प्रधानमंत्री ने जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लिया और नाइजीरिया व गुयाना की यात्रा की

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भारत ने पिछले दस वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है: नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 18 से 23 नवंबर, 2024 के बीच नाइजीरिया, ब्राजील और गुयाना की पांच दिवसीय यात्रा की। इस यात्रा के दौरान श्री मोदी ने ब्राजील में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लिया तथा 31 द्विपक्षीय बैठकों में अनेक वैश्विक नेताओं के साथ बातचीत की।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इन राजनयिक मुलाकातों में नाइजीरिया में नाइजीरिया के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक, ब्राजील में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान 10 द्विपक्षीय बैठकें और गुयाना की यात्रा के दौरान नौ बैठकें शामिल थीं। ब्राजील में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इंडोनेशिया, पुर्तगाल, इटली, नॉर्वे, फ्रांस, ब्रिटेन, चिली, अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं के अलावा अन्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। अधिकारियों ने बताया कि इनमें इंडोनेशिया के सर्वश्री प्रबोवो सुबियांतो, पुर्तगाल के लुइस मोंटेनेग्रो, ब्रिटेन के कीर स्टार्मर, फ्रांस के इमैनुएल मैक्रों, चिली के गेब्रियल बोरिक फॉन्ट और अर्जेंटीना के जेवियर माइली के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठकें शामिल हैं।

जी-20 शिखर सम्मेलन के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, मिस्र, अमेरिका और स्पेन के नेताओं तथा यूरोपीय संघ की उर्सुला वॉन डेर लेयेन, संयुक्त राष्ट्र के एंटोनियो गुटेरेस, विश्व व्यापार संगठन की नोगोजी ओकोन्जो-इवेला, विश्व स्वास्थ्य संगठन के टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस तथा आईएमएफ की क्रिस्टालिना जॉर्जीवा और गीता गोपीनाथ जैसे प्रमुखों और कार्यकारियों (executives) के साथ अनौपचारिक बातचीत और बैठकें कीं।

गुयाना में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने गुयाना, डोमिनिका, बहामास, त्रिनिदाद और टोबैगो, सूरीनाम, बारबाडोस, एंटीगुआ और बारबुडा, ग्रेनेडा और सेंट लूसिया के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं।

जी-20 शिखर सम्मेलन

प्रधानमंत्री का ‘सामाजिक समावेश तथा भूख और गरीबी के खिलाफ लड़ाई’ विषय पर संबोधन

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 18 नवंबर को ‘सामाजिक समावेश तथा भूख और गरीबी के खिलाफ लड़ाई’ विषय पर जी-20 शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने शिखर सम्मेलन की मेजबानी और उनके शानदार आतिथ्य के लिए ब्राजील के राष्ट्रपति श्री लुइस इनासियो लूला दा सिल्वा को धन्यवाद दिया। उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों पर केंद्रित ब्राजील के जी-20 एजेंडे की सराहना की और उल्लेख किया कि इस दृष्टिकोण ने वैश्विक दक्षिण के देशों की चिंताओं को रेखांकित किया है और नई दिल्ली जी-20 शिखर सम्मेलन के जन-केंद्रित निर्णयों को आगे बढ़ाया है। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की जी-20 अध्यक्षता का ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ का आह्वान रियो में होने वाली बातचीत में भी गूंजता रहा है।

भूख और गरीबी से निपटने की भारत की पहल के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले दस वर्षों में 250 मिलियन लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है और देश में 800 मिलियन लोगों को मुफ्त खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा से निपटने में भारत की सफलता के बारे में श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा कि ‘मूलभूत बातों पर वापस आना और भविष्य की ओर आगे बढ़ना’ पर आधारित इसका दृष्टिकोण परिणाम दे रहा है। उन्होंने महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत द्वारा उठाए गए उपायों के बारे में विस्तार से बताया।

श्री मोदी ने अफ्रीका और अन्य देशों में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला। यह रेखांकित करते हुए कि वर्तमान में जारी संघर्षों से उत्पन्न खाद्य, ईंधन और उर्वरक संकट से वैश्विक दक्षिण के देश बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, उन्होंने भूख और गरीबी के खिलाफ वैश्विक गठबंधन स्थापित करने की ब्राजील की पहल का स्वागत किया। इसलिए, वैश्विक दक्षिण के देशों की चिंताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

‘सतत विकास और ऊर्जा परिवर्तन’

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सतत विकास और ऊर्जा परिवर्तन पर जी-20 शिखर सम्मेलन के सत्र को भी संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नई दिल्ली जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान समूह ने 2030 तक अक्षय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना और ऊर्जा दक्षता दर को दोगुना करने का संकल्प लिया था। उन्होंने सतत विकास प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए ब्राजील के निर्णय का स्वागत किया।

श्री मोदी ने सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले दस वर्षों में 40 मिलियन परिवारों को आवास, पिछले पांच वर्षों में 120 मिलियन परिवारों को स्वच्छ पेयजल, 100 मिलियन परिवारों को खाना पकाने के लिए स्‍वच्‍छ ईंधन और 115 मिलियन परिवारों को शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराई है।

इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि भारत अपनी पेरिस प्रतिबद्धताओं को पूरा करने वाला पहला जी-20 देश था, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिसमें से 200 गीगावाट हासिल किया जा चुका है। उन्होंने भारत द्वारा उठाए गए वैश्विक कदमों के बारे में भी बात की, जैसेकि अंतरराष्‍ट्रीय सौर गठबंधन, आपदारोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, मिशन लाइफ, एक सूर्य एक दुनिया एक ग्रिड और एक स्थायी प्‍लेनेट को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन। श्री मोदी ने ग्‍लोबल साउथ, विशेषकर छोटे द्वीप विकासशील राज्यों की सतत विकास आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए जी-20 से तीसरे वॉयस ऑफ द् ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन में भारत द्वारा घोषित वैश्विक विकास समझौते का समर्थन करने का आग्रह किया।

गुयाना यात्रा

प्रधानमंत्री ने गुयाना के राष्ट्रपति के साथ आधिकारिक वार्ता की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 20 नवंबर को जॉर्जटाउन में स्टेट हाउस में महामहिम डॉ. मोहम्मद इरफान अली से मुलाकात की। स्टेट हाउस पहुंचने पर राष्ट्रपति श्री अली ने उनका स्वागत किया और उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

दोनों नेताओं के बीच एक संक्षिप्त बैठक हुई, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। भारत और गुयाना के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत गति मिलेगी। दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार एवं निवेश, स्वास्थ्य एवं फार्मा, पारंपरिक चिकित्सा, खाद्य सुरक्षा, बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, क्षमता निर्माण, संस्कृति तथा दोनों देशों के लोगों के बीच पारस्परिक संपर्क सहित भारत और गुयाना के बीच बहुआयामी संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा की।

ऊर्जा के क्षेत्र में जारी सहयोग का जायजा लेते हुए दोनों नेताओं ने कहा कि हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। विकास के मामले में सहयोग भारत-गुयाना साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। श्री मोदी ने गुयाना की विकास संबंधी आकांक्षाओं को पूरा करने हेतु भारत के निरंतर सहयोग से अवगत कराया।

दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों नेताओं ने जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए अधिक सहयोग का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने भारत द्वारा आयोजित वॉयस ऑफ द् ग्लोबल साउथ समिट में भाग लेने के लिए राष्ट्रपति अली को धन्यवाद दिया। दोनों नेता ग्लोबल साउथ के देशों के बीच एकजुटता को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए।

दोनों नेता द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक मजबूत करने के लिए नियमित अंतराल पर उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित करने पर सहमत हुए। इस यात्रा के दौरान दस समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये।

