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों पर अडिग है। नीतियों का विकास और शासन के प्रति दृष्टिकोण समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप ढले हैं, फिर भी हमारी विचारधारा की गहरी जड़ों और हमारे संस्थापक नेताओं के दृष्टिकोण को कभी नजरअंदाज नहीं किया गया है।
एक सांसद के रूप में मैं हर दिन देखता हूं कि कैसे वाजपेयी जी के दृष्टिकोण की भावना वर्तमान प्रशासन के कार्यों में व्याप्त है। चाहे स्वास्थ्य सेवा सुधार हो, शिक्षा नीतियों या सामाजिक कल्याण योजनाओं से जुड़ी बहस हो, यह सभी इस बात पर जो देते है कि योजनाओं का लाभ सबसे कमजोर व्यक्ति तक पहुंचें। यह केवल आंकड़ा नहीं है; यह मानवीय पहलू के बारे में है, यह एक ऐसा सबक है जो मैंने वाजपेयी जी के शासन से सीखा है।
राष्ट्रीय अखंडता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता एक और सिद्धांत है जिसे नए जोश के साथ आगे बढ़ाया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने वाले विधायी उपायों से लेकर वैश्विक मंच पर भारत की संप्रभुता को स्थापित करने वाले कूटनीतिक प्रयासों तक, हर कदम हमारे राष्ट्र की एकता की रक्षा और उसे बनाए रखने के दृढ़ संकल्प से प्रेरित है। यह वाजपेयी जी के राष्ट्रीय गौरव के प्रति दृढ़ संकल्प एवं उनके रणनीतिक संकल्प को प्रतिध्वनित करता है।
इसके अलावा, धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद के बीच संतुलन एक विशिष्ट विशेषता बनी हुई है। राष्ट्रवाद के बारे में पार्टी का दृष्टिकोण स्वाभाविक रूप से समावेशी है, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का

वाजपेयी जी द्वारा रखी गई नींव पर अब मोदी जी ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है, जिससे प्रगति की एक ऐसी इमारत खड़ी हो रही है जो सभी भारतीयों के लिए एक बेहतर और उज्ज्वल भविष्य का वादा करती है। हम सभी लोग, एक राष्ट्र के रूप में एक सशक्त और सामंजस्यपूर्ण भारत के भव्य स्वप्न को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य करते रहेंगे। एक ऐसा स्वप्न जो हमारे समृद्ध अतीत के अनुरूप हो और साथ ही भविष्य की असीम संभावनाओं को साहसपूर्वक अपनाए
जश्न मनाते हुए साझा राष्ट्रीय आकांक्षाओं पर आधारित एक सामूहिक पहचान को बढ़ावा देता है। यह एक सूक्ष्म दृष्टिकोण है, जिसका वाजपेयी जी ने सद्भाव और आम सहमति पर जोर देकर समर्थन किया था और जिसे मोदी जी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में व्यक्त करते रहते हैं।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) जैसी परिवर्तनकारी पहल, जिसने भारत के अप्रत्यक्ष कर ढांचे को सुव्यवस्थित किया, सभी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास में अभूतपूर्व वृद्धि, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का विस्तार और विभिन्न तकनीकी हस्तक्षेपों के माध्यम से डिजिटल सशक्तीकरण- ये सभी केवल छिटपुट उपलब्धियां नहीं हैं, ये मूलतः वाजपेयी जी के दूरदर्शी रोडमैप की मूर्त अभिव्यक्तियां हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में साकार करने के लिए सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध और सशक्त रूप से क्रियान्वित किया गया। मुझे इस सतत् यात्रा में योगदान देने पर गर्व है, यह देखकर कि कैसे दशकों पहले बोए गए बीज अब एक जीवंत, आधुनिक भारत के रूप में फल-फूल रहे हैं।
यात्रा निर्बाध जारी है
भाजपा सांसद के रूप में मुझे अटल बिहारी वाजपेयी जी की समृद्ध विरासत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के गतिशील एवं परिवर्तनकारी नेतृत्व का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। जैसाकि मोदी जी ने कहा है, ‘हम साथ-साथ चलते हैं, हम साथ-साथ सोचते हैं, हम साथ-साथ संकल्प करते हैं और हम साथ-साथ इस देश को आगे बढ़ाते हैं।’ राष्ट्र निर्माण की इस निरंतर प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग बनकर मुझे अपार गर्व और कृतज्ञता का अनुभव हो रहा है।
अटल बिहारी वाजपेयी जी के दूरदर्शी दृष्टिकोण से मोदी जी के ‘2047 तक विकसित भारत’ के दृढ़ संकल्प को साकार करने की दिशा में विरासत का हस्तांतरण, भारत की विकासात्मक कहानी को सामने लाने में एक निर्बाध एवं शक्तिशाली निरंतरता का प्रतिनिधित्व करता है।
आज, भारत वैश्विक मंच पर पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में प्रतिष्ठित है और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर निरंतर अग्रसर है। भारत ने स्वयं को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है जो अपने लोकाचार एवं विकास यात्रा में समावेशी है, उत्तरोत्तर आधुनिक होता जा रहा है और अपनी आकांक्षाओं में ‘अनेकता में एकता’ के दृष्टिकोण को आत्मसात करते हुए उल्लेखनीय रूप से एकजुट है। यह जीवंतता इस बात का प्रमाण है कि वाजपेयी जी के एक सशक्त, समृद्ध और सामंजस्यपूर्ण भारत के सपने न केवल आज भी कायम हैं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सक्रिय रूप से फल-फूल भी रहे हैं।
वाजपेयी जी द्वारा रखी गई नींव पर अब मोदी जी ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है, जिससे प्रगति की एक ऐसी इमारत खड़ी हो रही है जो सभी भारतीयों के लिए एक बेहतर और उज्ज्वल भविष्य का वादा करती है। हम सभी लोग, एक राष्ट्र के रूप में एक सशक्त और सामंजस्यपूर्ण भारत के भव्य स्वप्न को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य करते रहेंगे। एक ऐसा स्वप्न जो हमारे समृद्ध अतीत के अनुरूप हो और साथ ही भविष्य की असीम संभावनाओं को साहसपूर्वक अपनाए।
(लेखक भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद हैं)

