केंद्रीय वित्त मंत्री का बजट 2025-26 पर लोकसभा में हुई परिचर्चा का जवाब
बेरोजगारी दर 2017-18 में छह प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 3.2 प्रतिशत हो गई
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में 11 फरवरी, 2025 को केंद्रीय बजट 2025-26 पर चर्चा का उत्तर देते हुए माननीय सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह बजट वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच प्रस्तुत किया गया है, जो मध्य-पूर्व संकट एवं रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे भू-राजनीतिक तनावों के साथ-साथ वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में धीमी वृध्दि और उभरते बाजारों में उच्च मुद्रास्फीति से भी प्रभावित है। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को रेखांकित करते हुए कहा कि इन कठिनाइयों के बावजूद राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने हमारे सकल घरेलू उत्पाद में 6.4 प्रतिशत और नॉमिनल टर्म में 9.7 प्रतिशत वृद्धि रहने का अनुमान लगाया गया है। हम अपने सुधी पाठकों के लिए उनके भाषण का सारांश यहां प्रकाशित कर रहे हैं:
केंद्रीय वित्त मंत्री तथा कारपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने चर्चा का उत्तर देते हुए कहा: मैं बहुत आभारी हूं कि माननीय सदस्यों ने बजट का गहन अध्ययन किया है। यह बजट अत्यधिक अनिश्चितताओं के समय में आया है। वैश्विक चिंता के मुद्दों का प्रभाव हमारे अपने बजट निर्माण पर भी पड़ता है। मध्य-पूर्व की स्थिति, रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में ठहराव और उभरते बाजारों में बढ़ती-घटती मुद्रास्फीति सभी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति को खराब कर रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में विश्व परिदृश्य लगभग 180 डिग्री बदल गया है, जिसके परिणामस्वरूप किसी भी देश के लिए अपना बजट बनाने में चुनौतियां अब पहले से कही अधिक जटिल है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था के वास्तविक रूप में 6.4 प्रतिशत और वर्तमान मूल्यों के आधार पर 9.7 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। केंद्रीय बजट 2025-26 में वैश्विक संदर्भ में घरेलू अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली इन तात्कालिक चुनौतियों का समाधान करने की कोशिश की गई है। यह भारत को विकसित भारत में बदलने के लिए भविष्य के मार्ग को भी प्रशस्त करता है।
इस बजट में हमारा मुख्य लक्ष्य विकास को गति देना, समावेशी विकास सुनिश्चित करना, निजी क्षेत्र के निवेश को एकीकृत करना और परिवारों की मानोभावनाओं में उल्लास भरना है। इसलिए गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी पर ध्यान केंद्रित करते हुए बजट निम्नलिखित व्यापक क्षेत्रों में नई योजनाओं और सुधारों को उद्घाटित करता है: ग्रामीण संपन्नता और अनुकूलन निर्माण में विकास इंजन के रूप में कृषि, एमएसएमई, निवेश और निर्यात को बढ़ावा देना।
घरेलू खपत को बढ़ावा और निर्यात संवर्धन
हम घरेलू खपत को बढ़ावा देने और निर्यात संवर्धन सहित भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए रोजगारोन्मुखी विकास भी चाहते हैं। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को जारी रखना और निवेश बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र को फिर से जागृत करना और सबसे महत्वपूर्ण बात; लोगों में निवेश करना, अर्थव्यवस्था में निवेश करना और नवाचार के लिए निवेश करना वास्तव में ये वे बिंदु हैं, जिन पर केद्रीय बजट ध्यान केंद्रित कर रहा है ताकि हम राजकोषीय अनिवार्यताओं के साथ राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं को संतुलित कर सकें।
