एमएसएमई ने अपेक्षाकृत कम पूंजी लागत पर लाखों नौकरियां सृजित की हैं और कृषि के बाद यह रोजगार सृजन में दूसरे स्थान पर है
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा 30 अगस्त को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार अभी तक उद्यम पोर्टल पर कुल 4,91,47,316 पंजीकृत एमएसएमई हैं, जिनमें से अधिकांश को सूक्ष्म उद्यम के रूप में वर्गीकृत किया गया है। अपने आर्थिक योगदान के अलावा इन एमएसएमई ने पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। देशभर में 21.17 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया है जो कि सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ाने में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार दुनिया भर में एमएसएमई 90% व्यवसायों का प्रतिनिधित्व करते हैं; 60 से 70% रोजगार सृजित करते हैं और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 50% का योगदान देते हैं। भारत में पिछले पांच दशकों में एमएसएमई देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एमएसएमई ने अपेक्षाकृत कम पूंजी लागत पर लाखों नौकरियां सृजित की हैं और कृषि के बाद यह रोजगार सृजन में दूसरे स्थान पर है।
एमएसएमई सेक्टर ने पिछले कुछ वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद में एमएसएमई द्वारा सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 2017-18 में 29.7%, जो 2018-19 और 2019-20 में बढ़कर 30.5% हो गया। कोविड-19 महामारी के बावजूद इस क्षेत्र ने वर्ष 2020-21 में 27.3% का योगदान बनाए रखा, जो वर्ष 2021-22 में बढ़कर 29.6% और 2022-23 में 30.1% तक पहुंच गया।
एमएसएमई ने 2019-20 में भारत के निर्यात में 49.75% का योगदान दिया, जो 2020-21 में घटकर 49.35% और 2021-22 में 45.03% रह गया। साल 2022-23 में यह आंकड़ा घटकर 43.59% रह गया, जो कि वर्ष 2023-24 में बढ़कर 45.73% और मई, 2024 तक 45.79% हो गया।

