वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास एवं उद्घाटन
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 11 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 3,880 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने काशी से अपने गहरे जुड़ाव की चर्चा करते हुए अपने परिवार और क्षेत्र के लोगों के आशीर्वाद के लिए उनका हार्दिक आभार व्यक्त किया और उन्हें मिले अपार स्नेह और समर्थन को भी स्वीकार किया। प्रधानमंत्री ने इस स्नेह के प्रति ऋणी होने का भाव प्रकट करते हुए कहा कि काशी उनकी है और वे काशी के हैं।
काशी अब न केवल प्राचीन है बल्कि प्रगतिशील भी है
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में बनारस के विकास को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि
भारत पिछले एक दशक में दूध उत्पादन में लगभग 65 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा दूध उत्पादक बन गया है। इस सफलता का श्रेय लाखों किसानों और पशुपालकों को जाता है। ऐसी उपलब्धियां पिछले दस वर्षों में निरंतर प्रयासों का परिणाम हैं
काशी ने आधुनिकता को अपनाते हुए न सिर्फ अपनी विरासत को संजोया है बल्कि उज्ज्वल भविष्य को भी अपनाया है। उन्होंने कहा कि काशी अब न केवल प्राचीन है बल्कि प्रगतिशील भी है, यह अब पूर्वांचल के आर्थिक मानचित्र का केंद्र भी है।
कार्यक्रम में काशी और पूर्वांचल के विभिन्न हिस्सों से जुड़ी कई परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से सम्पर्क को मजबूत बनाने, हर घर में नल से जल पहुंचाने के अभियान और शिक्षा, स्वास्थ्य एवं खेल सुविधाओं के विस्तार पर बल दिया। उन्होंने हर क्षेत्र, हर परिवार और हर युवा को बेहतर सुविधाएं देने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि ये पहल पूर्वांचल को एक विकसित क्षेत्र में बदलने में महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध होंगी।
प्रधानमंत्री ने आज महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर समाज के कल्याण और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए उनके और सावित्रीबाई फुले के आजीवन समर्पण को याद किया। उन्होंने महिला सशक्तीकरण के लिए उनके दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने के लिए जारी प्रयासों पर भी चर्चा की।
श्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर चलती है। उन्होंने पूर्वांचल के पशुपालक परिवारों, विशेषकर परिश्रमी महिलाओं को बधाई दी, जिन्होंने इस क्षेत्र के लिए एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने कहा कि जब-जब महिलाओं पर भरोसा किया जाता है, तब-तब उन्होंने इतिहास रच दिया है।
प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के बनास डेयरी प्लांट से जुड़े पशुपालक परिवारों को बोनस के वितरण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 100 करोड़ रुपये से अधिक का यह बोनस कोई उपहार नहीं बल्कि उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण का पुरस्कार है, जो उनके श्रम और दृढ़ता के मूल्य को दर्शाता है।
काशी में हजारों परिवारों के जीवन और नियति को नया आकार देने वाली बनास डेयरी के परिवर्तनकारी प्रभाव की चर्चा करते हुए श्री मोदी ने बताया कि किस प्रकार से डेयरी ने कड़ी मेहनत को पुरस्कृत किया है और आकांक्षाओं को पंख दिए हैं। उन्होंने गर्व से कहा कि इन प्रयासों ने पूर्वांचल की कई महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनने में सक्षम बनाया है और अब वे आजीविका की चिंताओं से समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ रही हैं। श्री मोदी ने कहा कि यह प्रगति केवल बनारस और उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में स्पष्ट है।
भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पिछले एक दशक में दूध उत्पादन में लगभग 65 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा दूध उत्पादक बन गया है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय लाखों किसानों और पशुपालकों को देते हुए कहा कि ऐसी उपलब्धियां पिछले दस वर्षों में निरंतर प्रयासों का परिणाम हैं। श्री मोदी ने डेयरी क्षेत्र को मिशन मोड में आगे बढ़ाने के लिए की गई पहलों की ओर इशारा किया, जिसमें पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड सुविधाओं से जोड़ना, ऋण सीमा बढ़ाना और सब्सिडी कार्यक्रम का शुभारंभ शामिल है।
प्रधानमंत्री ने कई वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान वय वंदना कार्ड वितरित करने का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके चेहरों पर दिख रहे संतोष के भाव बताते हैं कि यह इस योजना की सफलता का प्रमाण है।
विकास और विरासत के बीच संतुलन बनाने की भारत की यात्रा की चर्चा के साथ-साथ काशी को इस मॉडल का सबसे बेहतरीन उदाहरण बताते हुए प्रधानमंत्री ने गंगा के प्रवाह और भारत की चेतना पर भी अपने भाव प्रकट करते हुए कहा कि काशी भारत की आत्मा और विविधता का सबसे सुंदर प्रतिनिधित्व है
पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवा में की गई महत्वपूर्ण प्रगति पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इससे न केवल अस्पतालों की संख्या में वृद्धि हुई है, बल्कि रोगियों का उपचार भी पूर्ण गरिमा के साथ किया जा रहा है। श्री मोदी ने आयुष्मान भारत योजना को गरीबों के लिए वरदान बताया, जो न केवल उपचार प्रदान करती है, बल्कि आत्मविश्वास भी जगाती है।
उन्होंने कहा कि वाराणसी में हजारों और पूरे उत्तर प्रदेश में लाखों लोगों को इस योजना से लाभ हुआ है और हर उपचार, ऑपरेशन और राहत उनके जीवन में एक नई शुरुआत का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना ने उत्तर प्रदेश के लाखों परिवारों के करोड़ों रुपये बचाए हैं, क्योंकि सरकार ने उनके स्वास्थ्य सेवा की जिम्मेदारी ली है।
वाराणसी में सबसे अधिक वय वंदना कार्ड
वरिष्ठ नागरिकों के लिए नि:शुल्क इलाज के अपने वादे के साथ आयुष्मान वय वंदना योजना के शुभारंभ की चर्चा करते हुए श्री मोदी ने कहा कि यह पहल 70 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक के लिए नि:शुल्क उपचार सुनिश्चित करती है, चाहे उनकी आय कुछ भी हो। उन्होंने कहा कि वाराणसी ने सबसे अधिक वय वंदना कार्ड जारी किए हैं, यहां लगभग 50,000 कार्ड वितरित किए गए हैं।
क्षेत्र में बेहतर यातायात सम्पर्क को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन चौड़ी सड़कों के साथ गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर और आजमगढ़ जैसे शहरों में यात्रा तेज़ और सुविधाजनक हो गई है। श्री मोदी ने कहा कि कभी ट्रैफिक जाम से त्रस्त रहने वाले क्षेत्र अब विकास की गति देख रहे हैं। उन्होंने वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में सम्पर्क बढ़ाने के लिए पिछले एक दशक में हुए लगभग 45,000 करोड़ रुपये के निवेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस निवेश ने न केवल बुनियादी ढांचे को बल्कि विश्वास को भी बदल दिया है, जिससे काशी और पड़ोसी जिलों को लाभ हुआ है।
विकास और विरासत के बीच संतुलन बनाने की भारत की यात्रा की चर्चा के साथ-साथ काशी को इस मॉडल का सबसे बेहतरीन उदाहरण बताते हुए प्रधानमंत्री ने गंगा के प्रवाह और भारत की चेतना पर भी अपने भाव प्रकट करते हुए कहा कि काशी भारत की आत्मा और विविधता का सबसे सुंदर प्रतिनिधित्व है।
जीआई टैगिंग में उत्तर प्रदेश अग्रणी
देश भर में जीआई टैगिंग में उत्तर प्रदेश की अग्रणी स्थिति को रेखांकित करते हुए श्री मोदी ने राज्य की कला, शिल्प और कौशल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मान्यता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वाराणसी और उसके आसपास के जिलों के 30 से अधिक उत्पादों को जीआई टैग मिले हैं। श्री मोदी ने कहा कि यह टैग वस्तुओं की पहचान का पासपोर्ट हैं। उन्होंने क्षेत्र के उन उत्पादों को सूचीबद्ध किया जिन्हें मान्यता दी गई है, जैसे वाराणसी का तबला, शहनाई, दीवार पेंटिंग, ठंडाई, भरवां लाल मिर्च, लाल पेड़ा और तिरंगा बर्फी।
श्री मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि जौनपुर की इमरती, मथुरा की सांझी कला, बुंदेलखंड का कठिया गेहूं, पीलीभीत की बांसुरी, प्रयागराज की मूंज कला, बरेली की जरदोजी, चित्रकूट की काष्ठकला और लखीमपुर खीरी की थारू जरदोजी जैसे उत्पादों को हाल ही में जीआई टैग प्रदान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की मिट्टी की खुशबू अब सीमाओं को पार कर रही है और अपनी विरासत को दूर-दूर तक फैला रही है।
मुख्य बातें
• पिछले 10 वर्षों में बनारस के विकास को नई गति मिली है
• महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले जी ने महिला सशक्तीकरण, उनके आत्मविश्वास और समाज के कल्याण के लिए जीवन भर कार्य किया
• बनास डेयरी ने काशी के हजारों परिवारों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी है
• काशी अब आरोग्य की राजधानी बन रही है
• आज काशी जाने वाला हर व्यक्ति यहां के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की प्रशंसा करता है
• उत्तर प्रदेश अब सिर्फ संभावनाओं की भूमि नहीं, बल्कि सामर्थ्य और सिद्धियों की संकल्प भूमि बन रहा है
श्री मोदी ने कहा कि काशी को संरक्षित करने का अर्थ भारत की आत्मा की रक्षा करना है। प्रधानमंत्री ने काशी को निरंतर सशक्त बनाने, इसे सुंदर बनाए रखने तथा इसकी प्राचीन भावना को आधुनिक पहचान के साथ जोड़ने की सामूहिक प्रतिबद्धता पर बल देते हुए अपने संबोधन का समापन किया। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