2025-26 के बजट में प्रभावी पूंजीगत व्यय 15.48 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जबकि 2024-25 के संशोधित अनुमान में यह 13.18 लाख करोड़ रुपये था। यह दर्शाता है कि सरकार प्रभावी पूंजीगत व्यय के वित्तपोषण के लिए उधार लिए गए लगभग संपूर्ण संसाधनों का उपयोग कर रही है। वर्ष 2025-26 में क्षेत्रवार परिव्यय में कृषि और संबद्ध गतिविधियां शामिल हैं, जिन्हें 1.71 लाख करोड़ रुपये मिले हैं; ग्रामीण विकास को 2.67 लाख करोड़ रुपये; शहरी विकास और परिवहन को 6.45 लाख करोड़ रुपये; स्वास्थ्य और शिक्षा को 2.27 लाख करोड़ रुपये; रक्षा को 4.92 लाख करोड़ रुपये (जिसमें रक्षा पेंशन शामिल नहीं है) मिले हैं। वर्तमान बजट के ये आंकड़े दर्शाते हैं कि पूंजीगत परिव्यय में कोई कमी नहीं आई है। इसके विपरीत उनमें वृद्धि हुई है।
सभी योजनाओं के अंतर्गत राज्यों को संसाधनों का अंतरण वर्ष-दर-वर्ष बढ़ रहा है। इस बजट में यह 25.01 लाख करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.1 लाख करोड़ रुपये अधिक है। इसलिए, राज्यों को दी जाने वाली धनराशि मे बिल्कुल कमी नहीं आई है।
12 लाख रुपये तक आय कर मुक्त
2023-24 में कर दरों को आसान बनाकर करदाताओं को राहत देना एक बड़ा कदम था। इस साल यह बढ़कर 12 लाख रुपये हो गई है। 2024-25 में हमने पीएसी द्वारा सुझाए गए एक प्रस्ताव के साथ मंत्रालयों को सशक्त बनाया। इसके परिणामस्वरूप मंत्रालयों में परिचालन दक्षता में सुधार के लिए वित्तीय डेलीगेशन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
बढ़ती बेरोजगारी के संबंध में इस तथ्य पर प्रकाश डालना चाहती हूं कि 2023-24 के वार्षिक आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार श्रम बल भागीदारी दर 2017-18 में 49.8 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 60 प्रतिशत हो गई है, जो लगभग 10.3 प्रतिशत अंक की वृद्धि को दर्शाती है। श्रमिक जनसंख्या अनुपात 2017-18 में 46.8 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 58.2 प्रतिशत हो गया है, जो 11.4 प्रतिशत अक की वृद्धि दर्शाता है। बेरोजगारी दर 2017-18 में छह प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 3.2 प्रतिशत हो गई है। रोजगार मेले के अंतर्गत केन्द्र सरकार की नौकरियों के लिए 9.25 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं।
उच्च मुद्रास्फीति, विशेषकर खाद्य मुद्रास्फीति के बारे में चिन्ताओं के बारे में मैं यह कहना चाहूंगी कि वास्तव में इसे इस सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता प्राप्त है। कुल मिलाकर खुदरा मुद्रास्फीति 2-6 प्रतिशत के अधिसूचित सीमा के भीतर है। मैं केवल इस तथ्य पर प्रकाश डालना चाहती हूं कि खाद्य मुद्रास्फीति, जो प्रतिकूल मौसम की स्थितियों या आपूर्ति शृंखला में व्यवधानों के कारण प्रभावित हुई थी, पर ध्यान दिया गया है। हम अभी भी ऐसा करना जारी रखे हुए हैं। जलाशयों में जल स्तर की भी निगरानी की जा रही है। इसमें सुधार हुआ है ताकि रबी फसल उत्पादन के लिए सिंचाई के लिए जल पर्याप्तता सुनिश्चित हो सके।
2025-26 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति 4.2 प्रतिशत से कम
भारतीय रिजर्व बैंक की एमपीसी की नवीनतम बैठक के अनुसार, जो उन्होंने 7 फरवरी को आयोजित की थी, 2025-26 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति 4.2 प्रतिशत से कम अनुमानित है। संप्रग शासन के दौरान खाद्य मुद्रास्फीति 11 प्रतिशत तक पहुंच गई जिससे जनता को भारी कठिनाई हुई। 2014-2024 तक एनडीए शासन में इसे 5.3 प्रतिशत तक लाया गया था, जो आपूर्ति शृंखला सुधार और कृषि सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने का संकेत देता है। एनडीए 2014-2024 की तुलना में यूपीए-2 के तहत ईंधन मुद्रास्फीति 8.9 प्रतिशत थी, जो एनडीए के दौरान 4.4 प्रतिशत है जो वैश्विक मूल्य अस्थिरता के बेहतर प्रबंधन को उजागर करता है।
बेरोजगारी दर 2017-18 में छह प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 3.2 प्रतिशत हो गई है। रोजगार मेले के अंतर्गत केन्द्र सरकार की नौकरियों के लिए 9.25 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं
कुल घरेलू सक्रिय एलपीजी ग्राहक अप्रैल, 2014 में 14.52 करोड़ से बढ़कर दिसंबर, 2024 तक 32.89 करोड़ हो गए हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत प्रति व्यक्ति खपत की दर एक वर्ष में 44 सिलेंडर है। इस बजट में सरकार ने कृषि में बेहतर उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए है ताकि आपूर्ति संबंधी समस्याओं का बेहतर ढंग से निपटान किया जा सके।
प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना
प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना-विकासशील कृषि जिला कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है जहां सौ कम उत्पादकता वाले कृषि जिले पर ध्यान दिया जाएगा। घरेलू बचत में गिरावट और घरेलू ऋण में वृद्धि जैसे अन्य मुद्दे भी हैं। मैं इस संबंध में कुछ तथ्य रखना चाहती हूं। घरेलू बचत में शुद्ध वित्तीय और फिजिकल सेविंग शामिल है, जो 2019-20 से 2022-23 तक 8.9 प्रतिशत सीएजीआर की चकवृद्धि औसत वृद्धि दर से बढ़ी है। परिवारों द्वारा वास्तविक परिसंपत्तियों में बचत का पुनः आवंटन किया जाता है।
कोविड के बाद की अवधि में घरेलू रियल एस्टेट निवेश में काफी वृद्धि हुई है। सकल घरेलू बचत में भौतिक परिसंपत्ति में बचत की हिस्सेदारी 2015-16 में 30.8 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 42.7 प्रतिशत हो गई है। इसलिए राष्ट्रीय लेखा साख्यिकी के अनुसार भौतिक परिसंपत्ति में घरेलू बचत मे 2019-20 से 2022-23 तक 15.6 प्रतिशत की चक्रवृद्धि औसत वृद्धि दर से वृद्धि हुई है। जहां तक सार्वजनिक व्यय में कमी का सवाल है, मैं कहना चाहती हूं कि 2025-26 में केंद्रीय बजट का कुल व्यय लगभग 50.65 लाख करोड़ रुपये होगा, जो 2024-25 के बजट अनुमान और 2024-25 के संशोधित अनुमान से लगभग 2.44 लाख करोड़ रुपये और 3.49 लाख करोड़ रुपये अधिक है।
2025-26 के लिए पूंजीगत व्यय 11.21 लाख करोड़ रुपये
पूंजीगत व्यय के संबंध में कई लोग सोचते हैं कि पूंजीगत व्यय में कमी आई है। ऐसा नहीं है। पिछली बार पूंजीगत व्यय 11.11 लाख करोड़ रुपये था और अब यह 11.21 लाख करोड़ रुपये है। इसलिए, इसमें केवल वृद्धि हुई है और 2025-26 के लिए प्रभावी पूंजीगत व्यय 15.48 लाख करोड़ रुपये आंका गया है।
राजकोषीय सुदृढ़ीकरण एक अन्य मुद्दा था जिस पर यह पूछा जा रहा था कि क्या यह सार्वजनिक व्यय और सामाजिक क्षेत्र के व्यय की कीमत पर किया जा रहा है। कहा गया कि शिक्षा बजट कम किया गया है और पीएम पोषण, जल जीवन मिशन, पीएम आवास योजना और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के बजट में कमी आई है। सामाजिक कल्याण के संबंध में बजट राशि 2024-2025 में 56,501 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-2026 में 60,052 करोड़ रुपये हो गई है। यह कम नहीं हुआ है। शिक्षा की बात करें तो बजट राशि 2024-2025 में 1.26 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-2026 में 1.29 लाख करोड़ रुपये हो गई है। स्वास्थ्य की बात करें तो 2024-2025 में जो बजट 89,287 करोड़ रुपये था, वह 2025-2026 में 98,311 करोड़ रुपये हो गया है।
राज्यों को पूंजीगत व्यय के लिए दी जा रही राशि में प्रतिवर्ष निरंतर वृद्धि
मैंने पहले ही उल्लेख किया है कि पूंजीगत व्यय के लिए दी जा रही राशि में प्रतिवर्ष निरंतर वृद्धि हो रही है। ऐसा नहीं है कि राज्यों में परियोजनाएं नहीं चल रही है। पंजाब के लिए पिछले तीन वर्षों में 825 किमी लम्बे मार्ग के विकास के लिए 38 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं स्वीकृत की गई थीं। जिसकी राशि 22,160 करोड़ रुपये है। तेलंगाना के संबंध में वारंगल में काकतीय मेगा टेक्सटाइल पार्क को अगस्त, 2024 में पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क के रूप में घोषित किया गया था। राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के तहत जहीराबाद में एक औद्योगिक नोड भी है।
केरल के लिये केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगस्त, 2024 में पलक्कड़ में औद्योगिक नोड को मंजूरी दी। केरल में वर्ष 2014 से 1,300 किमी लम्बे राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया है। कर्नाटक के सबंध में 2014 से कर्नाटक में 5,213 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया है। 2014 से कर्नाटक में सात हवाई अड्डों का संचालन शुरू किया गया है। हमने वर्ष 2014 से कर्नाटक में 1,652 किलोमीटर नई रेल पटरियों का निर्माण किया है।