दूसरा भारत-कैरिकॉम शिखर सम्मेलन

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और ग्रेनेडा के प्रधानमंत्री श्री डिकॉन मिशेल, जो वर्तमान में कैरीकॉम के अध्यक्ष हैं, ने 20 नवंबर, 2024 को जॉर्जटाउन में दूसरे भारत-कैरीकॉम शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री ने शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए गुयाना के राष्ट्रपति श्री इरफान अली को धन्यवाद दिया। पहला भारत-कैरिकॉम शिखर सम्मेलन 2019 में न्यूयॉर्क में आयोजित किया गया था। गुयाना के राष्ट्रपति और ग्रेनेडा के प्रधानमंत्री के अलावा, शिखर सम्मेलन में डोमिनिका की राष्ट्रपति और

डोमिनिका के प्रधानमंत्री, सूरीनाम के राष्ट्रपति, त्रिनिदाद और टोबैगो के प्रधानमंत्री, बारबाडोस की प्रधानमंत्री, एंटीगुआ और बारबुडा के प्रधानमंत्री, ग्रेनेडा के प्रधानमंत्री, बहामास के प्रधानमंत्री, सेंट लूसिया के प्रधानमंत्री, सेंट विंसेंट के प्रधानमंत्री, बहामास के प्रधानमंत्री, बेलीज के विदेश मंत्री, जमैका की विदेश मंत्री और सेंट किट्स और नेविस के विदेश मंत्री ने भाग लिया।

श्री मोदी ने कैरीकॉम के लोगों के प्रति गहरी एकजुटता व्यक्त की और क्षेत्र में तूफान बेरिल से हुई तबाही पर दु:ख जताया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देश हाल के वर्षों में सबसे अधिक चुनौतियों और संघर्षों का सामना कर रहे हैं और भारत ने कैरीकॉम देशों के साथ मजबूत साझेदारी के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का विकास सहयोग समर्थन कैरीकॉम देशों की जरूरतों और प्राथमिकताओं पर आधारित है।

कैरीकॉम देशों के साथ भारत की करीबी विकास साझेदारी को और मजबूत करने के लिए श्री मोदी ने कैरीकॉम देशों को सात प्रमुख क्षेत्रों में सहायता की पेशकश की। ये क्षेत्र केरीकॉम के संक्षिप्त नाम से मेल खाते हैं और भारत और केरीकॉम के बीच मित्रता के घनिष्ठ संबंधों को बढ़ाते हैं। ये हैं: सी: क्षमता निर्माण; ए: कृषि एवं खाद्य सुरक्षा; आर: नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन; आई: नवाचार, प्रौद्योगिकी और व्यापार; सी: क्रिकेट और संस्कृति; ओ: महासागर अर्थव्यवस्था और समुद्री सुरक्षा; एम: चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल।

क्षमता निर्माण के संबंध में प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि कैरीकॉम देशों के लिए आईटीईसी छात्रवृत्ति की संख्या अगले पांच वर्षों में एक हजार और बढ़ा दी जाएगी। खाद्य सुरक्षा के संबंध में, जो इन देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है, उन्होंने कृषि क्षेत्र में ड्रोन, डिजिटल खेती, कृषि मशीनीकरण और मृदा परीक्षण जैसी प्रौद्योगिकी को अपनाने में भारत के अनुभव को साझा किया।

नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रों में भारत और कैरीकॉम के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने सदस्यों को भारत के नेतृत्व वाली वैश्विक पहल जैसे अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए बुनियादी ढांचा गठबंधन, मिशन लाइफ और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

प्रधानमंत्री ने गुयाना की संसद को संबोधित किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 21 नवंबर को गुयाना की संसद की नेशनल असेम्‍बली को संबोधित किया। ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। इस संबोधन के लिए स्‍पीकर श्री मंजूर नादिर ने संसद का विशेष सत्र बुलाया था।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत और गुयाना के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों को याद किया। उन्होंने देश के सर्वोच्च सम्मान के लिए गुयाना के लोगों को धन्यवाद दिया। श्री मोदी ने कहा कि भारत और गुयाना के बीच भौगोलिक दूरी के बावजूद साझा विरासत और लोकतंत्र ने दोनों देशों को एक दूसरे के करीब ला दिया है। दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक लोकाचार और समान मानव-केंद्रित दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इन मूल्यों ने उन्हें समावेशी पथ पर आगे बढ़ने में मदद की है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का ‘मानवता सर्वप्रथम’ का मंत्र उसे ब्राजील में हाल ही में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन सहित वैश्विक दक्षिण की आवाज को बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत विश्वबंधु के रूप में मानवता की सेवा करना चाहता है, जो दुनिया का मित्र है और इस मौलिक

