‘ऑपरेशन सिंदूर’ एवं ‘ऑपरेशन महादेव’ की सफलता पर एनडीए सांसदों ने किया प्रधानमंत्री मोदी जी का अभिनंदन

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एन.डी.ए. संसदीय दल की बैठक 05 अगस्त, 2025 को जी.एम.सी. बालयोगी सभागार, संसद भवन परिसर में आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा एवं अन्य एन.डी.ए. सांसद उपस्थित थे। बैठक के दौरान एन.डी.ए. नेताओं ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘ऑपरेशन महादेव’ की सफलता के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी को बधाई दी। इन अभियानों की सफलता पर एन.डी.ए. सांसदों द्वारा सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसमें सशस्त्र बलों की भूमिका और उनकी अटूट प्रतिबद्धता की प्रशंसा की गई। पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए लोगों के प्रति भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। एन.डी.ए. संसदीय दल के प्रस्ताव में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के अद्वितीय नेतृत्व की भी सराहना की गई और कहा गया कि उनके अटल संकल्प, दूरदर्शी नेतृत्व और सशक्त कमान ने हर भारतीय के हृदय में एक नई एकता एवं गर्व की भावना भी जाग्रत की है। एन.डी.ए. संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा शुरू किए गए रक्षा सुधारों को भी रेखांकित किया गया, जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान निर्णायक साबित हुए। प्रस्ताव में कहा गया कि एन.डी.ए. सरकार एक सशक्त, विकसित और शांतिपूर्ण भारत के निर्माण के लिए अथक प्रयास कर रही है। आने वाले समय में ये प्रयास और भी अधिक जोश के साथ जारी रहेंगे

पारित प्रस्ताव

एन.डी.ए. संसदीय दल हमारे सशस्त्र बलों की अतुलनीय वीरता और अटूट प्रतिबद्धता को नमन करता है, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव के दौरान अदम्य साहस का प्रदर्शन किया। उनकी वीरता हमारे राष्ट्र की रक्षा के प्रति उनके अडिग समर्पण को दर्शाती है। हम पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए सभी लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

एन.डी.ए. संसदीय दल इस कठिन समय में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रदर्शित अद्वितीय नेतृत्व की सराहना करता है। उनका अटल संकल्प, दूरदर्शी नेतृत्व और सशक्त कमान न केवल देश को मजबूत स्थिति में बनाया हुआ है, बल्कि हर भारतीय के हृदय में एक नई एकता और गर्व की भावना भी जाग्रत की है।

22 अप्रैल को पाकिस्तान-पोषित आतंकी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) जो कि लश्कर-ए-तैयबा की शाखा और मुखौटा है। इस संगठन द्वारा जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक भीषण आतंकी हमला किया गया। इस अमानवीय और बर्बर हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की निर्मम हत्या की गई। आतंकियों ने लोगों को धर्म के आधार पर अलग करके गोलियों से छलनी करने का कृत्य किया।

इस आतंकी हमले से पूरा देश शोक और आक्रोश से भर उठा था। हर भारतीय की भावना को व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 24 अप्रैल को बिहार के मधुबनी से कहा, “आज बिहार की धरती से मैं दुनिया को कहना चाहता हूं कि भारत हर आतंकी को, उनके समर्थकों को, पहचान कर, खोजकर, दंडित करेगा। हम उन्हें धरती के आखिरी छोर तक खोजकर मारेंगे। आतंकवाद भारत की आत्मा को नहीं तोड़ सकता। आतंकवाद को माफ नहीं किया जाएगा। न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। पूरा देश इस संकल्प में एकजुट है। मानवता में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति हमारे साथ है। मैं उन सभी देशों और उनके नेताओं का धन्यवाद करता हूं जो इन कठिन समय में भारत के साथ खड़े हैं।”

बिहार की धरती से लिया गया संकल्प अब कार्यरूप में परिणत हो चुका है। पहलगाम आतंकी हमले के प्रत्युत्तर में 6-7 मई 2025 की मध्यरात्रि को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। सैन्य पराक्रम और सशक्त नेतृत्व के माध्यम से न्याय सुनिश्चित किया गया, यह पुनः सिद्ध हुआ कि भारत आतंक को न तो भूलता है, न माफ करता है।

ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के विभिन्न स्थानों पर स्थित आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों पर सटीक, सीमित, गैर बढ़ावा योग्य और लक्षित कार्रवाई की गई। यह भारत की शांति के प्रति प्रतिबद्धता, आतंक के प्रति पूर्ण असहिष्णुता, तथा आतंकी ढांचे को जड़ से उखाड़ फेंकने की संकल्पबद्धता का प्रतीक रहा। 2014 में एन.डी.ए. सरकार के सत्ता में आने के बाद से यह नीति स्थापित हो चुकी है। जनता आज भी नहीं भूली है कि 2014 से पहले भारत में आतंकवादी ढांचा किस तरह फैला हुआ था। पटना, बेंगलुरु, मुंबई, गुवाहाटी, वाराणसी, अहमदाबाद, हैदराबाद और यहां तक कि दिल्ली जैसे बड़े शहरों में बम विस्फोट आम बात बन चुकी थी। इस स्थिति में जो बदलाव आया है, उसे देशवासियों ने अत्यंत सराहा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्थापित ‘नव सामान्य’ (New Normal) अब भारत के प्रतिरोध की नीति को परिभाषित करता है। यह नीति तीन स्पष्ट सिद्धांतों पर आधारित है:

पहला, यदि भारत पर कोई आतंकी हमला होता है, तो उसका उसका उचित जवाब दिया जाएगा। हम हमारी शर्तों पर और पूरी दृढ़ता के साथ जवाब देंगे। जहां से भी आतंक की जड़ें निकलती हैं, हम वहां पर सख्त कार्रवाई करेंगे।

दूसरा, भारत किसी भी परमाणु ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेगा। भारत परमाणु ब्लैकमेल की आड़ में विकसित हो रहे आतंकवादी ठिकानों पर सटीक और निर्णायक हमला करेगा।

तीसरा, हम आतंकवाद के सरगनाओं और उसे प्रायोजित करने वाली सरकारों में कोई अंतर नहीं करेंगे, दोनों को समान रूप से उत्तर दिया जाएगा।

ऑपरेशन सिंदूर को विशेष रूप से भारत की नारी शक्ति का अपार समर्थन मिला। इस ऑपरेशन का नाम भी अत्यंत मार्मिक है, क्योंकि हमारी संस्कृति में ‘सिंदूर’ वह पवित्र प्रतीक है जिसे विवाहित महिलाएं अपने मस्तक पर धारण करती हैं। कायर आतंकियों ने हमारे घरों की स्त्रियों से उनका सिंदूर छीनने का दुस्साहस किया था, लेकिन हमारे सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से उसका बदला लिया और करोड़ों भारतीयों की रक्षा की। इस प्रकार एन.डी.ए. संसदीय दल, भारत की माताओं और बेटियों को न्याय दिलाने वाली इस निर्णायक कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का अभिनंदन करता है। यह वास्तव में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अडिग राष्ट्रीय इच्छाशक्ति का एक सशक्त उदाहरण है।

एन.डी.ए. संसदीय दल ने उन रक्षा सुधारों की भी सराहना की है जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लागू किए गए और जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुए। यह स्मरण करना आवश्यक है कि मोदी सरकार ही वह सरकार है जिसने सैन्य सुधारों और स्वदेशीकरण (indigenisation) पर विशेष बल दिया। संयुक्तता और समन्वय (jointness and integration) के प्रति प्रतिबद्धता भी इस ऑपरेशन में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई। प्रधानमंत्री की ‘ड्रोन क्रांति’ के प्रति व्यक्तिगत प्रतिबद्धता भी इस अभियान में कारगर सिद्ध हुई। प्रधानमंत्री ने बार-बार स्पष्ट किया है कि भारत की सशस्त्र सेनाओं को आतंकवाद की जड़ों पर प्रहार करने के लिए पूर्ण स्वतंत्रता है और वे कब, कहां और कैसे कार्रवाई करें, यह निर्णय वे स्वयं लें। ऑपरेशन सिंदूर उसी दिशा में किया गया सशक्त और निर्णायक कदम था।

ऑपरेशन सिंदूर के पश्चात् प्रधानमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि विभिन्न दलों के 59 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल 32 देशों का दौरा करे, जिससे भारत का दृष्टिकोण वैश्विक मंचों पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके। यह भारत द्वारा अब तक चलाया गया सबसे व्यापक वैश्विक संपर्क अभियान (global outreach) है। इस अभियान के माध्यम से यह रेखांकित किया गया कि भारत स्वयं आतंकवाद का शिकार रहा है और दुनिया के किसी भी कोने में किया गया आतंकी हमला मानवता के विरुद्ध किया गया अपराध है। विपक्षी सांसदों की भागीदारी ने भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और प्रधानमंत्री की कूटनीति को दर्शाती है, जो मानते हैं कि राष्ट्रीय हित के मामलों में हम सभी एक साथ हैं।

अमेरिका द्वारा ‘द‌् रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) जो पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार था उसे ‘विदेशी आतंकी संगठन’ (FTO) और ‘वैश्विक विशेष रूप से नामित आतंकवादी’ (SDGT) घोषित करना, तथा ब्रिक्स (BRICS) द्वारा संयुक्त घोषणा में पहलगाम हमले की निंदा करते हुए ‘आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता’ और ‘दोहरे मानकों के पूर्ण अस्वीकार’ की प्रतिज्ञा, पाकिस्तान द्वारा अपनी धरती पर फैलाए जा रहे आतंकवाद के खिलाफ भारत के कूटनीतिक जीत को दर्शाता है। ये घटनाक्रम दर्शाते हैं कि आज भारत की वैश्विक मंच पर स्थिति और प्रभाव निरंतर सशक्त हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत के साथ खड़ा है।

पिछले 11 वर्षों से एन.डी.ए. सरकार एक सशक्त, विकसित और शांतिपूर्ण भारत के निर्माण के लिए अथक प्रयास कर रही है। आने वाले समय में ये प्रयास और भी अधिक जोश के साथ जारी रहेंगे।