मूल्यों पर आधारित शासन: अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत

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डॉ. विवेक कुमार मिश्रा

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, निस्संदेह हमारे देश के सबसे प्रमुख एवं सर्वमान्य नेताओं में से एक थे, जिन्होंने 16 अगस्त, 2018 को अंतिम सांस ली। 25 दिसंबर, 1924 को ग्वालियर में जन्मे, एक प्रखर वक्ता, जिन्होंने अपने जीवनकाल में भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचते देखा। राजनीति, गद्य और काव्य के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा के कारण उन्होंने सभी का सम्मान अर्जित किया।

दुनिया ने कई कद्दावर नेताओं को जन्म दिया है जिन्हें समाज से सम्मान मिला, लेकिन बहुत कम ऐसे नेता हुए जिन्हें अपने आलोचकों से भी सम्मान मिला और अटल बिहारी वाजपेयी उनमें से एक थे। वाजपेयी जी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे, एक बार 1996 में केवल 13 दिनों के लिए और फिर 1998 में 11 महीनों के लिए, लेकिन उसके बाद उन्होंने 1999-2004 तक अपना कार्यकाल पूर्ण किया।

अटल जी अपने राजनीतिक जीवन में दस बार लोकसभा सांसद और दो बार राज्यसभा के लिए चुने गए। उन्होंने प्रधानमंत्री का कार्यकाल पूरा किया और ऐसा करने वाले वह भारत के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे। वाजपेयी जी को 2015 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

अटल जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक समर्पित स्वयंसेवक थे, जो भारत के पुनरुत्थान के लिए समर्पित एक अद्वितीय सामाजिक संगठन है। आरएसएस से अपने जुड़ाव के बारे में, अटल जी ने एक बार संयुक्त राज्य अमेरिका में कहा था कि “वह कल प्रधानमंत्री नहीं हो सकते हैं, लेकिन कोई भी उनके स्वयंसेवक होने के अधिकार को नहीं छीन सकता है।” उन्होंने आरएसएस के बारे में लिखा, “आरएसएस केवल व्यक्तियों को नहीं बदलता है, बल्कि यह सामूहिक मन को बदलता है। यह

वाजपेयी जी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे, एक बार 1996 में केवल 13 दिनों के लिए और फिर 1998 में 11 महीनों के लिए, लेकिन उसके बाद उन्होंने 1999-2004 तक अपना कार्यकाल पूर्ण किया। अटल जी अपने राजनीतिक जीवन में दस बार लोकसभा सांसद और दो बार राज्यसभा के लिए चुने गए

आरएसएस के लोकाचार की सुंदरता है। हमारी आध्यात्मिक परंपरा में एक व्यक्ति महान ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है।” वह हिंदुत्व विचारधारा में दृढ़ विश्वास रखते थे। वह भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक थे। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय से अपने मूल्यों और राष्ट्र सेवा की मजबूत परंपराओं को आत्मसात किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य के रूप में श्री वाजपेयी 16 साल की उम्र से ही राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे। 1951 में उन्होंने ‘भारतीय जनसंघ’ के लिए काम करना शुरू किया।

सुशासन दिवस

श्री अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे नेता थे जिन्होंने राजनीति को मूल्यों और भारतीय परंपराओं से जोड़कर सुशासन की नींव रखी। वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2014 में अटल जी के 90वें जन्मदिन को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में घोषित किया था। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत की जनता को पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह शासन प्रदान करने की प्रतिबद्धता के माध्यम से वाजपेयी जी के मार्ग पर चलने का निर्णय लिया। मुझे लगता है कि अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर प्रतिवर्ष सुशासन दिवस मनाना भारत के लोगों के लिए एक बड़े सम्मान की बात है।

सुशासन का अर्थ है विकासोन्मुख, पारदर्शिता और सेवाओं की शीघ्र एवं सुगम प्राप्ति पर आधारित सरकार से है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि “हमारे प्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिन को सुशासन दिवस घोषित कर हम इस देश के लोगों को पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह शासन प्रदान करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि “अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न मुद्दों से निपटने में अटल जी की कुशलता राष्ट्र के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई है।” इसीलिए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने उनके जन्मदिन को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।
अटल जी के जन्मदिन को सुशासन दिवस के रूप में मनाने का उद्देश्य इस प्रकार है:

• पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासन का निर्माण
• आम आदमी का कल्याण सुनिश्चित करना
• सुशासन के लिए अच्छी और प्रभावी नीतियां बनाना
• लोगों को भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देना
• देश में पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन प्रदान करने की सरकार की प्रतिबद्धता के बारे में लोगों को जागरूक करना
• देश में विकास और प्रगति को बढ़ावा देना
• नागरिकों को सरकार के करीब लाना ताकि वे शासन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बन सकें