विचार ने वैश्विक समुदाय के प्रति उसके दृष्टिकोण को आकार दिया है, जहां वह सभी देशों को समान महत्व देता है— चाहे वे बड़े हों या छोटे।

श्री मोदी ने वैश्विक प्रगति और समृद्धि लाने के लिए महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच अधिक आदान-प्रदान का आग्रह किया, ताकि युवाओं की क्षमता का पूरा उपयोग किया जा सके। कैरेबियाई क्षेत्र को भारत के दृढ़ समर्थन से अवगत कराते हुए उन्होंने राष्ट्रपति अली को दूसरे भारत-कैरिकॉम शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए धन्यवाद दिया।

भारत-गुयाना ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए भारत की गहरी प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत और लैटिन अमेरिकी महाद्वीप के बीच गुयाना अवसरों का सेतु बन सकता है। श्री मोदी ने अपने संबोधन का समापन गुयाना के महान सपूत श्री छेदी जगन के कथन को उद्धृत करते हुए किया, जिन्होंने कहा था, “हमें अतीत से सीखना होगा और अपने वर्तमान को सुधारना होगा तथा भविष्य के लिए एक मजबूत आधार तैयार करना होगा।” उन्होंने गुयाना के सांसदों को भारत आने का निमंत्रण दिया।

 

हाल ही में गुयाना, डोमिनिका और नाइजीरिया द्वारा प्रदान किए गए सर्वोच्च नागरिक सम्मान के अलावा प्रधानमंत्री श्री मोदी को निम्नलिखित पुरस्कार/सम्मान भी प्राप्त हुए हैं

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नाइजीरिया के राष्ट्रपति
के साथ आधिकारिक वार्ता

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 17-18 नवंबर 2024 के दौरान नाइजीरिया की राजकीय यात्रा की। उन्होंने 17 नवंबर को अबुजा में नाइजीरिया के राष्ट्रपति श्री बोला अहमद टीनूबू के साथ आधिकारिक वार्ता की। स्टेट हाउस पहुंचने पर प्रधानमंत्री का 21 तोपों की सलामी के साथ औपचारिक स्वागत किया गया।

दोनों राजनेताओं के बीच एक सीमित बैठक हुई, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता का आयोजन हुआ। श्री मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति टीनूबू के साथ अपनी गर्मजोशी भरी बैठक को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच मित्रता के विशेष बंधन हैं, जो साझा अतीत, समान लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के आपसी मजबूत संबंधों द्वारा परिभाषित होते हैं।

दोनों नेताओं ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की। राष्ट्रपति टीनूबू ने वॉयस ऑफ द् ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलनों के माध्यम से विकासशील देशों के मुद्दों पर जोर देने संबंधी भारत के प्रयासों को स्वीकार किया। दोनों नेताओं ने ग्लोबल साउथ के देशों की विकास आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री ने ईसीओडब्लूएएस के अध्यक्ष के रूप में नाइजीरिया द्वारा निभाई गई भूमिका तथा बहुपक्षीय निकायों में इसके योगदान की सराहना की।
वार्ता के बाद तीन समझौता ज्ञापनों— सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम, सीमा शुल्क सहयोग और सर्वेक्षण सहयोग – पर हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री के सम्मान में राजकीय भोज का आयोजन किया गया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 17 नवंबर को नाइजीरिया के अबुजा में भारतीय समुदाय द्वारा उनके सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रवासी भारतीयों को भी संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय द्वारा गर्मजोशी और उत्साह के साथ किए गए उनके भव्य स्वागत पर प्रसन्नता व्यक्त की।