ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं और चिंताओं को समझना जरूरी है: नरेन्द्र मोदी

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प्रधानमंत्री ने जी-7 आउटरीच सत्र को संबोधित किया

  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 17 जून को कनाडा स्थित कनानास्किस में जी-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में भाग लिया। यह कार्यक्रम जी-7 शिखर सम्मेलन का एक हिस्सा था। उन्होंने ‘ऊर्जा सुरक्षा: बदलती दुनिया में पहुंच और सामर्थ्य सुनिश्चित करने के लिए विविधीकरण, प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचा’ विषय पर एक सत्र को संबोधित किया। श्री मोदी ने कनाडा के प्रधानमंत्री श्री मार्क कार्नी को उनके निमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया और जी-7 को अपनी यात्रा के 50 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा भविष्य की पीढ़ियों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों में से एक है। समावेशी विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर विस्तार से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उपलब्धता, पहुंच, सामर्थ्य और स्वीकार्यता ऐसे सिद्धांत हैं जो ऊर्जा सुरक्षा के प्रति भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हैं। श्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि भले ही भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, लेकिन इसने समय से पहले अपनी पेरिस प्रतिबद्धताओं को सफलतापूर्वक पूरा किया है।

एक टिकाऊ और हरित भविष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, मिशन लाइफ और वन सन-वन वर्ल्ड-वन ग्रिड जैसी कई वैश्विक पहल की हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उन्हें और मजबूत करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अनिश्चितता और संघर्षों ने ग्लोबल साउथ के देशों पर बहुत बुरा प्रभाव डाला है और भारत ग्लोबल साउथ की आवाज को विश्व मंच पर सुनाने को अपनी जिम्मेदारी समझता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक स्थायी भविष्य के बारे में गंभीर है तो दुनिया के लिए ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं और चिंताओं को समझना जरूरी है।

श्री मोदी ने आतंकवाद का समर्थन और उसे बढ़ावा देने वाले देशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आह्वान किया। श्री मोदी ने आगे कहा कि आतंकवाद से निपटने में कोई दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए और आतंकवाद का समर्थन करने वालों को कभी भी पुरस्कृत नहीं किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी, एआई और ऊर्जा के बीच संबंधों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि दक्षता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एआई एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है, लेकिन प्रौद्योगिकी में स्वयं ऊर्जा का व्यापक उपयोग होता है और स्वच्छ एवं हरित पहलों के माध्यम से इसे कैसे टिकाऊ बनाया जाए, इसकी रणनीति बनाना महत्वपूर्ण है।

कनाडा के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के अवसर पर कनाडा के प्रधानमंत्री श्री मार्क कार्नी के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन के सम्मान और संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता के आधार पर भारत-कनाडा संबंधों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने चिंताओं और संवेदनशीलताओं के लिए आपसी सम्मान, लोगों के बीच मजबूत संबंधों और बढ़ती आर्थिक पूरकताओं पर आधारित रचनात्मक और संतुलित साझेदारी को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस बारे में दोनों पक्ष संबंधों में स्थिरता बहाल करने के लिए संतुलित व रचनात्मक कदम उठाने पर सहमत हुए और इसकी शुरुआत एक-दूसरे की राजधानियों में उच्चायुक्तों की शीघ्र वापसी से होगी।

दोनों नेताओं ने विश्वास बहाली और संबंधों में गति लाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में वरिष्ठ मंत्रिस्तरीय और कार्य-स्तरीय संबंधों को फिर से शुरू करने के महत्व पर बल दिया।