केंद्रीय वित्त मंत्री का बजट 2025-26 पर राज्यसभा में हुई परिचर्चा का जवाब
केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 13 फरवरी, 2025 को बजट 2025-26 पर राज्यसभा में हुई परिचर्चा का जवाब दिया। श्रीमती सीतारमण ने सदस्यों को बजट चर्चा में उनकी भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने उल्लेख किया कि बजट 2025-26 इस प्रकार तैयार किया गया है कि इसका उद्देश्य विकास को गति देना, समावेशी विकास सुनिश्चित करना, निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करना, घरेलू भावना को सशक्त बनाना और उभरते भारतीय मध्यम वर्ग की खर्च करने की क्षमता को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ाना है
प्रभावी पूंजीगत व्यय 15.48 लाख करोड़ रुपये का अनुमान
केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने अपने जवाब में प्रभावी पूंजीगत व्यय के महत्व पर प्रकाश डाला, जिसमें केंद्रीय बजट में मूल पूंजीगत व्यय और पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए राज्यों को अनुदान सहायता शामिल है। हालांकि, इन अनुदानों को राजस्व व्यय के रूप में वर्गीकृत किया गया है, वे पूंजी परिसंपत्ति सृजन में योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्रभावी पूंजीगत व्यय 15.48 लाख करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया है, जो 2024-25 के लिए संशोधित अनुमानों में 13.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने कहा कि यदि सार्वजनिक उद्यमों द्वारा किए गए निवेश को शामिल किया जाए, तो 2025-26 के लिए कुल पूंजीगत व्यय लगभग 19.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
श्रीमती सीतारमण ने वर्ष 2025-26 के लिए क्षेत्रवार परिव्यय को निम्रानुसार प्रस्तुत कियाः
कृषि और संबद्ध गतिविधियों: 1.71 लाख करोड़ रुपये
ग्रामीण विकास: 2.67 लाख करोड़ रुपये
शहरी विकास और परिवहन: 6.45 लाख करोड़ रुपये
स्वास्थ्य और शिक्षाः 2.27 लाख करोड़ रुपये
रक्षा व्यय (रक्षा पेंशन को छोड़कर): 4.92 लाख करोड़ रुपये
उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय आवंटन में कोई कमी नहीं की गई है। श्रीमती सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया कि राज्यों को आवंटित धन में कमी नहीं की गई है, बल्कि इसमें पर्याप्त वृद्धि हुई है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सरकार ने राज्यों के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत किया, न केवल वित्त आयोग की सिफारिशों के कारण, बल्कि एक स्वतंत्र नीति निर्णय के रूप में। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2020-21 में सरकार ने राज्यों को 50 वर्ष की ब्याज-मुक्त पूंजी सहायता शुरू की, जिसकी प्रारंभिक राशि 12,000 करोड़ रुपये थी। इस पहल में किसी भी राज्य को बाहर नहीं रखा गया, जिससे सभी राज्यों को लाभ मिला। उन्होंने बताया कि 2020-21 में 12,000 करोड़ रुपये का यह आवंटन बढ़कर वर्तमान वर्ष के बजट में 1,50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि बजट निर्माण में राजकोषीय पारदर्शिता और प्रौद्योगिकी अपनाने को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने लंबे समय से बकाया देनदारियों का निपटारा किया और इस बात पर प्रकाश डाला कि केंद्रीय करों के हस्तांतरण के तहत राज्यों को देय 81,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वर्षों से लंबित पड़ी थी। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने राज्यों की समस्याओं को समझा और इन बकायों को समाप्त करने पर जोर दिया।
श्रीमती सीतारमण ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) और ऑफ-बजट उधार से संबंधित वित्तीय दायित्वों की चिंताओं को संबोधित करते हुए सरकार के पारदर्शिता और राजकोषीय जिम्मेदारी के प्रयासों को उजागर किया। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार ने एफसीआई की उन देनदारियों को शामिल किया, जो पहले बजट के बाहर थी और राज्यों के बकायों को चुकाने के बाद शहरी विकास मंत्रालय से शहरी आवास के लिए 33,000 करोड़ रुपये के ऑफ-बजट उधार को भी बजट में लाया गया। 2025-26 के लिए खाद्य सब्सिडी पर उन्होंने स्पष्ट किया कि 2023-24 में एफसीआई में सरकार के 11,000 करोड़ रुपये की इक्विटी निवेश के कारण लागत में कमी हुई, जिससे एफसीआई के अल्पकालिक उधार घट गए और खाद्य सब्सिडी प्रावधान को यथार्थवादी बनाया गया।
मुख्य कर सुधार और बजटीय उपाय
वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि करदाताओं को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से नई कर व्यवस्था पेश की गई थी। इसे डिफॉल्ट व्यवस्था बनाया गया ताकि व्यक्ति स्वचालित रूप से इसका हिस्सा बन जाएं, जब तक कि ये विशेष रूप से पुरानी व्यवस्था के अंतर्गत छूट का विकल्प नहीं चुनते। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति पुरानी कर व्यवस्था को अधिक लाभकारी मानता है, तो उसके पास उसमें बने रहने का विकल्प उपलब्ध है। उन्होंने उल्लेख किया कि उस वित्तीय वर्ष में कर मुक्त आय सीमा 7 लाख रुपये तक बढ़ाई गई थी, जिससे इस राशि तक कमाने वाले व्यक्तियों को कोई कर नहीं देना पड़ा। श्रीमती सीतारमण ने आगे बताया कि अब यह सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी गई है।
राजकोषीय सुधार और ऋण समेकन
वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि पेश किए गए प्रमुख सुधारों में से एक अल्पकालिक ट्रेजरी बिल (टी-बिल) उधारी में भारी कमी थी। इस उपाय से वित्तीय प्रणाली में अधिक तरलता सुनिश्चित हुई, जिससे निजी उधारकर्ताओं को सरकारी हस्तक्षेप के कारण बाजार में कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा। अल्पकालिक टी-बिल उधारी में कमी करके सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वह निजी क्षेत्र की उधारी को प्रभावित न करे।
उन्होंने उल्लेख किया कि 88,000 करोड़ रुपये मूल्य के सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) की पुनर्खरीद की गई। इस एकल कदम से लगभग 5,000 करोड़ रुपये की ब्याज बचत हुई और साथ ही प्रणाली में तरलता का संचार भी हुआ।
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि जुलाई बजट में स्पष्ट रूप से ऋण समेकन का मार्ग प्रस्तुत किया गया था। इस रणनीति का उद्देश्य सरकारी ऋण को वर्तमान स्तर, जो जीडीपी का लगभग 58% है, से घटाकर 31 मार्च, 2031 तक लगभग 50% तक लाना है। इस योजना का विस्तृत विवरण जुलाई बजट के साथ प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में दिया गया था।
खाद्य मुद्रास्फीति का प्रबंधन
वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने उच्च खाद्य मुद्रास्फीति पर चिंताओं का समाधान करते हुए बताया कि जनवरी, 2025 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति 5.22% से घटकर 4.31% पर आ गई है, जो इसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य के करीब लाती है। यह गिरावट टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में तेज सुधार और टैरिफ मुक्त आयात के माध्यम से दालों की मुद्रास्फीति में कमी के कारण हुई है।
उन्होंने 7 फरवरी को आरबीआई की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2025-26 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान 4.2% है, जो पहले की तुलना में कम है।
श्रीमती निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार ने कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने और उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से ‘प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना’ शुरू की है, जिससे अधिक उत्पादन बाजार में आ सके। उन्होंने आगे कहा कि कई पहल शुरू की गई है, जिनमें घरेलू दलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए आत्मनिर्भरता योजना, सब्जियों और फलों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए एक विशेष कार्यक्रम और कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए उच्च उपज बीजों के लिए राष्ट्रीय मिशन शामिल है।
उन्होंने सरकार की भारत चना दाल और भारत आटा के रूप में सब्सिडी वाले दाल, चावल और आटे की बिक्री की पहल का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि चरण 1 और चरण 2 के बीच 13.8 लाख टन भारत चना दाल, 160 लाख टन भारत आटा और 15.3 लाख टन चावल के साथ-साथ चना दाल, मूंग दाल और अन्य उत्पादों की बिक्री की गई। श्रीमती सीतारमण ने आश्वासन दिया कि सरकार सब्सिडी वाले गेहूं, चावल और चना दाल के समर्थन को जारी रखते हुए यह सुनिश्चित करेगी कि कीमतें आम नागरिकों के लिए बोझ न बनें।
वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने भारतीय रुपये के अवमूल्यन पर चिंताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इसकी विनिमय दर कई कारकों से प्रभावित होती है, जिनमें अमेरिकी डॉलर की गतिशीलता, पूंजी प्रवाह, ब्याज दरें, कच्चे तेल की कीमतें और चालू खाता घाटा शामिल हैं। वर्ष 2024 की चौथी तिमाही में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण मुद्रा अस्थिरता देखी गई, जिसका प्रभाव केवल भारत ही नहीं, बल्कि कई प्रमुख अर्थव्यवस्याओं पर भी पड़ा।
उन्होंने बताया कि अक्टूबर, 2024 से जनवरी, 2025 के बीच अमेरिकी डॉलर सूचकांक में 6.5% की वृद्धि हुई, जिससे कोरियाई वोन (8.1%), इंडोनेशियाई रुपिया (6.4%) और मलेशियाई रिंगिट (5.9%) सहित विभिन्न एशियाई मुद्राओं का अवमूल्यन हुआ। इसी अवधि में जापानी येन, ब्रिटिश पाउंड और यूरो जैसी जी-10 मुद्राओं में भी 5.5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
खाद्य और उर्वरक अनुदान
श्रीमती सीतारमण ने स्पष्ट किया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए उर्वरक अनुदान को 1.64 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.68 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसमें कोई कमी नहीं की गई है। उन्होंने पूर्वोदय पहल के अंतर्गत पूर्वाचल क्षेत्र में पहले से बंद पड़े तीन यूरिया कारखानों के पुनरुद्धार पर प्रकाश डाला, जो सभी पूर्वी क्षेत्र में स्थित है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने मौजूदा बजट के तहत असम में नामरूप संयंत्र को बहाल करने की घोषणा की और बताया कि इससे 12.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हो सकेगा, जिससे उर्वरक की उपलब्धता बढ़ेगी और आयात में कमी आएगी।
श्रीमती निर्मला सीतारमण ने एमएसएमई क्षेत्र के प्रति सरकार के प्रयासों को लेकर उठी चिंताओं का समाधान करते हुए कहा कि पिछले तीन बजटों, जिनमें वर्तमान बजट भी शामिल है, में एमएसएमई क्षेत्र को तेज विकास के लिए सशक्त बनाने हेतु महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि ऋण सीमा और निकास तंत्र को मजबूत किया गया है, जिससे सूक्ष्म और लघु उद्यमों को अधिक ऋण गारंटी कवरेज प्राप्त हुआ है।
उन्होंने राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन पर ध्यान केंद्रित करने और इलेक्ट्रिक वाहन और मोबाइल उत्पादन को प्रोत्साहित करने की बात भी कही। इसके अतिरिक्त, कई महत्वपूर्ण खनिजों के आयात को सक्षम बनाया गया है। उन्होंने दोहराया कि जुलाई, 2024 के बजट में उठाए गए कदमों को वर्तमान बजट में भी जारी रखा गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि एमएसएमई क्षेत्र बजट निर्माण में हमेशा से प्राथमिकता में रहा है।

