‘भारत का टाइगर हिल है, भारत का टाइगर हिल रहेगा’

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    भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केन्द्रीय मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने 26 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली स्थित पार्टी केन्द्रीय कार्यालय में कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कारगिल युद्ध में विजय व अपने शौर्य का परचम लहराने वाले और अपनी जान की बाजी लगाने वाले देश के वीर जवानों एवं शहीदों को नमन किया और शहीदों को श्रद्धांजलि दी। श्री नड्डा ने कहा कि देश की रक्षा में सेना के शौर्य के साथ नीति निर्धारकों की भूमिका भी

भारत ने साधारण नागरिकों को नुकसान नहीं पहुंचाया, लेकिन जैश और लश्कर के मुख्यालय ध्वस्त कर दिए

अहम रहती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर कर यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अपने नागरिकों की रक्षा के लिए भारत दुश्मन के घर में घुसकर कार्रवाई करेगा और यही नए भारत का न्यू नॉर्मल है। कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ, संसदीय बोर्ड की सदस्य डॉ. सुधा यादव, कर्नल वीएन थापर, लेफ्टिनेंट जनरल वी.के. चतुर्वेदी, लेफ्टिनेंट जनरल वी.के. खंडारे एवं लेफ्टिनेंट जनरल नितिन कोहली सहित भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ और राष्ट्रीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।

श्री नड्डा ने कहा कि 26 वर्ष पहले 1999 की फरवरी में कारगिल सेक्टर, द्रास सेक्टर, बटालिक सेक्टर, मस्को सेक्टर और टाइगर हिल पर पाकिस्तान की फौज ने पीठ में छुरा भोंककर कब्जा करने का प्रयास किया था। कारगिल में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने सेनाओं को उस स्थान को फिर से वापस लेने और वहां तिरंगा झंडा फहराने का आदेश दिया था, साथ ही उन्होंने नारा दिया था, ‘भारत का टाइगर हिल है, भारत का टाइगर हिल रहेगा।’

उन्होंने कहा कि वह बहुत ही कठिन लड़ाई थी, क्योंकि टैक्टिकली और स्ट्रैटेजिकली टाइगर हिल की ऊंचाइयों पर पाकिस्तान की फौज बैठी थी और भारतीय सेना नीचे थी, इसलिए भारतीय सेना एक तकलीफदायक परिस्थितियों में थी और पाकिस्तानी सेना लगातार भारत के नेशनल हाईवे की मूवमेंट्स को देख रही थी। ऐसी परिस्थिति में ‘ऑपरेशन विजय’ शुरू हुआ। 15,000 फीट की ऊंचाई के साथ-साथ बर्फीली हवाओं, तेज बारिश के बावजूद मां भारती के रणबाकुरों ने यह लड़ाई लड़ी। 81 दिन की लड़ाई के बाद भारतीय सेना ने इसमें विजय हासिल की और आज, 26 जुलाई को पूरा देश ‘ऑपरेशन विजय दिवस’ के रूप में मनाता है।

उन्होंने कहा कि उरी की घटना में हमारे 18 जवान शहीद हो गए। उस समय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से कहा था पाकिस्तान ने बहुत बड़ी गलती कर दी है। इसका खामियाजा पाकिस्तान को भुगतना पड़ेगा। एक समय में भारत 26/11 की तरह डोजियर लेके जाता था, लेकिन अब जमाना बदल चुका था। उरी हमले के कुछ दिन बाद सर्जिकल स्ट्राइक हुई और भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान के सारे लॉन्चिंग पैड्स को ध्वस्त कर दिया। उसी तरह, पुलवामा में सीआरपीएफ के 40 जवान जैश-ए-मोहम्मद के सुसाइड बॉम्बर की गाड़ी से हुए हमले में शहीद हो गए। उसके बाद भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा, “बहुत जल्द इसका जवाब मिलेगा” और फिर बालाकोट एयर स्ट्राइक हुई। 22 अप्रैल को जो पहलगाम में हुआ, उसके बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मधुबनी से पूरे विश्व को यह स्पष्ट संदेश दिया था कि जिस तरह की घटना घटी है, पाकिस्तान को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा और पाकिस्तान को कल्पना से अधिक करारा जवाब मिलेगा। फिर ऑपरेशन सिंदूर हुआ और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने बहावलपुर, मुरीदके, नूरखान, सियालकोट, रफीकी, चकलाला और रहीम यार खान में पाकिस्तान के भीतर घुसकर मिसाइल स्ट्राइक की। जैसा प्रधानमंत्री जी ने कहा, ठीक वैसे ही भारतीय सेना ने घर में घुसकर जवाब दिया। भारत ने साधारण नागरिकों को नुकसान नहीं पहुंचाया, लेकिन जैश और लश्कर के मुख्यालय ध्वस्त कर दिए। भारत ने यह दिखा दिया कि यह नया भारत है, यह भारत का न्यू नॉर्मल है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने आप को बचाने के लिए सिविलियन एयरक्राफ्ट चलाता रहा, लेकिन उनकी हर मिसाइल को भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने पूरी तरह नाकामयाब कर दिया। 9 और 10 मई को भारत ने तीन घंटे में पाकिस्तान के 11 सैन्य ठिकानों को ध्वस्त कर दिया जिसमें नूर खान, रफीक़ी, मुरीदके, सुक्कुर, सियालकोट, सरगोधा, बुलारी, जकोबाबाद शामिल थे।