महिला विकास से महिला-नेतृत्व वाले विकास तक

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) पर विशेष

     जैसा कि विश्व अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है, मैं इस बात को आपके समक्ष रखना चाहती हूं कि कैसे भारत महिलाओं के विकास के युग से आगे बढ़कर अब महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की नई सुबह की ओर एक प्रेरक यात्रा पर निकल गया है। यह परिवर्तन एक महत्वपूर्ण कदम है: जो महिला केंद्रित विकास पहलों के माध्यम से महिलाओं के लिए अवसर, सेवाओं तक पहुंच और समानता सुनिश्चित करता है।

हालांकि, महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास समावेशन से कहीं आगे जाता है। यह महिलाओं को नेतृत्व की बागडोर संभालने, नवाचार को आगे बढ़ाने और नीतियों को आकार देने में सशक्त बनाता है।

महिला सशक्तीकरण को लेकर हमारे व्यवहार में एक बड़ा बदलाव आया है। भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि महिलाएं विकास के केंद्र में हैं। अब सत्ता का नजरिया बदल रहा है, ताकि वे खुद बदलाव की राह तय कर सकें। महिलाएं नीतियों और कार्यक्रमों की सिर्फ निष्क्रिय लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि अब सक्रिय बदलाव लाने वाली हैं। भारत एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां महिलाएं निर्णय लेने, नेतृत्व करने और नीतियों को लागू करने, व्यवसायों और सामुदायिक पहलों का नेतृत्व करने के केंद्र में हों। वे राष्ट्र को सशक्त बनाती हो। जैसा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं: “जब महिलाएं समृद्ध होती हैं, तो दुनिया समृद्ध होती है।” महिलाओं की यह प्रगति हमारे राष्ट्र के सशक्तीकरण को ताकत देती है।

महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास समावेशन से कहीं आगे जाता है। यह महिलाओं को नेतृत्व की बागडोर संभालने, नवाचार को आगे बढ़ाने और नीतियों को आकार देने में सशक्त बनाता है

भारत ने हमेशा महिला नेतृत्व की अपनी समृद्ध परंपराओं को संजोया है और उसे कायम रखा है, जो इसकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में गहराई से समाहित है। वैदिक काल में गार्गी और मैत्रेयी नेतृत्वकर्ता थीं, जिन्होंने अन्य दार्शनिकों के साथ बहस में बराबरी से भाग लिया और उस समय भी महिलाओं के लिए उपलब्ध शैक्षिक अवसरों के प्रतीक के रूप में काम किया। रानी लक्ष्मीबाई और कित्तूर रानी चेन्नम्मा जैसी महिलाएं भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की क्षेत्रीय और लैंगिक विविधता का प्रतीक थीं। आज, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को आदिवासी समुदाय से संबंधित पहली महिला और सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाली दूसरी महिला होने का गौरव प्राप्त है। चंद्रयान और मंगलयान मिशन काफी हद तक भारत की शानदार महिला वैज्ञानिकों की वजह से सफल हुए। उन्होंने इन पदों का नेतृत्व किया क्योंकि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) पाठ्यक्रमों में भारत के 43 प्रतिशत स्नातक महिलाएं हैं। दुनिया भर में STEM स्नातकों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है। आज, महिलाएं व्यवसाय, चिकित्सा और सशस्त्र बलों जैसे क्षेत्रों में अग्रणी हैं, लेकिन बदलाव सिर्फ इन्हीं तक सीमित नहीं है।

भारत भर में जमीनी स्तर पर लाखों महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में लगभग 11.5 मिलियन लखपति दीदी हैं, जो स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की सदस्य हैं और जिनकी वार्षिक घरेलू आय 1 लाख रुपये से अधिक है। ड्रोन दीदी योजना का लक्ष्य 2024-25 और 2025-2026 के बीच 15,000 चयनित एसएचजी को ड्रोन प्रदान करना है। ड्रोन का उपयोग कृषि क्षेत्रों में तरल उर्वरकों और कीटनाशकों को डालने, जल संसाधनों के प्रबंधन और पानी की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करके सिंचाई करने और मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता का विश्लेषण करने के लिए किया जा सकता है। पीएम मुद्रा योजना की शुरुआत के बाद से इस योजना के तहत महिलाओं को 69 प्रतिशत से अधिक ऋण प्रदान किये गये हैं। भारत में लगभग 80 प्रतिशत महिलाओं के पास बैंक खाता है, जिसका संचालन वे स्वयं करती हैं। स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) और जल जीवन मिशन जैसे कार्यक्रमों ने क्रमशः शौचालय और नल के पानी तक पहुंच प्रदान करते हुए लगभग 100 मिलियन और 122 मिलियन परिवारों को लाभान्वित किया है और इस तरह लाखों महिलाओं को सशक्त बनाया है।

ग्रामीण आवास कार्यक्रम के तहत पंजीकृत घरों में से 74 प्रतिशत या तो पूरी तरह से या संयुक्त रूप से महिलाओं के नाम पर हैं। मुफ्त गैस सिलेंडर वितरित करने के सरकार के कार्यक्रम ने 103 मिलियन महिलाओं के धुएं से मुक्त रसोई के सपने को साकार किया है। मई, 2024 तक 1.4 मिलियन से अधिक महिलाएं पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) की सदस्य चुनी गईं, जिसमें सरपंच का पद भी शामिल है। यह पीआरआई के कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों का 46 प्रतिशत है। महिला सरपंच अपने गांवों में पानी, सौर ऊर्जा, पक्की सड़कें, शौचालय और बैंकों को बेहतर बनाने की परियोजनाओं में शामिल रही हैं।

महिलाओं को आवाज उठाने और नेतृत्व करने में सक्षम बनाने के लिए अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता है। हमारी सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक जैसे ऐतिहासिक कानूनों के माध्यम से इस एजेंडे के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण की गारंटी देता है। मातृत्व लाभ अधिनियम में संशोधन कर महिलाओं को 26 सप्ताह तक के सवेतन मातृत्व अवकाश की गारंटी भी दी गयी। महिला हेल्पलाइन और शी-बॉक्स जैसी पहल संकट में महिलाओं को सहायता प्रदान करती हैं, जबकि ‘पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई) योजना’ का लक्ष्य देश भर में 1,000 कामकाजी महिला छात्रावास स्थापित करना है, जिससे आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा मिलेगा।

भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के लिए प्रधानमंत्री के आह्वान का समर्थन ब्राजील ने भी किया, जिसने 2024 में जी-20 की अध्यक्षता की। यह महिलाओं की पूरी क्षमता का उपयोग करने, उनके अमूल्य योगदान को मान्यता देने और प्रगति एवं समृद्धि की यात्रा में एक नेतृत्वकर्ता के रूप में उनकी भूमिका को स्वीकार करने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। आइए, हम सब मिलकर #AccelerateAction के लिए एकजुट हों और भारत के भविष्य को आकार देने की जिम्मेदारी लें। हम सभी को हाथ मिलाना चाहिए, बदलाव को अपनाना चाहिए और प्रगति एवं सशक्तीकरण की दिशा में इस प्रेरक यात्रा का हिस्सा बनना चाहिए।

(लेखक केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं)