संविधान के 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर विशेष चर्चा
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 13 दिसंबर, 2024 को लोकसभा में संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर हुई चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा, “हम सभी भाग्यशाली हैं कि हम भारत के संविधान के ‘अमृत महोत्सव’ के साक्षी बन रहे हैं।”
उन्होंने भारत की स्वतंत्रता एवं भारत के संविधान के निर्माण से जुड़ी सभी महान हस्तियों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
हम यहां अपने सुधी पाठकों के लिए श्री राजनाथ सिंह के भाषण का सारांश प्रकाशित कर रहे हैं:
हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि हम भारतीय संविधान के अमृत महोत्सव के साक्षी बन रहे है। 75 वर्ष पहले संविधान सभा द्वारा स्वतंत्र भारत के लिए संविधान निर्माण का महान कार्य सम्पन्न किया गया था। लगभग 3 वर्षों की जोरदार बहस और विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप हमें हमारा संविधान मिला है। संविधान सभा ने जो संविधान तैयार किया था वह केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं था, बल्कि जन आकांक्षाओं का प्रतिबिम्ब था और उन्हें पूरा करने का वह माध्यम भी था।
हमारा संविधान सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक जीवन के सभी पहलुओं को छूते हुए राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है। इसके साथ ही लोगों के लिए मोरल ट्रेजेक्टरी यानी नैतिक मार्ग भी बनाता है। हमारा संविधान सहकारी संघवाद सुनिश्चित करने के साथ ही राष्ट्र की एकता को सुनिश्चित करने पर भी बल देता है। यह संविधान नियंत्रण और संतुलन बनाए रखने का भी सिस्टम प्रदान करता है, जिससे सभी संस्थाएं अपने संवैधानिक दायरे में रहकर काम कर सके।
हमारा संविधान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग से सिंचित स्वाभिमान है
हमारा संविधान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग से सिंचित स्वाभिमान है। यह ऐतिहासिक घटनाक्रमों की शृंखला का परिणाम है। कई महापुरुषों के विचारों ने हमारे स्वतंत्र भारत के संविधान की भावना को मजबूत और समृद्ध किया। स्वतंत्रता व समानता के सिद्धांतों पर आधारित एक गणतांत्रिक संविधान की डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भी वकालत की थी। हमारे वर्तमान संविधान में भी इन्हीं मूल्यों को प्राथमिकता दी गई है। हमारा संविधान संवैधानिक तंत्र के जरिए नागरिकों के कल्याण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की भावना के साथ काम कर रही है। मौजूदा सरकार भारत के संविधान में निहित धर्म और भावना दोनों के अनुरूप काम कर रही है। हमारा संविधान प्रगतिशील, समावेशी और परिवर्तनकारी है। मौजूदा सरकार संविधान की मूल भावना को केंद्र में रखकर जनहित के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रही है। हमने गुलामी की मानसिकता को समाप्त करके ‘भारत न्याय संहिता’, ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ और ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम’ जैसे नये कानूनों को पारित किया है। सरकार ने समाज के सभी वर्गों, विशेषकर कमजोर वर्गों के लोगों के समुचित विकास को अपना लक्ष्य बनाया है।
रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म
रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के हमारे संकल्प ने आज भारत को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की कतार में लाकर खड़ा कर दिया है। सामाजिक न्याय के संवैधानिक आदशों के अनुरूप महिला और महिला नेतृत्व विकास को सुनिश्चित करने के लिए हमने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया है। इससे राजनीतिक क्षेत्र की महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा तथा उनका सशक्तीकरण भी सुनिश्चित होगा। वर्ष 2018 में राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया है।
आजाद भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ है। आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को दस प्रतिशत आरक्षण का अवसर प्रदान किया गया है। सरकार ने संविधान को लेटर एंड स्पिरिट में बखूबी लागू किया है।
संविधान के मूल्य हमारे लिए सर्वोपरि
मैं इस अवसर पर संविधान के कस्टोडियन और इंटरप्रेटर के रूप में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की भी सराहना करना चाहता हूं। विपक्ष के कई नेता संविधान की प्रति अपनी जेब में रखकर घूमते हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी संविधान को सिर माथे पर लगाती है। हमारी प्रतिबद्धता संविधान के प्रति पूरी तरह से साफ है। संविधान के मूल्य हमारे लिए सर्वोपरि हैं। हमारे संविधान निर्माताओं ने हमें एक जीवंत दस्तावेज दिया है जो युगानुकूल परिवर्तन की जरूरत के साथ तेजी से आग बढ़ रहा है। बाबा साहब अम्बेडकर सहित अन्य संविधान निर्माताओं ने भी यह माना था कि संविधान भविष्य की सभी संभावनाओं को नहीं भांप सकता है। इसलिए उन्होंने आने वाली पीढ़ियों को उसमें संशोधन करने का अधिकार दिया था।
वर्तमान सरकार ने पिछले दस वर्षों में जो भी संवैधानिक संशोधन किए हैं, मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि उन सभी का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ संवैधानिक मूल्यों को सशक्त करना था, सामाजिक कल्याण था, लोगों का सशक्तीकरण था। चाहे वह अनुच्छेद 370 को निरस्त किया जाना हो या महिलाओं के सामाजिक व आर्थिक सशक्तीकरण के लिए नारी वंदन अधिनियम हो या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सामाजिक न्याय के लिए आरक्षण हो या जीएसटी कानून हो, यह कार्य संघवाद के संवैधानिक सिद्धांत को कायम रखते हुए सभी को साथ लेकर चलने के हमारे प्रयास को दर्शाता है।
कांग्रेस ने किया संविधान बदलने का प्रयास
आजाद भारत के इतिहास में कांग्रेस ने सिर्फ संविधान संशोधन ही नहीं किया है, बल्कि धीरे-धीरे संविधान को बदलने का प्रयास भी किया है। कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए अधिकांश संवैधानिक संशोधन या तो विरोधियों और आलोचकों को चुप कराने के लिए किए गए या गलत नीतियों को लागू करने के लिए किए गए थे। क्या यह सब एक तानाशाह द्वारा अपने निजी स्वार्थ के लिए संविधान को विकृत करने का भरसक प्रयास नहीं था? जैसाकि आप जानते हैं कि आर्टिकल 368 के माध्यम से संविधान में संशोधन की व्यवस्था की गई है और संविधान में लोक सभा कार्यकाल भी बढ़ाकर छह साल कर दिया गया। 75 वर्षों के बाद आज हमें अपने संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराना चाहिए। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि भारत का संविधान भारतवासियों की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक सशक्त माध्यम साबित हुआ है।
हमें बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान सभा के प्रत्येक सदस्य के प्रति आभारी होना चाहिए। डॉ. अंबेडकर ने उसमें कहा था कि जिन लोगों पर देश चलाने की जिम्मेदारी है, उनकी भूमिका सकारात्मक हो। हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हमारा संविधान सबसे उत्कृष्ट दिमागों की एक कड़ी मेहनत और दृष्टि का परिणाम है। हमारा संविधान हर मामले में एक महान दस्तावेज़ है। हमारे प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व की सरकार संविधान की पवित्रता को किसी भी सूरत में भंग नहीं होने देगी।