अटल जी की सबसे यादगार उपलब्धि उनके द्वारा शुरू की गई महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाएं थीं – ‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ और ‘प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना’। स्वर्णिम चतुर्भुज ने चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली और मुंबई को राजमार्गों के एक नेटवर्क के माध्यम से जोड़ा, जबकि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के माध्यम से गांवों को बारहमासी सड़कों के एक नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया

अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रूप में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान उपर्युक्त सभी उद्देश्यों के लिए प्रयास किया। उनके जन्मदिन पर सुशासन दिवस मनाना उनकी आजीवन सेवा का सम्मान है। इसके अलावा, सुशासन दिवस भारत सरकार को निरंतर यह याद दिलाता रहेगा कि सत्तारूढ़ दल निष्पक्ष, विकासोन्मुखी होना चाहिए और समाज के उन सभी वर्गों का विकास होना चाहिए, जिनके लिए वाजपेयी जी ने अपना जीवन समर्पित किया।

वाजपेयी शासन की आर्थिक नीतियां

अपने कार्यकाल के दौरान वाजपेयी जी ने तुच्छ राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के बजाय देश के विकास के लिए लक्षित कार्यक्रमों को प्रमुखता दी। सुशासन का मूल विचार वाजपेयी ने 7 सितंबर, 2000 को न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी में अपने संबोधन में प्रस्तुत किया था। उन्होंने कहा था, “व्यक्ति को सशक्त बनाने का अर्थ है राष्ट्र को सशक्त बनाना और सशक्तीकरण तीव्र आर्थिक विकास और तीव्र सामाजिक परिवर्तन के माध्यम से सर्वोत्तम रूप से प्राप्त होता है।” वास्तव में ये शब्द देश के प्रति उनके योगदान में परिलक्षित होते थे। उन्होंने न केवल भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार किया, बल्कि समाज के वंचित वर्ग के उत्थान के लिए कई सामाजिक सुधार भी किए।

वाजपेयी सरकार में भारत का आर्थिक विकास सबसे तेज गति से हुआ। उनके कुशल और दूरदर्शी मार्गदर्शन में कार्यान्वित सुधार कार्यक्रमों के कारण भारत सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक उभरती हुई शक्ति बन गया। वाजपेयी जी का दृढ़ विश्वास था कि हमारे देश के प्रत्येक क्षेत्र, प्रत्येक समुदाय और प्रत्येक नागरिक को भारत की समृद्धि और प्रगति का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने गरीबों को सस्ता और रियायती खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए ‘अंत्योदय अन्न योजना’ शुरू की और आम आदमी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

अटल जी की सबसे यादगार उपलब्धि उनके द्वारा शुरू की गई महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाएं थीं— ‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ और ‘प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना’। स्वर्णिम चतुर्भुज ने चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली और मुंबई को राजमार्गों के एक नेटवर्क के माध्यम से जोड़ा, जबकि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के माध्यम से गांवों को बारहमासी सड़कों के एक नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना 5 वर्षों की अवधि में पूरी हुई। सड़क निर्माण प्रतिदिन 11 किलोमीटर राजमार्गों तक पहुंच गया। ‘दिल्ली मेट्रो’ परियोजना का शुभारंभ वाजपेयी जी ने 2002 में किया था।

वाजपेयी जी ने आर्थिक सुधारों की शुरुआत करके भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। 1998 से 2004 तक उनके कार्यकाल में भारत की जीडीपी दर आठ प्रतिशत, मुद्रास्फीति दर चार प्रतिशत के भीतर और विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि बनी रही। अटल जी की प्रतिबद्धता, व्यवसायों और उद्योगों के संचालन में सरकारी भूमिका को कम करने की थी और यह एक अलग विनिवेश मंत्रालय के गठन में परिलक्षित हुई। सबसे महत्वपूर्ण विनिवेश भारत एल्युमिनियम कंपनी (बाल्को) और हिंदुस्तान जिंक, इंडियन पेट्रोकेमिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड और वीएसएनएल में हुए। वाजपेयी सरकार ने राजकोषीय उत्तरदायित्व अधिनियम लागू करके एक और क्रांतिकारी सुधार किया, जिसका उद्देश्य राजकोषीय घाटे को कम करना था।

                                                                                                       (शेष अगले अंक में…)

(लेखक जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय संबंध पढ़ाते हैं)