तमिलनाडु के सबंध में चेन्नई मेट्रो रेल परियोजना चरण-॥ को केंद्रीय क्षेत्र परियोजना के तहत कुल 63,246 करोड़ रुपये के साथ अनुमोदित किया गया था, जिसमे से 65 प्रतिशत केंद्र सरकार का हिस्सा है। हिमाचल प्रदेश के सबंध में रोहतांग में दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग, अटल सुरंग का निर्माण 2020 मे किया गया था। एम्स बिलासपुर का उद्घाटन 2022 में हुआ था। 2014 से हिमाचल प्रदेश में 1,247 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया है। झारखंड पूर्वोदय पहल की घोषणा केंद्रीय बजट 2024-25 में देश के पूर्वी क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए की गई थी।
वित्त वर्ष 2025-2026 के लिए राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत
कर्ज को लेकर काफी चिंता है। मैं इसके बारे में बताना चाहूंगी। महामारी के कारण केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा 9.2 प्रतिशत तक पहुंच गया, जीडीपी के प्रतिशत के रूप में ऋण का स्तर 61.4 प्रतिशत था, लेकिन हमने राजकोषीय घाटे और सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में ऋण, दोनों को कम करने के लिए प्रयास किए हैं। तब से राजकोषीय घाटा और ऋण प्रतिशत कम हो गया है। अब हमारे पास राजकोषीय घाटे की संख्या 4.4 प्रतिशत है, जो पहले ही 2025-2026 के लिए रखी गयी है और सकल घरेलू उत्पाद के ऋण के संबंध में हमने कहा है कि हम इसे 2030-31 तक 49 से 51 प्रतिशत के बीच घटाकर नीचे लायेंगे, जो यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि देश का ऋण कम हो जाएगा।
मैं चाहती हूं कि सब यह समझें कि केन्द्रीय सरकार की देनदारी अधिकांशत घरेलू देनदारियां है जिनका एक छोटा सा हिस्सा है जो बही-मूल्य पर कुल देनदारियों का 34 प्रतिशत है जो बाह्य क्षेत्र से संबंधित है। इसलिए, यह एक नकारात्मक जोखिम है, क्योंकि यदि विदेशी ऋण की संख्या बड़ी है, तो चिंता होगी लेकिन हमारा विदेशी ऋण बड़ा नहीं है।
एमएसएमई क्षेत्र में 25 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरूदण्ड है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था को चलाने वाले प्रमुख इंजनों में से एक है। एमएसएमई के क्षेत्र में 25 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। सूक्ष्म उद्यमों के मामले में मैं इस तथ्य को उजागर करना चाहती हूं कि वर्तमान में इसके लिए 1 करोड़ रुपये का आवंटन है और संशोधित आवंटन 2.5 करोड़ रुपये है। सूक्ष्म उद्यमों का चालू कारबार 5 करोड़ रुपये है और हमने इसे संशोधित कर 10 करोड़ रुपये किया है। लघु उद्यमों के बारे में वर्तमान निवेश 10 करोड़ रुपये है और अब इसे पुनरीक्षित करके 25 करोड़ रुपये किया गया है और इसी तरह लघु उद्यम का वर्तमान कारोबार 50 करोड़ रुपये है और इसे बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये किया गया है।
इसी तरह मध्यम उद्यम के लिए हमने इसे 50 करोड़ रुपये से संशोधित कर 125 करोड़ रुपये किया है और कारोबार 250 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये कर दिया है। किसान क्रेडिट कार्ड के प्रति व्यक्ति ऋण की ऊपरी सीमा अब 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है, ताकि कहीं उन्हें बाध्य होकर बिचौलिए से उधारी न लेनी पड़े। इसी मंशा से हमने किसान क्रेडिट कार्ड लाया है। 1 अप्रैल, 2025 से आरम्भ होने वाली इस अल्पावधिक ऋण सुविधा से लगभग 8 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे।
वर्ष 2024-25 से 3 वर्ष पूर्व देश के सकल घरेलू उत्पाद की औसत वृद्धि लगभग 8 प्रतिशत थी। गत 12 तिमाही में से केवल दो तिमाही में ही यह वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत को छू चुकी है अथवा इससे नीचे रही है। मजबूत आर्थिक नींव के कारण त्वरित गति से पूर्वस्थिति बहाली हो रही है और हम ऐसे उपाय करेंगे, जिससे समयानुक्रम में हमारी अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्ष की ही तरह सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था होगी। हम निरंतर सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बने रहेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों की उत्तम मांग से प्रेरित वर्ष 2024-25 में अंतिम निजी उपभोग व्यय में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि होने की प्रत्याशा है।

